Footwear Technologist

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फैशन हमेशा से ही हमारी लाइफ का मेजर पार्ट रहा है। कपडे हों, हेयर स्टाइल या फिर फुटवियर। सभी में हम औरों से अलग दिखना चाहते हैं, लेकिन अगर बात फुटवियर की हो, तो यहां हमें फैशन तो चाहिए ही, साथ ही हमें ऐसे प्रोडक्ट की भी तलाश रहती है, जो पूरी तरह से कंफर्टेबल हों। हमारी इसी डिमांड को पूरा करते हैं, फुटवियर टेक्नोलॉजिस्ट। इंडिया में फुट वियर इंडस्ट्री को यहां की हाई पॉपुलेशन का बेनिफिट हमेशा से मिलता रहा है। आगे भी इसमें कमी नहीं आने वाली है।
चैलेंजेज
एक शू टेक्नोलॉजिस्ट फैशन के अनुसार हमारे लिए फुटवियर डिजाइन करता है। कुछ समय पहले तक इस फील्ड में जो नया कॉन्सेप्ट आता था, वह कम से कम कुछ महीने या फिर साल तक एक जैसा ही रहता था। इसका मेन रीजन यह था कि इंडिया में इस फील्ड से रिलेटेड बडे विदेशी ब्रांड बहुत कम थे और उनकी प्रेजेंस भी हाई क्लास सोसायटी के एक विशेष वर्ग तक ही थी, लेकिन अब इस सिचुएशन में पूरी तरह से चेंज आ चुका है। फुटवियर से रिलेटेड सभी बडे ब्रांड्स इंडिया में अपना कारोबार बढा चुके हैं और उनकी प्रेजेंस हाई सोसायटी से निकल कर मिडिल क्लास तक हो गई है। इन कंपनियों के बीच मार्केट पर कब्जे को लेकर जारी कॉॅम्पिटिशन ने उन्हें हर दो-तीन महीने में नए डिजाइन मार्केट में लाने को मजबूर किया है। इंडियन प्लेयर्स भी बाजार में अपनी पहचान बनाए रखने के लिए अपने कस्टमर्स के लिए नए-नए डिजाइंस कम दामों पर लेकर आ रहे हैं।
सैलरी
इंडिया में फुटवियर डिजाइनर/फुटवियर टेक्निशियन को इससे रिलेटेड कोर्स करने के बाद जॉब के शुरुआती दौर में ही दो से तीन लाख रुपये एनुअली मिल जाते हैं। तीन-चार साल का एक्सपीरियंस होने के बाद यही सैलरी चार से पांच लाख रुपये सालाना हो जाती है। बडी कंपनियों में इससे भी ज्यादा सैलरी मिल जाती है, जो इस बात पर डिपेंड करती है कि आपके वर्क की क्वॉलिटी क्या है और आप इस फील्ड में आने वाली नई टेक्नोलॉजी को कितनी तेजी से अपने काम में अडॉप्ट करते हैं।
कोऑर्डिनेशन मस्ट
एक शू टेक्नोलॉजिस्ट का सारा काम कोऑर्डिनेशन पर डिपेंड करता है। उसका ज्यादातर समय डिजाइनर्स और इंजीनियर्स के साथ प्रोडक्ट डिजाइन और उसके डेवलपमेंट प्रॉसेस में बीतता है। फुटवियर इंडस्ट्री में आ रहे नए कॉन्सेप्ट के रिसर्च और पब्लिक ओपिनियन जानने में भी उसे अपना टाइम इनवेस्ट करना होता है। कोऑर्डिनेशन में कहीं भी कोई कमी आने पर इसका असर पूरे प्रोडक्ट पर दिखाई दे जाता है। इसलिए एक शू टेक्नोलॉजिस्ट को कोऑर्डिनेशन पर ही सबसे ज्यादा फोकस करना चाहिए।
स्किल्स
यह फील्ड उन लोगों के लिए है, जो हमेशा बेस्ट आइडिया तलाशते रहते हैं। इस समय इंटरनेशनल लेवल पर फुटवियर में किस तरह का ट्रेंड चल रहा है और उसमें किस तरह के चेंजेज करके उन्हें कम रेट में उससे बेहतर बनाया जा सकता है।
इंस्टीट्यूट्स
फुटवियर डिजाइन एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट, नोएडा
www.fddiindia.com
द सेंटर लेदर रिसर्च इंस्टीट्यूट, चेन्नई
www.clri.org
सेंट्रल फुटवियर ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट आगरा
www.cftiagra.org.in
कर्नाटका इंस्टीट्यूट ऑफ लेदर टेक्नोलॉजी, बेंगलुरु
www.kiltbangalore.com
एक्सपर्ट बाइट
फुटवियर टेक्नोलॉजी में ट्रेंड यूथ के लिए पॉजिटिव रिजल्ट देखने को मिल रहे हैं। नई टेक्नोलॉजी में ट्रेंड यूथ इस फील्ड में आकर इसे पूरी तरह से चेंज कर रहे हैं। इसके बावजूद इंटरनेशनल लेवल पर अपनी पहचान बनाने के लिए हमें बहुत कुछ करने की जरूरत है। इस फील्ड से रिलेटेड यूथ अपनी टेक्निकल स्किल्स को जितना डेवलप करेंगे, इस सेक्टर में उनके लिए उतना ही ज्यादा स्कोप बनता जाएगा। जॉब के लिए कंपनियां अच्छे इंस्टीट्यूट से कोर्स करने वालों को ही प्रॉयरिटी देती हैं। इसे ध्यान में रखते हुए अपने लिए इंस्टीट्यूट का सलेक्शन करें।
आरती सबरवाल, फुटवियर डिजाइनिंग एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट, नोएडा

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