एक ऐसे करियर की कल्पना कीजिए जिसमें आपको ब्रह्मांड के जन्म या किसी तारे की मौत का गवाह बनने का अवसर मिले। खगोलविद् वे वैज्ञानिक हैं जो चांद, ग्रह, तारे, आकाशगंगाओं जैसे खगोलीय पिंडों का अध्ययन करते हैं। वे इनके जन्म, प्रकृति, रासायनिक एवं भौतिक संरचना आदि पर शोध करके महत्वपूर्ण जानकारी जुटाते हैं।
नवीन तकनीकों के आगमन से इस क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास हुआ है और अब खगोलविद् अत्याधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल करके सुदूर ब्रह्मांड के रहस्यों से पर्दा उठा रहे हैं।
खगोल विज्ञान की शिक्षा का इतिहास भारत में काफी पुराना है। भारत में प्राचीनकाल से पहले इसकी शिक्षा दी जाती रही है। ऐसे कई लोग हैं जो इन तारों तथा खगोलीय हलचलों के प्रति रोमांचित होते रहते हैं। आप में से कई लोग एक खगोलविद् बनकर अपनी जिज्ञासा शांत करने की इच्छा रखते होंगे। अधिकांश लोग यह मानते हैं कि खगोलविद् रात को अपना सारा समय टैलीस्कोप में देखते हुए बिताते होंगे, जबकि यह सच्चाई नहीं है। आधुनिक तकनीक ने इस क्षेत्र को और अधिक रोमांचक तथा सरल बना दिया है।
पाठ्यक्रम
खगोल विज्ञान एक बहुत ही रोचक क्षेत्र है। इसमें विज्ञान के विभिन्न पहलुओं (खासकर भौतिक विज्ञान से संबंधित) को समझना आवश्यक हो जाता है। इसके अंतर्गत कई तरह की शाखाएं सम्मिलित हैं। जैसे एस्ट्रोफिजिक्स, एस्ट्रोमैटेरोलॉजी, एस्ट्रोबायोलॉजी, एस्ट्रोमीट्री, एस्ट्रोजियोलॉजी आदि।
योग्यता
खगोलविद् बनने के इच्छुक छात्रों को बारहवीं की परीक्षा गणित व भौतिक विज्ञान सहित उत्तीर्ण होना अनिवार्य है क्योंकि खगोल विज्ञान में बहुत-सा भौतिक विज्ञान का सम्मिश्रण है। बैचलर डिग्री मिलने के पश्चात आपके पास मास्टर्स तथा पी.एच.डी. स्तर के तमाम विकल्प आ जाते हैं। अधिकांश ऐसे संस्थान हैं जो खगोल विज्ञान में विशिष्ट कोर्स भी छात्रों को मुहैया कराते हैं। साफ तौर पर कहा जा सकता है कि खगोल विज्ञान का पाठ्यक्रम करने के लिए सबसे उपयुक्त योग्यता बी.एससी. (पी.सी.एम.) है। इसी के बाद खगोल विज्ञान में करियर बनाने का सपना पूरा हो सकता है।
संभावनाएं
एक खगोलविद् के पास रोजगार के कई अवसर हैं। खगोल विज्ञान की प्रयोगशाला में कार्य करने से लेकर विश्वविद्यालयों में अध्यापन तक सभी इनके कार्य क्षेत्र के अंतर्गत आता है। चूंकि खगोल विज्ञान बहुत ही प्रचलित क्षेत्र है, अत: न सिर्फ विश्वविद्यालयों, बल्कि नासा जैसे स्पेस सैंटर में भी कार्य किया जा सकता है। कुछ लोग अखबारों तथा मैगजीन में फ्रीलांस राइटर के रूप में कार्य करते हैं, जबकि कुछ विदेशों में किस्मत आजमाते हैं। इस क्षेत्र में विदेशों में भी रोजगार की प्रचुरता है।
पारिश्रमिक
इस क्षेत्र की लोकप्रियता का एक प्रमुख कारण इसमें दिया जाने वाला पारिश्रमिक भी है। शोध कार्यों के दौरान एक जूनियर रिसर्चर को 10 हजार रुपए प्रतिमाह से अधिक तथा सीनियर रिसर्चर को 15 हजार तक प्रतिमाह के करीब मिलते हैं। साथ ही इन रिसर्चरों को होस्टल अथवा आवास सुविधा, मैडीकल यात्रा एवं अन्य भत्ता भी मिलता है। शोध पूरा कर लेने के बाद इन्हें कई संस्थानों में कार्य करने के लिए अवसर मिलते हैं। कई ऐसी सरकारी अथवा गैर-सरकारी संस्थाएं हैं जो विभिन्न वैज्ञानिक ग्रेडों में एस्ट्रोनॉमर्स (खगोलविद्) को रखती हैं। इस दौरान उनकी सैलरी एवं भत्ते उच्चकोटि के होते हैं।
प्रमुख संस्थान
1 इंडियन इंस्टीच्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स, कोरमंगला, बेंगलूर
2 आंध्र यूनिवर्सिटी, विशाखापट्टनम
3 सैंटर फॉर एडवांस स्टडी इन एस्ट्रोनॉमी (उस्मानिया यूनिवर्सिटी), हैदराबाद
4 एस.एन. बोस नैशनल सैंटर फॉर बेसिक साइंसेज, सैक्टर-3, सॉल्ट लेक, कोलकाता
