विश्व आर्थिक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है और कार्यस्थलों पर अप्रत्याशित परिवर्तन हो रहे हैं। प्रौद्योगिकी की होड़ और काम के लिए वैश्विक प्रतिस्पर्धा से इन परिवर्ततनों को बल मिला है इस बात का महत्व निन्तर बढ़ रहा है कि रोजगार का चयन न केवल देश में हो रहे परिवर्तनों को बल्कि अंतरर्राष्ट्रीय स्तर पर जो हो रहा है उसे ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। रोजगार की दुनिया आज वह नहीं है, जिसमें वर्षों पहले आपके माता-पिता ने प्रवेश किया था। सभी तरह की नई प्रौद्योगिक, विशेषकर कम्प्यूटर, सूचना प्रौद्योगिकी, आज लगभग प्रत्येक उद्योग का हिस्सा बन चुकी है।
रोजगार सुरक्षा और स्थाई रोजगार की बात धीरे-धीरे अतीत का हिस्सा होती जा रही है। आजीवन रोजगार के स्थान पर आजीवन नियोजनीयता का महत्व बढ़ रहा है। व्यवसाय में लचीलापन और स्वतंत्र कार्यों (फ्रीलांसिंग) का चलन व्याप्त होता जा रहा है। अनेक ऐसी प्रवृत्तियां हैं जो अगले कुछ वर्षों तक हमारे जीवन को मुख्य रूप से प्रभावित करती रहेंगी। प्रस्तुत लेख में ऐसे व्यवसायों और पाठ्ïयक्रमों का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया जा रहा है जो नई सहस्रब्दि में सफलता चाहने वाले के लिए उपयोगी हो सकते हैं।
कला और डिजाइन
रोजगार के आकर्षक अवसरों में कला और डिजाइन का महत्व और लोकप्रियता निरन्तर बढ़ती जा रही है। मुख्य रूप से उपग्रह चैनलों के माध्यमों से भारतीय उपभोक्ताओं को अंतर्राट्रीय संस्कृतियों, जीवन शैलियों, डिजाइन अवधारणाओं और पैकेजिंग की जानकारी मिल रही है। इसके अलावा प्रयोज्य में निरन्तर वृद्धि से भी वस्त्रों, आभूषणों, गृहसज्जा, उत्पादों, टैक्सटाइल, प्रदर्शनियों, दृश्य संचार, आदि में डिजाइन उद्योग को बल मिला है।
सबसे अधिक अवसर फैशन, उपसाधनों (आभूषण सहित), उत्पाद, गृहसज्जा, औद्योगिक और दृश्य संचार डिजाइन में हैं। इंटरनेट के प्रसार से ग्राफिक आर्टिस्टों के लिए वेबसाइट डिजाइन में रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं। हालांकि उनके लिए विज्ञापन, प्रकाशन और उससे संबद्ध कार्यों में भी रोजगार के अवसर कम नहीं है। कला कोनिवेश के रूप में मान्यता मिलने से दृश्य कलाकारों को भी लाभ पहुंचा है और लोकप्रियता बढऩे से भारतीय कलाकारों को अपनी कलाकृतियों के लिए अधिक सुनिश्चित बाजार उपलब्ध हो रहा है।
कला में प्रतिभा सौंदर्य के प्रति संवेदना, विशेष अंतर्दृष्टिï और व्यापार के प्रति रुझान रखने वाले उम्मीदवारों के लिए निम्रांकित पाठ्ïयक्रम लाभदायक हो सकत हैं-बीएफए, कॉमर्शियल आर्ट, ग्राफिक्स, औद्योगिक डिजाइन, प्रोडॅक्ट डिजाइन, गृहसज्जा डिजाइन, दृश्य संचार डिजाइन फैशन , उपसाधन, आभूषण, टैक्सटाइल डिजाइन, ऐनिमेशन फिल्म डिजाइन, आदि में डिप्लोमा। कम्प्यूटर की सहायता से डिजाइन तैयार कने में दक्षता और मल्टीमीडिया प्रशिक्षण होने पर आर्टिस्टों और डिजाइनरों के लिए अवसर और भी बढ़त जाते हैं। सफलता के लिए प्रतिभा और कुशाग्र बुद्धि आवश्यक है ताकि आप बाजार की मांग पूरी कर सकें अथवा पुरोगामी, पथ-निर्रोरक बन सकें।
शिक्षा
शिक्षा के क्षेत्र में रोजगार के अवसरों का महत्व किंडरगार्टन से लेकर डॉक्टोरल स्तर तक निरन्तर बढ़ता जा रहा है। निजी क्षेत्र में शैक्षिक क्रमों में काफी वृद्धि हुई है क्योंकि स्कूलों, कॉलेजों, व्यावसायिक संस्थानों की मांग निरन्तर बढ़ती जा रही है। इसकी वजह यह भी है कि भारत में उच्च शिक्षा को अधिक आय और विकास के बेहतर अवसरों का माध्यम समझा जाने लगा है। स्नातकोत्तर उपाधि के बाद पीएचडी और एनईटी (राष्टï्रीय पात्रता परीक्षा) परीक्षा उत्तीर्ण करके आप विश्वविद्यालय, कॉलेज में शिक्षक पद के लिए आवेदन कर सकते हैं। अगर हम आईटी व्यावसायियों की मांग पूरा करना चाहते हैं तो नए कॉलेजों और विभागों को भी स्नातकोत्तर उपाधिधारकों की आवश्यकता पड़ेगी। ऐसे में इच्छुक शिक्षक कोचिंग संस्थानों में भी नौकरी के लिए कोशिश कर सकते हैं। इससे उन प्रतियोगियों को भी सहायता हो सकेगी जो व्यावसायिक संस्थानों और प्रतिष्ठिïत विश्वविद्यालयों में दाखिले की होड़ में लगे होंगे। स्नातकोत्तर उपाधि के साथ बीएड होना 12वीं कक्षा तक शिक्षक के लिए अनिवार्य है। स्नातक स्तर पर स्कूल विषय लिए हों तो बीएड करके स्कूली शिक्षक बना जा सकता है। 12वीं कक्षा के बाद शिक्षण में डिप्लोमा करके आप प्राथमिक कक्षाओं के अध्यापक बन सकते हैं।
