प्लास्टिक इंडस्ट्री में कॅरियर की संभावनाएं





भारत में प्लास्टिक जीवन आपूर्ति का सबसे सस्ता और बेहतर माध्यम है। आपूर्ति की इस बड़ी खपत और मांग से प्लास्टिक सेक्टर में रोजगार की कई संभावनाएं हैं। इस इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का मानना है कि भविष्य में प्लास्टिक से बने उत्पादों की मांग 13 से 14 प्रतिशत, प्रतिवर्ष बढ़ेगी। इस तरह भारत में प्लास्टिक्स की खपत 2015 तक 2200 मिलियन टन हो जाने की पूरी संभावना है।
वर्तमान में घरेलू उत्पाद ही नहीं बल्कि इलैक्ट्रोनिक उत्पादों के निर्माण में प्लास्टिक का उपयोग बड़े स्तर पर हो रहा है। रेफ्रिजरेटर्स, ऑटोमोबाइल्स, रेडियो और टेलीविजन सेट, पेंट्स, सिंथेटिक टेक्सटाइल्स, एयरक्राफ्ट और शिपिंग के साथ-साथ रक्षा सामग्रियों, मेडिकल और सर्जिकल उपकरणों में भी प्लास्टिक से ही बनाए जा रहे हैं।
रोजगार की संभावनाएं
पिछले दशकों में प्लास्टिक प्रौद्योगिकी और बहुलक विज्ञान, दो ऐसे बिजनेस क्षेत्र रहे हैं जिनमें भारत के सबसे बड़े औद्योगिक घरानों ने कई हजार करोड़ों रुपए का निवेश किया है। रिलायंस, स्पिक, ने फिनोलेक्स और दूसरी कंपनियों के लिए नए उत्पादों को विकसित करने के लिए अनुसंधान प्रयोगशाला संयंत्र लगाए हैं।
कंप्यूटर इंडस्ट्री हो या इलैक्ट्रिकल और इलैक्ट्रॉनिक्स उत्पाद, सभी में प्लास्टिक की मांग दिनों दिन बढ़ रही है। इस क्षेत्र में अगर आप कॅरियर बनाते हैं, तो रिसर्च और अध्ययन के अलावा प्राइवेट और पब्लिक सेक्टर की विभिन्न कंपनियों में नौकरी के अच्छे अवसर हैं।
पात्रता
अगर आपने बारहवीं में विज्ञान (भौतिकी, रसायनशास्त्र और गणित) से उत्तीर्ण की है तो आप प्लास्टिक टेक्नोलॉजी में बी.टेक करने की पात्रता रखते हैं। प्लास्टिक टेक्नोलॉजी में एम.टेक करने के लिए केमिकल इंजीनियरिंग या प्लास्टिक रबर टेक्नोलॉजी या मैकेनिकल इंजीनियरिंग अथवा टेक्सटाइल इंजीनियरिंग में बी.टेक/बीई उपाधि होना आवश्यक है।
भौतिक शास्त्र अथवा रसायन शास्त्र में एमएस-सी करने वाले छात्र भी प्लास्टिक टेक्नोलॉजी में एम.टेक कर सकते हैं। जिन छात्रों ने गेट परीक्षा उत्तीर्ण की हो, उन्हें एम.टेक में प्राथमिकता दी जाती है।
वेतन
प्लास्टिक इंजीनियरिंग क्षेत्र में कुशल पेशेवरों के लिए भारी मांग है। इस क्षेत्र में वेतन की शुरुआत 20 से 25,000 न्यूनतम से शुरू होती है। वेतन उम्मीदवार के अनुभव के साथ बढ़ जाता है।
संस्थान
आईआईटी, नई दिल्ली कोर्स: एमटेक (डेढ़ वर्ष)।
दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, नई दिल्ली कोर्स: बीई (पॉलीमर साइंस), एमई (डेढ़ वर्ष), पीएचडी।
बिड़ला इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी, रांची कोर्स: बीई पॉलीमर।
हरकोर्ट बटलर इंस्टीट्यूट, कानपुर कोर्स: बीटेक (प्लास्टिक टेक)।
इंडस्ट्री ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, कानपुर यूनिवर्सिटी, कानपुर कोर्स: बीटेक (प्लास्टिक), एमटेक (प्लास्टिक)।
बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी, झांसी कोर्स: एमएससी (इंटीग्रेटेड), एमएससी (पॉलीमर), एससी (पॉलीमर केमिस्ट्री)।
डिपार्टमेंट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी, मुंबई यूनिवर्सिटी, मुंबई कोर्स: बीकॉम (पॉलीमर), बीएससी, एमटेक (डेढ़ वर्ष)।
लक्ष्मी नारायण इंडस्ट्री ऑफ टेक्नोलॉजी, नागपुर कोर्स: बीटेक।
भास्कराचार्य कॉलेज ऑफ अप्लाइड साइंस, नई दिल्ली कोर्स: बीएससी ऑनर्स (पॉलीमर साइंस)।
संत लोंगोवाल इंडस्ट्री ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, संगरूर, पंजाब कोर्स: बीई (पेपर एंड प्लास्टिक) तीन वर्ष का।

Post a Comment

Previous Post Next Post
संस्कार News
संस्कार News

🎧 LIVE FM RADIO




🔊 Volume