फेल्योर : द रोड ऑफ अचीवमेंट

फेल्योर : द रोड ऑफ अचीवमेंट
लाइफ स्किल्स की इपॉर्टेस
एक स्टूडेंट की लाइफ में पर्सनल स्किल्स की जरूरत हमेशा महसूस की जाती है, क्योंकि कहीं न कहीं यही स्किल्स जॉब दिलाने में मेन रोल अदा करती हैं। इन स्किल्स की हेल्प से ही पर्सनैलिटी डेवलपमेंट भी होता है। पर्सनल स्किल्स सेल्फ ग्रूमिंग में भी इंपॉर्टेट रोल अदा करती है, लेकिन मेरा मानना है कि इन स्किल्स के साथ ही स्टूडेंट्स को अपनी लाइफ स्किल्स पर भी ध्यान देना चाहिए। समय को देखते हुए आज के यूथ को इसकी जरूरत है। इग्नू में कुछ इसी तरह की स्किल्स को डेवलप करने के लिए कई तरह के शार्टटर्म कोर्सेज चलाए जा रहे हैं।
मेक एन आइडियल
लाइफ में सक्सेस हासिल करनी है, तो सबसे पहले उन सक्सेसफुल लोगों के बारे में इन्फॉर्मेशन लेनी होगी, जो सोसायटी के लिए आदर्श बन चुके हैं। ऐसे बहुत से लोग तलाशने पर आपको मिल जाएंगे। इन्हीं में से कुछ को अपना आइडियल बनाएं। उनके स्ट्रगल को देखें, उनकी स्किल्स से सीखें। उन्हें अपनी लाइफ में उतारें। आपमें खुद-ब-खुद चेंज आने लगेगा। हर सक्सेसफुल इंसान की ग्रोथ की स्टोरी कहीं न कहीं इसी तरह से शुरू होती है।
क्वैश्चन योर सेल्फ
हमारे एजुकेशन सिस्टम में साइंटिफिक तरीके से स्टूडेंट्स की स्किल्स को जज नहीं किया जाता है। यही कारण है कि यहां हमेशा ट्रायल एंड एरर चलता रहता है। स्टूडेंट्स अपनी पर्सनल स्किल्स को जानना चाहते हैं, तो सबसे पहले उन्हें खुद से क्वैश्चन करना होगा कि वे ऐसा कौन सा काम कर सकते हैं, जो उनके और सोसायटी के लिए यूजफुल साबित हो सकता है। किस तरह का वर्क करके वे सोसायटी को लीड कर सकते हैं? निश्चित रूप से अपने आप से क्वैश्चन करने पर पता चल जाएगा कि आप में म्यूजिशियन, स्पो‌र्ट्समैन, मैनेजमेंट या एडमिनिस्ट्रेशन जैसी कौन सी क्वॉलिटी है। इसमें आप चाहें तो किसी फ्रेंड या फैमिली मेंबर की हेल्प भी ले सकते हैं, लेकिन फाइनल डिसीजन आपका ही होना चाहिए।
हार्ड वर्क से सक्सेस
सक्सेस हार्डवर्क का ही रिजल्ट होती है। अगर आप लगातार मेहनत करेंगे, तो यह मिलेगी ही। लाइफ में कभी प्रयास बंद न करें। आज जितनी भी बडी हस्तियां हैं, सक्सेस के लिए उन्हें भी संघर्ष करना पडा। ये सभी सोसायटी को नई राह इसीलिए दे सके, क्योंकि ये तमाम तकलीफों के बाद भी अपने मूल्यों पर अडिग रहे और नतीजतन समाज में अपनी पहचान दे सके। हमारी सोसायटी की एक विडंबना है कि यहां सक्सेस को ही सब कुछ माना जाता है, जबकि असफलताओं के महत्व को भी स्वीकारा जाना चाहिए क्योंकि बिना इसकी सीढी के सक्सेस तक पहुंचना शायद पॉसिबल ही नहीं है।
रोल ऑफ कॉन्फिडेंस
कई बार स्टूडेंट्स अपने वर्क को बीच में ही अधूरा छोड देते हैं। इस सिचुएशन से बचने के लिए जो भी वर्क करें वह कॉन्फिडेंस, पेशेंस और सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी को ध्यान में रखते हुए किया जाना चाहिए। वर्क करते समय इस बात को कभी न भूलें कि हम उस संस्कृति से जुडे हैं, जहां सेवा और त्याग को हमेशा प्रॉयरिटी दी गई है। आपको भी ऐसा ही टॉरगेट अपनी लाइफ के लिए बनाना है।
कल्चर और टेक्नोलॉजी
किसी भी संस्कृति के डेवलपमेंट में टेक्नोलॉजी का रोल रहता है। स्टूडेंट इस बात को समझते हुए संस्कृति के डेवलपमेंट में भी अपना योगदान दें। अच्छी एजुकेशन हासिल करने का उद्देश्य केवल सेल्फ डेवलपमेंट नहीं, बल्कि कल्चर और सोसायटी दोनों का डेवलपमेंट होना चाहिए।

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