वेब दुनिया: भरी है संभावनाओं से


इंटरनेट पर बढ़ते कारोबार ने वेब डिजाइनरों एवं वेब डेवलपर्स की मांग बढ़ाई है। इस क्षेत्र को भविष्य की संभावना के रूप में देखा जा रहा है। इंटरनेट के आगमन से व्यापार के तौर-तरीकों में भारी तब्दीली आई है। वर्तमान के साथ-साथ भविष्य में भी व्यापार की रूपरेखा में इससे परिवर्तन होगा। चूंकि अब ज्यादातर बिजनेस इकाइयां 'वेब पेजÓ डेवलप कर रही है और इसी के माध्यम से आपस में संवाद भी हो रहे हैं इसलिए संभवत: प्रिंट आधारित सामग्री अप्रासंगिक भी होते जा रहे हैं और हो भी क्यों न? अब हम किसी भी व्यापार विवरणिका (ब्रोशर) को वेब सर्वर पर हर हफ्ते या 15 दिनों में 'अपडेटÓ कर सकते हैं तो पहले की भांति उसे हर बार नए ढंग से 'प्रिंटÓ करने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। अब तो फैक्स, कॉपी या प्रिंट के रूप में कम्पनी के कर्मचारियों को 'मेमोÓ भेजने की जरूरत ही क्या है। 'माउसÓ के एक क्लिक से सभी कर्मचारियों के 'डेस्टटॉपÓ पर यह पहुंच जाएगा। सूचना क्रांति के इस युग में तो सभी प्रकार के बिजनेस में अनिवार्य 'टूलÓ बन गया है। यही कारण है कि वेब डिजाइनरों एंड डेवलपरों की मांग आज सबसे अधिक है।
ट्राईसॉफ्ट सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड के यूजर एक्सपीरियंस ग्रुप की प्रमुख, मधु मेनन कहती हैं, 'वेब डिजाइनर मूलत: वेबसाइट के निर्माण, विकास एवं रखरखाव से संबंद्ध होते हैं।Ó
हालांकि वेब डिजाइनर एवं वेब डेवलपर में कई विभिन्नताएं हैं। 'वेब डिजाइनर अपनी क्रिएटिविटीÓ एवं कलात्मक क्षमताओं के आधार पर वेबसाइट का निर्माण करते हैं जबकि वेब डेवलपर मूलत: प्रोग्रामर होता है जो वेबसाइट को 'फंक्शनलÓ (क्रियात्मक) स्वरूप प्रदान करता है जिसमें वह एचटीएमएल, जावा जैसे स्क्रीप्ट का इस्तेमाल करता है। दूसरे शब्दों में जो 'क्रिएटिव दिमांगÓ के हैं वे वेब डिजाइनिंग के क्षेत्र में जा सकते हैं और जो कठिन टेक्नोलॉजी से ज्यादा ताल्लुक रखते हैं वे वेब डेवलपर बन सकते हैं। हालांकि ये दोनों क्षेत्र एक-दूसरे के पूरक हैं और किसी व्यक्ति में दोनों क्षेत्रों की खासियतें भी हो सकती हैं क्योंकि दोनों ही क्षेत्र समान रूप से चुनौतीपूर्ण हैं। निरंतर बदल रहे टेक्नोलॉजी से इन्हें लैस रहना पड़ता है इसलिए निस्संदेह यह एक चुनौतीपूर्ण काम है। पेज निर्माण में यह भी ध्यान रखना होता है कि वह साइट के 'थीमÓ के अनुरूप हो उसके 'संदेशÓ एवं 'लक्ष्यÓ को मुखरता से पेश कर सके। उसमें 'नैविगेबीलिटीÓ के गुण भी होने चाहिए जिससे साइट 'यूजर फ्रेंडलीÓ बन सके।
वेबसाइट के दो प्राथमिक अंग हैं- 'कन्टेन्टÓ और 'विजुअल।Ó कन्टेन्ट वेबसाइट में निहित टेक्स्ट से संबंधित है। यह दर्शकों को साइट के परिचय एवं उपयोग से अवगत कराता है। इसके अंतर्गत सभी तथ्य, डाटा एवं दृश्य होते हैं जिसका विवरण पेजों में होता है। दूसरे शब्दों में यह साइट का 'बैकबोनÓ होता है। इसे इस तरह से बनाया जाता है जिससे साइट आसानी से उपलब्ध हो सके, पर्याप्त जानकारी से भरी हो, आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया गया हो और सहज ही पठनीय हो।
