आसमां के सीने पर कामयाबी के दस्तखत-पायलट


अब तो शायद ही कोई ऐसा देश हो जहां अंतरराष्टï्रीय संचार, व्यापार और राष्टï्रीय सुरक्षा में विमानों का उपयोग न होता हो। विमानों को उड़ाने में विशेषज्ञ टेस्ट पायलटों और उड़ान इंजीनियरों की भूमिका अति महत्वपूर्ण होती है। उन्हें अब पहले से अधिक गंभीरता व जिम्मेदारी से काम करना होता है। नील गगन में पंछियों की तरह उड़ते विमानों में बैठकर आकाश की ऊंचाइयों से हाथ मिलाने वाले कैरियर को चुनने के लिए आज के शिक्षित युवा बेताब हैं। इस कैरियर का आकर्षण आकाश में उड़ती जिंदगी, बेहतर वेतन, स्तरीय रहन-सहन आदि सहज ही लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं।
एक पायलट सिर्फ आसमान की ही नहीं जिंदगी की भी बुलंदियों को छूता है। उच्च शिक्षित युवक-युवतियां इस आकर्षक कैरियर में अपने स्वर्णिम भविष्य की खोजबीन करने में जुटे हैं। मानसिक व शारीरिक रूप से स्वस्थ तथा अंग्रेजी भाषा पर एकाधिकार रखने वालों के लिए इस क्षेत्र में कामयाबी कदम चूमती है। पायलट के रूप में एक युवक या युवती एक ओर जहां अकूत धन अर्जित करता है वहीं जिंदगी के सर्वश्रेष्ठï अनुभवों व उपलब्धियों से भी दो-चार होता है। पायलटों को विमान संबंधी सभी युक्तियों और उपकरणों को चाक-चौबंद रखना होता है। विमान उड़ान भरते समय किसी दुर्घटना में न फंस जाए, इसके लिए नई-नई सुरक्षा तकनीकें खोजनी और अपनानी पड़ती हैं।
विमान विधा में निरंतर हो रही बढ़ोतरी के फलस्वरूप अति उच्च प्रौद्योगिकी वाले उपकरण विकसित हो रहे हैं, लेकिन इनकी लागत और जोखिम दोनों में भी निरंतर इजाफा हो रहा है। इसलिए आज के टेस्ट पायलटों तथा फ्लाइट इंजीनियरों की जिम्मेदारी भी बढ़ी है। इस क्षेत्र में शानदार भविष्य को देखते हुए भारी तादाद में युवा इस ओर आकर्षित हुए हैं, फिर भी प्रतिदिन पायलटों की मांग जोर पकड़ती जा रही है। एयर इंडिया और इंडियन एयर लाइंस को पायलटों की कमी से दो-चार होना पड़ रहा है, तभी तो उन्हें सेवानिवृत्त हो चुके पायलटों से भी अनुबंध के आधार पर काम कराने को विवश होना पड़ रहा है। इस हालात के लिए काफी कुछ जिम्मेदार निजी क्षेत्र के उपक्रम भी हैं। सहारा एयरलाइंस, दमानिया, जैट, अर्चना, ईस्ट-वेस्ट एयरलाइंस, मोदी लुफ्त आदि ने इंटरनेशनल नेटवर्क पर अपनी सेवाएं तो मुहैया कराई ही हैं, सरकारी क्षेत्र में कार्यरत प्रतिभाशाली तथा अनुभवी लोगों को भी अधिक सुविधाएं तथा वेतन के लालच में अपने लिए तोड़ लिया है। एक पायलट को बतौर वेतन सवा लाख से लेकर दो लाख रुपये तक प्रतिमाह प्रदान किया जा रहा है।
विमान के लिए पायलट का कार्य बेहद जिम्मेदारीपूर्ण व दायित्व वाला है। उन्हें हर क्षण चौकन्ना, नियंत्रित व सतर्क रहना पड़ता है। उनकी जरा-सी लापरवाही अथवा चूक सैकड़ों यात्रियों को जोखिम के मुंह में धकेल सकती है। समस्त पायलट उड़ान के वक्त हवाई यातायात नियंत्रण कक्ष (एयर ट्रैफिक कंट्रोल) के निर्देशों व संकेतों को अक्षरश: पालन करने के लिए प्रतिबद्ध होते हैं। एक योग्य पायलट का मस्तिष्क कम्प्यूटर की भांति कार्य करता है। एक ही सेकंड में वो कारगर व अचूक निर्णय लेता है। वायुयान की गति, ऊंचाई, उतरने, टेक