इंगलिश सीखने का सरल उपाय

आप हिंदी या अपनी मातृ भाषा तो धाराप्रवाह बोल लेती हैं, परंतु इंगलिश बोलने या समझने में आपको दिक्कत आती है। ऐसी स्थिति में आप एक कम्प्लैक्स का शिकार हो जाती हैं। इसके लिए क्या आपने कभी इस बात पर ध्यान देने की कोशिश की है कि कोई भी भाषा सीखने में जहां आपको दूसरे के द्वारा बोला या लिखा हुआ ठीक-ठीक समझ आना चाहिए, वहीं इंटरप्रिटेशन भी ठीक से आनी चाहिए अर्थात उस भाषा की पूरी समझ एवं अभिव्यक्ति दोनों ही जरूरी होते हैं।

यदि हम अपनी मातृ भाषा की सीख पर ध्यान दें, तो पता चलेगा कि हमने उसे अपनी फैमिली और आस-पास के लोगों से दिन-रात सुनते और निरंतर बोलते हुए सीखा है। इस भाषा के लिए पेरैंट्स न कोई क्लास लगवाते हैं और न ही कोई टीचर रखते हैं, इसी तरह इंगलिश भी सीखी जा सकती है।

भाषा बोलने का माहौल

इंगलिश चूंकि हमारे यहां आम भाषा नहीं है, तो उसके लिए हमें मातृ भाषा की तरह बोलने का माहौल भी नहीं मिल सकता, परंतु बहुत-कुछ वैसा ही बनाया जा सकता है। जब भी आप टी.वी. देखें तो उसमें अंग्रेजी कार्यक्रम ज्यादा देखें। भले ही उसे आप शुरू में पूरी तरह न समझ पाएं, परंतु बार-बार सुनने से आप इसे काफी हद तक समझने लगेंगी। इसी तरह रेडियो पर भी इंगलिश न्यूज और अन्य कार्यक्रम सुनती रहें। याद रखें, भाषा सीखने का पहला कदम सुनते रहने से ही शुरू होता है। हिंदी न्यूज के ठीक बाद यदि इंगलिश न्यूज भी टी.वी. पर उन्हीं दृश्यों के साथ देखी जाएं, तो निश्चित रूप से आपकी इंगलिश की समझ एवं पकड़ लगातार बढ़ती जाएगी।

बोलने की प्रैक्टिस
सुने हुए छोटे-छोटे सैंटेंस या तो नोट कर लें या जो याद रह जाएं, उन्हें बार-बार दोहराएं तथा बातचीत में उन्हें इस्तेमाल करें। याद रखें, इंगलिश भी अन्य भाषाओं की तरह पहले बोलनी सीखनी चाहिए तथा लिखने एवं पढऩे की प्रैक्टिस बाद में करनी चाहिए। अपने भाई-बहनों और फ्रैंड सर्कल में डिस्कशन करते हुए इसे बोलने का अभ्यास करें। बोलने में थोड़ी गलती हो भी जाए तो उसकी परवाह न करें, क्योंकि मातृ भाषा सीखते समय भी तो हमारे बच्चे गलती करके सीखते हैं। यदि ठीक बोलने में घर के किसी बड़े या इंगलिश ट्यूटर की भी मदद मिल सकती हो, तो जहां बोलना जल्दी आएगा, वहीं गलतियां भी कम होती जाएंगी।

शब्द ज्ञान बढ़ाएं

भले ही भाषा की नींव शब्दों के साथ-साथ सैंटेंस पर हो, परंतु सैंटेंस बनते तो शब्दों के सही संयोग से ही हैं, इसलिए लगातार नए शब्दों को सैंटेंस एवं सही रैफ्रैंस में सीखते रहें। किसी भी शब्द के केवल सही स्पैलिंग और उसका अर्थ याद कर लेना ही पर्याप्त नहीं है। उसका सही जगह इस्तेमाल करना भी आना चाहिए। इसके लिए एक डिक्शनरी भी आपके पास होनी चाहिए, जिसमें से मीनिंग निकाल कर आप याद कर सकें। शब्दों के अर्थ भी संदर्भ से जुड़ कर बदलते रहते हैं, इसलिए उन्हें वाक्यों में प्रयोग करना सीखें तथा सही परिस्थिति में उन्हें इस्तेमाल करें। जितना आपका शब्द ज्ञान बढ़ेगा, उतना ही आप उसमें परफैक्ट होते जाएंगे। इसके अलावा जब भी कोई नया शब्द पढऩे या सुनने को मिले तो उसे नोट कर लें, इससे आपका निजी शब्द भंडार भी बढ़ता जाएगा।

ग्रामर सीखें

पहले ग्रामर पढ़ कर और सीख कर ही लैंग्वेज सीखी जाती हो, ऐसा नहीं है। हमने अपनी मातृ भाषा भी बिना ग्रामर पढ़े और समझे बिना केवल बोलने की प्रैक्टिस करके ही सीखी थी। ग्रामर भले ही सीधे इंगलिश की प्रैक्टिस नहीं कराती, पर वह सही ढंग से उसे सीखने में सहायक होती है तथा आम तौर पर भाषा में होने वाली गलतियों को भी दूर करती है। अत: बोलने की प्रैक्टिस करते हुए ग्रामर का भी सहारा लें।

Post a Comment

Previous Post Next Post
संस्कार News
संस्कार News

🎧 LIVE FM RADIO




🔊 Volume