विज्ञापनों की रूपहली दुनिया


'ईट म्युजिक स्लीप म्यूजिकÓ ड्रिंक ओनली कोका कोला, 'यही है राइट चॉइसÓ उसकी कमीज मेरी कमीज से सफेद कैसे? तथा 'ढंढूते रह जाओगे।Ó ऐसे न जाने कितने स्लोगन (बोल) होते हैं तो बरबस ही हमारे दिलो-दिमाग पर छा जाते हैं। इनका ग्लैमरयुक्त खूबसूरत अंदाज हमें अपनी ओर खींच ही लेता है। जाने-अनजाने ही हम इन स्लोगंस को गुनगुनाते रहते हैं। कब ये शब्द हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन जाते हैं, पता ही नहीं चलता। यही है विज्ञापन की दुनिया। बेहतर लेखन-क्षमता कल्पनाशीलता, चुस्त दिमाग तथा आकर्षक व्यक्तित्ववाले युवक-युवतियों के लिए विज्ञापन की रूपहली दुनिया में अपार संभावनाएं हैं।
आज का युग विज्ञापन का युग है। घर से बाहर निकलते ही व्यक्ति स्वयं को विज्ञापनों के बीच पाता है। मुँह-अंधेरे अखबार पढऩे से विज्ञापनों का सिलसिला शुरू होता है। ऑफिस के रास्ते में, बसों में, बिजली के खंभों पर, दीवारों पर, होर्डिंग के रूप में विज्ञापन चाहे-अनचाहे तरीके से हमारे सामने आते रहते हैं। रेडियो और टेलीविजन पर विज्ञापन, सिनेमाघरों में स्लाइड द्वारा विज्ञापन, पत्र-पत्रिकाओं में जगह-जगह विज्ञापनों की भरमार, रास्ते में किसी के द्वारा हैंडबिल के रूप में चमचमाते नियोन बल्बों द्वारा विज्ञापन...अर्थात्ï व्यक्ति दिनभर इच्छा या अनिच्छा से विज्ञापन देखने, पढऩे और सुनने के लिए मजबूर होता है।
विज्ञापन दो शब्दों 'विÓ तथा 'ज्ञापनÓ से मिलकर बना है।'विÓ शब्द उपसर्ग रूप में अर्थ होता है-विशेष का और ज्ञापन का तात्पर्य है- सूचना अथवा ज्ञान देना। यानी संयुक्त रूप से किसी वस्तु या तथ्य की विशेष जानकारी या सूचना देनी ही विज्ञापन लैटिन के ्रस्र1द्गह्म्ह्लद्गह्म् से अंग्रेजी में ्रस्र1द्गह्म्ह्लद्गह्म्ह्लद्बह्यद्बठ्ठद्द बने शब्द का हिन्दी रूपांतरण है। लैटिन में इस शब्द का अर्थ 'टू टर्न टूÓ अर्थात किसी ओर मुडऩा यानी किसी के प्रति या किसी की ओर आकर्षित करना या आकर्षित होना है।
विज्ञापन शब्द से ऐसे संदेशें का ख्याल भी आता है। जिनमें से अधिकांश का उद्देश्य किसी वस्तु, सेवा अथवा किसी विचार को बढ़ावा देना होता है। बिक्री हेतु प्रभावपूर्ण ढंग से संदेश देना ही विज्ञापनों का काम होता है। संदेश प्रेषित करने का तरीका इतना प्रभावशाली होता है कि वह जनमानस को किसी निश्चित किंतु उद्देश्यपूर्ण दिशा में मोडऩे का यत्न करता है। विज्ञापन की महत्ता पर इंगलैंड के प्रधानमंत्री ग्लेडस्टन का अभिमत था कि व्यवसाय के लिए विज्ञापन का वही महत्व है जो उद्योग में वाष्प शक्ति का। विंस्टन चर्चिल ने भी विज्ञापन की आर्थिक उपयोगिता को महत्व देते हुए कहा था कि टकसाल के अतिरिक्त कोई भी बिना विज्ञापन के मुद्रा उत्पन्न नहीं कर सकता।
