दिल्ली
की पेज थ्री पार्टियां हों या कनाट प्लेस का कोई रेस्तरां या फिर पांचतारा
होटलों के लांज बार, अगर कोई आधुनिक महिला या कमसिन दुबली−पतली युवती
सिगरेट पीती दिख जाए तो इसमें कोई हैरानी की बात नहीं। वह या तो फैशनेबल
होने का दंभ भर रही है या फिर धूम्रपान की लत की शिकार हो चुकी है। दरअसल
आज की युवा महिलाएं इससे होने वाले नुकसान को समझ नहीं पा रही है। वह न
केवल अपना बल्कि भविष्य में होने वाले अपने बच्चों के लिए खतरनाक जाल बुन
रही है। वह स्मोकिंग को बेशक अपना 'स्टाइल स्टेटमेंट' कहें मगर यह कड़वा सच
है कि वे जल्द ही कई गंभीर बीमारियों का शिकार होने वाली हैं।
तंबाकू
का पौधा जिसका वैज्ञानिक नाम 'निकोटियाना टोबैकम' है इसके पत्तों का
इस्तेमाल स्मोकिंग में किया जाता है। इस पौधे के पत्तों में निकोटिन होता
है। इसीलिए इसकी लत जल्द लगती है। सूंधने और चबाने वाले टोबैको की पैदावार
उत्तरी अमेरिका और यूरोप में हुई। पहली बार टोबैको का प्रचलन यूरोप में
'क्रिस्टोलर कोलंबस' ने किया। उसके बाद यह स्पेन, पुर्तगाल फ्रांस, ब्रिटेन
सब जगह लोकप्रिय होता चला गया। निकोटिन के अलावा इसमें और भी रसायन पाये
जाते हैं जो फेफड़ों और श्वास नली के लिए काफी नुकसान देह है। जैसे−
एसिटोन, अमोनिया कार्बन−मोनोआक्साइड, मिथेन इत्यादि। ये सारे रसायन हृदय
रोग, हार्ट अटैक, श्वसन क्रिया में परेशानी, फेफड़ों में कैंसर आदि के लिए
जिम्मेदार होते हैं। साल 1960 में तंबाकू पर हुए अनुसंधान से पता चला कि
इसका सबसे ज्यादा प्रभाव फेफड़ों और हृदय पर पड़ता है। 30 साल की उम्र के
बाद धूम्रपान करना अत्यंत हानिकारक है। यह सब जानते हुए कि स्मोकिंग शरीर
के लिए घातक है, फिर भी नए ब्रांड के सिगरेट के विज्ञापन दिख ही जाते हैं।
जितना
सिगरेट पीने वाले की सेहत पर असर पड़ता है उतना ही उसके साथ रहने वाला भी
नुकसान में रहता है। यह पैसिव स्मोकिंग है। आप सिगरेट न पीते हुए भी दूसरों
का धुआं पीते है। लिहाजा आप भी फेफड़ों की बीमारी से ग्रस्त हो सकते हैं।
ऐसे लोगों को 'पैसिव स्मोकर्स' कहा जाता है। बच्चों के सामने सिगरेट पीना
और भी खतरनाक साबित होता है। क्योंकि बच्चों में सांस की बीमारी और श्वसन
तंत्र में संक्रमण होने का डर होता है। गले की बीमारी भी हो सकती है।
आजकल
हाई सोसाइटी की महिलाएं सिगरेट पीने को अपना स्टाइल मानती हैं। महिलाओं
में यह लत तेजी से पनप रही है। एक सर्वे के अनुसार दिल्ली विश्वविद्यालय
में पढ़ने वाली ज्यादातर लड़कियां स्मोकिंग को अच्छा मानती है। कई लड़कियों
ने तो इसे अपनी आदत में शुमार कर लिया है। वर्ल्ड एंटी स्मोकिंग डे पर हुए
एक सर्वे के मुताबिक दिल्ली विश्वविद्यालय की 70 फीसद लड़कियां और 31
प्रतिशत लड़के 'स्मोकर्स' पाए गए। इनमें से हर कोई करीबन 14 सिगरेट रोज
पीता है। यह आंकड़ा खतरे की घंटी है। बीच साल की उम्र तक पहुंचते ही युवा
सिगरेट के आदी हो जाते है।
करीब 83 फीसद युवा और 87
फीसद युवतियां सिर्फ मस्ती के लिए सिगरेट पीती हैं। हालांकि ज्यादातर लोग
इससे होने वाले खतरे से वाकिफ होते हैं। ज्यादातर युवतियां अब तो खुलेआम
सिगरेट पीती नजर आ जाएंगी। युवाओं में खुलापन अच्छी बात है मगर बुरी बात यह
है कि यह स्मोकिंग के मामले में सामने आ रही है।
ज्यादातर
सिगरेट पीने वाले लोग पिछड़े क्षेत्र में पाए गए हैं जहां शिक्षा का अभाव