जाहिर है, जिन व्यक्तियों ने तार्किक ढंग से प्रोग्रामिंग करने की क्षमता हो। वे बहुत जल्द ही सफल वेब डेवलपर बन जाते हैं। 'कन्टेन्ट डेवलपमेंटÓ के लिए वेब डेवलपर कई तरह के स्क्रिप्ट का इस्तेमाल करते हैं। इस ओर पहला कदम- एचटीएमएल का सीखना है। यह प्रोग्रामिंग लैग्वेंज नहीं है बल्कि साधारण फॉरमैटिंग लैंग्वेज है जिससे पेज के 'ले-आऊटÓ को बनाने में मदद मिलती है। एचटीएमएल की क्षमताओं एवं कमजोरियों को जानने के बाद आप पेज के डिजाइन को अधिक शीर्ष कर पाएंगे और साथ ही 'फास्ट लोडिंगÓ क्षमता से भी युक्त कर सकेंगे। प्रोग्रामिंग में अधिक सहायता के लिए आज जावा, डीएचटीएमएल, सीजीआई स्क्रीपटिंग, एएसपी, वीबी स्क्रीप्ट और अन्य ई-कामर्स से संबंधित विशेषताओं का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।
अब, विजुअल की बात करते हैं। दृश्य से पेज आकर्षक बनता है। यह इसकी सबसे बड़ी विशेषता है जो पेज को एकरस एवं भारी होने से बचाता है। कई बार लोगों, ग्राफिक, फ्लोचार्ट, टेबल, इमेज, कार्टून या फोटोग्राफ लिखित सामग्री से ज्यादा प्रभावशाली सिद्ध होते हैं। डिजाइनिंग सॉफ्टवेयर के रूप में फोटोशॉप, फ्रीहैंड, पेंटर, इलसट्रेटर, फायर वक्र्स, ड्रीमवीवर फ्लैश, थ्रीडी-एनीमेटर एवं थ्रीडी-स्टूडियो की सहायता ली जा सकती है।
वेब डिजाइनिंग एवं डेवलपमेंट के क्षेत्र में कई इंस्टीटï्यूट विभिन्न प्रकार के कोर्स कराते हैं जिससे छात्र इनसे संबंधित जानकारी एवं प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं। एसटीजी, के रीजनल हेड, रोहित सिंह बताते हैं, सामान्यत: ग्रेजुएशन कर रहे छात्र इन कोर्सों में दाखिला लेते हैं। जब वे कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी कर बाहर आते हैं तो वे स्नातक की डिग्री के साथ-साथ प्रोफेशनल योग्यता भी हासिल कर लेते हैं जिससे उन्हें तुरन्त नौकरी मिलने की ज्यादा संभावना होती है। ये इंस्टीटï्यूट इन छात्रों के प्लेसमेंट में भी मदद करती हैं।
संस्थान, कोर्स एवं अवधि
(ए) एसटीजी
एडवांस डिप्लोमा इन वेब एंड ई-कॉमर्स टेक्नोलॉजी (7 माह)
एकसेल प्लस, (36 माह)
वेब डिजाइन कोर्स (72 घंटे)
(बी) एरीना मल्टीमीडिया
डूएल सर्टिफिकेट इन मल्टीमीडिया एंड वेब इंजीनियरिंग (3 वर्ष)
ई-कॉम डेवलपमेंट में सर्टिफिकेट (15 माह)
ई-कॉम डिजाइनिंग में सर्टिफिकेट (9 माह)
वेब इंजीनियरिंग में प्रोफेशनल सर्टिफिकेट (1 वर्ष, 3 माह)
(सी) एप्टेक
एसीई.पी.नेट (350 घंटे)
ई-कॉमर्स प्रोग्राम (6 माह)
(डी) एनआईआईटी
विभिन्न प्रकार के सर्टिफिकेट कोर्स
एरीना मल्टीमीडिया के जोनल एकेडेमिक हेड, टी महीधरन से बातचीत
प्रश्न : मल्टीमीडिया के विभिन्न कोर्सों के प्रति छात्रों की प्रतिक्रिया कैसी है?
