घर से दुर्भाग्य, दरिद्रता और कष्ट भगाएं

"ठहरिए मैं केवल तीन मिनट की माफी चाहता हूं!"

मैंने आश्चर्य से पूछा, "क्यों क्या किजिएगा?"

इंटरव्यू में अब आपकी ही बारी आने वाली है और आप अब मंत्र पढ़ने जा रहे हैं। क्या यह पूजन का समय है?

"भाई साहब! कुछ नहीं बस एक मनोवैज्ञानिक सिद्धि करूंगा। ऐसे ही महत्तवपूर्ण समय के लिए मनोवैज्ञानिक सिद्धि है। हमारे पूर्वज भी करते और लाभ उठाते आए हैं। बस अभी आता हूं ज्यादा समय नहीं लूंगा।"

यह कहकर मेरे मित्र बाग के एक कोने में शीघ्रता से चले गए। इन्टरव्यू चल रहा था। अनेक उम्मीदवार तैयार होकर इन्टरव्यू के लिए परिक्षा दे रहे थे। सैंकड़ों चिंताएं परिक्षार्थीयों के चेहरों पर उभरी हुई थी। कुछ समय के उपरांत मेरे मित्र लौट आए। अब उनका रूप ही दूसरा था। घबराहट के स्थान पर उनका मन शांत और संतुलित था। उनके मन की चंचलता दूर हो गई थी। उनमें किसी नव चेतना का संचार हो गया लगता था।

मंत्र जाप के पश्चात जब वह इन्टरव्यू में गए तो उन्होंने कमाल कर दिया। वे निडर, शांत और संतुलित रूप से पूछे गए प्रश्नों के उत्तर देते रहे। ऐसा लग रहा था जैसे वह घर में बैठ कर अपने मित्रों से बातचीत कर रहे हों। मुझे उस गुप्त मंत्र को जानने की बड़ी जिज्ञासा हुई। जब वो इन्टरव्यू देकर आए तो मार्ग में मैंने उनसे उस मंत्र का रहस्य पूछा।

वह बोले," मैं एक गुप्त मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया जानता हूं। हमारे सनातन धर्म में सभी संकटों को दूर करने का ऐसा मंत्र है जिससे अनेकों विपत्तियों में मुझे नई शक्ति, नया साहस, नवीन प्रेरणा और कष्टनिवारण की शक्ति दी है। जब जब मुझ पर कोई कष्ट आता है तब तब मैं उसी मंत्र की शरण में जाकर उसे दोहराता हूं। यह आध्यात्मिक शक्ति मुझे सहायता करती है। मैं जब भी किसी महत्वपूर्ण कार्य सिद्धि के लिए जाता हूं तो पहले अपने इस प्रिय मंत्र का जाप करके दूसरी मंत्र शक्ति से अपने आप को भरकर जाता हूं,इसी के कारण मेरी सदा विजय होती रही है। रोग, शोक , कष्ट, विपत्ति और परिक्षाओं की स्थितियों में मैंने इस मंत्र से बहुत लाभ उठाया है।"

ऐसा कहकर उन्होंने प्रसन्नता का अनुभव किया।

मैंने उस मंत्र का रहस्य जानने की तीव्र इच्छा प्रगट की तो वो बोले," बजरंग बाण"

जिस घर में बगरंग बाण का नियमित पाठ होता है, वहां दुर्भाग्य, दारिद्रय, भूत-प्रेत का प्रकोप और असाध्य शारीरिक कष्ट कदापि प्रवेश नहीं कर पाते। मंगलवार को इस मंत्र का जाप अवश्य करना चाहिए।

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