मनोरंजन और सूचना
उपग्रह चैनलों के प्रसार और रेडियो में फिर से बढ़ती रुचि को देखते हुए इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, प्रिंट मीडिया, मीडिया और वेब सहित जन संचार की रोजगार दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका है। इससे लोगों की शिक्षा और मनोरंजन की आवश्यकताएं पूरी होती है। ऑन लाइन पब्लिशिंग आज महत्वपूर्ण व्यवसाय बन गया है। अत: अगर आपके पास जनसंचार में उपाधि या स्नातकोत्तर डिप्लोमा है, अपने आसपास की दुनिया में हो रही घटनाओं में आपकी रुचि है, आप लोगों को जानकारी देने में रुचि रखते है अथवा अभिनेता, सेट डिजाइनर, संगीतज्ञ, कोरिओग्राफर (नृत्यकार) आदि हैं, तो आपके लिए अनेक अवसर हैं, जिनकी खोज कर लाभ उठाया जा सकता है।
स्वास्थ्य देखभाल (चिकित्सा सेवाएं)
चिकित्सा और स्वास्थ्य देखभाल सेवाएं महत्वपूर्ण रही हैं और इनमें विशेषज्ञता हासिल करके अधिक धन कमाया जा सकता है। निदान और उपचार में जिस तरह से अत्याधुनिक तकनीकों का प्रयोग बढ़ रहा है उसे देखते हुए मेडिकल टैक्नोलॉजी (मेडिकल प्रयोगशाला प्रौद्योगिक, सम्बद्ध विषय) में व्यवसाय की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। जीर्ण रोगों की रोकथाम के तौर-तरीकों के बारे में जागरूकता बढऩे को देखते हुए चिकित्सा के क्षेत्र में पुनर्वास सेवाओं की मांग में वृद्धि होगी। पुनर्वास कार्मिकों में फिजियोथेरेपिस्ट, ऑक्युपेशनल, थेरेपिस्ट, आडिओलॉजी और स्पीच थेरेपिस्ट, नर्सें और अन्य कार्मिकों की महत्वपूर्ण भूमिका होतीहै। भेषज (औषध) उद्योग की बढ़ती भागीदारी के साथ होमियोपैथी, आयुर्वेद और यूनानी पद्धति जैसी वैकल्पिक चिकित्सा प्रणालियों की लोकप्रियता में वृद्धि हो रही है। कॉस्मैटिक उद्योग में डेंस्टिटों (दांत के डॉक्टरों) को अच्छा कारोबार प्राप्त हो रहा है। चिकित्सा में नई प्रौद्योगिकी टेलीमेडिसनि (दूर-उपचार) के रूप में उभर रही है।
हॉस्पिटल प्रबंध, स्वास्थ्य प्रबंध के क्षेत्र में स्नातकों और मेडिकल स्नातकों के लिए रोजगार के नए-नए अवसर पैदा हो रहे हैं। हैल्थ-केयर मैनेजर परस्पर संबद्ध स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक से अधिक कारगर बनाने के लिए काम करते हैं। इनमें रोगी को अस्पताल में और बाहर दी जाने वाली सेवाएं शामिल हैं। स्वास्थ्य देखभाल, अस्पताल प्रबंध में सभी स्तरों पर कार्यक्षमता और लागत में बचत पर ध्यान दिया जाता है।
आव-भगत और अवकाश
यात्रा, विश्राम और भोजन तथा मनोरंजन के क्षेत्र में उन लोगों के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध हैं जो अनुकूल सोच रखते हों, जिन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त किया हो और अवकाश संबंधी व्यवसायों को अब एक विशेषाधिकार की बजाए एक अधिकार के रूप में देखा जा सकता है। टे्रवल एजेंसियां यात्रा और टूर आयोजित करके अच्छा धन कमा रही है। गुंजायमान अर्थव्यवस्था में रेस्तरां और मनोरंजन उद्योग का विकास अवश्य होता है। आर्ठएटीए, टे्रवल मैंनेजमेंट, होटल मैंनेजमेंट और सम्बद्ध प्रशिक्षण लेना इस दिशा में सही कदम कहा जा सकता है।
सूचना प्रौद्योगिकी
सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में निरंतर और व्यापक परिवर्तन हो रहे हैं। अत: कम्प्यूटर में रोजगार की संभावनाओं का लाभ उठाने के इच्छुक उम्मीदवारों को यह दायित्व भली-भांति समझना चाहिए कि उन्हेें अपने कौशल को लगातार उन्नत बनाना होगा। अगर वे पिछड़ गए तो उनका व्यवसाय पुराना पड़ जाएगा।