5 टाटा इंस्टीच्यूट ऑफ फंडामैंटल रिसर्च, होमी भाभा रोड, मुम्बई
6 रेडियो एस्ट्रोनॉमी सैंटर, पो. बॉ. नं. 8, तमिलनाडु
नवीन तकनीकों के आगमन से इस क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास हुआ है और अब खगोलविद् अत्याधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल करके सुदूर ब्रह्मांड के रहस्यों से पर्दा उठा रहे हैं।
खगोल विज्ञान की शिक्षा का इतिहास भारत में काफी पुराना है। भारत में प्राचीनकाल से पहले इसकी शिक्षा दी जाती रही है। ऐसे कई लोग हैं जो इन तारों तथा खगोलीय हलचलों के प्रति रोमांचित होते रहते हैं। आप में से कई लोग एक खगोलविद् बनकर अपनी जिज्ञासा शांत करने की इच्छा रखते होंगे। अधिकांश लोग यह मानते हैं कि खगोलविद् रात को अपना सारा समय टैलीस्कोप में देखते हुए बिताते होंगे, जबकि यह सच्चाई नहीं है। आधुनिक तकनीक ने इस क्षेत्र को और अधिक रोमांचक तथा सरल बना दिया है।
पाठ्यक्रम
खगोल विज्ञान एक बहुत ही रोचक क्षेत्र है। इसमें विज्ञान के विभिन्न पहलुओं (खासकर भौतिक विज्ञान से संबंधित) को समझना आवश्यक हो जाता है। इसके अंतर्गत कई तरह की शाखाएं सम्मिलित हैं। जैसे एस्ट्रोफिजिक्स, एस्ट्रोमैटेरोलॉजी, एस्ट्रोबायोलॉजी, एस्ट्रोमीट्री, एस्ट्रोजियोलॉजी आदि।
योग्यता
खगोलविद् बनने के इच्छुक छात्रों को बारहवीं की परीक्षा गणित व भौतिक विज्ञान सहित उत्तीर्ण होना अनिवार्य है क्योंकि खगोल विज्ञान में बहुत-सा भौतिक विज्ञान का सम्मिश्रण है। बैचलर डिग्री मिलने के पश्चात आपके पास मास्टर्स तथा पी.एच.डी. स्तर के तमाम विकल्प आ जाते हैं। अधिकांश ऐसे संस्थान हैं जो खगोल विज्ञान में विशिष्ट कोर्स भी छात्रों को मुहैया कराते हैं। साफ तौर पर कहा जा सकता है कि खगोल विज्ञान का पाठ्यक्रम करने के लिए सबसे उपयुक्त योग्यता बी.एससी. (पी.सी.एम.) है। इसी के बाद खगोल विज्ञान में करियर बनाने का सपना पूरा हो सकता है।
संभावनाएं
एक खगोलविद् के पास रोजगार के कई अवसर हैं। खगोल विज्ञान की प्रयोगशाला में कार्य करने से लेकर विश्वविद्यालयों में अध्यापन तक सभी इनके कार्य क्षेत्र के अंतर्गत आता है। चूंकि खगोल विज्ञान बहुत ही प्रचलित क्षेत्र है, अत: न सिर्फ विश्वविद्यालयों, बल्कि नासा जैसे स्पेस सैंटर में भी कार्य किया जा सकता है। कुछ लोग अखबारों तथा मैगजीन में फ्रीलांस राइटर के रूप में कार्य करते हैं, जबकि कुछ विदेशों में किस्मत आजमाते हैं। इस क्षेत्र में विदेशों में भी रोजगार की प्रचुरता है।
पारिश्रमिक
इस क्षेत्र की लोकप्रियता का एक प्रमुख कारण इसमें दिया जाने वाला पारिश्रमिक भी है। शोध कार्यों के दौरान एक जूनियर रिसर्चर को 10 हजार रुपए प्रतिमाह से अधिक तथा सीनियर रिसर्चर को 15 हजार तक प्रतिमाह के करीब मिलते हैं। साथ ही इन रिसर्चरों को होस्टल अथवा आवास सुविधा, मैडीकल यात्रा एवं अन्य भत्ता भी मिलता है। शोध पूरा कर लेने के बाद इन्हें कई संस्थानों में कार्य करने के लिए अवसर मिलते हैं। कई ऐसी सरकारी अथवा गैर-सरकारी संस्थाएं हैं जो विभिन्न वैज्ञानिक ग्रेडों में एस्ट्रोनॉमर्स (खगोलविद्) को रखती हैं। इस दौरान उनकी सैलरी एवं भत्ते उच्चकोटि के होते हैं।
प्रमुख संस्थान
1 इंडियन इंस्टीच्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स, कोरमंगला, बेंगलूर
2 आंध्र यूनिवर्सिटी, विशाखापट्टनम
3 सैंटर फॉर एडवांस स्टडी इन एस्ट्रोनॉमी (उस्मानिया यूनिवर्सिटी), हैदराबाद
4 एस.एन. बोस नैशनल सैंटर फॉर बेसिक साइंसेज, सैक्टर-3, सॉल्ट लेक, कोलकाता
5 टाटा इंस्टीच्यूट ऑफ फंडामैंटल रिसर्च, होमी भाभा रोड, मुम्बई
6 रेडियो एस्ट्रोनॉमी सैंटर, पो. बॉ. नं. 8, तमिलनाडु