ऐसा नजरिया अपनाएंगे तो सफलता आपके इशारों पर नाचेगी

बात पिछले साल की है। परीक्षाएं सिर पर थीं। बल्लू उदास था। सोच रहा था कि यदि वह फिर फेल हो गया तो अपने दोस्तों को क्या मुंह दिखाएगा?

बल्लू मन ही मन बातें कर रहा था, ‘‘पापा सुबह ही उठा लेते हैं और सब्जी मंडी में अपने साथ ले जाते हैं। मुझे समझ नहीं आती कि मैं सुबह उठकर पढूं या उनके साथ ठेले पर 2-2 घंटे सब्जी बेचने के लिए चीख चीख कर आवाजें लगाया रहूं? परीक्षा के दिन सिर पर हैं। मेरे दोस्त सुबह उठकर 2-2 घंटे पढ़ते हैं। लेकिन मैं। जब स्कूल से घर आता हूं, तत्काल पापा का फोन आ जाता है मम्मी के पास बल्लू को जल्दी भेजो। साथ काम कराना है।’’

मुझे समझ नहीं आता कि पापा मुझ से इतनी ऊंची-ऊंची आवाज में चीखने के लिए क्यों कहते रहते हैं, ‘‘आलू ले लो, गोभी ले लो, प्याज ले लो। गाजर ले लो।’’

मुझे पापा पर भी गुस्सा आता है कि मेरे एेसे चीखने से क्या सभी ग्राहक उन के पास आ जाएंगे? जिस ग्राहक ने कोई सब्जी खरीदनी है, ‘‘वह ठेले पर पड़ी सब्जी देखकर खुद नहीं आ जाएगा? पर पापा को कौन समझाए।’’

 लेकिन फिर यह सोच कर शांत होने की कोशिश करता कि पापा कोई खास पढ़े लिखे नहीं हैं। इसलिए पढ़ाई के महत्व को नहीं समझते। बल्लू सुबह होते ही पापा के साथ सब्जी मंडी में जाकर सब्जी लाद कर लाता। फिर डेढ़-दो घंटे के बाद घर आकर स्कूल जाने के लिए फटाफट तैयार होता। स्कूल से आता तो मम्मी-पापा का खाना बनाकर देती। बल्लू फिर बाजार में जाकर उन्हें खाना देता। जहां उसके पापा ठेला लेकर खड़े होते थे वह स्थान घर से दूर था।

‘‘मैं इस बार भी पास नहीं हो पाऊंगा। पापा ने मुझे पिछले साल चिढ़ाया था जब मैं फेल हो गया था। लेकिन इस में मेरा क्या कसूर था ? अपने साथ चार-चार घंटे काम भी करवाते रहते हैं। पढऩे के लिए समय भी तो चाहिए। क्या बिना पढ़े अच्छे नंबर आ सकते हैं ? मैं फिर फेल हो जाऊंगा।’’

‘‘अरे कहां खोए हुए हो? लगाआे पांच-सात आवाजें।’’ बैंच पर बैठे बल्लू को पापा ने एकदम कंधे से झिंझोड़ा तो बल्लू एकदम घबरा सा गया और आवाजें लगाने लगा, ‘‘आलू ले लो, गोभी ले लो, प्याज ले लो। गाजर ले लो।’’

बल्लू का परीक्षा परिणाम निकला। वही बात हुई जिसका बल्लू को डर था। वह फिर फेल हो गया। दूसरे साथी हंसते हुए एक-दूसरे को बधाई दे रहे थे लेकिन स्कूल के मैदान के एक  कोने में बैठा वह रो रहा था। उसका दिल करता था कि वह किसी को मुंह न दिखाए और कहीं जाकर छिप जाए।

रात हो गई थी लेकिन बल्लू घर न आया। उसे इधर-उधर ढूंढा गया लेकिन कहीं
न मिला। गली मोहल्ले में शोर मच गया। बल्लू के दोस्तों और रिश्तेदारों से पता किया गया। लेकिन कोई पता न चला।

