नई दिल्ली।
पाकिस्तान सेना प्रमुख ने एक बार फिर ऐसा बयान दिया है जिससे भारतवासियों के खून में उबाल आ सकता है। अपने हालिया भाषण में उन्होंने कहा, "हम हिंदुओं से अलग हैं। उनकी दस पीढ़ियां भी हमें नहीं हरा सकतीं।" यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण संबंधों को लेकर संवेदनशीलता पहले से ही चरम पर है।
पाक सेना प्रमुख का यह बयान न केवल पड़ोसी मुल्क के सैन्य दृष्टिकोण को दर्शाता है, बल्कि उनके भीतर पल रही कटुता और विफल राजनीतिक-सामाजिक सोच को भी उजागर करता है। भारत ने हमेशा से शांति और भाईचारे का संदेश दिया है, जबकि पाकिस्तान के उच्च अधिकारी अक्सर युद्धोन्मादी और भड़काऊ टिप्पणियां कर माहौल को विषाक्त करते आए हैं।
भारतीय विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान के इस तरह के बयानों का उद्देश्य अपने देश की आंतरिक विफलताओं से जनता का ध्यान भटकाना है। आर्थिक संकट, सामाजिक अस्थिरता और राजनीतिक उथल-पुथल से जूझ रहे पाकिस्तान को बार-बार भारत विरोधी बयानबाजी से कुछ समय के लिए घरेलू मोर्चे पर समर्थन जुटाने की आदत सी हो गई है।
भारतीय जनता में इस बयान को लेकर जबरदस्त आक्रोश देखा जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी लोग तीखी प्रतिक्रियाएँ दे रहे हैं और पाकिस्तान को उसके अतीत की याद दिलाते हुए करारा जवाब दे रहे हैं। कई विश्लेषकों ने इसे 'हास्यास्पद' और 'वास्तविकता से परे' करार दिया है।
विदेश मंत्रालय ने इस बयान पर औपचारिक प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "भारत अपने आत्मसम्मान और अखंडता की रक्षा के लिए पूरी तरह सक्षम है। पाकिस्तान को आत्ममंथन करना चाहिए, न कि पड़ोसी देशों को लेकर भड़काऊ बातें करनी चाहिए।"
यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तानी नेताओं ने इस तरह की बयानबाजी की हो। इतिहास गवाह है कि भारत ने हर चुनौती का न केवल डटकर सामना किया है बल्कि अपने शौर्य और एकता से दुनिया को अपना लोहा भी मनवाया है।
विजय कुमार शर्मा
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