किताबों
की दुनिया व्यक्ति को केवल ज्ञान का भंडार ही नहीं उपलब्ध कराती बल्कि
किताबें किसी भी व्यक्ति की वे साथी हैं जिनके कारण व्यक्ति स्वयं को कभी
अकेला महसूस नहीं करता। पुस्तकें अथवा किताबें किसी व्यक्ति के लिए ज्ञान
का वह भंडार हैं जिसके कारण व्यक्ति स्वयं को अत्यधिक सहज एवं ज्ञान से
परिपूर्ण पाता है।
पुस्तकें आज केवल ज्ञान प्राप्ति का उत्तम साधन ही नहीं बल्कि आय के सृजन का भी उम्दा स्रोत बनती जा रही हैं। देश में शिक्षा के प्रचार-प्रसार के पश्चात तो पुस्तकों से संबंधित रोजगार का वर्चस्व और भी अधिक हो गया है। आज किसी भी व्यक्ति के लिए अपनी इच्छानुसार ज्यादा से ज्यादा पुस्तकें खरीद पाना संभव नहीं है और व्यक्ति की इन्हीं इच्छाओं की पूर्ति करती है ‘लाइब्रेरी’। लाइब्रेरी पुस्तक ज्ञान का वह भंडार केन्द्र है, जहां से किताबें तथा पत्र-पत्रिकाएं आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं। अब तो सरकार की ओर से भी प्रत्येक क्षेत्रों में पुस्तकालयों अथवा लाइब्रेरियों की स्थापना की जा रही है।
रोजगार की संभावनाएं
स्कूलों, कॉलेजों एवं सार्वजनिक निगमों में तो आज लाइब्रेरी होती ही हैं इसलिए लाइब्रेरी की संख्या बढऩे के साथ ही इसमें काम करने वाले लोगों की मांग भी बढ़ी है। लाइब्रेरी का प्रबंधन प्रशिक्षित लोगों के हाथ में होता है। एक बड़ी लाइब्रेरी में काम करने वालों की संख्या काफी अधिक होती है।
एक अच्छी लाइब्रेरी में लाइब्रेरियन के साथ-साथ असिस्टैंट, डॉक्यूमैंट ऑफिसर, काऊंटर असिस्टैंट आदि स्टाफ होता है। अब तो देश के बड़े-बड़े पुस्तकालयों को कम्प्यूटर नैटवर्क के जरिए भी जोड़ा जा रहा है ताकि पाठकों को आसानी से मैटर उपलब्ध हो सके। विषयों की बढ़ती जटिलता के कारण अब यह पहले की भांति सरल नहीं रह गया है।
कार्यक्षेत्र
किताबों की खरीद, विषयों के अनुसार उनका पृथककरण अथवा कैटेगराइजेशन, इनकी कैटलॉगिंग रखने की जगह का उचित प्रकार से निर्धारण आदि करने के मूल में ही पुस्तकालय विज्ञान का सार है।
योग्यता
इस क्षेत्र में स्नातक होने के बाद आ सकते हैं। लाइब्रेरी विज्ञान की पढ़ाई देश के विभिन्न संस्थानों में होती है।
पाठ्यक्रम
इसमें मुख्य रूप से बैचलर ऑफ लाइब्रेरी साइंस (बी.लिब.) कराया जाता है। इसके अतिरिक्त कई विश्वविद्यालयों में एम.लिब. और पीएच.डी. की भी सुविधा है। इसमें प्रवेश लिखित परीक्षा के आधार पर होता है। लिखित परीक्षा में सामान्य ज्ञान से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं।
यह क्षेत्र विशेष रूप से महिलाओं के लिए अधिक आकर्षक होता है। महिलाएं इसमें बढ़-चढ़ कर भाग लेती हैं। इसमें नौकरी की संभावनाएं भी अधिक हैं। संदर्भ सहायक और प्रलेखन सहायक आदि पदों पर भी नियुक्ति बी.लिब. के छात्रों की ही होती है। यह एक वर्षीय कोर्स है।
संस्थान
1 इंदिरा गांधी मुक्त विश्वविद्यालय, मैदान गढ़ी, नई दिल्ली
2 बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी, उत्तर प्रदेश
3 जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय, जामिया नगर, नई दिल्ली
4 दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली
5 मुम्बई विश्वविद्यालय, एम जी रोड, फोर्ट, मुम्बई, महाराष्ट्र
