हिन्दी भाषा में बनाएं अपना भविष्य


कितना अजीब लगता है कि जब हमारे देश में जिसकी राष्टï्रभाषा हिन्दी है और इसी भाषा में कामकाज करने के लिए पखवाड़ों का आयोजन किया जाए। हिन्दी में काम करने के लिए इन निर्धारित पखवाड़ों की निश्चित अवधि में कितना काम हो पाता है, कहना मुश्किल है। कहीं हिन्दी के नाम पर यह सिर्फ एक रस्म अदायगी तो नहीं? यदि ऐसा नहीं है तो फिर क्यों आधी सदी गुजरने के बाद भी हिन्दी पखवाड़ा मनाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। हिन्दी राष्टï्रभाषा बनी मगर अपेक्षा के अनुरूप इसे सम्मान का दर्जा नहीं मिला। संभवतया यह कारण है कि अभी तक अपनी पहचान बनाए रखने के लिए इसे हर पल संघर्ष के दौर से गुजरना पड़ रहा है। इसका अनुमान हिन्दी पखवाड़ा आयोजित करने वाले विभागों से नहीं बल्कि स्वयं उन संस्थानों से जिन्हें प्रचार-प्रसार का दायित्व सौंपा गया है, की कार्य पद्धति से सहज ही लगाया जा सकता है।
बेशक सतही तौर पर हिन्दी को बढ़ावा देने की बात जोर-शोर से की जाती है लेकिन वास्तविकता यह है कि हिन्दी को बढ़ावा देने वाले संस्थानों को सदैव ही प्रशासनिक उपेक्षा व उदासीनता का सामना करना पड़ता है। यहाँ तक कि राज्य और केंद्र स्तर पर भी सहजता से ऐसी स्थिति देखी जा सकती है।
प्रशासनिक स्तर पर भले ही हिन्दी दोयम दर्जे की भाषा बनी हुई है फिर भी हिन्दी में काम करने की व्यापक संभावनाएं हैं। देश के विभिन्न क्षेत्रों में हिन्दी अधिकारी, अध्यापक, अनुवादक और हिन्दी पत्रकारिता में उप-सम्पादक तथा रिपोर्टर के रूप में संभावनाएं हैं। हिन्दी में प्रशिक्षण कार्य हेतु अनेक राज्य व केंद्र द्वारा स्थापित संस्थाएं हैं जो ज्यादातर अनुवाद कार्य के प्रशिक्षण में संलग्न हैं। जैसे कि केन्द्रीय हिन्दी संस्थान हिन्दी को बढ़ावा देने के लिए देश-विदेश के अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण प्रदान कर रहा है।
संस्थान द्वारा निम्न पाठï्यक्रमों का संचालन किया जाता है।
1. विदेशी अभ्यर्थियों के लिए समन्वित हिन्दी पाठï्यक्रम
2. पोस्ट एम.ए. अनुप्रयुक्त हिन्दी भाषा विज्ञान डिप्लोमा
3. पोस्ट एम.ए. अनुवाद सिद्धांत एवं व्यवहार डिप्लोमा
4. पोस्ट एम.ए. अनुप्रयुक्त हिन्दी भाषा विज्ञान उच्च डिप्लोमा
5. हिन्दी अध्यापकों के लिए नवीनीकरण पाठï्यक्रम एवं कार्यशालाओं का आयोजन संस्थान देश भर में फैले अपने छह क्षेत्रीय केन्द्रों से विभिन्न पाठï्यक्रमों का संचालन आवश्यकतानुसार करता है। किसी भी पाठï्यक्रम में प्रवेश के लिए आवेदन-पत्र जून जुलाई माह में संस्थान के कार्यालय से डाक द्वारा अथवा स्वयं प्राप्त कर सकते हैं। प्रथम चार पाठï्यक्रम स्ववित्तीय योजना के तहत संचालित किए जाते हैं और अभ्यर्थियों को चुनाव के बाद अग्रिम रूप से निर्धारित शुल्क संस्थान में जमा करना होता है।
संस्थान के सभी पाठï्यक्रम अंशकालीन रूप से संचालित होते हैं, फिर भी विभिन्न संस्थानों में कार्यरत अभ्यर्थियों को संबंद्ध संस्थान से अनापत्ति पत्र प्रस्तुत करना आवश्यक है। क्रमांक एक व पांच को छोड़कर सभी पाठï्यक्रमों में चयन प्रवेश परीक्षा व साक्षात्कार के आधार पर किया जाता है। डिप्लोमा के लिए न्यूनतम योग्यता एम.ए. या एम.एससी अथवा समकक्ष उपाधि निर्धारित है तथा स्नातक स्तर पर हिन्दी एक विषय के रूप में अध्ययन आवश्यक है, हिन्दी भाषा विज्ञान उच्च डिप्लोमा में प्रवेश के इच्छुक अभ्यर्थियों के लिए हिन्दी भाषा विज्ञान में किसी मान्य संस्थान से डिप्लोमा आवश्यक है। संस्थान के सभी पाठï्यक्रमों की अवधि एक वर्ष की होती है। प्रथम दो कोर्सों के लिए चार प्रश्न-पत्र निर्धारित हैं, जिसमें अभ्यास तथा परियोजना कार्य भी शामिल है।
सम्पूर्ण परीक्षा के लिए 400 अंक निर्धारित है उच्च डिप्लोमा कोर्स के लिए 600 अंकों की परीक्षा होती है तथा इसमें 200 अंकों का एक लघु शोध प्रबंध शामिल है। हिन्दी भाषा विज्ञान डिप्लोमा की प्रवेश परीक्षा के लिए भाषा की दक्षता, वर्तनी शब्दार्थ, वाक्य रचना की शुद्धता, बोलियाँ तथा ऐतिहासिक, भौगोलिक और साहित्यिक विषयों की विस्तृत जानकारी आवश्यक है। केन्द्रीय हिन्दी संस्थान और हिन्दी भाषी राज्यों के सरकारी विद्यालयों में कार्यरत अध्यापकों के लिए अल्पावधि के पाठï्यक्रम का संचालन होता है और सारा व्यय सरकार वहन करती है। इसके अलावा संस्थान विभिन्न संस्थाओं तथा कार्यालयों व बैंकों में प्रचारार्थ हेतु कार्यशालाएं भी आयोजित करता है और सुविधा शुल्क संस्थान को देय होता है। कार्यशाला समापन के पश्चात अभ्यर्थियों को प्रमाण-पत्र जारी किए जाते हैं।
केन्द्रीय हिन्दी संस्थान दिल्ली में व्यवस्थागत परिस्थितियों के कारण निर्धारित पाठï्यक्रमों में बदलाव की संभावना बनी रहती है इसलिए विशेष जानकारी हेतु संस्थान के दूरभाष नंबर-6961477 व 6961323 से भी सम्पर्क कर सकते हैं।

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