मॉडलों की ग्लैमरेस व चकाचौंधपूर्ण दुनिया किसे अच्छी नहीं लगती। मॉडलों को इस मुकाम तक पहुंचाने वाला व्यक्ति मॉडल कोऑर्डिनेटर होता है। यह विज्ञापन के क्षेत्र का वह भाग है जो विज्ञापन तैयार करने के लिए मॉडल, सेट व सजावट के सामान आदि की व्यवस्था करता है। विज्ञापनों के लिए मॉडलों के चयन से लेकर उनके भोजन तक का प्रबंध करना मॉडल कोऑर्डिनेटर का कार्य है। हंसकर कहती हैं मॉडल कोऑर्डिनेटर नेहा शर्मा। मॉडल कोऑर्डिनेटर के व्यवसाय में किसी विश्वविद्यालय की डिप्लोमा या डिग्री काम नहीं आती बल्कि इसके लिए व्यावहारिक होना अधिक जरूरी है। इस क्षेत्र में आपकी सफलता काफी हद तक आप के प्रभावशाली व्यक्तित्व, बहिर्मुखी स्वभाव और कार्यक्षमता पर निर्भर करता है। बहिर्मुखी स्वभाव मॉडल कोऑर्डिनेटर के लिए काफी फायदेमंद रहता है। छोटी-सी पिन से लेकर उनके लैम्प जैसी वस्तुएं कहां से किस जगह से मिलती है उसे इन सब बातों की जानकारी होना चाहिए।
कठिन से कठिन परिस्थितियों में तुरंत निर्णय लेने की क्षमता मॉडल कोऑर्डिनेटर में होना चाहिए। जैसा की मॉडल को-ऑर्डिनेटर आशिमा नैयर कहती हैं, यदि आप उन लोगों में से हैं जो यह सोचने बैठ जाते हैं कि अब क्या किया जाए? इस परिस्थिति में कार्य को कैसे संभाला जाए? सोचने का तो समय ही नहीं होता, बस आपको निर्बाध रूप से अपना काम करना होता है।
एक मॉडल कोऑर्डिनेटर का कार्य क्षेत्र सिर्फ इतना ही नहीं है प्रोडक्शन कोऑर्डिनेटर व प्रोडक्शन स्टाइलिस्ट के रूप में भी उसे काम करना पड़ता है। एक निर्देशक विज्ञापन की विषय वस्तु सामने रखता है, उसके अनुसार ही कार्य करना होता है।
मॉडल कोऑर्डिनेटर में प्रतिभाओं को पहचानने व छांटने की क्षमता होना जरूरी है। साधारण से दिखने वाले युवाओं को भी कुछ अलग अंदाज में कैसे पेश किया जाए- ऐसा कर दिखाना भी मॉडल कोऑर्डिनेटर का काम है। सुंदर लोगों को तो तरह-तरह की सौंदर्य प्रतियोगिताएं खोज निकालती है लेकिन वास्तविक लगने वाले पात्रों को तलाश करना सचमुच चुनौतीपूर्ण है और मॉडल कोऑर्डिनेटर ऐसे ही पात्रों की खोज में लगा रहता है। इस व्यवसाय में आगे बढऩे के लिए व्यक्ति में धैर्य होना बहुत जरूरी है। किसी विज्ञापन की शूटिंग करते समय काफी तनाव का माहौल रहता है और हर चीज की व्यवस्था करनी पड़ती है। ऐसी परिस्थितियों में यदि मॉडल कोऑर्डिनेटर हड़बड़ाकर अपना धैर्य खो बैठे तो किए कराए पर पानी फिर सकता है।
फैशन की दुनिया में हो रहे परिवर्तनों और इस क्षेत्र का विस्तार होने से मॉडलिंग में भी संभावनाएं बढ़ी हैं और साथ ही मॉडल कोऑर्डिनेटर की मांग भी बढ़ी है। इस व्यवसाय में आमदनी की कोई सीमा नहीं है। आप महीने में बीस हजार भी कमा सकते हैं और पचास हजार भी। यह आपके इस क्षेत्र में अनुभव, कार्य क्षमता और संपर्क के दायरे पर निर्भर करता है। किसी मॉडल कोऑर्डिनेटर के सहायक बनकर आप इस काम को सीख सकते हैं और जब आपक इस क्षेत्र में अनुभव और पहचान कायम हो जाए तो स्वतंत्र रूप से भी कार्य किया जा सकता है।