आतिथ्य में कॅरियर: हॉस्पिटेलिटी सेक्टर


भारत में मेहमाननवाजी की पंरपरा बहुत पुरानी है। सदियों से हम घर आए अतिथि को देवता की तरह पूजते आए हैं। हमारे सामने कितनी ही मुश्किलें हों, साधन कितने ही सीमित हों लेकिन यदि मेहमान घर आया है तो उसके स्वागत-सत्कार में कभी कमी नहीं आती है। आज भारत की यही प्राचीन परंपरा भरे पूरे कॅरियर का रूप ले चुकी है। इसके अंतर्गत आज होटल, रेस्टोरेंट से लेकर एयरलांइस तक हर जगह अतिथि को भगवान व अपने जॉब को पुण्य कर्म समझने वाले क्षमतावान युवाओं की दरकार है। ऑफिस रिसेप्सन से लेकर होटल, रेस्टोरेंट में खान पान व सुविधाएं, ठहरना, टूर एंड ट्रैवल्स, इवेंट प्लानिंग, क्रूज लाइनर, मैनेजमेंट, एयरलाइंस, इंटरटेनमेंट, एम्यूजमेंट पार्क तक अलग- अलग सेक्टर इस इंडस्ट्री के असर से बच नहीं पाए हैं।
बडा क्षेत्र, बेहतर जॉब्स
खातिरदारी किसे पसंद नहीं होती। खासतौर पर विदेशों से आने वाले लोगों के मन में तो सालों से भारत की पहचान एक शानदार मेजबान की रही है। वह मेजबान जो हर पल अपनी सांस्कृतिक छटाओं के आंचल में आगंतुकों को सकून पहुंचाता रहता है। एक कंसल्टेंसी फर्म के हालिया सर्वे पर गौर करें तो हमें इस परंपरागत क्षेत्र के बढते पेशेवराना तेवरों का अंदाजा हो जाएगा। इसके मुताबिक पिछले साल करीब 5.4 मिलियन विदेशी पर्यटन भारत घूमने आए, जो इसके पूर्व वर्ष देश आए विदेशी पर्यटकों से 9.4 फीसदी अधिक है, वहीं इसी अवधि में करीब 540 मिलियन देशी पर्यटकों ने भी भारत केअलग-अलग हिस्सों की सैर की। जाहिर है इसका फायदा देश को मिला। व‌र्ल्ड ट्रैवेल एंड टूरिज्म काउंसिल, इस रिपोर्ट की सुखद तस्दीक करती है, जिसके मुताबिक पर्यटकों की इस बढी आमद के चलते भारतीय हॉस्पिटेलिटी सेक्टर में आगामी 10 सालों में करीब 8 मिलियन नौकरियां होंगी। ऐसे में वे सभी युवा जोअतिथि देवो भव : मंत्र के बूते इस इंडस्ट्री में राह बनाना चाहते हैं, उनके लिए अवसरों की कमी नहीं है।
ग्रोथ ने बनाया अव्वल पसंद
अभी ज्यादा वक्त नहीं हुआ, जब भारत आने वाले विदेशी खिलाडी व टीमें अपने शेफ को साथ लाया करते थे तो कई बार उनका खाना ही पैक्ड डिब्बों की शक्ल में सात समंदर पार से मंगाया जाता था, लेकिन पिछले 12-15 सालों में इस क्षेत्र में जबर्दस्त बदलाव देखने को मिले हैं। भारतीय होटलों का स्तर आश्चर्यजनक ढंग से ऊपर आया है तो कल तक भारतीय खाने पर नाक भौं सिकोडने वाले विदेशियों में इस खाने की चाहत बढी है। एक अनुमान के मुताबिक, अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में लोग हफ्ते में औसतन तीन दिन भारतीय खाने का लुत्फ लेते हैं तो भारतीय होटल भी अब गुणवत्ता के मामले में कतई पीछे नहीं हैं। यही कारण है कि आज वैश्विक स्तर पर हमारी मेहमाननवाजी, हमारे भोजन व संस्कृति ने एक ब्रांड की शक्ल ले ली है।
जॉब ओरिएंटेड कोर्स ने दी नई उडान