ऑफ और लैंडिंग के समय सटीक पहल करनी होती है। उड़ान भरने के उपरांत विमान पूर्णतया पायलट के सुपुर्द हो जाता है। अनेक मौके ऐसे आए हैं जब पायलटों ने अपनी जान पर खेलकर यात्रियों को सकुशल गंतव्य तक पहुंचाया। कई बार अपहरणकर्ताओं (हाईजैकर) से युक्तिपूर्वक बचाव किया, तो अनेक मौकों पर अंतिम क्षणों में पैराशूट के जरिए हजारों फीट ऊंचाई से धरती या समुद्र में उतरे। खतरों व रोमांच से भरे इस कैरियर में जान हथेली पर रखकर चलने की शपथ ली जाती है। पायलट संकट या दुर्घटना के समय भी अंतिम क्षणों तक दूसरों की जान बचाने के प्रति संकल्पबद्ध होता है।
एक पायलट के लिए सामान्यत: अच्छा स्वास्थ्य व स्वस्थ मानसिकता का होना सर्वोपरि है। उसे अपनी प्रेजेंस ऑफ  माइंड तथा अनेक बौद्धिक क्षमताओं को साबित करना होता है। एक कुशल पायलट को भारी तनाव के क्षणों में भी स्थित-प्रज्ञ की भूमिका अदा करनी पड़ती है।
एक पायलट अपने केबिन-क्रू के साथ बेहतर तालमेल व सामंजस्यपूर्ण भाव से अपने कार्य को अंजाम देता है तथा अपनी टीम का नेतृत्व करता है। एक विमान चालक के रूप में वह भले ही एयरलाइन कंपनियों की प्रत्येक सेवा-शर्त को मंजूर करता हो परंतु 'व्यक्तित्वÓ एवं 'स्थायित्व परीक्षणÓ में यदि वह खरा नहीं उतरता है तो उसकी सेवाएं नहीं ली जाती हैं।
विमानों के लिए जानी-मानी संस्थाएं व कंपनियां पायलट के फिजिकल परीक्षण के लिए उच्च स्तरीय टेस्ट आयोजित करती हैं। इन टेस्टï्स में अभ्यर्थी का उद्देश्य, मानसिकता, उसकी पृष्ठïभूमि, बुद्धिमत्ता, व्यक्तित्व एवं तकनीकी सूझबूझ व सकारात्मक दृष्टिïकोण को विभिन्न कोणों से जांचा-परखा जाता है। पूरी तरह संतुष्टï होने के बाद ही कोई भी कंपनी किसी भी पायलट को अरबों रुपये मूल्य का विमान तता यात्रियों की अमूल्य जान सुपुर्द करती है। साक्षात्कार में इस बात पर विशेष ध्यान दिया जाता है कि अभ्यर्थी का आत्मविश्वास किस स्तर का है। यही नहीं- अभ्यर्थी के निरंतर सीखने की ललक तथा भूल-चूक व लापरवाही से निजात पाने की धारणा को भी जांचा जाता है।
पायलट बनने के लिए अभ्यर्थी को दो तरह के कोर्स करने होते हैं। ये हैं- कमर्शियल पायलट लाइसेंस ग्राउंड टे्रेनिंग एवं दूसरा है- फ्लाइट डिस्पेचर कोर्स।
उपरोक्त दोनों कोर्स वर्ष में तीन बार जनवरी, मई और सितंबर में कराए जाते हैं। सी.पी.एल. कोर्स चार माह की अवधि का और फ्लाइट डिस्पेचर कोर्स छह माह का होता है। प्रवेश से एक माह पूर्व विभिन्न समाचार-पत्रों में इस संबंध में विज्ञापन प्रकाशित किए जाते हैं तथा कोर्स शुरू होने से एक माह पूर्व प्रवेश परीक्षा का आयोजन किया जाता है। उसके बाद साक्षात्कार लिए जाते हैं ताकि अभ्यर्थी क्लब के चिकित्सक पैनल से अपना विधिवत मेडिकल परीक्षण करा ले।
शैक्षिक योग्यता के संबंध में डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डी.जी.सी.ए.) नई दिल्ली द्वारा न्यूनतम मापदंड तय किए गए हैं जो पूर्णतया लागू होते हैं। जिसके मुताबिक अभ्यर्थी को फिजिक्स व गणित की परीक्षा में उत्तीर्ण होना आवश्यक होता है। विज्ञान के स्नातक को वरीयता दी जाती है। आयु सीमा 16 से 25 वर्ष है। द्विवर्षीय वैधता के अंतर्गत सी.पी.एल. परीक्षा उत्तीर्ण करनी होती है। इसके तहत इंडियन कमर्शियल पायलट लाइसेंस प्राप्त करने के लिए अपेक्षित उड़ान के 250 घंटे पूरे करने होते हैं। इस परीक्षा में खरा नहीं उतरने पर अभ्यर्थी को फिर से लिखित परीक्षा में बैठना होता है।
