जीव विज्ञान विषय में सीनियर हायर सैकण्डरी पास विद्यार्थी का यही स्वप्न होता है कि वो देश के किसी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश प्राप्त करें तथा चिकित्सक बनकर देश और समाज की सेवा करें अनेक युवा इस क्षेत्र में असीमित कमाई की संभावनाओं के साथ समाज में अपनी प्रतिष्ठïा बनाने के उद्देश्य से भी इस व्यवसाय को अपनाना चाहते हैं।
यह क्षेत्र आप क्यों चुने
मेडिकल कॉलेज में प्रवेश के लिये होने वाली कठिन प्रतियोगी परीक्षा में असफल रहने वाले विद्यार्थियों ने साबित कर दिया है कि बिना सोचे समझे यह क्षेत्र चुनना चाहते है और असफल रहने पर कला वर्ग के विषयों को चुनते हैं। चिकित्सा क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिये आवश्यक है कि आप में वैज्ञानिक तथ्यों को समझने, उनका विश्लेषण करने, उन्हें भली-भांति याद करने तथा अवसर मिलने पर उनका उपयोग करने में दक्ष हो। चिकित्सा अध्ययन के लिये तार्किक मस्तिष्क तथा वैज्ञानिक समझ का होना अत्यन्त आवश्यक है। एक पूर्ण विशेषज्ञ बनने के लिये आपको कम से कम 10 वर्षों तक इस क्षेत्र में अध्ययन करना पड़ता है। अत: पूर्ण धैर्य की आवश्यकता है।
यदि आप 10+2 भौतिक विज्ञान, रसायन शास्त्र तथा जीव विज्ञान विषय से पास हैं तो इस क्षेत्र में जा सकते हैं।
पाठï्यक्रम
चिकित्सा के क्षेत्र में अनेक पाठï्यक्रम उपलब्ध हैं एलोपैथी पद्धति में फिजिशियन या सर्जन बनना चाहते है तो एम.बी.बी.एस. में प्रवेश तथा उसके बाद उच्च शिक्षा प्राप्त करनी होती है। आयुर्वेद या यूनानी पद्धतियों में बी.ए. एम.एस. या बी.यू.एम.एस. करने के बाद वैद्य या हकीम बन सकते हैं। इसके अतिरिक्त भारत में होम्योपैथी, प्राकृतिक चिकित्सा व वायोकैमिक चिकित्सा पद्धतियां भी प्रचलित हैं।
प्रवेश
चिकित्सा जगत में एम.बी.बी.एस. एक महत्वपूर्ण पाठï्यक्रम है इस हेतु देश के 151 चिकित्सा महाविद्यालयों में प्रथम वर्ष में लगभग 17,300 स्थान है जो प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से उपलब्ध हो सकते हैं कुछ महाविद्यालयों में भुगतान सीटें भी होती हैं जिनमें भी विद्यार्थी प्रवेश पा सकते हैं। राजस्थान के विद्यार्थी पी.एम.टी. की परीक्षा के अतिरिक्त निम्न मेडिकल कॉलेजों की प्रवेश परीक्षा में भी सम्मिलित हो सकते हैं।
1. अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली
2. शशस्त्र सेना चिकित्सा महाविद्यालय, पुणे
3. महात्मा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान, वर्धा
4. क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज, बैल्लौर
5. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, अलीगढ़
6. आयुर्विज्ञान संस्थान, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी
7. सेन्ट जोन्स मेडिकल कॉलेज, बैंगलोर
8. मणिपाल उच्च शिक्षा अकादमी, मणिपाल
9. जवाहरलाल नेहरू स्नातकोत्तर चिकित्सा एवं शिक्षा एवं शोध संस्थान, पांडेचेरी
आप निराश न होवें
मेडिकल कॉलेज में प्रवेश ही चिकित्सा के क्षेत्र में रोजगार पाने का माध्यम नहीं है अपितु इसके अतिरिक्त भी अनेक ऐसे व्यवसाय इस क्षेत्र में उपलब्ध है जिनको प्रशिक्षण प्राप्त कर पा सकते हैं।
चिकित्सा प्रयोगशाला तकनीज्ञ, रेडियोग्राफर, फार्मेसिस्ट फिजियोथरपिस्ट, सेनेटरी इन्स्पेक्टर, नर्स, महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता, महिला स्वास्थ्य विजिटर आदि अनेक अर्धचिकित्सीय वर्ग के व्यवसाय हैं जिनमें सहायक के रूप में आप काम कर सकते हैं।