आईटी में सर्वाधिक वेतन सॉफ्टवेयर विकास से संबंधित व्यवसायों में मिलता है। नेटवर्क इंजीनियरों, नेटवर्क प्रशासकों, कम्प्यूटर प्रोग्रामर्स, सिस्टम प्रोग्रामर्स और विश£ेषकों, डाटाबेस मैनेजरों, डाटा सुरक्षा विशेषज्ञों की जबरदस्त मांग है। दीर्घावधि के लिए निरन्तर प्रगति सुनिश्चित करने में कम्प्यूटर इंजीनियरी में स्नातकोत्तर उपाधि या डॉक्टरेट उपाधि अथवा कम्प्यूटर विज्ञान, दूरसंचार इंजीनियरों, कम्प्यूटर अनुप्रयोग और संबद्ध विषयों में उपाधि प्राप्त करना उपयोगी सिद्ध हो सकता है।
बीमा सेवाएं
बीमा क्षेत्र में निजी कम्पनियों के प्रवेश से प्रशिक्षित व्यवसायियों की मांग बढ़ गई है। उम्मीद की जा रही है कि बीमा उद्योग में अब विपणन वितरण, बीमांकिक (अक्ट्ïयूरिअल्स), समुद्री बीमा कार्य और निवेश विभागों में रोजगार के व्यापक अवसर पैदा होंगे। अन्य पदाधिकारी भले की संबद्ध व्यापार में कार्यरत व्यवसायियों में से हो सकते हैं, किन्तु बीमांकितों की बड़ी संख्या में आवश्यकता होगी। सांख्यिकी और गणित स्नातकों को इस पाठ्ïयक्रम के लिए कोशिश करनी चाहिए जो अक्ट्ïयूरिअल सोसायटी ऑफ इंडिया द्वारा संचालित किया जाता है। भारतीय बीमा संस्थान और इंस्ट्ïियूट ऑफ रिस्क मैनेजमेंट समुद्री बीमा कार्यों में प्रशिक्षण दे सकते हैं, इसके लिए मेडिकल और जीवन विज्ञान स्नातकों को प्राथमिकता दी जा सकती है। सर्वेक्षकों (सर्वेयर्स) को बीमा नियंत्रक द्वारा लाइसेंस दिया जाता है, जिनमें इंजीनियर, लेखाकार, मेडिकल स्नातक आदि शामिल हो सकते हैं, नए संस्थानों और कम्पनियों द्वारा बीमा एजेंटों को प्रशिक्षण देने का काम पहले ही शुरू किया जा चुका है।
पुस्तकालय और प्रलेखन सेवाएं
पुस्तकालय या लाइब्रेरी की परम्परागत अवधारणा को पुन: परिभाषित किया जा रहा है। पुस्तकालय अब कागजी रिकॉर्ड या पुस्तकें प्राप्त करने का स्थल मात्र नहीं रह गया है। पुस्तकालयों में अब अत्याधुनिक माध्यम, जैसे सी.डी. रोम, इंटरनेट, परोक्ष पुस्तकालय और विस्तृत संसाधनों तक सुदूर पहुंच, जैसी सुविधाएं उपलब्ध है। पुस्कालयाध्यक्ष अब पुस्तकालय के बाहर के क्षेत्रों में सूचना प्रबंध और अनुसंधान कौशल का इस्तेमाल कर रहे हैं। उदाहरण के लिए वे डाटाबेस का विकास, संदर्भ उपकरण विकास, सूचना प्रणालियों, प्रकाशन, विपणन और डाटाबेस प्रयोक्ताओं का प्रशिक्षण और इंटरनेट समन्वय जैसे कार्य भी करने लगे है। इस क्षेत्र में रोजगार के बेहतर अवसर पानेके लिए स्नातक उपाधि के बाद पुस्कालय विज्ञान में स्नातक (बीलिब साइंस) और उसके बाद एमलिब साइंस, प्रलेखन विज्ञान में स्नाकोत्तर उपाधि प्राप्त की जा सकती है।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी, इंजीनियरी
भविष्य में निश्चित रूप से प्रौद्योगिकी का वर्चस्व रहेगा और अत्याधुनिक वैज्ञानिक अध्ययन के क्षेत्र में व्यवसाय महत्वपूर्ण होंगे, नए विषयों और विभिन्न विषयों में परस्पर संबद्ध अध्ययन लाभदायक सिद्ध होगा। पर्यावरण इंजीनियरी, बायोमेडिकल इंजीनियरी, खाद्य प्रसंस्करण प्रौद्योगिकी जैसे विषयों में विशेषज्ञता हासिल करने वालों को रोजगार के शानदार अवसर उपलब्ध हो सकते हैं। अगर आप ज्ञान आधारित व्यवसाय में जाना चाहते हैं और प्रगति के उत्कृष्ट अवसर पाना चाहते हैं तो स्नातक उपाधि योग्यता पर्याप्त नहीं है। आपको स्नाकोत्तर उपाधि और उसके बाद अनुसंधान उपाधि प्राप्त करनी होगी। इन क्षेत्रों में सफलता के लिए शैक्षिक विषयों में उत्कृष्टïता और गंभीर रुचि जरूरी है। साथ ही आपको यह विश्वास होना चाहिए कि अनुसंधान एवं विकास, परामर्श जैसे व्यवसाय आपके व्यक्तित्व के अनुकूल है।
हाईटैक (उच्च प्रौद्योगिकी) एक तेजी से बढ़ता क्षेत्र है किन्तु प्रतिस्पर्धा भी कम नहीं है। हाई-टैक में व्यवसाय प्राप्त करनेके लिए आपको विज्ञान या इंजीनियरी में ठोस प्रशिक्षण लेना होगा ताकि प्रबंध और अन्य कौशल के लिए आपका एक आधार तैयार हो सकें।