विज्ञापन कारोबार के फलने-फूलने का दारोमदार विज्ञापन तैयार करके रातोंरात उत्पादों को लोकप्रियता दिलाती हैं। बहुराष्टï्रीय कंपनियों के प्रवेश में बढ़ोत्तरी तथा प्रतिस्पर्धा के कारण इस क्षेत्र में नई संभावनाओं ने जन्म लिया है। एक ही क्षेत्र में अनेक प्रतिष्ठिïत कंपनियों की सक्रियता से होड़ व मुकाबलेबाजी की एक नई महाभारत छिड़ी है। प्रतिस्पर्धा में बढ़ोत्तरी के चलते बाजार में माल की खपत एक चैलेंज बनकर सामने आई है। उत्पादनों की गुणवत्ता से लेकर पैकेजिंग तक में व्यापक सुधार प नित नए प्रयोग किए जा रहें हैं। विज्ञापन व इससे संबंधित क्षेत्रों में रोमांच, अपार धन, यश तथा ग्लैमर होने के कारण शिक्षित युवक-युवतियों में इसे अपनाने के लिए ाहेड़ सी छिड़ी है।
सैटेलाइट चैनलों की बाढ़ तथा दूरदर्शन पर विवध कार्यक्रमों के चलते टी.वी. विज्ञापन का कारोबार तेजी से बढ़ा है। अधिकतर विज्ञापन एजेंसियों द्वारा बनाए जा रहे हैं। कोई भी विज्ञापन एजेंसी सामान्यत: चार विभागों पर निर्भर रहती है। क्लाइंट सर्विसिंग (उपभोक्ता सर्विस), क्रिएटिविटी (रचनात्मकता), मीडिया और आर्ट पॉडक्ïशन। इसके अलावा एजेंसी में एकाउंट प्लानिंग, टी.वी. व फिल्म प्रदर्शनी, इवेंट मैनेजमेंट (आयोजन प्रबंधन), डायरेक्ट मार्केटिंग, फोटोग्राफी, प्रिंट बाइंग, फाइनेंस और एकाउंट विभाग भी होते हैं।
विज्ञज्ञपन से संबंधित समस्त कार्स अधिकतर ऐ से लेकर दो वर्ष के होते हैं। कोर्स की फीस विभिन्न संस्थानों में अलग-अलग है। उच्च स्तरीय पदों के लिए औपचारिक प्रशिक्षण विशेष महत्व रखता है।
क्लाइंट सर्विसिंग सभी विज्ञापन एजेंसियों के लिए संजीवनी की तरह है। इसके लिए समुचित व्यवस्था देखनेवाले अधिकारी को 'क्लाइंट सर्विसिंग अधिकारीÓ कहा जाता है। वह व्यक्ति विज्ञापन एजेंसी और ग्राहक के मध्य एक सेतु की तरह कार्य करता है। वह एजेंसी के अधिकृत प्रतिनिधि की हैसियत से ग्राहक के साथ हुई बातचीत अथवा सौदे के अनुसार एजेंसी के विभिन्न विभागों के बीच तारतम्य बनाए रखने का काम करता है। यह विभाग विज्ञापन की योजना से लेकर उसके प्रभावशाली प्रस्तुतीकरण तक का काम करता है। उधर विज्ञापन को तैयार करने का काम क्रिएटिव विभाग का होता है। इस विभाग में दो तरह के कर्मचारी होते हैं-कॉपीराइटर और विजुअलाइजर। यही लोग विज्ञापन की कल्पना करते हैं और उसके साथ उत्पाद या संदेश का तालमेल बैठाते हैं। कॉपीराइटर और विजुअलाइजर दोनों एक साथ मिलकर विज्ञापनों की कल्पना करते हैं और उसे तैयार करते हैं।