फार्मेसिस्ट
फार्मेसिस्ट का कार्य दवाएं तैयार करना है यह व्यवसाय पुरुष एवं महिला दोनों के लिये उपलब्ध है इस व्यवसाय में डिप्लोमा, डिग्री तथा मास्टर डिग्री के कोर्स क्रमश: 2 साल, 4 साल एवं बी फार्मा के बाद 2 वर्ष की अवधि हेतु राजस्थान में प्री फार्मेसी परीक्षा के माध्यम से उपलब्ध हैं इस योग्यता के आशार्थी अस्पताल, नर्सिंग होम, दवाई बनाने वाले निजी एवं सार्वजनिक दोनों ही क्षेत्रों में नौकरी प्राप्त कर सकते हैं। राजस्थान के लगभग 11 महाविद्यालयों में प्रत्येक में 40 से 60 स्थानों तक उपलब्ध हैं।
चिकित्सा प्रयोगशाला तकनीज्ञ और रेडियोग्राफर
प्रयोगशाला तकनीज्ञ तथा रेडियोग्राफर जैसे अद्र्धचिकित्सीय वर्ग के कुछ व्यवसाय चिकित्सा व्यवसाय के सहायक के रूप में कार्य करते हैं। ये व्यक्ति विभिन्न रोगों के निदान और उन्हें रोकने में सहायक हैं। इनके मुख्य कार्य चिकित्सा उपकरणों को प्रयोगशाला में उचित स्थान पर व्यवस्थित करके रक्त, उदर, मूक, थूक आदि के नमूनों पर रोग मूलक व अन्य नियमित परीक्षण करते हैं। इनकी नियुक्ति चिकित्सा के विभिन्न विभागों में हो सकती है।
रेडियोग्राफर का मुख्य कार्य एक्सरे उपकरण को चलाना है तथा मानव के विभिन्न अंगों के रेडियोग्राफर खींचना है। इनकी नियुक्ति अस्पतालों की प्रयोगशालाओं, औद्योगिक चिकित्सा स्थापनाओं, जन स्वास्थ्य संगठनों तथा प्राइवेट प्रेक्टिस करने वाले चिकित्सकों के यहां हो सकती है। विज्ञापनों एवं रोजगार कार्यालयों के माध्यम से ही इन पदों पर नियुक्तियां प्राप्त की जा सकती है।
नर्स
नर्स चिकित्सालयों में रोगियों की उनके बिस्तर से बिस्तर जाकर साज संभाल करती हैं तथा इसके अतिरिक्त रोगियों की जांच में चिकित्सक की सहायता करती हैं। नर्स व्यवसाय में रोजगार हेतु तीन प्रकार के पद उपलब्ध हैं।
(1) जनरल नर्सिंग- इस पद हेतु पात्रता सीनियर हायर सैकण्डरी या प्रथम वर्ष भौतिक शास्त्र, जीव विज्ञान तथा रसायन शास्त्र विषय के साथ तीन वर्ष का प्रशिक्षण पाठï्यक्रम उपलब्ध है (पुरुष एवं महिला)
(2) ए.एन.एम.- इस पद हेतु सैकेण्डरी योग्यता के आशार्थी 6 माह से एक वर्ष का प्रशिक्षण प्राप्त कर व्यवसाय अपना सकते हैं।
(3) महिला स्वास्थ्य विजिटर- यह पद पदोन्नति से भरा जाता है जिस हेतु महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता के 5 वर्ष का अनुभवी होना होता है।
फिजियो थैरपिस्ट- एक फिजियो थैरपिस्ट शरीर के किसी अंग में फैक्चर, जोड़, मांस पेशी के कमजोरी, सन्निपात दिल, सीना, चमड़ी एवं स्त्री रोग से सम्बन्धित रोगों में थैरपी से अपने कार्य को अंजाम देते हैं। इस व्यवसाय हेतु सीनियर हायर सैकेण्डरी उत्तीर्ण विज्ञान विषयों के साथ छात्रों हेतु प्रवेश परीक्षा के माध्यम से दो वर्ष का डिप्लोमा कोर्स उपलब्ध है।
सैनेटरी इन्सपेक्टर- सेनेटरी इन्सपेक्टर का मुख्य कार्य सफाई से सम्बन्धित होता है इस व्यवसाय हेतु सैकेण्डरी स्कूल योग्यता के साथ एक वर्षीय डिप्लोमा प्राप्त युवक स्थानीय निकायों, कन्टोनमेन्ट बोर्डों, जिला बोर्ड, जिला स्वास्थ्य विभाग रेलवे, कम्युनिटी प्रोजेक्ट, फैक्ट्री, औद्योगिक संस्थानों तथा हवाई अड्डïों आदि संस्थानों में नौकरियां प्राप्त कर सकते हैं।