इन दिनों हॉस्पिटेलिटी सेक्टर की तेज तरक्की के बीच देश के कई संस्थान जॉब ओरिएंटेड कोर्स ऑफर करते हैं। इन कोर्सो की खासियत है?कि यहां हाईस्कूल से लेकर पीजी तक के छात्रों को मौका मिलता है। कोर्सो की अवधि प्राय: 3 हफ्तों से लेकर 2 साल तक की होती है। इनमें बैचलर ऑफ होटल मैनेजमेंट, मास्टर इन टू-रिज्म, डिप्लोमा इन केबिन क्रू मैनेजमेंट सर्वाधिक लोकप्रिय हैं। इसके अलावा डिप्लोमा, पीजी डिप्लोमा आदि कोर्स भी उपलब्ध हैं। इन दिनों मेडिकल टूरिज्म में भी कॅरियर के कई विकल्प हैं। इस प्रकार कहा जा सकता है कि जॉब ओरिएंटेड कोर्स के कारण हॉस्पिटेलिटी युवाओं में काफी लोकप्रिय हो रहा है।
डिफरेंट कोर्स, डिफरेंट एलिजिबिलिटी
इन सभी कोर्स के लिए सभी संस्थान अलग-अलग योग्यता अपनाते हैं। इसमें इंट्री के लिए योग्यता हाईस्कूल से लेकर ग्रेजुएशन तक है। वहीं एमएससी इन हॉस्पिटेलिटी एडमिनिस्ट्रेशन के लिए आपको इसी विषय में बीएससी होना अनिवार्य है। बेहतर कम्यूनिकेशन, एक से ज्यादा भाषाओं का ज्ञान, लोगों में जल्दी घुल मिल जाने की आदत, मिलनसार व मधुर व्यवहार, मल्टीटास्किंग काम को इंज्वॉय करने का रवैया कुछ ऐसी क्वालिटीज हैं, जो इस क्षेत्र में बेसिक्स का दर्जा रखती हैं।
मुख्य संस्थान
- ओबेरॉय सेंटर ऑफ लर्निग एंड डेवलेपमेंट, नई?दिल्ली
- इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट, कैटरिंग टेक्नोलॉजी एंड एप्लाइड न्यूट्रीशंस, मुंबई
- इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेट कैटरिंग एंड न्यूट्रीशंस, नई दिल्ली
- इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट(ताज ग्रुप) औरंगाबाद
- क्रिस्ट कॉलेज, बेंगलुरु
- इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनजमेंट कैटरिंग टेक्नोलॉजी एंड एप्लाइड न्यूट्रीशंस (हैदराबाद)
- मेरिट स्विस एशियन स्कूल ऑफ होटल मैनेजमेंट (ऊटी)
दूसरों से अलग है सेक्टर
आज देश में हॉस्पिटेलिटी में जॉब का दायरा बहुपक्षीय हुआ है, जिसमें युवाओं के सामने करने को बहुत कुछ है। इसमें आने वाली तरह-तरह की इंडस्ट्री इसे स्टूडेंट्स के लिए फायदेमेंद बना रहे हैं। पर कई मायनों में यह क्षेत्र दूसरे सेक्टर से अलग है। इसमें इंजीनियर, डॉक्टर की तरह कोई फिक्स वर्किग ऑवर या काम का सेट पैटर्न नहीं है। इसमें तो आपको हर वक्त अलग-अलग तरह की जिम्मेदारी लेने के लिए तत्पर रहना होता है, खुद को काम के अनुरूप ढालना होता है। याद रखिए आगे बढकर जिम्मेदारी लेने की यही आदत इस फील्ड में आपको तरक्की दिलाएगी। रही बात क्वालिफिकेशन की तो प्राइवेट के साथ कई सरकारी संस्थान भी यहां सक्रिय हैं, जिनके जरिए आप वाजिब फीस में बडी ऊंचाई तय कर सकते हैं।
कौशिक भट्टाचार्या, जनरल मैनेजर
तारिका जंगल पार्क, जिम कार्बेट नेशनल पार्क, नैनीताल, उत्तराखंड
हॉस्पिटेलिटी: एक सेक्टर 6 नियामतें