और ज्यादा गरीबी है। करीब दस लाख लोग इस लत के कारण अपनी जिंदगी से हाथ धो
बैठते हैं। महिलाओं में दिन−प्रतिदिन सिगरेट की बढ़ती लत ने डाक्टरों को
चिंता में डाल दिया है। ऐसी महिलाओं की संख्या न केवल गांवों में बल्कि
शहरों में भी तेजी से बढ़ रही है। अगर कोई महिला एक दिन में 20 सिगरेट पीती
है तो उसे ब्रेस्ट कैंसर होने के खतरे बढ़ जाते है। तनाव और अवसाद के कारण
ही महिलाओं सिगरेट नहीं पीती बल्कि उनका मानना है इससे वजन भी कम होगा।
दिल्ली के केसर अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डा. मधु वर्मा बताती हैं तंबाकू शरीर में प्रवेश कर खून में भी
मिल जाता है और फिर फेफड़ों में भी। इसका असर गर्भ में पल रहे बच्चे पर ज्यादा होता है। गर्भवती महिलाओं को भी बिल्कुल स्मोकिंग नहीं करनी चाहिए। नहीं तो बच्चा या तो मानसिक रूप से बीमार पैदा होगा या मरा हुआ होगा। अगर गर्भवती महिला के सामने भी सिगरेट पीया जाए तो वह भी खतरनाक होता है। महिलाएं इस मामले में ज्यादा जवाबदेह हैं। क्योंकि आने वाला भविष्य उन पर टिका है। और अगर बच्चा ही मानसिक रूप से बीमार पैदा होगा तो देश का भविष्य क्या होगा?
मिल जाता है और फिर फेफड़ों में भी। इसका असर गर्भ में पल रहे बच्चे पर ज्यादा होता है। गर्भवती महिलाओं को भी बिल्कुल स्मोकिंग नहीं करनी चाहिए। नहीं तो बच्चा या तो मानसिक रूप से बीमार पैदा होगा या मरा हुआ होगा। अगर गर्भवती महिला के सामने भी सिगरेट पीया जाए तो वह भी खतरनाक होता है। महिलाएं इस मामले में ज्यादा जवाबदेह हैं। क्योंकि आने वाला भविष्य उन पर टिका है। और अगर बच्चा ही मानसिक रूप से बीमार पैदा होगा तो देश का भविष्य क्या होगा?
स्मोकिंग छोड़ना वैसे तो काफी मुश्किल
है। मगर आप एक बार ठान लें तो इसे छोड़ सकते हैं। इसे छोड़ना इसलिए मुश्किल
हैं क्योंकि निकोटिन एक्टीवेट करता है डोपामीन नामक रसायन, जो मस्तिष्क
में पाया जाता है वह सिगरेट पीने के बाद इंसान को आनंद की अनुभूति देता है।
सिगरेट
छोड़ने के चार घंटे बाद से तीन से पांच दिन का समय काफी मुश्किल भरा होता
है। इसमें आपको सिगरेट, बीड़ी पीने की तलब होती है। अगर आप इन तीन दिनों
में अपने पर काबू पा लेते हैं तो आने वाले दो हफ्ते क अंदर आप इसे छोड़ने
की स्थित मिें आ जाएंगे। हालांकि आपको काफी मुश्किलों से गुजरना पड़ सकता
है, जैसे− सिरदर्द, अनिद्रा, गुस्सा आना, किसी काम में मन न लगना, भूख न
लगना या फिर चिड़चिड़ापन। लेकिन एक बार आप तय कर लें तो सिगरेट छोड़ने के
20 मिनट के अंदर आपका ब्लड प्रेशर सामान्य हो जाएगा और 24 घंटे के बाद ही
आप हार्ट अटैक के खतरों से बाहर होंगे। दो−तीन हफ्तों के अंदर आपके फेफड़े
30 प्रतिशत ज्यादा अच्छी तरह काम कर सकेंगे। इन दिनों आप दूसरे काम कर सकते
है। जैसे कहीं घूमने जा सकते हैं।
च्यूगंम या कैंडी
जैसी चीज कुछ समय के लिए अपने मुंह में रख सकते हैं। मनपसंद भोजन कर सकते
है। व्यायाम कर सकते हैं। एक काम और कीजिए सिगरेट न पीकर आपने जितने रुपए
बचाए हैं उसे 'मनी जार में' डाल दीजिए। सिगरेट छोड़ते समय अपने डॉक्टर से
जरूर सलाह लें वे आपको एनआरटी (निकोटिन रिपलेस्मेंट थेरेपी) से सिगरेट
छोड़ने में मदद करेंगे। सिगरेट न सिर्फ पीने वालों के लिए हानिकारक है
बल्कि इनके साथ रहने वालों के लिए भी उतनी ही नुकसानदेह है। तो चलिए आज से
ही सिगरेट न पीने का संकल्प कीजिए और स्वस्थ्य जीवन जीना सीखिए।