गांवों में रोजगार


प्रदेश के सर्वांगीण विकास की परिकल्पना तब तक साकार नहीं हो सकती जब तक कि गांव प ग्रामीण विकास को सर्वोच्च  प्राथमिकता नहीं दी जा॥ इसी को मद्देन$जर रखकर राजस्थान सरकार ग्रामीण क्षेत्रों एवं वहां के निवासियों के सर्वांणीण विकास के लिए पूर्ण रूप से कटिबद्ध है। रो$जगार के पर्याप्त अवसर जुटाकर प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि करना सरकार का मुख्य लक्ष्य है। इसी लक्ष्य की पूर्ति के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में आवश्यक सुविधा व स्थानीय स्तर पर रो$जगार के साधन उपलब्ध कराने के कार्यक्रम को योजनाबद्ध ढंग से क्रियान्वित किया जा रहा है।
राज्य के विशिष्ठï योजनाएं एवं एकीकृत ग्रामीण विकास विभाग के माध्यम से ये रो$जगारपरक योजनाएं क्रियान्वित की जा रही हैं। इससे ग्रामीण विकास का सुदृढ़ आधार तैयार हुआ है।
राजस्थान में ग्रामोत्थान के लिए विशिष्टï योजनाएं एवं सकीकृत ग्रामीण विकास के माध्यम से कई योजनाएं जन-जन के कल्याणार्थ और रो$जगार सृजित करने के लिए क्रियान्वित है। इनमें जवाहर रो$जगार योजना प्रथम व द्वितीय धारा, आश्वासित रो$जगार योजना, अपना गांव अपना काम, तीस जिले तीस काम, निर्बन्ध राशि, टाइसम योजनाएं प्रमुख हैं। इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य रो$जगार के अतिरिक्त अवसर उपलब्ध कराकर ग्रामीण क्षेत्रों के निर्धन परिवारों के जीवन स्तर में सुधार लाना है। साथ ही गांवों में निर्माण कार्य कराकर सार्वजनिक सम्पत्तियों का सजृन कर गांवों का विकास करना है।
जवाहर रो$जगार योजना
योजना के अन्तर्गत 80 प्रतिशत राशि केन्द्र सरकार द्वारा और 20 प्रतिशत राशि राज्य सरकार द्वारा व्यय की जाती है। योजना के तहत आधारभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए निर्माण कार्य कराये जाकर मानव दिवस के रो$जगार सृजित किये जाते हैं। योजना जन प्रतिनिधियों, ग्राम, पंचायतों एवं पंचायत समितियों के माध्यम से जिला ग्रामीण विकास अभिकरणों द्वारा राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में चलाई जा रही है। इसमें स्थानीय आवश्यकता के अनुरूप स्कूल, पंचायत, औषाधालय, सड़के, नालियां, कूप आदि का निर्माण करवाया जाता है। इन कार्यों के अतिरिक्त पिछड़े वर्ग के परिवारों के लिए जीवनधारा योजना में सिंचाई के कुओं का निर्माण और अनुसूचित जाति/जनजाति तथा गरीबी की रेखा से नीचे जीवन ज्ञापन करने वाले परिवारों के लिए इन्दिरा आवास येाजना में आवास सुविधा उपलब्ध करवाने का प्रावधान है।
जवाहर रो$जगार योजना के तहत वित्तीय वर्ष 1993-94 में 142 करोड़ 47 लाख रुपये व्यय कर चार करोड़ मानव दिवस का रो$जगार उपलब्ध कराया गया। वर्ष 1994-95 में एक अरब 42 करोड़ 67 लाख रुपये व्यय कर दो करोड़ 72 लाख मानव दिवस रो$जगार सृजित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
जवाहर रो$जगार योजना-द्वितीय धारा
जवाहर रो$जगार योजना-द्वितीय धारा में उन जिलों को लिया गया है, जो अत्यन्त पिछड़े हैं जथा जिनमें अधिक विकास कार्य एवं रो$जगार उपलब्ध करवाये जाने की आवश्यकता है। इसमें 80 प्रतिशत व्यय केन्द्र सरकार द्वारा वहन किया जाता है। राज्य में इस योजना के अन्तर्गत बाड़मेर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, सवाईमाधोपुर, अजमेर और उदयपुर हैं। वर्ष 1993-94 में 16 करोड़ 28 लाख रुपये व्यय कर 47 लाख 24 हजार मानव दिवस रो$जगार सृजित किये गये हैं। वर्ष 1994-95 में 47.5 करोड़ रुपये व्यय कर लगभग एक करोड़ 30 लाख मानव दिवसों का रो$जगार सृजित किया जायेगा।
आश्वसित रो$जगार योजना
जवाहर रो$जगार योजना के तहत प्रधानमंत्री ने राज्य के सूखाग्रस्त एवं पिछड़े क्षेत्रों में नवीनीकरण वितरण प्रणाली अपनाने वाले 122 विकास खण्डों में निर्धनतम परिवारों के लिए आश्वसित रो$जगार योजना गांधी जयन्ती (2 अक्टूबर, 1993) से प्रारम्भ की। योजना के तहत प्रति परिवार कम से कम दो व्यक्तियों को वर्ष में 100 दिन के लिए आश्वसित रो$जगार उपलब्ध कराया जाता है और साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में जनोपयोगी परिसम्पत्तियों का सृजन किया जाता है। वर्ष 1993-94 में 9 करोड़ 27 लाख रुपये व्यय कर पचास लाख मानव दिवस रो$जगार सृजित किये गये। वर्ष 1994-95 में 125 करोड़ रंपये व्यय कर मानव दिवस रो$जगार सृजित किये जायेंगे।