तकनीकी सहायता और प्रबंध
ऑटोमेशन (स्वचालन) और कम्प्यूटराइजेशन, सम्पर्क सूत्रता, नेटवर्किंग आदि के प्रचालन को देखते हुए हमें मरम्मत करने वाले प्रशिक्षित कार्मिकों, मैकेनिकों, रख-रखाव और तकनीकी सहायता देने वाले अन्य तकनीशियनों की आवश्यकता पड़ेगी। अत: इंजीनियरी में डिग्री या डिप्लोमा रखने वालों की भारी मांग होगी। अगर वे अपना कौशल और अनुभव अद्यतन रखेंगे, तो मुंह मांगे दाम मिलेंगे। सेवा एजेंसियों या रख-रखाव सेवा देने वालों के रूप में स्वरोजगार के व्यापक अवसर उपलब्ध होंगें।
अन्य विकल्प-जो अगली सदी में महत्वपूर्ण बने रहेंगे, उनमें लेखाविधि, लेखा परीक्षा, प्रबंध, विधि सेवाएं, विपणन एवं वितरण, प्रशासनिक सेवाएं, बैंकिंग शामिल हैं, जिनमें ये ऐसे रोजगार हैं, जिनकी आवश्यकता गुंजायमान अर्थव्यवस्था और मंदी दोनों में ही पड़ती है।
बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल, पर्यावरण और प्राकृतिक संस्थान तथा री-साइक्लिंग और व्यवसाय और गतिविधियां हैं, जिनसे लाभकारी रोजगार के अधिक विस्तृत अवसर पैदा होने की संभावना है। सेवा क्षेत्र में भी रोजगार के अधिक अवसर पैदा होंगे। इसी तरह वस्तु विनिर्माण, विनिर्माण उद्योग में भी रोजगार के अवसरों का विकास होगा।
अगली सदी की अवधारणाएं और प्रवृत्तियां आपको प्रकाश में लाती हैं। स्वयं को खोजने का प्रयास कीजिए और यह तय कीजिए कि आपके लिए सबसे महत्वपूर्ण क्या है-कार्य का स्वरूप, जीवन की गुणवत्ता, धन और स्थान जहां आप रहना चाहते हैं और इसके बाद अपने विकल्प चुनिए। यह प्रश्र विचारणीय है कि भविष्य में कार्यस्थल केवल उन्हीं के अनुकूल होगा जो भली-भांति शिक्षित और योग्य हैं तथा नए कौशल शीघ्र हासिल कर सकते हैं। इस संदर्भ में एक अच्छी बात है कि कार्यस्थल पर लचीलेपन के कारण संगठित क्षेत्र में औपचारिक योग्यताओं और उच्च स्तरीय प्रशिक्षण का महत्व कम हो गया है। औपचारिक नौकरी के युग में उन लोगों के साथ भेदभाव होता था जिन्होंने औपचारिक शिक्षा प्राप्त नहीं की। नौकरी विहीन कार्यस्थल पर काम वे लोग करेंगे, जिनमें क्षमता और इच्छाशक्ति होगी, भले ही उन्होंने डिग्री या सर्टिफिकेट प्राप्त किया हो या नहीं। अगर वे विश्वसनीय ढंग से काम कर सकेंगे तो वह काम मिलेगा भी उन्हीं को डाटा ऐंट्री, मेंटनेंस, क्लीनिंग, अनुसंधान, प्रशिक्षण और ऐसे ही अन्य परिसर विषयक कार्यों में उन लोगों के लिए रोजगार के ढेर सारे अवसर उपलब्ध होंगे जो इन सेवाओं को संचालित करने और प्रदान में दिलचस्पी रखेंगे।
कुछ क्षेत्रों में रोजगार लुप्त होता जा रहा है, जैसे विनिर्माण क्षेत्र को ही लें, जहां ज्यादा काम होने पर भी स्वचालन की वजह सेअधिक जनशक्ति की आवश्यकता नहीं रह गई है, किन्तु इसका यह अर्थ नहीं है कि काम में कमी आएगी। ऐसे अनेक कार्य होंगे, जिनके लिए लोगों को अच्छा पारिश्रमिक मिलेगा लेकिन लाभ उद्यमी व्यक्तियों को ही होगा। कार्मिक की मांग में बदलाव आया है क्योंकि अब शारीरिक श्रम करने वालों के स्थान पर ज्ञान आधारित श्रमिकों की मांग बढ़ी है। किन्तु मशीनों की मरम्मत और रख-रखाव के लिए भी बड़ी संख्या में लोगों की जरूरत होगी, जो शारीरिक श्रम से सम्बद्धहै। अत: एक तरह का पुन: परीक्षण जरूरी होगा। कम औपचारिक कार्यस्थल पर अनौपचारिक कार्यस्थल पर अनौपचारिक शिक्षा पर बल दिया जाएगा, जहां अल्प, अंशकालिक प्रशिक्षण कीमांग होगी। वास्तव में 21वीं सदी में, जिन लोगों में सीखने, भूलने और पुन: सीखने की क्षमता होगी, वहीं वास्तविक रूप से साक्षर माने जाएंगे। निरन्तर शिक्षा को जीवन शैली के रूप में अपना लीजिए। आकपे लक्ष्यों के अनुसार औपचारिक शिक्षा का युग भले ही समाप्त हो गया हो, किन्तु बदलती कार्यनीति और प्रौद्योगिकी के साथ गति बनाए रखने के लिए अभी बहुत कुछ सीखना होगा। अपने को कभी पुराना न पडऩे देने के लिए आपको अनौपचारिक कार्य नियमित आधार करने की आदत डालनी होगी। नई प्रवृत्तियों की जानकारी प्राप्त करने के लिए औद्योगिक बैठकों, सेमिनारों और सम्मेलनों में हिस्सा लेना शुरू कीजिए, सीखने की क्षमता और सबसे महत्वपूर्ण नहीं तो महत्वपूर्ण कौशल अवश्य है।