फ्लाइट डिस्पेचर को-आर्डीनेटर के रूप में काम करता है तथा कंपनी के एयरक्राफ्ट के ऑपरेशन कंट्रोल के लिए समस्त उपलब्ध जानकारियां एकत्रित करने की जिम्मेदारी भी उसी की है। परीक्षा में उत्तीर्ण अभ्यर्थी को नब्बे दिन तक किसी एयरलाइंस में 'ऑन जॉबÓ अनुभव की प्रक्रिया से गुजरना होता है। उसके उपरांत डी.जी.सी. बोर्ड की मौखिक परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद ही वह किसी एयरलाइंस के फ्लाइट डिस्पैच सेक्शन में भर्ती होने की पात्रता अर्जित करता है।
नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थियों को सी.पी.एल. लेना अनिवार्य होता है। पायलट की शारीरिक ऊंचाई कम-से-कम पांच फीट पांच इंच होनी चाहिए। मेडिकल संबंधी तमाम परीक्षण इंस्टीटï्यूट ऑफ एविएशन मेडिसिन, बैंगलोर में किए जाते हैं।
प्रशिक्षण का द्वितीय चरण पी.पी.एल. कहलाता है जिसके तहत तीव्र गति, मध्यम गति, धीमी गति, अकेले तथा साथियों के साथ बैठकर विमानों को उड़ाने का प्रशिक्षण लेना होता है। भारत में छह सरकारी उड्डïयन क्लब तथा 29 अन्य उड्डïयन क्लब संचालि हैं, जहां तीनों प्रशिक्षण पाठï्यक्रमों को कराया जा रहा है। किसी भी पायलट द्वारा प्रशिक्षण अवधि में की गई उड़ान को बाकायदा श्रेणीबद्ध किया जाता रहता है तथा प्रविष्टिïयों में स्पष्टï किया जाता है कि फलां पायलट ने इतने घंटे की सफल उड़ान भरी।
विभिन्न भारतीय फ्लाइंग क्लब
दि मुंबई फ्लाइंग क्लब, जुहू एयरोड्रोम, सांताक्रुज (पश्चिम) मुंबई-49
दिल्ली उड्डïयन क्लब, सफदरजंग, दिल्ली
असम फ्लाइंग क्लब, गुवाहाटी एयरपोर्ट, गुवाहाटी
बिहार फ्लाइंग इंस्टीटï्यूट, सिविल एयरोड्रोम, पटना (बिहार)
गुजरात फ्लाइंग क्लब, सिविल हवाई अड्डा, हंसी रोड, बड़ौदा
अमृतसर उड्डïयन क्लब, राजासांसी एयरोड्रोम, अमृतसर, पंजाब
लुधियाना एविएशन क्लब, सिविल एयरोड्रोम, लुधियाना
राजकीय उड्डïयन क्लब, एयरोड्रोम, लखनऊ
मध्य प्रदेश उड्डïयन क्लब, भोपाल
फ्लाइंग ट्रेनिंग इंस्टीटï्यूट, बेहाला, कलकत्ता- 700060
राजस्थान राज्य उड़ान विद्यालय, सांगानेर एयरपोर्ट, जयपुर
नागपुर फ्लाइंग क्लब, सोनेगांव एयरोड्रोम, नागपुर
हिसार एविएशन, टेक्सटाइल रोड, सिरसा बाईपास, हिसार 125002 (हरियाणा)
पिंजोर एविएशन क्लब, सिविल एयरोड्रोम, अंबाला
करनाल एविएशन क्लब, कुंजपुरा रोड, करनाल (हरियाणा)
गवर्नमेंट फ्लाइंग क्लब, एयरोड्रोम, फैजाबाद (उ.प्र.)
मद्रास, हैदराबाद, जमशेदपुर, अंडमान-निकोबार, कोयम्बटूर तथा बैंगलोर में भी फ्लाइंग क्लब हैं।
संपर्क सूत्र
एस.एस.सी. (डब्ल्यू) एफ.जी. पोस्ट बैग-001, डी.एच.क्यू. पोस्ट ऑफिस नई दिल्ली- 110011
कार्मिक निदेशक, इंडियन एयरलाइंस हाउस, 113 गुरुद्वारा रकाबगंज रोड, नई दिल्ली-1
दि इंडियन एविएशन एकेडेमी द्वारा सेंट जोसेफ हाई स्कूल पो.बा.नं. 27680 मालाड (पश्चिम), मुंबई- 400087

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