व्यावसायिक कला (कामर्शियल आर्ट) अथवा अनुपयुक्त कला कोई नया क्षेत्र नया नहीं है। यह भी उतनी ही पुरानी है जितनी ललित कला किन्तु बढ़ते व्यावसायीकरण, उदारीकरण और उपभोक्तावादी संस्कृति ने कामर्शियल आर्ट की महत्ता को बढ़ावा दिया है। आज कामर्शियल आर्ट में स्नातक, स्नातकोत्तर या डिप्लोमा प्राप्त युवक-युवतियों के लिए डायरेक्टर, क्रिएटिव आर्टिस्ट, ग्राफिक डिजाइनर आदि के रूप में समाचार पत्रों के विशिष्टï अंकों, रंगबिरंगी पत्रिकाओं से लेकर विज्ञापन एजेंसियों तक में रोजगार के तमाम अवसर खुल गए हैं। 1982 में भारतीय दूरदर्शन के व्यावसायिक होने तथा 1990 में भारत में बहुराष्टï्रीय कंपनियों के आने के बाद कामर्शियल आर्टिस्टों की मांग बड़ी तेजी से बढ़ी है।
कामर्शियल आर्ट के क्षेत्र में कार्य करने की संभावनाएं भी बढ़ी हैं जिसका कारण है-फोटोग्राफी व कम्प्यूटर क्षेत्र में नई-नई तकनीकों का आना। हां, ललितकला व वाणिज्यिक कला में मात्र अंतर यह है कि वाणिज्यिक कला में कलाकार को अपनी सृजनशीलता स्वयं अपने या प्रशंसकों के लिए नहीं बल्कि अपने ग्राहक की संतुष्टिï, उपभोक्ता की रुचि व बाजार की विज्ञापन संबंधी रणनीति को ध्यान में रख कर करनी होती है।
विज्ञापन एजेंसियों में विज्ञापन कार्य कामर्शियल आर्टिस्टों द्वारा ही किया जाता है। विज्ञापन कार्य सामूहिक रूप से किया जाता है, जो अविन्यासकर्ताओं, विज्ञापन कलाकारों, पेस्ट अप मैन, अक्षर लेखन करने वालों तथा चित्र बनाने वालों आदि के द्वारा होता है। इन व्यक्तियों के कार्यों का निरीक्षण और मार्गदर्शन प्राय: एक कला निर्देशक द्वारा किया जाता है। कला निर्देशक न केवल मार्गदर्शन, पर्यवेक्षण और विभिन्न विशिष्टï योग्यता के कलाकारों के कार्य का समन्वयन करता है बल्कि नए-नए विचारों की परिकल्पना करता है तथा फोटोग्राफ, चित्रों आदि का संग्रह भी करता है। विज्ञापन में व्यक्त किए जाने वाले विचार के संबंध में ग्राहक से चर्चा करने के बाद वह माध्यम और आकार (प्रदर्शन विज्ञापन, सिनेमा स्लाइड, विज्ञापन पट्टï, पोस्टर आदि) का चयन करता है। फिर प्रयोग में लाई जाने वाली सामग्री और रंगों के विषय में निर्णय लेता है और आरंभिक आलेखन व डिजाइनों की तैयारी करता है। ग्राहक का अनुमोदन मिल जाने के बाद वह अंतिम अविन्यास और कार्यों को पूरा करता है।
वरिष्ठï व अनुभवी कामिर्शियल आर्टिस्ट टेलीविजन और सिनेमा, व्यंग्य चित्रों, औद्योगिक फिल्मों, औद्योगिक डिजाइनों, फैशन चित्रों, कपड़े के डिजाइन, बधाई पत्रों के डिजाइनों, पैंकिंग लेबलों आदि का ही काम करते हैं। किंतु अधिकांश आर्टिस्ट प्रकाशन (समाचार-पत्र पत्रिकाएं, पुस्तक के चित्रण व डिजाइनिंग, पोस्टर लेबलों, गत्ते के डिब्बों ब्रोशर आदि का लाभ करते हैं।)
हालांकि कला का युग प्रकृति प्रदत्त होता है लेकिन अगर किसी अच्छे संस्थान से इस क्षेत्र का बारीकी से प्रशिक्षण प्राप्त किए जाए तो सकल कामर्शियल आर्टिस्ट के रूप में सफलता प्राप्त करने में अधिक देर नहीं लगेगी। कामर्शियल आर्टिस्ट बनने के लिए इनमें से किसी में भी विशेषज्ञता प्राप्त करता है।