रोजगार सुरक्षा और स्थाई रोजगार की बात धीरे-धीरे अतीत का हिस्सा होती जा रही है। आजीवन रोजगार के स्थान पर आजीवन नियोजनीयता का महत्व बढ़ रहा है। व्यवसाय में लचीलापन और स्वतंत्र कार्यों (फ्रीलांसिंग) का चलन व्याप्त होता जा रहा है। अनेक ऐसी प्रवृत्तियां हैं जो अगले कुछ वर्षों तक हमारे जीवन को मुख्य रूप से प्रभावित करती रहेंगी। प्रस्तुत लेख में ऐसे व्यवसायों और पाठ्ïयक्रमों का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया जा रहा है जो नई सहस्रब्दि में सफलता चाहने वाले के लिए उपयोगी हो सकते हैं।
कला और डिजाइन
रोजगार के आकर्षक अवसरों में कला और डिजाइन का महत्व और लोकप्रियता निरन्तर बढ़ती जा रही है। मुख्य रूप से उपग्रह चैनलों के माध्यमों से भारतीय उपभोक्ताओं को अंतर्राट्रीय संस्कृतियों, जीवन शैलियों, डिजाइन अवधारणाओं और पैकेजिंग की जानकारी मिल रही है। इसके अलावा प्रयोज्य में निरन्तर वृद्धि से भी वस्त्रों, आभूषणों, गृहसज्जा, उत्पादों, टैक्सटाइल, प्रदर्शनियों, दृश्य संचार, आदि में डिजाइन उद्योग को बल मिला है।
सबसे अधिक अवसर फैशन, उपसाधनों (आभूषण सहित), उत्पाद, गृहसज्जा, औद्योगिक और दृश्य संचार डिजाइन में हैं। इंटरनेट के प्रसार से ग्राफिक आर्टिस्टों के लिए वेबसाइट डिजाइन में रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं। हालांकि उनके लिए विज्ञापन, प्रकाशन और उससे संबद्ध कार्यों में भी रोजगार के अवसर कम नहीं है। कला कोनिवेश के रूप में मान्यता मिलने से दृश्य कलाकारों को भी लाभ पहुंचा है और लोकप्रियता बढऩे से भारतीय कलाकारों को अपनी कलाकृतियों के लिए अधिक सुनिश्चित बाजार उपलब्ध हो रहा है।
कला में प्रतिभा सौंदर्य के प्रति संवेदना, विशेष अंतर्दृष्टिï और व्यापार के प्रति रुझान रखने वाले उम्मीदवारों के लिए निम्रांकित पाठ्ïयक्रम लाभदायक हो सकत हैं-बीएफए, कॉमर्शियल आर्ट, ग्राफिक्स, औद्योगिक डिजाइन, प्रोडॅक्ट डिजाइन, गृहसज्जा डिजाइन, दृश्य संचार डिजाइन फैशन , उपसाधन, आभूषण, टैक्सटाइल डिजाइन, ऐनिमेशन फिल्म डिजाइन, आदि में डिप्लोमा। कम्प्यूटर की सहायता से डिजाइन तैयार कने में दक्षता और मल्टीमीडिया प्रशिक्षण होने पर आर्टिस्टों और डिजाइनरों के लिए अवसर और भी बढ़त जाते हैं। सफलता के लिए प्रतिभा और कुशाग्र बुद्धि आवश्यक है ताकि आप बाजार की मांग पूरी कर सकें अथवा पुरोगामी, पथ-निर्रोरक बन सकें।
शिक्षा
शिक्षा के क्षेत्र में रोजगार के अवसरों का महत्व किंडरगार्टन से लेकर डॉक्टोरल स्तर तक निरन्तर बढ़ता जा रहा है। निजी क्षेत्र में शैक्षिक क्रमों में काफी वृद्धि हुई है क्योंकि स्कूलों, कॉलेजों, व्यावसायिक संस्थानों की मांग निरन्तर बढ़ती जा रही है। इसकी वजह यह भी है कि भारत में उच्च शिक्षा को अधिक आय और विकास के बेहतर अवसरों का माध्यम समझा जाने लगा है। स्नातकोत्तर उपाधि के बाद पीएचडी और एनईटी (राष्टï्रीय पात्रता परीक्षा) परीक्षा उत्तीर्ण करके आप विश्वविद्यालय, कॉलेज में शिक्षक पद के लिए आवेदन कर सकते हैं। अगर हम आईटी व्यावसायियों की मांग पूरा करना चाहते हैं तो नए कॉलेजों और विभागों को भी स्नातकोत्तर उपाधिधारकों की आवश्यकता पड़ेगी। ऐसे में इच्छुक शिक्षक कोचिंग संस्थानों में भी नौकरी के लिए कोशिश कर सकते हैं। इससे उन प्रतियोगियों को भी सहायता हो सकेगी जो व्यावसायिक संस्थानों और प्रतिष्ठिïत विश्वविद्यालयों में दाखिले की होड़ में लगे होंगे। स्नातकोत्तर उपाधि के साथ बीएड होना 12वीं कक्षा तक शिक्षक के लिए अनिवार्य है। स्नातक स्तर पर स्कूल विषय लिए हों तो बीएड करके स्कूली शिक्षक बना जा सकता है। 12वीं कक्षा के बाद शिक्षण में डिप्लोमा करके आप प्राथमिक कक्षाओं के अध्यापक बन सकते हैं।
