इंटेलीजंस
क्वोशन्ट (IQ) और इमोशनल क्वोशन्ट(EQ) जैसी क्रिया से आप एक व्यक्ति की
मानसिक योग्यता को जान सकते है। जी हां, जन्म से ही हम इस क्रिया का हिस्सा
होते हैं लेकिन बड़े होने के साथ-साथ यह क्रिया कॉम्पिटिशन का रूप ले लेती
हैं जिसका सामना हमें हर क्षेत्र में करना पड़ता है।
इससे पहले आप सोच में पड़े हम आपको बता देते हैं कि असल में ये इंटेलीजंस क्वोशन्ट (IQ) और इमोशनल क्वोशन्ट(EQ) क्या हैं? इमोशनल क्वोशन्ट (EQ) व्यक्ति की खुद की और दूसरों की भावनाओं को मापने की एक क्रिया है। जैसे भावुक होना, दूसरों के प्रति आपका व्यवहार। यह आपको जीवन में असल सफलता दिलाता हैं जबकि इंटेलीजेंस क्वोशन्ट (IQ) आपको परीक्षा में सफलता दिलाता हैं।
मनोवैज्ञानिक और विज्ञान पत्रकार डा. डेन गोलमेन ने इंटेलीजेंस क्वोशन्ट और इमोशनल क्वोशन्ट के बारे में बताया था कि जीवन में 20 प्रतिशत सफलता इंटेलीजेंस क्वोशन्ट से मिलती है जबकि 80 प्रतिशत सफलता और इमोशनल क्वोशन्ट के कारण मिलती है। उनके अनुसार इमोशनल क्वोशन्ट कम होने वाले लोगो का जीवन परेशानियों से घिरा हुआ होता है। जीवन के प्रति आपका दृष्टिकोण ही आपको सफल बनाता।
गौरतलब हैं कि आज की पीढ़ी के लिए आई.क्यु और इ.क्यु के कुछ बेसिक क्लियर होना बहुत जरूरी हो गया हैं। हमारे अनुसार इस मॉड्यूल को सिलेबस में शामिल किया जाना चाहिए ताकि स्कूल-कॉलेजों में पड़ने वाले बच्चे इसको समझ सके और समझदार बन सके।
इससे पहले आप सोच में पड़े हम आपको बता देते हैं कि असल में ये इंटेलीजंस क्वोशन्ट (IQ) और इमोशनल क्वोशन्ट(EQ) क्या हैं? इमोशनल क्वोशन्ट (EQ) व्यक्ति की खुद की और दूसरों की भावनाओं को मापने की एक क्रिया है। जैसे भावुक होना, दूसरों के प्रति आपका व्यवहार। यह आपको जीवन में असल सफलता दिलाता हैं जबकि इंटेलीजेंस क्वोशन्ट (IQ) आपको परीक्षा में सफलता दिलाता हैं।
मनोवैज्ञानिक और विज्ञान पत्रकार डा. डेन गोलमेन ने इंटेलीजेंस क्वोशन्ट और इमोशनल क्वोशन्ट के बारे में बताया था कि जीवन में 20 प्रतिशत सफलता इंटेलीजेंस क्वोशन्ट से मिलती है जबकि 80 प्रतिशत सफलता और इमोशनल क्वोशन्ट के कारण मिलती है। उनके अनुसार इमोशनल क्वोशन्ट कम होने वाले लोगो का जीवन परेशानियों से घिरा हुआ होता है। जीवन के प्रति आपका दृष्टिकोण ही आपको सफल बनाता।
गौरतलब हैं कि आज की पीढ़ी के लिए आई.क्यु और इ.क्यु के कुछ बेसिक क्लियर होना बहुत जरूरी हो गया हैं। हमारे अनुसार इस मॉड्यूल को सिलेबस में शामिल किया जाना चाहिए ताकि स्कूल-कॉलेजों में पड़ने वाले बच्चे इसको समझ सके और समझदार बन सके।