प्रिटिंग टेक्नॉलॉजी में रोजगार


प्रिंटिंग या मुद्रण का अर्थ है प्रस्तुतिकरण। यह हमारे विचारों, भावनाओं और अभिव्यक्तियों की शब्दों, पंक्तियों और चित्रात्मक रूपों में प्रस्तुति है। अधिक सही शब्दों में कहें तो प्रिंटिंग का अर्थ है:  ''मूल प्रति के समान अधिक संख्या में प्रतियां छापने की कला, विज्ञान और प्रौद्योगिकीÓÓ। जर्मनी के जोहन्नस गुटेनबर्ग, जो प्रिंटिंग के जनक कहे जाते हैं, ने प्रौद्योगिकी की इस बेजोड़ विधा का आविष्कार 15वीं शताब्दी में किया था। इस क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान 1978 में अलोइस सेनेफेल्डर ने ''लिथोग्राफीÓÓ के आविष्कार के रूप में दिया। प्रिंटिग की बदौलत मानव की प्रगति को, खासकर लिखित इतिहास की शूरूआत के बाद से, भलि-भांति दर्ज करना संभव हो गया है। चाहे लकड़ी के ब्लॉकों में उत्कीर्ण करके मानव की उपलब्धियां दर्ज की गई हों. जैसा कि कई सदियों पहले चीन के लोगों ने किया था, या फिर अत्याधुनिक डिजीटल प्रिंअिंग जैसा कि आधुनिक मानव कर रहा है, यह कहने के लिए पर्याप्त है कि प्रिंटिंग सदियों से मानव के विचारों, उसकी खोजों और आशाओं की अभिव्यक्ति का माध्यम बनी रही है।
पिछले दशक के दौरान भारत ने इस क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। आजकल प्रिंटिंग सिर्फ कागज तक ही सीमित नहीं रह गई है बल्कि बोर्ड, प्लास्टिक, धातु, शीशा, चमड़ा और संबद्घ संस्तरों पर भी होने लगी है। आधुनिक प्रिटिंग प्रक्रियाओं के फलस्वरूप बेढब से बेढब और जटिल से जटिल आकृति को भी प्रभावकारी ढंग से प्रिंट किया जा सकता है।
समूचे प्रिंटिंग प्रौद्योगिकी क्षेत्र को प्रेस-पूर्व, प्रेस, प्रेस परवर्ती, रखरखाव और विपणन कार्यों में विभाजित किया जा सकता है। इस प्रौद्योगिकी की औपचारिक शिक्षा पूरी करने के बाद विद्यार्थी उपरोक्त में से किसी एक को अपने व्यवसाय का विशेष क्षेत्र बना सकते हैं। आज के युग में इस क्षेत्र में अनेक पूर्ण स्वचालित उपकरण शामिल हो गए हैं जैसे हाई रिजोल्यूशन स्कैनर्स, ऑटोमैटिक प्लेट प्रोसेसर, तेज गति वाली पूरी तरह स्वचालित प्रेस, कम्प्यूटर से प्रेस प्रौद्योगिकी, ऑटो बाइन्डर्स और डिजीटल प्रेस आदि। इन खोजों से प्रिंटिंग प्रौद्योगिकी एक बेजोड़, चुनौतीपूर्ण और संभावनाओं से भरपूर विकल्प बन गई है। जिसका चयन व्यवसाय के रूप में किया जा सकता है।
हमारे देश में निम्रांकित, तीन स्तरीय शिक्षा, प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी के रूप में उपलब्ध है :
1. इंजीनियरी / प्रौद्योगिकी में स्नातक
2. इंजीनियरी डिप्लोमा
3. अल्पावधि के प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रम
इंजीनियरी / प्रौद्योगिकी में स्नातक पाठ्यक्रम की अवधि चार वर्ष है। पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता विज्ञान विषयों में 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करना है। उम्मीदवार के पास भौतिकशास्त्र, रसायन शास्त्र  और गणित विषय रहे हों और उसने कम से कम 50 प्रतिशत अंक प्रापत किए हों। दाखिला लिखित परीक्षा के आधार पर होता है। पहले वर्ष का पाठ्यक्रम इंजीनियरी / प्रौद्योगिकी के अन्य विषयों के समान होता है किन्तु बाद के तीन वर्षों में प्रिंटिंग,  प्रेस-पूर्व, प्रेस, प्रेस परवर्ती, रखरखाव और विपणन संबंधी पहलू, कम्प्यूटर, इलेक्ट्रॅनिक पहलुओं, परियोजना प्रबंध, संचालन अनुसंधान और इस क्षेत्र में आधुनिक प्रौद्योगिकी संबंधी विकास जैसे पहलुओं की जानकारी दी जाती है। कुछ सप्ताह का औद्योगिक प्रशिक्षण, एक प्रोजेक्ट और सेमीनार भी पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं। उपरोक्त पाठ्यक्रम निम्रांकित संस्थानों में उपलब्ध है:
1. अन्ना विश्वविद्यालय, चैन्नई, तमिलनाडु
2. अविनाशलिंगम्ï कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एण्ड टेक्नोलॉजी, कोयम्बटूर, तमिलनाडु
3. बीएमएस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एण्ड टेक्नोलॉजी, बंगलौर, कर्नाटक
4. कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एण्ड टेक्नोलॉजी, पुणे, महाराष्टï्र
5. जवाहर लाल नेहरू तकनीकी विश्वविद्यालय, हैदराबाद आन्ध्रप्रदेश