इलेस्ट्रेटर्स : विज्ञापनों, पुस्तकों, पत्रिकाओं, सूची पत्रों, फैशन की चीजों आदि के लिए स्केच (रेखाचित्र) और इलेस्ट्रेशन तैयार करना।
ले आउट मैन : विचारों एवं कल्पनाओं को मूर्त रूप देने के लिए ड्राइंग, अक्षर लेखन, चित्रों, शीर्षकों (कैप्शन) आदि के क्रम एवं स्थान निर्धारण व्यवस्था की सामंजस्य रूप योजना बनाने वाला।
ड्राफ्ट मैन : साधारण चार्टों, डायग्रामों, नक्शों एवं उचित अक्षर लेखन का काम खुले हाथों या स्टेंसिल या मशीन से करना। वह लाइन ड्राइंग या स्केल ड्राइंग का भी काम कर सकता है।
पेस्ट अप मैन : कार्ड बोर्ड पर अक्षर लेखन, चित्रों इलेस्ट्रेशन एवं मूल कला कार्य (आर्ट वर्क) को कांट-छांट करने, सजाने व चिपकाने वाला।
विज्ञापन कलाकार : प्रदर्शन विज्ञापनों, नुमाइशों और दूसरे प्रदर्शनों के लिए इलेस्ट्रेशन, अक्षर लेखन, ले आउट आदि बनाने वाला।
सूचना पट्टï लेखक - साइन बोर्ड, नेम प्लेट एवं होर्डिंग्स का काम करने वाला।
कामर्शियल आर्टिस्ट के लिए बढ़ते उदारीकरण व व्यावसायीकरण ने रोजगार के तमाम क्षेत्र खोल दिए हैं। विज्ञापन एजेंसियों, दूरदर्शन एवं फिल्म स्टूडियो, मुद्रण एवं प्रकाशन संस्थानों, आर्ट स्टूडियो, सरकारी व निजी क्षेत्र के व्यापारिक व औद्योगिक संस्थानों के विज्ञापन व प्रचार विभागों में स्टाफ आर्टिस्टों के रूप में कार्य मिल जाता है।
अगर स्वतंत्र रूप से कोई इस क्षेत्र में व्यवसाय शुरू करना चाहता है तो सफल होने के लिए केवल प्रतिभा व हुनर की आवश्यकता नहीं है बल्कि इसके साथ-साथ चतुर वाकिफ बुद्धि, व्यापक संपर्क व विश्वसनीयता की बहुत अधिक जरूरी है।
देश के विभिन्न संस्थाओं में कामर्शियल आर्ट का प्रशिक्षण दिया जाता है। विभिन्न पालीटेक्निक संस्थानों में डिप्लोमा पाठï्यक्रम की पढ़ाई होती है। आई.टी.आई. यानी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में भी यह पाठï्यक्रम संचालित किया जाता है।
देश के विभिन्न संस्थानों, विश्वविद्यालयों में स्नातक व स्नातकोत्तर पाठï्यक्रम संचालित किया जाता है। सभी संस्थानों में प्रवेश की अलग-अलग शर्तें हैं।
विभिन्न संस्थान
1. दिल्ली कला महाविद्यालय (दिल्ली विश्वविद्यालय), तिलक मार्ग, नई दिल्ली-110001
2. कला शिल्प महाविद्यालय, लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ
3. सर जे.जे. स्कूल आफ आर्ट, डॉ. डी.एन. रोड, मुम्बई-400001
4. जामिया मिल्लिया इस्लामिया, जामिया नगर, नई दिल्ली- 110025
5. इलाहाबाद विश्वविद्यालय, इलाहाबाद
6. हाउस होल्ड कला एवं होम साइंस संस्थान, अम्बेडकर विश्वविद्यालय, आगरा
7. राजकीय शिल्प एवं कला महाविद्यालय, कलकत्ता
8. राजकीय शिल्प एवं कला महाविद्यालय, चंडीगढ़
9. बहरामपुर विश्वविद्यालय, भंज बिहार, बहरामपुर-760007
10. कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र- 132119