रोजगार के बाजार में मंदी के बीच अधिकतर जॉब शिक्षा के क्षेत्र में है। इसके बाद स्वास्थ्य और इंफ्रा स्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में इंजीनियर्स की आवश्यकता है। यह बात एसोचैम के सर्वे में सामने आई है। सर्वे में यह भी खुलासा हुआ है कि अखबारों में दिए जा रहे नौकरी के विज्ञापनों में से लगभग पचास प्रतिशत शिक्षण के क्षेत्र से जुड़े होते है।
इस रुझान को अल्पकालिक कह सकते है, क्योंकि फिलहाल नए सत्र के लिए स्कूल कॉलेजों में शिक्षकों की भर्ती कर फैकल्टी के पदों को भरना चाहते है। स्वास्थ्य सेवाओं में नौकरियों के भरने के लिए रिक्तियों को बार बार देखा जा रहा है। इन प्रस्तावित नौकरियों में फर्मा कम्पनियों में सैल्स और मार्केटिंग की है। साथ ही छोटी संख्या में रिसर्च के क्षेत्र में भी जॉब है। मगर स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने वाले अस्पतालों, पॉलीक्लिनिक, डायगनोस्टिक सैंटरों में प्रयाप्त मात्रा में जॉब है।
इस रुझान को अल्पकालिक कह सकते है, क्योंकि फिलहाल नए सत्र के लिए स्कूल कॉलेजों में शिक्षकों की भर्ती कर फैकल्टी के पदों को भरना चाहते है। स्वास्थ्य सेवाओं में नौकरियों के भरने के लिए रिक्तियों को बार बार देखा जा रहा है। इन प्रस्तावित नौकरियों में फर्मा कम्पनियों में सैल्स और मार्केटिंग की है। साथ ही छोटी संख्या में रिसर्च के क्षेत्र में भी जॉब है। मगर स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने वाले अस्पतालों, पॉलीक्लिनिक, डायगनोस्टिक सैंटरों में प्रयाप्त मात्रा में जॉब है।
शिक्षा के क्षेत्र में कॉलेजों के मुकाबले प्राइवेट स्कूल जॉब के लिए कॉलेजों से ज्यादा विज्ञापन कर रहे हैं क्योंकि स्कूलों का शिक्षण सत्र अप्रैल से शुरु हो जाएगा, जबकि कॉलेजों का जुलाई-अगस्त में होगा। यह स्थिति कुछ माह बाद उच्च शिक्षा में देखने मिलेगी। कॉलेजों में अधिकतर पोस्ट के लिए पीएचडी और नेट आवश्यक है, तो स्कूलों में पोस्ट ग्रेजुएट, बी.एड या एमएड विषय विशेष में होना चाहिए। नौकरी के क्षेत्र में कॉरपोरेट जगत फिलहाल नया निवेश करने से कतरा रहा है। जिससे जॉब की स्थिति उत्साहजनक नहीं है और आम चुनावों तक ऐसा ही रहने की संभावना है ।इसके साथ ही 2014 की दूसरी तिमाही से पहले बदलाव की ज्यादा संभावना नहीं दिख रही है।