उत्तर : आईटी के क्षेत्र में पहले जिस प्रकार के कोर्स थे वे बेहद पुराने पैटर्न पर आधारित थे। लेकिन वर्तमान समय उपलब्ध कोर्स- ई-कॉमर्स को ध्यान में रखकर विकसित किए गए हैं। चाहे वे बी2बी हो या बी2सी अब छात्रों को भी यह पता होता है कि उन्हें किस तरह के कोर्स की आवश्यकता है और उन्हें इस कोर्स से क्या फायदे होंगे।
प्रश्न : वेब डिजाइनरों एवं वेब प्रोग्रामर में से किसकी मांग ज्यादा है?
उत्तर-2 : जब मल्टीमीडिया एक प्रोफेशन
के रूप में आया तो वेब डिजाइनरों की मांग ज्यादा थी लेकिन अब मुझे लगता है कि दोनों की मांग समान रूप से ज्यादा है। दरअसल दोनों एक-दूसरे के पूरक के रूप में उभरे हैं।
प्रश्न : क्या यह प्रोफेशन आकर्षक हैं?
उत्तर-3 : वेतन भिन्न-भिन्न संस्थानों में अलग-अलग हो सकता है। फिर भी अमूमन यह 5000 से 8000 प्रति माह होती है। इसमें अन्य सुविधाएं जैसे वृद्धि, बोनस आदि उम्मीदवार की प्रतिभा एवं मेहनत पर निर्भर हैं।
प्रश्न : किन क्षेत्रों में वेब संबंधित कैरियर बनाया जा सकता है? क्या इस क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से भी कार्य किया जा सकता है?
उत्तर : उन संस्थानों में अनेक अवसर हैं जो वेब 'सोल्यूशन्सÓ ऑफर करत ेहैं। वैसे भी अब अधिकांश कम्पनियां वेब निर्माण कर रही हैं। जाहिर है, संभावनाएं स्वतंत्र रूप से भी कार्य करने में भी हैं।
प्रश्न :अब जबकि कम्पनियां इंटरनेट को बहुत भरोसेमंद नहीं मान रही हैं और धीरे-धीरे अपने हाथ खींचने लगी हैं, ऐसे में विकास की कितनी संभावनाएं हैं?
