समय के साथ चलते हुए आज की आधुनिक पीढ़ी फैशन के रंग में पूरी तरह डूब चुकी है। न केवल शहरों व महानगरों में बल्कि कस्बे व गांवों में भी युवक-युवतियां फैशन की दौड़ में शामिल हैं।
फैशन हमेशा सुंदरता को ध्यान में रखकर ही नहीं बनाया जाता बल्कि फैशन के नाम पर जनता को बेवकूफ भी बहुत बनाया जाता है। हर चीज की तरह यहां भी लाभ-हानि दोनों हैं। लाभ तो यह है कि फैशन डिजाइनिंग का व्यवसाय सबसे ज्यादा फल-फूल रहा है, जिसके कारण बेरोजगारों को रोजगार मिला है। महिलाओं को भी इस फील्ड में कुछ कर दिखाने का अवसर मिला है।
यहां काम करके वे कार्यकुशल तो बनती ही हैं, उनका व्यक्तित्व भी निखरता है और इसमें पैसा भी बहुत है। यहां सृजन का सुख भी है और ग्लैमर भी। विभिन्न प्रकार के नए-नए लुभावने डिजाइनों की रचना करने को मिलती है। विस्तार की यहां पूरी संभावना है। बस, आप में प्रतिभा और कार्य के प्रति लगन होनी चाहिए। यहां के डिजाइनों का बाहर के देशों में क्रेज है और काम बढ़ाने के लिए निर्यातक कम्पनियों से वस्त्र निर्यात के लिए संबद्ध हुआ जा सकता है।
फैशन डिजाइनिंग के लिए ऊंची-ऊंची डिग्रियों की आवश्यकता नहीं है। कुछ तो इसकी तरफ एप्टीच्यूड शुरू से होता है, कुछ बाद में इसमें रुचि लेते हैं। इसका कोर्स मात्र 6 मास में किया जा सकता है। शैक्षणिक योग्यता 10+2 उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। आयु सीमा फैशन डिजाइनिंग पाठ्यक्रम के लिए 18 से 25 वर्ष के बीच है।
यह कोर्स दिल्ली सरकार की तरफ से स्वरोजगार के अंतर्गत आता है। यह पाठ्यक्रम नि:शुल्क है। आयोजनों के व्यय के लिए मात्र 100 रुपए पूर्ण अवधि में एक बार लिए जाते हैं।
फैशन डिजाइनिंग के कोर्स सरकारी और प्राइवेट दोनों ही हैं। प्राइवेट संस्थाओं की तरफ लोगों का रुझान ज्यादा है क्योंकि फैशन परिवर्तन को ये जल्दी से अपना लेते हैं जबकि सरकारी संस्थान सिलेबस को फॉलो करने में ही पिछड़ जाते हैं। प्राइवेट संस्थानों में सीखने वालों के लिए नौकरी के अवसर भी रहते हैं। ज्यादातर विद्यार्थी कोर्स पूरा करके उन्हीं संस्थानों में जॉब पा जाते हैं। कुछ विद्यार्थी जिन्हें आर्थिक सपोर्ट होता है, अपना स्वयं का व्यवसाय शुरू कर लेते हैं।
फैशन डिजाइनिंग में ‘निफ्ट’ (नैशनल इंस्टीच्यूट ऑफ फैशन टैक्रोलॉजी) का नाम सबसे पहले आता है। इस फैशन संस्थान का न्यूयार्क के फैशन इंस्टीच्यूट ऑफ टैक्रोलॉजी के साथ म्युचुअल अंडरस्टैंडिंग के आधार पर अनुबंध है जिसके अंतर्गत निफ्ट को यह तकनीकी सहायता देता है। वहां के अनुभवी विषय विशेषज्ञ निफ्ट में प्रशिक्षण देने के लिए आते हैं और यहां के शिक्षक न्यूयार्क में प्रशिक्षण देने जाते हैं।
देश-विदेश के वस्त्र आयातक एवं निर्यातक यहां से प्रशिक्षित व्यक्तियों की मांग करते हैं और निफ्ट उनकी इस मांग की पूर्ति करता है। निफ्ट फैशन के क्षेत्र में शोध, पर्यवेक्षण और सर्वेक्षण के द्वारा नए-नए आकर्षक डिजाइन भी तैयार करता है।
