बनिए ग्लैमर की दुनिया के आका-फिल्म निर्देशक


फिल्मों का समाज से गहरा ताल्लुक है। फिल्मों में काम करने वाले सितारों की एक झलक भर पाने को जहां दुनिया दीवानी रहती है, वहीं निर्देशकों को भी कम लोकप्रियता नहीं मिलती। बल्कि दूसरे शब्दों में कहें तो कई निर्देशक ऐसे भी हैं जिनके साथ काम करने के लिए बड़े-बड़े सितारे भी तरसते हैं। निर्देशन का व्यवसाय आजकल ग्लैमर से परिपूर्ण कैरियर के रूप में विकसित हो रहा है। आज प्रशिक्षण की उच्चस्तरीय व्यवस्थाएं मुहैया होने के कारण युवाओं का इस क्षेत्र में प्रवेश आसान हो गया है। इस क्षेत्र में कैरियर बनाने के लिए नई पीढ़ी की युवतियां भी युवकों से पीछे नहीं हैं।
कलात्मक अभिरुचियों वाले युवक-युवतियों के लिए फिल्मों में निर्देशन का क्षेत्र एक बेहतरीन कैरियर हो सकता है। फिल्म निर्माण में इस्तेमाल की जाने वाली तकनीकों में उत्तरोत्तर विकास व दायरे के विस्तार ने इस क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के कैरियर की संभावनाओं में इजाफा किया है। आज बहुमुखी प्रतिभा व आकर्षक व्यक्तित्व वाले लोग फिल्म निर्देशन, अभिनय, एन्करिंग तथा फिल्म कथा लेखक के रूप में अपनी संभावनाओं व योग्यताओं को परख सकते हैं। फिल्मों तथा दूरदर्शन के माध्यम से हम जिन दृश्यों को क्षणभर में देखकर अपनी भली-बुरी टिप्पणी कर देते हैं, उन दृश्यों को सजीव बनाने में परदे के पीछे अनेक लोग जुटे रहते हैं। इन कथानकों व दृश्यों की प्रस्तुति के पीछे कुशल निर्देशक की सूझबूझ व योग्यता छिपी रहती है।
दरअसल, निर्देशक (डायरेक्टर) परदे के पीछे का कलाकार होता है। उसी के इशारे पर प्रेमालाप, मारधाड़, हिंसा, मिलन, जुदाई, सस्पेंस आदि के दृश्यों का फिल्मांकन होता है। फिल्म डायरेक्टर शॉट ओ.के. करता है। वास्तव में सूक्ष्मता से गौर करें तो यह कैरियर आलराउंडर किस्म का है।
आज सरकारी व निजी क्षेत्र में अनेक संस्थान फिल्म विधा से संबंधित विभिन्न पाठï्यक्रम संचालित कर रहे हैं। इस क्षेत्र में अपना कैरियर बनाने के लिए विचार कर रहे युवक-युवतियों को विधिवत रूप से प्रशिक्षण लेने की आवश्यकता है।
एक जमाना था जब पृथ्वीराज कपूर तथा राजकपूर सरीखे महान फिल्मकार स्वयं गलती करके सीखते थे, तब इस तरह के प्रशिक्षण केंद्र या तो अस्तित्व में ही नहीं थे या फिर उनमें तकनीकी रूप से इतनी समृद्धता का अभाव था। या यूं कहें कि तब भारतीय सिनेमा भी अपने शैशवकाल से गुजर रहा था। लेकिन आज विदेशी पैटर्न को ध्यान में रखते हुए न सिर्फ फिल्में ही बनाई जा रही हैं अपितु स्टंट व अन्य तकनीकी फार्मूलों पर भी धड़ल्ले से अमल किया जा रहा है।
फिल्मों के प्रति अपनी वास्तविक रुचि रखने वाले युवा इस क्षेत्र में बहुत कुछ कर सकते हैं। डायरेक्शन कोर्स कंपलीट करने के उपरांत उनके समक्ष कई विकल्प मौजूद होते हैं जिनमें से वो इतनी इच्छा के मुताबिक चयन कर सकते हैं। दूरदर्शन धारावाहिकों, सैटेलाइट चैनलों के लिए तैयार होने वाले कार्यक्रमों तथा फिल्म निर्माण के कार्य में जुटी कंपनियों में वे बतौर सहायक निर्देशक अपने कैरियर का श्रीगणेश कर सकते हैं।
स्वतंत्र रूप से आप कार्यक्रम बनाकर निजी चैनल्स अथवा दूरदर्शन को दे सकते हैं अथवा मुंबई में स्थापित विभिन्न फिल्म कंपनियों के लिए काम कर सकते हैं। यही नहीं रंगमंच के क्षेत्र में आपके लिए बेहतर विकल्प खुले होंगे, आप वहां भी अपने नाम व काम का लोहा मनवा सकते हैं। पृष्ठïभूमि से आप नाटकों, झलकियों, संगीत-समारोहों आदि का आयोजन तथा निर्देशन कर सकते हैं तथा रंगमंचीय संस्थाओं का गठन करके अपने लिए वांछित संभावनाएं खोज सकते हैं।
आज पूरे देश में पचास से भी ऊपर सरकारी व गैर सरकारी संस्थान फिल्म विधा से जुड़े अनेक पाठï्यक्रम चला रहे हैं। कई संस्थान फिल्म निर्देशन में डिप्लोमा अथवा सर्टिफिकेट कोर्स संचालित कर रहे हैं। लेकिन इनमें से अनेक निजी संस्थान विश्वसनीय नहीं हैं। जबसे स्थानीय स्तर पर क्षेत्रय भाषाओं में टी.वी. फिल्मों तथा धारावाहिकों के निर्माण की स्वीकृति व अनुमति केंद्र सरकार ने दी है, तब से क्षेत्रीय स्तर पर निर्देशकों की मांग में भी इजाफा हो गया है।
