इस क्षेत्र में प्रशिक्षित पेशेवरों की हमेशा मांग बनी रहती है

वाणी संबंधी विकार नर्वस सिस्टम या ऐसे किसी भी हिस्से या मांसपेशियों में आ सकते हैं जो बोलने में व्यक्ति की सहायता करते हैं। ऐसे विकारों के कारण व्यक्ति बोलने में भी असमर्थ हो सकता है या उसे इसमें दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। इन विकारों में से कुछ वाणी से नहीं बल्कि भाषा से संबंधित होते हैं, जिनकी वजह समझ न आना या दिमाग के भाषा केंद्र में शब्दों को नहीं बना पाना होता है। ऐसे विकारों का सामना कर रहे लोगों की सहायता स्पीच थैरेपी द्वारा की जा सकती है।

स्पीच थैरेपिस्ट उन लोगों का उपचार करते हैं जिन्हें बोलने या उच्चारण आदि में परेशानी होती है या जो हकलाते हैं। दूसरी तरफ ऑडियोलॉजिस्ट का काम ऐसे लोगों का इलाज करना होता है, जिन्हें सुनने की क्षमता में किसी न किसी तरह की कमी होती है।

दरअसल स्पीच थैरेपी तथा हीयरिंग साइंस एक ही सिक्के के दो पहलुओं के समान हैं इसलिए स्पीच थैरेपिस्ट तथा ऑडियोलॉजी की शिक्षा आमतौर पर कोर्स में एक साथ दी जाती है।

यह क्षेत्र काफी विस्तृत है, जिसमें कई अन्य विषयों का ज्ञान भी सम्मिलित हो जाता है जिनमें एनाटोमी, फिजियोलॉजी, साइकोलॉजी, लिंग्यूइस्टिक्स, मैडीसिन, एजुकेशन आदि शामिल हैं। स्पीच एंड हीयरिंग साइंस कोर्स करने वाले छात्रों को बेसिक एवं अप्लाइड रिसर्च के साथ-साथ क्लीनिकल एप्लीकेशंस से भी परिचित करवाया जाता है। इस क्षेत्र में कोर्स करके वे स्पीच साइंस, हीयरिंग साइंस, स्पीच लैंग्वेज पैथोलॉजी या ऑडियोलॉजी आदि में विशेषज्ञता प्राप्त कर सकते हैं।

संभावनाएं

भारत में स्पीच थैरेपिस्ट की बेहद कमी है, जबकि इस समस्या से ग्रस्त लोगों की संख्या काफी ज्यादा है। ऐसे में इस क्षेत्र में प्रशिक्षित पेशेवरों की हमेशा मांग बनी रहती है यानी इस क्षेत्र में करियर बनाने वाले युवा एक उत्तम रोजगार एवं उज्ज्वल भविष्य की अपेक्षा कर सकते हैं।

अवसर
स्पीच थैरेपिस्ट एवं ऑडियोलॉजिस्ट वे पेशेवर हैं जो शिक्षकों, चिकित्सकों, मनोवैज्ञानिकों, समाजिक कार्यकर्ताओं, पुनर्वास सहायकों तथा किन्हीं भी अन्य तरह के विशेषज्ञों के साथ मिल कर काम करते हैं।

परंतु वे इनमें से किसी के अधीन नहीं होते हैं, वे अपना काम स्वतंत्र रूप से करते हैं बस अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए एक टीम के रूप में एक-दूसरे की सहायता करते हैं।

वे अपने सेवाएं सरकारी एवं निजी विद्यालयों, अस्पतालों, पुनर्वास केंद्रों, नर्सिंग केयर केंद्रों, सामुदायिक क्लीनिक्स, राज्य अथवा स्थानीय स्वास्थ्य विभागों, होम केयर, अडल्ट डे केयर सैंटर्स, अपाहिजों की सहायता के लिए बने केंद्रों, शोध प्रयोगशालाओं से लेकर इंडस्ट्रीज तक में देते हैं।

योग्यता

एक स्पीच थैरेपिस्ट या ऑडियोलॉजिस्ट बनने के लिए मास्टर डिग्री प्राप्त करना अनिवार्य है। इन विशेषज्ञों को लाइसैंस देने वाले सभी राज्य इसके लिए मास्टर लैवल ट्रेनिंग को अनिवार्य योग्यता मानते हैं।  स्पीच लैंग्वेज पैथोलॉजी या ऑडियोलॉजी में सर्टीफिकेट ऑफ क्लीनिकल कम्पीटैंस प्रदान करने के लिए अमेरिकन स्पीच लैंग्वेज हीयरिंग एसोसिएशन (ए.एस.एच.ए.) मास्टर डिग्री के साथ-साथ एक वर्षीय क्लीनिकल इंटर्नशिप को पूरा करने की भी मांग करती है।
आमतौर पर इस क्षेत्र में दो प्रकार के कोर्स करवाए जाते हैं-

1. स्पीच एंड लैंग्वेज थैरेपिस्ट्स एंड ऑडियोलॉजिस्ट्स तथा

 2. सुनने में अक्षम लोगों की सहायता के लिए शिक्षक तैयार करने वाले कोर्स जिन्हें स्पैशल एजुकेशन भी कहा जाता है।

पहले प्रकार के कोर्स तीन स्तरों पर करवाए जाते हैं, जिनमें डिप्लोमा, ग्रैजुएट एवं पोस्ट ग्रैजुएट कोर्स शामिल हैं। संबंधित कोर्स विभिन्न संस्थानों में चलाए जाते हैं। ग्रैजुएट कोॢसज में बी.एससी. (ऑडियोलॉजी एंड स्पीच थैरेपी), बी.एससी. (हीयरिंग, लैंग्वेज एंड थैरेपी), बी.एससी. (स्पीच एंड हीयरिंग) जैसे कोर्स संचालित किए जाते हैं। इसी प्रकार मास्टर डिग्री के अलावा पीएच.डी. स्तर पर भी अनेक कोर्स देश भर के प्रमुख संस्थानों में संचालित किए जाते हैं।

दूसरे प्रकार के कोर्स यानी स्पैशल एजुकेशन के तहत बी.एड-हीयरिंग इम्पेयर्ड, एम.एड-हीयरिंग इम्पेयर्ड,  डिप्लोमा इन स्पैशल एजुकेशन-हीयरिंग इम्पेयर्ड जैसे कोर्स संचालित किए  जाते हैं।

प्रमुख संस्थान
1 अली यावर जंग नैशनल इंस्टीच्यूट फॉर द हीयरिंग हैंडीकैप्ड, के.सी. मार्ग, बांद्रा रिक्लेमेशन, बांद्रा (वैस्ट), मुम्बई-400050

2 ऑल इंडिया इंस्टीच्यूट ऑफ स्पीच एंड हीयरिंग, मानसगंगोत्री, मैसूर-570006

3 पोस्ट ग्रैजुएट इंस्टीच्यूट ऑफ मैडीकल एजुकेशन एंड रिसर्च, चंडीगढ़-160012

4 ऑल इंडिया इंस्टीच्यूट ऑफ मैडीकल साइंसेज (एम्स), नई दिल्ली

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