निफ्ट में 6 नए डिप्लोमा कोर्सेज की व्यवस्था है। ये हैं- डिजाइनिंग, फैशन डिजाइनिंग (दोनों की अवधि तीन वर्ष), मर्चेन्डाइजिंग और मार्कीटिंग (दो वर्ष का डिप्लोमा) के अंतर्गत वस्त्र व्यवसाय की जानकारी दी जाती है।
यह एक स्तरीय डिप्लोमा है। गारमैंट मैन्युफैक्चरिंग टैक्रोलॉजी (दो वर्ष का कोर्स) के अंतर्गत उत्पादन कला का ज्ञान कराया जाता है। इसके लिए स्नातक डिग्री जरूरी है। लैदर गारमैंट टैक्रोलॉजी करने वाले स्टाइलिस्ट लैदर डिजाइनर का धंधा अपना सकते हैं।
इनके लिए चयन प्रक्रिया अखिल भारतीय परीक्षा के आधार पर ही आयोजित होती है। सफल होने पर ही इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है। लेडी इरविन कालेज, नई दिल्ली में ‘क्रिएटिव कम्प्यूटर सैंटर’ का निर्माण हुआ है, जहां कम्प्यूटर की मदद से फैशन विषयक विभिन्न डिप्लोमा कोर्सों की व्यवस्था की गई है। इसमें कम्प्य्टूर एडिड फैशन डिजाइनिंग कोर्स, कम्प्यूटर एडिड टैक्सटाइल डिजाइनिंग कोर्स, कम्प्यूटर एडिड इंटीरियर एंड लैंडस्केप डिजाइनिंग कोर्स, कम्प्यूटर एडिड ग्राफिक्स एंड मल्टीमीडिया प्रशिक्षण हैं। इन कोर्सिज की अवधि पांच मास है। इनमें एडवांस कोर्स की भी व्यस्था है जिसकी अवधि एक वर्ष है।
इन कोर्सिज के लिए पंजीकरण हर साल होता है। सीट मिलने पर सूचना मिल जाती है। पांच शिफ्ट में यहां प्रशिक्षण होता है। यह शिफ्ट दो-दो घंटे की होती है। आवेदन पत्र में अपनी सुविधा के समय का उल्लेख किया जा सकता है।
फैशन हमेशा सुंदरता को ध्यान में रखकर ही नहीं बनाया जाता बल्कि फैशन के नाम पर जनता को बेवकूफ भी बहुत बनाया जाता है। हर चीज की तरह यहां भी लाभ-हानि दोनों हैं। लाभ तो यह है कि फैशन डिजाइनिंग का व्यवसाय सबसे ज्यादा फल-फूल रहा है, जिसके कारण बेरोजगारों को रोजगार मिला है। महिलाओं को भी इस फील्ड में कुछ कर दिखाने का अवसर मिला है।
यहां काम करके वे कार्यकुशल तो बनती ही हैं, उनका व्यक्तित्व भी निखरता है और इसमें पैसा भी बहुत है। यहां सृजन का सुख भी है और ग्लैमर भी। विभिन्न प्रकार के नए-नए लुभावने डिजाइनों की रचना करने को मिलती है। विस्तार की यहां पूरी संभावना है। बस, आप में प्रतिभा और कार्य के प्रति लगन होनी चाहिए। यहां के डिजाइनों का बाहर के देशों में क्रेज है और काम बढ़ाने के लिए निर्यातक कम्पनियों से वस्त्र निर्यात के लिए संबद्ध हुआ जा सकता है।
फैशन डिजाइनिंग के लिए ऊंची-ऊंची डिग्रियों की आवश्यकता नहीं है। कुछ तो इसकी तरफ एप्टीच्यूड शुरू से होता है, कुछ बाद में इसमें रुचि लेते हैं। इसका कोर्स मात्र 6 मास में किया जा सकता है। शैक्षणिक योग्यता 10+2 उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। आयु सीमा फैशन डिजाइनिंग पाठ्यक्रम के लिए 18 से 25 वर्ष के बीच है।