मनोरंजन और सूचना
उपग्रह चैनलों के प्रसार और रेडियो में फिर से बढ़ती रुचि को देखते हुए इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, प्रिंट मीडिया, मीडिया और वेब सहित जन संचार की रोजगार दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका है। इससे लोगों की शिक्षा और मनोरंजन की आवश्यकताएं पूरी होती है। ऑन लाइन पब्लिशिंग आज महत्वपूर्ण व्यवसाय बन गया है। अत: अगर आपके पास जनसंचार में उपाधि या स्नातकोत्तर डिप्लोमा है, अपने आसपास की दुनिया में हो रही घटनाओं में आपकी रुचि है, आप लोगों को जानकारी देने में रुचि रखते है अथवा अभिनेता, सेट डिजाइनर, संगीतज्ञ, कोरिओग्राफर (नृत्यकार) आदि हैं, तो आपके लिए अनेक अवसर हैं, जिनकी खोज कर लाभ उठाया जा सकता है।
स्वास्थ्य देखभाल (चिकित्सा सेवाएं)
चिकित्सा और स्वास्थ्य देखभाल सेवाएं महत्वपूर्ण रही हैं और इनमें विशेषज्ञता हासिल करके अधिक धन कमाया जा सकता है। निदान और उपचार में जिस तरह से अत्याधुनिक तकनीकों का प्रयोग बढ़ रहा है उसे देखते हुए मेडिकल टैक्नोलॉजी (मेडिकल प्रयोगशाला प्रौद्योगिक, सम्बद्ध विषय) में व्यवसाय की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। जीर्ण रोगों की रोकथाम के तौर-तरीकों के बारे में जागरूकता बढऩे को देखते हुए चिकित्सा के क्षेत्र में पुनर्वास सेवाओं की मांग में वृद्धि होगी। पुनर्वास कार्मिकों में फिजियोथेरेपिस्ट, ऑक्युपेशनल, थेरेपिस्ट, आडिओलॉजी और स्पीच थेरेपिस्ट, नर्सें और अन्य कार्मिकों की महत्वपूर्ण भूमिका होतीहै। भेषज (औषध) उद्योग की बढ़ती भागीदारी के साथ होमियोपैथी, आयुर्वेद और यूनानी पद्धति जैसी वैकल्पिक चिकित्सा प्रणालियों की लोकप्रियता में वृद्धि हो रही है। कॉस्मैटिक उद्योग में डेंस्टिटों (दांत के डॉक्टरों) को अच्छा कारोबार प्राप्त हो रहा है। चिकित्सा में नई प्रौद्योगिकी टेलीमेडिसनि (दूर-उपचार) के रूप में उभर रही है।
हॉस्पिटल प्रबंध, स्वास्थ्य प्रबंध के क्षेत्र में स्नातकों और मेडिकल स्नातकों के लिए रोजगार के नए-नए अवसर पैदा हो रहे हैं। हैल्थ-केयर मैनेजर परस्पर संबद्ध स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक से अधिक कारगर बनाने के लिए काम करते हैं। इनमें रोगी को अस्पताल में और बाहर दी जाने वाली सेवाएं शामिल हैं। स्वास्थ्य देखभाल, अस्पताल प्रबंध में सभी स्तरों पर कार्यक्षमता और लागत में बचत पर ध्यान दिया जाता है।
आव-भगत और अवकाश
यात्रा, विश्राम और भोजन तथा मनोरंजन के क्षेत्र में उन लोगों के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध हैं जो अनुकूल सोच रखते हों, जिन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त किया हो और अवकाश संबंधी व्यवसायों को अब एक विशेषाधिकार की बजाए एक अधिकार के रूप में देखा जा सकता है। टे्रवल एजेंसियां यात्रा और टूर आयोजित करके अच्छा धन कमा रही है। गुंजायमान अर्थव्यवस्था में रेस्तरां और मनोरंजन उद्योग का विकास अवश्य होता है। आर्ठएटीए, टे्रवल मैंनेजमेंट, होटल मैंनेजमेंट और सम्बद्ध प्रशिक्षण लेना इस दिशा में सही कदम कहा जा सकता है।
सूचना प्रौद्योगिकी
सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में निरंतर और व्यापक परिवर्तन हो रहे हैं। अत: कम्प्यूटर में रोजगार की संभावनाओं का लाभ उठाने के इच्छुक उम्मीदवारों को यह दायित्व भली-भांति समझना चाहिए कि उन्हेें अपने कौशल को लगातार उन्नत बनाना होगा। अगर वे पिछड़ गए तो उनका व्यवसाय पुराना पड़ जाएगा।