इस क्षेत्र में आने के इच्छुक अभ्यर्थी की शैक्षिक योग्यता कम-से-कम स्नातक होनी चाहिए। सरकारी क्षेत्र के संस्थान 25 वर्ष तक की उम्रवाले युवक-युवतियों को चुनते हैं। निजी क्षेत्र के संस्थानों में अमूमन उम्र की कोई सीमा नहीं है। अभिनय व नाटï्यकला में आपकी दिलचस्पी अथवा अनुभव आपके कैरियर के लिए अतिरिक्त योग्यता के रूप में काम आएंगे। जुझारू प्रवृत्ति, संघर्षशील व्यक्तित्व तथा आशावादी विचारधारा के साथ इस क्षेत्र की मुश्किलों पर काबू पाया जा सकता है। चूंकि इस क्षेत्र में विविधता व अनिश्चितता का वर्चस्व है, अत: आत्मविश्वास तथा दृढ़ संकल्प व्यक्ति की अमूल्य निधि होती है, जो उसे पग-पग पर सहारा देती है।
रोजगारोन्मुखी पाठï्यक्रम के लिए पुणे में स्थापित भारतीय फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीटï्यूट एक चर्चित व प्रतिष्ठिïत संस्थान के रूप में जाना जाता है। यहां त्रिवर्षीय 'फिल्म निर्देशनÓ कोर्स चलाया जाता है। जिसमें एक वर्ष सामान्य पाठï्यक्रम तथा दो वर्ष विशिष्टï पाठï्यक्रम के लिए सुनिश्चित किए जाते हैं। संस्थान देशभ्र से मात्र आठ उम्मीदवारों का चयन करता है जबकि दो सीटें विदेशी विद्यार्थियों के लिए आरक्षित होती हैं। इस प्रकार संस्थान कुल 10 उम्मीदवारों का प्रशिक्षण हेतु चयन करता है। चयन परीक्षा व साक्षात्कार में सफल उम्मीदवार को प्रवेश दे दिया जाता है।
फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीटï्यूट ऑफ तमिलनाडु, चेन्नई भी डायरेक्शन, सिनेमेटोग्राफी तथा फिल्म एडीटिंग में डिप्लोमा तथा अभिनय में सर्टिफिकेट कोर्स संचालित करता है। इस संस्थान में अभिनय के लिए दसवीं तथा बाकी कोर्सों में प्रवेश के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता स्नातक है। अभिनय एक वर्षीय तथा शेष पाठï्यक्रम त्रिवर्षीय अवधि के हैं।
इंस्टीटï्यूट ऑफ फिल्म टेक्नॉलोजी, चेन्नई भी फिल्म प्रोडक्शन तथा निर्देशन में त्रिवर्षीय डिप्लोमा पाठï्यक्रम चलाता है। यहां 18 से 24 वर्ष उम्र वाले युवक-युवतियों का चयन किया जाता है। शैक्षिक योग्यता के तहत किसी भी विषय में स्नातक होना आवश्यक है।
राष्टï्रीय नाटï्य विद्यालय भी निर्देशन में डिप्लोमा पाठï्यक्रम चलाता है। यहां हर वर्ष मार्च, अप्रैल में आवेदन प्रक्रिया प्रारंभ होती है। प्रवेश परीक्षा तथा साक्षात्कार के आधार पर उम्मीदवारों का चयन किया जाता है। राष्टï्रीय राजधानी क्षेत्र स्थित 'ड्रामा सिने लिंकÓ भी छह माह का निर्देशन डिप्लोमा पाठï्यक्रम चलाता है। बाहर के अभ्यर्थियों के लिए यहां आवासीय सुविधा भी उपलब्ध है। कुल 20 सीटों के लिए चयनित अभ्यर्थियों को पूना संस्थान से आए मशहूर लोग प्रशिक्षण प्रदान करते हैं। प्रशिक्षण के बाद प्लेसमेंट (नौकरी) की भी गारंटी है।
फिल्म सिटी नोएडा स्थित एशियन अकादमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन भी त्रैमासिक डायरेक्शन डिप्लोमा कोर्स संचालित करता है। यहां के अनेक लोग आज फिल्मों व धारावाहिकों की दुनिया में कार्यरत हैं।
प्रशिक्षण संस्थान
सत्यजीत रे फिल्म एंड टी.वी. इंस्टीटï्यूट, ईस्टर्न मैट्रोपोलिटन बाईपास रोड, पचसायय, कलकत्ता-94
भारतीय फिल्म एवं दूरदर्शन संस्थान, लॉ कॉलेज रोड, पुणे (महाराष्टï्र)
इंस्टीटï्यूट ऑफ फिल्म टेक्नोलॉजी, अडयार, चेन्नई-600020
नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा, बहावलपुर हाउस, भगवानदास मार्ग, निकट मंडी हाउस, नई दिल्ली- 110001
ड्रामा सिने लिंक, बी-55, सोमदत्त चैम्बर्स ढ्ढढ्ढ, 9 भीकाजी कामा प्लेस, नई दिल्ली,-110066
एशियन अकादमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन, मारवाह स्टूडियो कॉम्पलेक्स, एफ.सी.-14/15 फिल्म सिटी, सेक्टर-16, नोएडा-201301

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