प्रिशिक्षु के रूप में स्ïनातक लोगों को एजेंसियां अपने यहां भर्ती करती हैं। कॉपीराइटिंग के लिए पॉडक्ट की बिक्री हेतु प्रभावी लेखन कैसा हो, इसकी राइटर को अच्दी जानकारी होनी चाहिए। साथ ही अंग्रेजी व हिंदी दोनों भाषाओं पर अच्छी पकड़ और कम शब्दों में लेकिन असरदार ढंग से अपनी बात कहने की क्षमता होनी चाहिए। इस क्षेत्र में सफलतम लोग पांच से लेकर 50 हजार रुपये प्रतिमाह तक कमा रहे हैं।
प्रभावी दृश्य की परिकल्पना, विज्ञापन के चित्र प्रस्तुत करना, लोगों की पसंद या रोचकता पर पैनी नजर रखने का काम विजुअलाजर का होता है। इस पद के लिए अधिकतर कमर्शियल आर्ट तथा फाइन आर्ट के छात्रों का चुनाव होता है। निजी क्षेत्र की कंपनियां मात्र अनुभव के आधार पर ही चुनाव करती हैं। इस क्षेत्र में प्रशिक्षित युवक-युवती 5 से 30 हजार रुपये प्रतिमाह तक कमा सकते हैं।
इस क्षेत्र में मीडिया प्लानर का पद उच्च स्तरीय अधिकारी का पद होता है। अत: इस पद के लिए अधिक योग्यताओं वाले व्यक्ति का चयन किया जाता है। प्रेस, रेडियो, टेलीविजन व अन्य प्रचार-प्रसार माध्यमों से संपर्क व विज्ञज्ञपन संबंधी प्रबंधन कार्य मीडिया प्लानर को ही करने होते हैं। इस पद के लिए स्नातक होना जरूरी है। साथ ही 'डिप्लोमा इन एडवरटाइजिंग मैनेजमेंटÓ या डिप्लोमा इन मीडिया प्लानिंग एंड मैनेजमेंटÓ अथवा जनसंपर्क व प्रचार में डिग्री या डिप्लोमा तथा एम.बी.ए. की डिग्री होनी चाहिए। इस पद पर कार्यरत युवक-युवतियों को दस से बीस हजार या उससे भी अधिक वेतन प्रतिमाह दिया जाता है। अनेक कंपनियां कार, बंगला, फ्लैट आदि की सुविधाएं भी देती हैं।
इसी क्षेत्र से जुड़ा एक वर्ग स्पेस सेलिंग का भी है। इसमें विज्ञापनों के लिए अखबारों व पत्रिकाओं आदि में स्थान बुक करवाना होता है जिसकी एवज में बतौर पारिश्रमिक कमीशन मिलता है। यानी कि इस क्षेत्र में आय के असीमित स्रोत हैं। विज्ञापन जगत के अन्य कैरियर मॉडलिंग, लैब टेक्रीशियन, फोटोग्राफर आदि भी हैं।
प्रशिक्षण संस्थान
इंडियन इंस्टीट्ïयूट ऑफ मास कम्युनिकेशन जे.एन.यू. परिसर, अरुणा आसफ अली मार्ग, नई दिल्ली-110067
रोजेंद्र प्रसाद इंस्टीट्ïयूट ऑफ कम्युनिकेशन एंड मैनेजमेंट, मुंबई
जे.जे. स्कूल आफ आट्ïर्स, मुंबई
इंडो अमेरिकन सोसाइटी, मुंबई
निर्मला निकेतन, कॉलेज ऑफ होम साइंस, मुंबई
सेंट जेवियर इंटीट्ïयूट ऑफ कम्युनिकेशन, मुंबई
गरवारे इंटीट्ïयूट ऑफ कैरियर एजुकेशन एंड डेवलपमेंट, मुंबई
भारतीय विद्या भवन, मुंबई
के.सी. कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, मुंबई
मुद्रा इंटीट्ïयूट ऑफ कम्युनिकेशन, अहमदाबाद
विद्या गौरी, नीलकांत मार्ग, खानपुर, अहमदाबाद
नरसी मुंजी इंटीट्ïयूट ऑफ मैनेजमेंट  स्टीडीज, वी. एल. मेहता रोड, विले पारले, मुंबई

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