उत्तर : हालांकि यह सही है कि 'इंटरनेटÓ तक बहुत कम लोगों की पहुंच है लेकिन एक बात तय है कि 'नेटÓ पर बिजनेस खूब फल-फूल रहा है। इस क्षेत्र में काफी संभावनाएं हैं।
आप भी बनें वेबसाइट डिजाइनर
इंटरनेट और वेबसाइट के इस युग में वेबसाइट डिजाइनरों की मांग तेजी से बढ़ रही है। देश दुनिया का हर सरकारी गैर-सरकारी प्रतिष्ठïान अपना अलग वेबसाइट रखना चाहता है ताकि दुनियाभर के लोग उससे रू-ब-रू हो सके। यानी उसके संबंध में आसानी से जान सकें। सूचना क्रांति के इस दौर में यह अत्यंत आवश्यक हो गया है कि किसी भी क्षेत्र में तरक्की करने के लिए समाज की रफ्तार के मुताबिक चला जाए। जो इस रफ्तार से नहीं चल पाएगा वह हमेशा-हमेशा के लिए पीछे छूट जाएगा।
इसी आवश्यकता को देते हुए हर प्रतिष्ठïान, हर छोटा-बड़ा व्यावसायिक ग्रुप अपनी-अपनी वेबसाइट बनवाकर तेजी के साथ प्रचार-प्रसार कर रहा है। इस कार्य के लिए वेब डिजाइनरों की मांग बहुत तेजी से बढ़ी है, जो वेब डिजाइनिंग के कार्य में पूर्णत: दक्ष हों, कम्प्यूटर की मदद से यह डिजाइनिंग का एक नितांत नया क्षेत्र तैयार हो गया है। ध्यान रहे कि वेबसाइट डिजाइनिंग के क्षेत्र में वही लोग अधिक कामयाब हो सकते हैं जो कल्पनाशील हैं तथा सृजनात्मक गुण रखते हैं।
इसके लिए यह भी जरूरी है कि आपको चित्रकारी व कलाकारी के एक-दो साधारण हाथ भी कम से कम आते ही हों, इसके अलावा कम्प्यूटर का ज्ञान तो जरूरी है ही। अगर आप में यह सब कलाएं विद्यमान हैं तो जल्दी कीजिए वेबसाइट डिजाइनिंग में आपके लिए दमकता हुआ कैरियर इंतजार कर रहा है। वास्तव में वेब डिजाइनिंग का कार्य आपकी कल्पना शक्ति पर अधिक निर्भर करता है। इसके तहत आपको अपनी सृजनात्मक क्षमता, कौशल, चिन्तन तथा कल्पना शक्ति के जरिए विभिन्न रंगों का चयन करना होता है। इसके साथ चित्रों, शब्दों तथा ग्राफिक्स और एनीमेशन का मिश्रण करके एक वेबडिजाइन की रूपरेखा तैयार करनी होती है। वेबसाइट डिजाइनिंग के इस काम में कम्प्यूटर का ज्ञान होना इसलिए अधिक आवश्यक है क्योंकि चित्रण का संपूर्ण कार्य कम्प्यूटर स्क्रीन पर ही करना होता है। सही मायने में देखा जाए तो वेबसाइट डिजाइनिंग की अवधारण आज विज्ञापन पेशेवरों का बदला हुआ या कह लें कि सुधरा हुआ स्वरूप है। इसमें जरूरी है कि विजुअल इंफारमेशन्स तथा चित्रों का संयोजन तथा सम्मिश्रण आकर्षक हो। एक वेब पेज डिजाइन की सफलता सबसे अधिक निर्भर करती है मार्केटिंग पर। यानी सबसे महत्त्वपूर्ण तथ्य यह है कि आपकी वेबसाइट को कितने लोग क्लिक करते हैं अर्थात कितने लोग आपकी तरफ आकर्षित होते हैं। वेबसाइट डिजाइन करने के लिए प्रत्येक डिजाइन की अलग-अलग वेब तैयार करनी पड़ती है। इसके लिए इंटरनेट की भी मदद ली जाती है। अपनी वेबडिजाइन को ज्यादा आकर्षक बनाने के लिए आप विभिन्न वेबों के डिजाइनरों द्वारा तैयार डिजाइनों की थोड़ी-बहुत सहायता भी ले सकते हैं जो इंटरनेट पर उपलब्ध हैं। इसके अलावा जरूरी