सफलता के लिए जरूरी है समय का नियोजन


परीक्षाओं के अवसरों का सदुपयोग सही समय पर कर लेना और परीक्षा संबंधी जानकारी को उचित ढंग से हासिल करके जांच में खड़ा उतरना बहुत हद तक समय के नियोजन पर आधारित है। स्नातक की डिग्री प्राप्त करते ही परीक्षार्थी के सामने क्या करें, कहाँ से करें, कैसे करें, जैसे कई प्रश्न मंडराने लगते हैं ऐसी स्थिति में सीमित समय को ध्यान में रखकर अपना उद्देश्य निर्धारित करना चाहिए। सरकारी नौकरी हेतु प्रतियोगिता परीक्षा हो या फिर निजी क्षेत्र के रोजगारों के लिए आयोजित परीक्षा, स्वरूपगत अन्तर होने के बावजूद भी कुछ सामान्य बातें और जानकारी ऐसी हैं जिनका पालन समय के नियोजन पर निर्भर है तथा परीक्षा में सफलता प्राप्त करने के लिए अनिवार्य है।
दूरदर्शिता, अनुशासन एवं समर्पण ये तीन ऐसे स्तम्भ हैं जिनकी महत्ता को परीक्षार्थियों ने समझकर उन पर अमल किया वे अपने सपने को साकार कर पाते हैं। दूरदर्शिता से ही अपने जीवन उद्देश्य की तलाश करें तथा उसे हासिल करने हेतु अनुशासित रूप से आगे बढ़े एवं अपने प्रयासों के दौरान पूर्णतया समर्पित होकर कार्य करें।
कॉलेज की पढ़ाई की समाप्ति एवं रोजगार की उपलब्धि के बीच छात्र-छात्राओं को एक ऐसे दौर से गुजरना पड़ता है। इसलिए आने वाले संघर्ष के समय का पहले से ही नियोजन कर लें। इस क्रम में दूरदर्शिता, अनुशासन और समर्पण जैसे गुणों का समावेश करें।
दूरदर्शी बनें-अपने संघर्ष की करने की क्षमता, काबिलयत एवं योग्यता का आंकलन करके मंजिल को निर्धारित करें। काफी सोच-विचार करके, तर्क-वितर्क द्वारा अपने व्यक्तित्व को परखकर तथा निर्धारित मंजिल तक पहुंचने के रास्ते में आने वाली कठिनाइयों के स्वरूप को देखते हुए ही अपने जीवन उद्देश्य का निर्माण करें तता उससे संबंधित परीक्षा की तैयारी में जुट जाएं।
अनुशासित रहें-उद्देश्यों के निर्धारण के पश्चात बुलंद हौसले, घनात्मक विचार एवं जूझने की ताकत के साथ अनुशासित कदम उठाएं। याद रहें कि कुछ सालों की मेहनत और सफलता आपके जीवन को मूल्यवान तथा दूसरों के लिए प्रेरणा भी बन सकती है। अनुशासन में ही कोई सही ढंग से तैयारी कर सकता है क्योंकि लापरवाही से भटकने की संभावनाएं बनती हैं।
समर्पित रहें- कार्यप्रणाली को इस प्रकार नियोजित करें कि किसी भी दिन उत्साह में कमी नहीं रहे, थकावट का अहसास नहीं हो और आप हमेशा आगे बढऩे के इच्छुक बने रहें इसके लिए तैयारी के प्रति समर्पण की आवश्यकता है। जहाँ योग्य छात्रों की संख्या लगातार बढ़ रही है सफल होने के लिए अपने समय के प्रति समर्पित रहना अत्यंत आवश्यक है। युवावस्था के दोषों से बचकर अपनी मंजिल की ओर बढ़ते जाएं।
कोई भी अव्वल दर्जे का अधिकारी, डाक्टर, व्यवसायी, वकील, कलाकार और लेखक इन तीनों गुणों को जीवन में आत्मसात करने के बाद ही सफलता के शीर्ष को प्राप्त किया है। प्रारंभिक असफलता कभी भी किसी पराजय का द्योतक नहीं है।

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