यह कोर्स दिल्ली सरकार की तरफ से स्वरोजगार के अंतर्गत आता है। यह पाठ्यक्रम नि:शुल्क है। आयोजनों के व्यय के लिए मात्र 100 रुपए पूर्ण अवधि में एक बार लिए जाते हैं।
फैशन डिजाइनिंग के कोर्स सरकारी और प्राइवेट दोनों ही हैं। प्राइवेट संस्थाओं की तरफ लोगों का रुझान ज्यादा है क्योंकि फैशन परिवर्तन को ये जल्दी से अपना लेते हैं जबकि सरकारी संस्थान सिलेबस को फॉलो करने में ही पिछड़ जाते हैं। प्राइवेट संस्थानों में सीखने वालों के लिए नौकरी के अवसर भी रहते हैं। ज्यादातर विद्यार्थी कोर्स पूरा करके उन्हीं संस्थानों में जॉब पा जाते हैं। कुछ विद्यार्थी जिन्हें आर्थिक सपोर्ट होता है, अपना स्वयं का व्यवसाय शुरू कर लेते हैं।
फैशन डिजाइनिंग में ‘निफ्ट’ (नैशनल इंस्टीच्यूट ऑफ फैशन टैक्रोलॉजी) का नाम सबसे पहले आता है। इस फैशन संस्थान का न्यूयार्क के फैशन इंस्टीच्यूट ऑफ टैक्रोलॉजी के साथ म्युचुअल अंडरस्टैंडिंग के आधार पर अनुबंध है जिसके अंतर्गत निफ्ट को यह तकनीकी सहायता देता है। वहां के अनुभवी विषय विशेषज्ञ निफ्ट में प्रशिक्षण देने के लिए आते हैं और यहां के शिक्षक न्यूयार्क में प्रशिक्षण देने जाते हैं।
देश-विदेश के वस्त्र आयातक एवं निर्यातक यहां से प्रशिक्षित व्यक्तियों की मांग करते हैं और निफ्ट उनकी इस मांग की पूर्ति करता है। निफ्ट फैशन के क्षेत्र में शोध, पर्यवेक्षण और सर्वेक्षण के द्वारा नए-नए आकर्षक डिजाइन भी तैयार करता है।
निफ्ट में 6 नए डिप्लोमा कोर्सेज की व्यवस्था है। ये हैं- डिजाइनिंग, फैशन डिजाइनिंग (दोनों की अवधि तीन वर्ष), मर्चेन्डाइजिंग और मार्कीटिंग (दो वर्ष का डिप्लोमा) के अंतर्गत वस्त्र व्यवसाय की जानकारी दी जाती है।
यह एक स्तरीय डिप्लोमा है। गारमैंट मैन्युफैक्चरिंग टैक्रोलॉजी (दो वर्ष का कोर्स) के अंतर्गत उत्पादन कला का ज्ञान कराया जाता है। इसके लिए स्नातक डिग्री जरूरी है। लैदर गारमैंट टैक्रोलॉजी करने वाले स्टाइलिस्ट लैदर डिजाइनर का धंधा अपना सकते हैं।
इनके लिए चयन प्रक्रिया अखिल भारतीय परीक्षा के आधार पर ही आयोजित होती है। सफल होने पर ही इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है। लेडी इरविन कालेज, नई दिल्ली में ‘क्रिएटिव कम्प्यूटर सैंटर’ का निर्माण हुआ है, जहां कम्प्यूटर की मदद से फैशन विषयक विभिन्न डिप्लोमा कोर्सों की व्यवस्था की गई है। इसमें कम्प्य्टूर एडिड फैशन डिजाइनिंग कोर्स, कम्प्यूटर एडिड टैक्सटाइल डिजाइनिंग कोर्स, कम्प्यूटर एडिड इंटीरियर एंड लैंडस्केप डिजाइनिंग कोर्स, कम्प्यूटर एडिड ग्राफिक्स एंड मल्टीमीडिया प्रशिक्षण हैं। इन कोर्सिज की अवधि पांच मास है। इनमें एडवांस कोर्स की भी व्यस्था है जिसकी अवधि एक वर्ष है।
इन कोर्सिज के लिए पंजीकरण हर साल होता है। सीट मिलने पर सूचना मिल जाती है। पांच शिफ्ट में यहां प्रशिक्षण होता है। यह शिफ्ट दो-दो घंटे की होती है। आवेदन पत्र में अपनी सुविधा के समय का उल्लेख किया जा सकता है।