अपना गांव अपना काम
राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में जन-सुविधाओं के निर्माण हेतु जन सहभागिता के आधार पर यह योजना प्रारम्भ की गई है। 'अपना गांव अपना कामÓ योजना के तहत 30 प्रतिशत राशि जन सहयोग से एवं शेष 70 प्रतिशत राशि जवाहर रो$जगार योजना के अनतर्गत उपलब्ध कराई जाती है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रो$जगार के अतिरिक्त अवसर प्रदान किये जाते हैं। वर्ष 1993-94 में 7 करोड़ 11 लाख रुपये व्यय कर 1900 सार्वजनिक सुविधाओं के कार्य पूर्ण कराये गये और 46.15 लाख मानव दिवस रोजगार सृजित किये गये। वर्ष 1994-95 में 15 करोड़ रुपये के कार्य कराये जाने का लक्ष्य निधा्ररित किया गया है।
तीस जिले तीस काम
इस योजना के तहत विभिन्न विकास कार्यों में से किसी भी एक कार्य का चयन कर जिला ग्रामीण विकास अभिकरण के शासकीय निकाय से अनुमोदित करवाकर संबंधित विभागों के माध्यम से विकास कार्यों का क्रियान्वयन किया जाता है। इस योजना के तहत राशि का आवंटन शत-प्रतिशत राज्रू आयोजना मद से किया जाता है। येाजना के तहत मुख्य रूप से शाला, चिकित्सालय, भवन, सड़क, पेयजल, कूप, एनिकट निर्माण, फव्वारा सिंचाई योजना, पशुधन विकास, चारागाह विकास आदि के कार्य करवाये जाते हैं, जिनसे परोक्ष रूप से इन कार्यों से रो$जगार भी उपलब्ध होते हैं। क्षेत्रीय विधायक अपने विधान सभी क्षेत्र में पांच रुपये तक के कार्य सकते हैं। योजना के तहत गत वित्तीय वर्ष में 23.53 करोड़ के 1683 कार्य करवाये गये। वर्ष 1994-95 में 25 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
निर्बन्ध राशि योजना
निर्बन्ध राशि योजना के तहत प्राय: ऐसे छोटे-छोटे ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र के जनोपयोगी कार्य कराये जाते हैं, जिन्हें अन्य योजना मदों से या तो धनराशि उपलब्ध नहीं होती या राशि अपर्याप्त होती है। इस योजना के तहत शत-प्रतिशत राशि का आवंटन राज्य आयोजना मद से किया जाता है। इस योजना के तहत मुख्यत: पेयजल, सम्पर्क सड़क, पुलिया, सुलभ शौचालय, शिक्षण संस्थान, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा भवन आदि का निर्माण कराया जाता है। योजना के तहत वर्ष 1993-94 में 16.08 करोड़ रुपये व्यय कर 1070 विकास कार्य पूरे कराये गए। वर्ष 1994-95 में योजना के लिए 20 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था।
ट्राइसम योजना
ट्राइसम योजना एकीकृत ग्रामीण कार्यक्रम का एक अंग है। इस योजना में गरीबी की रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले निर्धनतम चयनित ग्रामीण परिवारों के युवकों को विभिन्न व्यवसायों में प्रशिक्षित कर स्वरो$जगार/मजदूरी रो$जगार प्रदान करवाया जाता है। योजना के लिए केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा पचास-पचास प्रतिशत राशि का आवंटन किया जाता है। प्रशिक्षण के पश्ïचात्ï स्वरो$जगार स्थापित करने के लिए ऋण व अनुदान उपलब्ध कराया जाता है। वर्ष 1993-94 में ट्राइसम योजना के तहत 10813 युवाओं को विभिन्न व्यवसायों में प्रशिक्षत कर 2684 युवाओं को स्वरो$जगार तथा 1094 युवाओं को मजदृरी रो$जगार उपलब्ध कराया गया। इस पर एक करोड़ दा लाख रुपये व्यय किया गया। वर्ष 1994-95 में 4 करोड़ 40 लाख व्यय कर 12875 युवाओं को प्रशिक्षित कर स्वरो$जगार/मजदूरी उपलब्ध कराये जाने का प्रावधान था।
सरकार का भरसक प्रयास है कि उपरोक्त रो$जगारोन्मुखी योजनाओं की सफल क्रियान्विति से ग्रामीण प्रदेश का सर्वंगीण विकास हो ताकि ग्रामीण क्षेत्र के निवासी गरिमामय जीवन यापन कर सकें।

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