हॉस्पिटेलिटी का मतलब बेहतर मेजबानी से है। आज इस क्षेत्र में बेहतर पैसा, क्रिएटिविटी, आत्मसंतोष सब कुछ मिलेगा। ऐसे ही कई और चीजें हैं, जो युवाओं को इस फील्ड में न्यौता दे रही हैं यूं तो आज छात्रों के सामने कॅरियर विकल्पों की कमी नहीं है। पंरपरागत हो या लीक से हटकर दोनों ही तरह की च्वाइसों के जरिए वे भविष्य बुलंद कर रहे हैं। लेकिनइन विकल्पों में हॉस्पिटेलिटी का अलग ही दर्जा है। यहां तक कि आज इसकी तेज ग्रोथ देखते हुए विशेषज्ञ भी मानते हैं कि 2020 तक देश के रोजगार बाजार में इस क्षेत्र की विकास दर 20 फीसदी के आस-पास होगी। ऐसे महौल में हॉस्पिटेलिटी को बतौर कॅरियर अपनाया जाए तो सौदा बुरा नहीं है। आज यह क्षेत्र ऐसी कई खासियतों से लैस है, जो युवाओं की पसंद में शीर्ष पर हैं।
- भविष्य का भरोसा
इस क्षेत्र का सीधा संबंध लोगों के जीवन स्तर से है। इस कारण माना जा सकता है कि देश की सुधरती आर्थिक सेहत, बढती प्रति व्यक्ति आय के बीच यह क्षेत्र आने वाले सालों में भी अपनी तपिश बरकरार रखेगा।
- हर दिन, नया दिन
इस फील्ड में आपका हर रोज नई दुनिया, नए लोग, उनके नए-नए तौर तरीकों से वास्ता पडता है। साथ ही आप अगर इस लाइन के दिग्गजों के साथ जुडे हैं तो मुमकिन है आपका दायरा देश की सीमाओं से भी परे हो जाए।
- रचनात्मकता दिलाएगी पहचान
बहुत कम क्षेत्र ऐसे होते हैं, जहां आप पर हॉस्पिटेलिटी सेक्टर की तरह भरोसा किया जाता है। बात चाहें होटल आए मेहमानों के स्वागत की हो, उनके मनोंरजन की हो या उनके लंच, डिनर के इंतजाम की। आप अपनी रचनाशीलता के दरिया में पुरजोर गोता लगा सकते हैं। कई बार यही रचनाशीलता इस फील्ड में तरक्की का जरिया बन जाती है।
- मोटी सैलरी है बडा आकर्षण
अपनी जॉब में बेहतर ग्रोथ की आशा सभी करते हैं। यदि आप भी ऐसे लोगों में हैं तो हॉस्पिटेलिटी सेक्टर एक सही चयन है। माना जाता है कि इस क्षेत्र में आप एक औसत संस्थान से नौकरी की शुरुआत करते हैं तो भी 20-25 हजार रुपए प्रति माह कमाए ही जा सकते हैं। बढते अनुभव के साथ आपकी ग्रोथ में भी बढत दर्ज हो जाती है।
- कम वक्त, पूरा ख्वाब
इस सेक्टर की सबसे खास बात है कि यहां आपको कम खर्च व कम समय में बेहतर जॉब मिलती है। यहां ज्यादातर कोर्सो की अवधि 3 हफ्तों से लेकर 3 साल तक है, जिनमें प्रवेश लेकर आप एक अच्छी जॉब की उम्मीद कर सकते हैं। जबकि इंजीनियरिंग, मेडिकल जैसे परंपरागत क्षेत्रों में आपके कम से कम चार-पांच साल तो कोर्स करने में ही गुजर जाते हैं।
- चुनें अपने मनमाफिक रंग
इस इंडस्ट्री ने आज कई चीजों को अपनी जद में ले लिया है। एम्यूजमेंट पार्क, एयरलाइन्स, इवेंट आर्गेनाइजिंग, फ्रंट ऑफिस मैनेजमेंट जैसे अनेक काम इसी में समाए हुए हैं। इस कारण आप चाहें तो हॉस्पिटेलिटी सेक्टर के अंतर्गत ही नियत अंतराल में स्विच ओवर कर कॅरियर को धार दे सकते हैं। अगर आप इनको ध्यान में रखकर कोई भी निर्णय लेते हैं, तो आपके लिए सबसे फायदे का सौदा हो सकता है।

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