6 शिवाजी विश्वविद्यालय, विद्या नगर, ग्वालियर, मध्य प्रदेश
7 बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर, बिहार
पुस्तकें आज केवल ज्ञान प्राप्ति का उत्तम साधन ही नहीं बल्कि आय के सृजन का भी उम्दा स्रोत बनती जा रही हैं। देश में शिक्षा के प्रचार-प्रसार के पश्चात तो पुस्तकों से संबंधित रोजगार का वर्चस्व और भी अधिक हो गया है। आज किसी भी व्यक्ति के लिए अपनी इच्छानुसार ज्यादा से ज्यादा पुस्तकें खरीद पाना संभव नहीं है और व्यक्ति की इन्हीं इच्छाओं की पूर्ति करती है ‘लाइब्रेरी’। लाइब्रेरी पुस्तक ज्ञान का वह भंडार केन्द्र है, जहां से किताबें तथा पत्र-पत्रिकाएं आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं। अब तो सरकार की ओर से भी प्रत्येक क्षेत्रों में पुस्तकालयों अथवा लाइब्रेरियों की स्थापना की जा रही है।
रोजगार की संभावनाएं
स्कूलों, कॉलेजों एवं सार्वजनिक निगमों में तो आज लाइब्रेरी होती ही हैं इसलिए लाइब्रेरी की संख्या बढऩे के साथ ही इसमें काम करने वाले लोगों की मांग भी बढ़ी है। लाइब्रेरी का प्रबंधन प्रशिक्षित लोगों के हाथ में होता है। एक बड़ी लाइब्रेरी में काम करने वालों की संख्या काफी अधिक होती है।
एक अच्छी लाइब्रेरी में लाइब्रेरियन के साथ-साथ असिस्टैंट, डॉक्यूमैंट ऑफिसर, काऊंटर असिस्टैंट आदि स्टाफ होता है। अब तो देश के बड़े-बड़े पुस्तकालयों को कम्प्यूटर नैटवर्क के जरिए भी जोड़ा जा रहा है ताकि पाठकों को आसानी से मैटर उपलब्ध हो सके। विषयों की बढ़ती जटिलता के कारण अब यह पहले की भांति सरल नहीं रह गया है।
कार्यक्षेत्र
किताबों की खरीद, विषयों के अनुसार उनका पृथककरण अथवा कैटेगराइजेशन, इनकी कैटलॉगिंग रखने की जगह का उचित प्रकार से निर्धारण आदि करने के मूल में ही पुस्तकालय विज्ञान का सार है।
योग्यता
इस क्षेत्र में स्नातक होने के बाद आ सकते हैं। लाइब्रेरी विज्ञान की पढ़ाई देश के विभिन्न संस्थानों में होती है।
पाठ्यक्रम
इसमें मुख्य रूप से बैचलर ऑफ लाइब्रेरी साइंस (बी.लिब.) कराया जाता है। इसके अतिरिक्त कई विश्वविद्यालयों में एम.लिब. और पीएच.डी. की भी सुविधा है। इसमें प्रवेश लिखित परीक्षा के आधार पर होता है। लिखित परीक्षा में सामान्य ज्ञान से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं।
यह क्षेत्र विशेष रूप से महिलाओं के लिए अधिक आकर्षक होता है। महिलाएं इसमें बढ़-चढ़ कर भाग लेती हैं। इसमें नौकरी की संभावनाएं भी अधिक हैं। संदर्भ सहायक और प्रलेखन सहायक आदि पदों पर भी नियुक्ति बी.लिब. के छात्रों की ही होती है। यह एक वर्षीय कोर्स है।
संस्थान
1 इंदिरा गांधी मुक्त विश्वविद्यालय, मैदान गढ़ी, नई दिल्ली
2 बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी, उत्तर प्रदेश
3 जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय, जामिया नगर, नई दिल्ली
4 दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली
5 मुम्बई विश्वविद्यालय, एम जी रोड, फोर्ट, मुम्बई, महाराष्ट्र
6 शिवाजी विश्वविद्यालय, विद्या नगर, ग्वालियर, मध्य प्रदेश
7 बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर, बिहार