‘‘मैं अब घर नहीं जाऊंगा। मैं दूसरी बार फेल हो गया हूं। मैं अब किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहा।’’ बल्लू सोच रहा था। गांव को जाने वाली सड़क के किनारे पर बैठा वह इधर उधर देख रहा था।तभी बल्लू के पास एक गाड़ी आकर रुकी। बल्लू एकदम ठिठक-सा गया।’’

‘‘अरे बेटा, इतनी रात में तुम अकेले सड़क के किनारे बैठे क्या कर रहे हो?’’ कार वाले ने कार से उतर कर उससे पूछा।

बल्लू चुप रहा।
उसका चेहरा भांप कर कार वाला व्यक्ति फिर बोला, ‘‘मुझे मालूम है तुम घर से नाराज होकर आए हो ? सच बताआे बेटा क्या बात है?’’

कार वाले व्यक्ति को इतने प्यार से बोलता देखकर बल्लू को सच बताना ही पड़ा।
असलियत जानकर कार वाला व्यक्ति हंस पड़ा। बोला, ‘‘अरे लल्लू, मैं तुम को बताता हूं कि मैं भी दो बार फेल हुआ था आठवीं कक्षा में लेकिन मैं घर छोड़ कर नहीं भागा। यह कायरता है। जीवन में आई किसी मुश्किल से घबराना हार मानना है। मैंने तीसरी बार परीक्षा दी थी और अपनी मेहनत से अच्छे अंक लेकर पास हुआ था। अब मैं एक आफिस में नौकरी करता हूं और मेरी तनख्वाह चालीस हजार रुपये महीना हैं। मेरी मानो, दृढ़- निश्चय धारण करो। फिर जुट जाआे और देखो तुम्हारा आत्मविश्वास क्या रंग लाता है। कहो तो छोड़ कर आऊं घर?’’

‘‘धन्यवाद अंकल। आप ने मेरी दुविधा दूर कर दी। मैं तो परेशान होकर ही घर न जाने से कतरा रहा था लेकिन आप की बातों ने मुझे शक्ति दी है। मैं फिर पढूंगा।’’ बल्लू बोला।

बल्लू घर वापस लौटने लगा। रास्ते में उसे दूर से आते हुए दो व्यक्ति दिखाई दिए। बल्लू को कुछ शक-सा हुआ। दोनों व्यक्ति ही जाने पहचाने से लग रहे थे। पास आए तो उसने पहचान लिया। उसके पापा पप्पू अंकल के साथ उसे ही इधर-उधर ढूंढते हुए फिर रहे थे।

‘‘अरे बल्लू तुम यहां? हम तो तुम्हें दोपहर के ढूंढ रहे हैं। कहां छिप गये थे?’’

बल्लू अपनी आंखें पोंछने लगा। यह देखकर पापा का मन भी भर आया। बोले, ‘‘बल्लू बेटा, तुम दोबारा फेल हो गए हो। कोई बात नहीं। तुम अकेले नहीं हो जो फेल हुए हो। दुनिया में बहुत से बच्चे फेल होते हैं। कोई अपनी गलती से, तो कोई किसी मजबूरी से। मुझे इस बात का अहसास है कि मैं अपने लालचवश तुम से ठेले पर काम करवाता रहा। यह मेरी भूल थी। अब तुम केवल पढ़ोगे। मैं ज्यादा धन कमाने के लिए तुम्हारे बचपन का सहारा नहीं लूंगा।’’

यह सुनकर बल्लू बोला, ‘‘पापा, मुझे भी एक अंकल ने ऐसी ही सीख दी है कि जिंदगी में हार मिले तो कभी घबराकर गलत कदम नहीं उठाना चाहिए। मैं फिर स्कूल में दाखिल होऊंगा और फिर देखना पापा। आप को यकीन दिलाता हूं, सफल होकर दिखाऊंगा। यह मेरा आप से वादा है।’’

इस वर्ष बल्लू की परीक्षा का परिणाम आया। वह अपनी कक्षा में तीसरे स्थान पर आया था। बल्लू बहुत खुश था। मम्मी-पापा भी खुश थे।

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