फोटोग्राफ्स, इंफॉरमेंशन्स को स्कैनर के जरिए लोड करना पड़ता है। आज देश की कई बड़ी-बड़ी शीतल पेय कंपनियां, टूथपेस्ट बनाने वाली कंपनियों और सौंदर्य प्रसाधन बनाने के कार्य में लगी कंपनियां इस क्षेत्र में रोजगार का अच्छा जरिया साबित हो सकती है। कारण यह है कि वे हर बार नए-नए रंग-ढंग से विज्ञापन तैयार करवाती हैं जिसमें ग्राफिक्स तथा डिजाइनों के जरिए आकर्षण पैदा करना आवश्यक होता है।
आज हर विज्ञापन में कुछ नया और लुभावना दिखाई पडऩा चाहिए, इसी कार्य के लिए जरूरत होती है व्यक्ति के विचार, चिन्तन, सृजनशीलता एवं कलात्मक दृष्टिï की। अगर आपने कंपनी का मनचाहा विज्ञापन डिजाइन कर दिया तो धन-दौलत की फिर बात ही नहीं, मनचाही आमदनी हो सकती है। हालांकि इस प्रक्रिया में अधिक समय लगता है तथा मेहनत भी काफी करनी पड़ती है लेकिन यह कार्य काफी दिलचस्प भी है। इस कार्य में विभिन्न सॉफ्टवेयर आपके लिए सहायक सिद्ध हो सकते हैं। सॉफ्टवेयरों के 50 किलो बाइटï्स से 11 किलो बाइटï्स की मदद से यह काम कुछ आसान हो जाता है।
तकनीकी विकास
हालांकि भारत में भी वेबसाइट डिजाइनों की मांग तेजी से बढ़ी है और इसके तकनीकी पक्ष का विकास भी तेजी के साथ हो रहा है, किन्तु दुनिया के कई अन्य देशों के मुकाबले अभी तकनीकी व्यवस्था में काफी कुछ सुधार करने की आवश्यकता प्रतीत होती है। वेबसाइट डिजाइनिंग के लिए आवश्यक सुविधाओं तथा प्रशिक्षण केंद्रों का विस्तार हो रहा है। उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में इसके कई चमत्कार पूर्ण एवं आश्चर्यजनक सॉफ्टवेयर बाजार में तहलका मचा देंगे। सबसे ज्यादा तो विज्ञापन के क्षेत्र में ही दिखाई पड़ेगी। वैसे तो वेबसाइट डिजाइनिंग में ग्राहक का कोई खास हस्तक्षेप नहीं होता है किन्तु वेब पेज की डिजाइनिंग करते समय उसकी इच्छा और आवश्यकता का ध्यान रखना आवश्यक होता है। वेबसाइट डिजाइनिंग का अपना कैरियर बनाने वाले युवक-युवतियां लाखों रुपए महीना कमा सकते हैं। वास्तव में देखा जाए तो आजकल इस क्षेत्र में लड़कियां तो लड़कों से भी आगे निकल रही हैं।
भारत में एक वेबसाइट डिजाइन करने की कीमत इस समय लाखों रुपए तक हो सकती है। हालांकि यह कीमत एनीमेशन, फोटोग्राफ्स तथा रंगों के संयोजन पर ही निर्भर करती है। इस क्षेत्र में कैरियर बनाने वालों का भविष्य काफी लाभदायक और स्वर्णिम है। भले ही भारत में वेबसाइट की अवधारणा काफी नई है परन्तु विस्तार का सिलसिला जारी है।
वेबसाइट डिजाइनिंग के लिए आवश्यक सामग्री
किसी वेबसाइट का डिजाइन तैयार करने के लिए मुख्य रूप से निम्नलिखित सामग्री की आवश्यकता होती है-
1. पेन्टियम कम्प्यूटर (कलर मॉनीटर) मोडम (हाई स्पीड) 2. कलर प्रिंटर 3. स्कैनर 4. इंटरनेट कनेक्शन 5. विभिन्न सॉफ्टवेयर्स 6. डिजीटाइजर 7. पेन पाइन्टर 8. जोयस्टीक (एनीमेशन के लिए) 9. अच्छी क्वालिटी की आइवरी शीटï्स इत्यादि।

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