आईटी में सर्वाधिक वेतन सॉफ्टवेयर विकास से संबंधित व्यवसायों में मिलता है। नेटवर्क इंजीनियरों, नेटवर्क प्रशासकों, कम्प्यूटर प्रोग्रामर्स, सिस्टम प्रोग्रामर्स और विश£ेषकों, डाटाबेस मैनेजरों, डाटा सुरक्षा विशेषज्ञों की जबरदस्त मांग है। दीर्घावधि के लिए निरन्तर प्रगति सुनिश्चित करने में कम्प्यूटर इंजीनियरी में स्नातकोत्तर उपाधि या डॉक्टरेट उपाधि अथवा कम्प्यूटर विज्ञान, दूरसंचार इंजीनियरों, कम्प्यूटर अनुप्रयोग और संबद्ध विषयों में उपाधि प्राप्त करना उपयोगी सिद्ध हो सकता है।
बीमा सेवाएं
बीमा क्षेत्र में निजी कम्पनियों के प्रवेश से प्रशिक्षित व्यवसायियों की मांग बढ़ गई है। उम्मीद की जा रही है कि बीमा उद्योग में अब विपणन वितरण, बीमांकिक (अक्ट्ïयूरिअल्स), समुद्री बीमा कार्य और निवेश विभागों में रोजगार के व्यापक अवसर पैदा होंगे। अन्य पदाधिकारी भले की संबद्ध व्यापार में कार्यरत व्यवसायियों में से हो सकते हैं, किन्तु बीमांकितों की बड़ी संख्या में आवश्यकता होगी। सांख्यिकी और गणित स्नातकों को इस पाठ्ïयक्रम के लिए कोशिश करनी चाहिए जो अक्ट्ïयूरिअल सोसायटी ऑफ इंडिया द्वारा संचालित किया जाता है। भारतीय बीमा संस्थान और इंस्ट्ïियूट ऑफ रिस्क मैनेजमेंट समुद्री बीमा कार्यों में प्रशिक्षण दे सकते हैं, इसके लिए मेडिकल और जीवन विज्ञान स्नातकों को प्राथमिकता दी जा सकती है। सर्वेक्षकों (सर्वेयर्स) को बीमा नियंत्रक द्वारा लाइसेंस दिया जाता है, जिनमें इंजीनियर, लेखाकार, मेडिकल स्नातक आदि शामिल हो सकते हैं, नए संस्थानों और कम्पनियों द्वारा बीमा एजेंटों को प्रशिक्षण देने का काम पहले ही शुरू किया जा चुका है।
पुस्तकालय और प्रलेखन सेवाएं
पुस्तकालय या लाइब्रेरी की परम्परागत अवधारणा को पुन: परिभाषित किया जा रहा है। पुस्तकालय अब कागजी रिकॉर्ड या पुस्तकें प्राप्त करने का स्थल मात्र नहीं रह गया है। पुस्तकालयों में अब अत्याधुनिक माध्यम, जैसे सी.डी. रोम, इंटरनेट, परोक्ष पुस्तकालय और विस्तृत संसाधनों तक सुदूर पहुंच, जैसी सुविधाएं उपलब्ध है। पुस्कालयाध्यक्ष अब पुस्तकालय के बाहर के क्षेत्रों में सूचना प्रबंध और अनुसंधान कौशल का इस्तेमाल कर रहे हैं। उदाहरण के लिए वे डाटाबेस का विकास, संदर्भ उपकरण विकास, सूचना प्रणालियों, प्रकाशन, विपणन और डाटाबेस प्रयोक्ताओं का प्रशिक्षण और इंटरनेट समन्वय जैसे कार्य भी करने लगे है। इस क्षेत्र में रोजगार के बेहतर अवसर पानेके लिए स्नातक उपाधि के बाद पुस्कालय विज्ञान में स्नातक (बीलिब साइंस) और उसके बाद एमलिब साइंस, प्रलेखन विज्ञान में स्नाकोत्तर उपाधि प्राप्त की जा सकती है।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी, इंजीनियरी
भविष्य में निश्चित रूप से प्रौद्योगिकी का वर्चस्व रहेगा और अत्याधुनिक वैज्ञानिक अध्ययन के क्षेत्र में व्यवसाय महत्वपूर्ण होंगे, नए विषयों और विभिन्न विषयों में परस्पर संबद्ध अध्ययन लाभदायक सिद्ध होगा। पर्यावरण इंजीनियरी, बायोमेडिकल इंजीनियरी, खाद्य प्रसंस्करण प्रौद्योगिकी जैसे विषयों में विशेषज्ञता हासिल करने वालों को रोजगार के शानदार अवसर उपलब्ध हो सकते हैं। अगर आप ज्ञान आधारित व्यवसाय में जाना चाहते हैं और प्रगति के उत्कृष्ट अवसर पाना चाहते हैं तो स्नातक उपाधि योग्यता पर्याप्त नहीं है। आपको स्नाकोत्तर उपाधि और उसके बाद अनुसंधान उपाधि प्राप्त करनी होगी। इन क्षेत्रों में सफलता के लिए शैक्षिक विषयों में उत्कृष्टïता और गंभीर रुचि जरूरी है। साथ ही आपको यह विश्वास होना चाहिए कि अनुसंधान एवं विकास, परामर्श जैसे व्यवसाय आपके व्यक्तित्व के अनुकूल है।
हाईटैक (उच्च प्रौद्योगिकी) एक तेजी से बढ़ता क्षेत्र है किन्तु प्रतिस्पर्धा भी कम नहीं है। हाई-टैक में व्यवसाय प्राप्त करनेके लिए आपको विज्ञान या इंजीनियरी में ठोस प्रशिक्षण लेना होगा ताकि प्रबंध और अन्य कौशल के लिए आपका एक आधार तैयार हो सकें।
तकनीकी सहायता और प्रबंध