6. गुरू जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार, हरियाणा
7. जादवपुर विश्वविद्यालय, कलकत्ता, पश्चिम बंगाल
8. मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मणिपाल कर्नाटक
पिं्रटिंग में इंजीनियरी डिप्लोमा के लिए गणित और विज्ञान (कम से कम 50 प्रतिशत) के साथ दसवीं कक्षा पास होना जरूरी है। दाखिला प्रवेश परीक्षा अथवा दसवीं के अंकों के आधार पर किया जाता है। अधिकतर संस्थान अन्य राज्यों के उम्मीदवारों के लिए कुछ सीटें सुरक्षित रखते हैं। यह तीन वर्ष का पाठ्यक्रम है। इस पाठ्यक्रम के अंतर्गत प्रिंटिंग, प्रेस-पूर्व, प्रेस, प्रेस परवर्ती और विपणन गतिविधियां और विभिन्न प्रक्रियाएं शामिल हैं। यह पाठ्यक्रम निम्नांकित संस्थानों में उपलब्ध है :
1. क्षेत्रीय प्रिंटिंग प्रौद्योगिकी संस्थान जादवपुर, कलकत्ता, पश्चिम बंगाल
2. उत्तरी क्षेत्र प्रिंटिंग प्रौद्योगिकी संस्थान, इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश
3. इंस्टीट्यूट ऑफ प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी, चैन्नई, तमिलनाडु
4. जे.जे. स्कूल ऑफ आटर््स, मुम्बई, महाराष्टï्र
5. महाराष्टï्र इंस्टीट्यूट ऑफ प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी, पुणे, महाराष्टï्र
6. इंस्टीट्यूट ऑफ प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी, हैदराबाद, आन्ध्र प्रदेश
7. पूसा पॉलीटेक्निक, नई दिल्ली
8. राजकीय कला निकेतन, जबलपुर, मध्यप्रदेश
9. स्कूल ऑफ प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी, बंगलौर, कर्नाटक
10. इंस्टीट्यूट ऑफ प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी, सोरापुर, केरल
प्रेस-पूर्व, प्रेस, प्रेस परवर्ती गतिविधियों के बारे में एक महीने से लेकर एक वर्ष तक की अवधि के विभिन्न अल्पावधि के पाठ्यक्रम संचालित किए जाते हैं। ये पाठ्यक्रम डिग्री और डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित करने वाले अधिकतर संस्थानों और जिला स्तर के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में उपलब्ध हैं। इनमें दाखिले के लिए दसवीं कक्षा उत्तीर्ण होना जरूरी है।
रोजगार की संभावनाएं
स्नातक उपाधि रखने वाले विद्यार्थी, जिन्होंने प्रेस-पूर्व, प्रेस, प्रेस परवर्ती, रखरखाव और विपणन के क्षेत्र में प्रशिक्षण प्राप्त किया हो, कमर्शियल प्रिंटिंग प्रेस, समाचार-पत्र उद्योग, पैकेजिंग उद्योग, प्रकाशन समूहों, मशीन विनिर्माण इकाइयों, विज्ञापन एजेंसियों आदि में रोजगार प्राप्त कर सकते हैं।अनेक बड़े और मध्यम आकार के संगठन प्रिंटिंग संस्थानों के कैम्पस में जाकर साक्षात्कार करके अपने लिए उम्मीदवारों का चयन करते हैं। वे पहले एक वर्षके प्रशिक्षण पर रखते हैं और उसके बाद विभिन्न प्रबंधकीय पदों पर पदोन्नति दे देते हैं। केन्द्र और राज्य स्तर की विभिन्न प्रिंटिंग इकाइयां वैज्ञानिक, प्रेस मैनेजर, अनुसंधान अधिकारी, तकनीकी अधिकारी, उत्पादन या प्रकाशन अधिकारी के रूप में नौकरी के अवसर उपलब्ध कराते हैं।
इंजीनियरी में डिप्लोमा प्राप्त करने वाले विद्यार्थी तकनीकी सहायक या सहायक पर्यवेक्षक के रूप में विभिन्न संगठनों, निजी, राज्य या केन्द्र सरकार की इकाइयों में नौकरियां पा सकते हैं।
प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रम करने वाले लोग निचले स्तर की गतिविधियों जैसे मशीनमैन, जूनियर तकनीशियन आदि पदों पर काम कर सकते हैं। इंजीनियरी या प्रौद्योगिकी की अन्य शाखाओं की तुलना में इन नौकरियों से आकर्षक और बेहतर वेतन सुविधाएं मिलती हैं। वर्तमान में इस व्यवसाय में करीब 18 से 20 लाख लोग लगे हुए हैं। उद्योग की इस शाखा में व्यावसायिक दृष्टिï से कुशल लोगों की जरूरत पड़ती है जो उच्च प्रौद्योगिकी वाले उपकरणों, मशीनों का संचालन कर सकें और काम को वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित ढंग से पूरा कर सकें। इस तरह प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी में चुनौतीपूर्ण और उज्ज्वल भविष्य के लिए योजना बनाने का यह उपयुक्त समय है।

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