ऑटोमेशन (स्वचालन) और कम्प्यूटराइजेशन, सम्पर्क सूत्रता, नेटवर्किंग आदि के प्रचालन को देखते हुए हमें मरम्मत करने वाले प्रशिक्षित कार्मिकों, मैकेनिकों, रख-रखाव और तकनीकी सहायता देने वाले अन्य तकनीशियनों की आवश्यकता पड़ेगी। अत: इंजीनियरी में डिग्री या डिप्लोमा रखने वालों की भारी मांग होगी। अगर वे अपना कौशल और अनुभव अद्यतन रखेंगे, तो मुंह मांगे दाम मिलेंगे। सेवा एजेंसियों या रख-रखाव सेवा देने वालों के रूप में स्वरोजगार के व्यापक अवसर उपलब्ध होंगें।
अन्य विकल्प-जो अगली सदी में महत्वपूर्ण बने रहेंगे, उनमें लेखाविधि, लेखा परीक्षा, प्रबंध, विधि सेवाएं, विपणन एवं वितरण, प्रशासनिक सेवाएं, बैंकिंग शामिल हैं, जिनमें ये ऐसे रोजगार हैं, जिनकी आवश्यकता गुंजायमान अर्थव्यवस्था और मंदी दोनों में ही पड़ती है।
बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल, पर्यावरण और प्राकृतिक संस्थान तथा री-साइक्लिंग और व्यवसाय और गतिविधियां हैं, जिनसे लाभकारी रोजगार के अधिक विस्तृत अवसर पैदा होने की संभावना है। सेवा क्षेत्र में भी रोजगार के अधिक अवसर पैदा होंगे। इसी तरह वस्तु विनिर्माण, विनिर्माण उद्योग में भी रोजगार के अवसरों का विकास होगा।
अगली सदी की अवधारणाएं और प्रवृत्तियां आपको प्रकाश में लाती हैं। स्वयं को खोजने का प्रयास कीजिए और यह तय कीजिए कि आपके लिए सबसे महत्वपूर्ण क्या है-कार्य का स्वरूप, जीवन की गुणवत्ता, धन और स्थान जहां आप रहना चाहते हैं और इसके बाद अपने विकल्प चुनिए। यह प्रश्र विचारणीय है कि भविष्य में कार्यस्थल केवल उन्हीं के अनुकूल होगा जो भली-भांति शिक्षित और योग्य हैं तथा नए कौशल शीघ्र हासिल कर सकते हैं। इस संदर्भ में एक अच्छी बात है कि कार्यस्थल पर लचीलेपन के कारण संगठित क्षेत्र में औपचारिक योग्यताओं और उच्च स्तरीय प्रशिक्षण का महत्व कम हो गया है। औपचारिक नौकरी के युग में उन लोगों के साथ भेदभाव होता था जिन्होंने औपचारिक शिक्षा प्राप्त नहीं की। नौकरी विहीन कार्यस्थल पर काम वे लोग करेंगे, जिनमें क्षमता और इच्छाशक्ति होगी, भले ही उन्होंने डिग्री या सर्टिफिकेट प्राप्त किया हो या नहीं। अगर वे विश्वसनीय ढंग से काम कर सकेंगे तो वह काम मिलेगा भी उन्हीं को डाटा ऐंट्री, मेंटनेंस, क्लीनिंग, अनुसंधान, प्रशिक्षण और ऐसे ही अन्य परिसर विषयक कार्यों में उन लोगों के लिए रोजगार के ढेर सारे अवसर उपलब्ध होंगे जो इन सेवाओं को संचालित करने और प्रदान में दिलचस्पी रखेंगे।
कुछ क्षेत्रों में रोजगार लुप्त होता जा रहा है, जैसे विनिर्माण क्षेत्र को ही लें, जहां ज्यादा काम होने पर भी स्वचालन की वजह सेअधिक जनशक्ति की आवश्यकता नहीं रह गई है, किन्तु इसका यह अर्थ नहीं है कि काम में कमी आएगी। ऐसे अनेक कार्य होंगे, जिनके लिए लोगों को अच्छा पारिश्रमिक मिलेगा लेकिन लाभ उद्यमी व्यक्तियों को ही होगा। कार्मिक की मांग में बदलाव आया है क्योंकि अब शारीरिक श्रम करने वालों के स्थान पर ज्ञान आधारित श्रमिकों की मांग बढ़ी है। किन्तु मशीनों की मरम्मत और रख-रखाव के लिए भी बड़ी संख्या में लोगों की जरूरत होगी, जो शारीरिक श्रम से सम्बद्धहै। अत: एक तरह का पुन: परीक्षण जरूरी होगा। कम औपचारिक कार्यस्थल पर अनौपचारिक कार्यस्थल पर अनौपचारिक शिक्षा पर बल दिया जाएगा, जहां अल्प, अंशकालिक प्रशिक्षण कीमांग होगी। वास्तव में 21वीं सदी में, जिन लोगों में सीखने, भूलने और पुन: सीखने की क्षमता होगी, वहीं वास्तविक रूप से साक्षर माने जाएंगे। निरन्तर शिक्षा को जीवन शैली के रूप में अपना लीजिए। आकपे लक्ष्यों के अनुसार औपचारिक शिक्षा का युग भले ही समाप्त हो गया हो, किन्तु बदलती कार्यनीति और प्रौद्योगिकी के साथ गति बनाए रखने के लिए अभी बहुत कुछ सीखना होगा। अपने को कभी पुराना न पडऩे देने के लिए आपको अनौपचारिक कार्य नियमित आधार करने की आदत डालनी होगी। नई प्रवृत्तियों की जानकारी प्राप्त करने के लिए औद्योगिक बैठकों, सेमिनारों और सम्मेलनों में हिस्सा लेना शुरू कीजिए, सीखने की क्षमता और सबसे महत्वपूर्ण नहीं तो महत्वपूर्ण कौशल अवश्य है।