परिधानों के आकाश पर सपनों का सूर्योदय

समाज में तेजी से बदलती मान्यताएं, रुचियों में नित नए परिवर्तन तथा बाजार में लेती संभावनाओं ने युवावर्ग के लिए विकल्पों का अंबार लगा दिया है। फैशन डिजाइनिंग एक ऐसा ही क्षेत्र है, जहां कैरियर के लिए अपार गुंजाइशें मौजूद हैं। आज युवतियों के अलावा युवकों का भी रुझान फैशन डिजाइनिंग की ओर बढ़ा है। अकूत पैसे और ग्लैमर ने इस क्षेत्र के आकर्षण में और वृद्धि  कर दी है। वास्तव में फैशन डिजाइनिंग आज के युग की मांग है। आज हमारे देश में एक से बढ़कर एक डिजाइनर वस्त्र तैयार हो रहे हैं, जिनकी विदेशों में भी मांग है। स्तरीय डिजाइन के वस्त्रों का भारी मात्रा में एक्सपोर्ट किया जा रहा है।
'मिस इंडियाÓ रह चुकी मेहर केस्टिलीनो, रीना ढाका, रितु बेरी, रोहित बाल आदि चर्चित फैशन डिजाइनरों ने भारतीय प्रतिभा व यहां के डिजाइनों की खूबियों से पूरी दुनिया को परिचित कराया है। इस सबसे अंतर्राष्टï्रीय स्तर पर जहां भारतीय फैशन डिजाइनरों की मांग बढ़ी है वहीं इस क्षेत्र में दाम के साथ-साथ नाम कमाने की भी संभावनाएं बढ़ गई हैं। आजकल इस क्षेत्र में जितने कुशल व दक्ष प्रशिक्षुओं की आवश्यकता है उतने उपलब्ध नहीं हैं। परिणामस्वरूप निजी क्षेत्र के संस्थान भी व्यावसायिक प्रशिक्षण देने के लिए नए-नए विकल्पों व साधनों को अमल में ला रहे हैं। दिल्ली और देश के समस्त महानगरों में 'हृढ्ढस्नञ्जÓ की तर्ज पर स्तरीय प्रशिक्षण दिया जाने लगा है।
फैशन के विस्तार तथा पश्चिमीकरण की होड़ ने फैशन डिजाइनरों तथा कारीगरों की कमी पैदा कर दी है। ऐसे में युवतियों का इस क्षेत्र में पदार्पण बेहद प्रासंगिक हो गया है। फैशन जगत से गहराई से जुड़े लोगों का दावा है कि 10 + 2 अथवा इंटरमीडिएट के उपरांत कोई भी युवती फैशन से संबधित कोई भी तकनीकी पाठ्यक्रम कर लेती है तो उसके बेरोजगार रहने की नौबत आ ही नहीं सकती।
कला के प्रति रुचि रखने वाली किशोरियों के लिए तो यह क्षेत्र तो मानो एक वरदान ही है। मॉडलिंग की चमचमाती दुनिया सौंदर्य प्रतियोगिताओं का बढ़ता क्रेज, फैशन शो, सैटेलाइट चैनल्स का नित बढ़ता दायरा तथा आधुनिक फिल्मों की देखादेखी फैशन के रंग में रची-बसी नई पीढ़ी की नई इच्छाओं के फलस्वरूप फैशन डिजाइनर का काम भी बढ़ गया है। भारतीय परिवेश में फैशन अब एक दिखावा भर नहीं रहा अपितु आवश्यकता के रूप में स्वीकृत हो चुका है। प्रत्येक बदलता धर्म, वर्ण, वर्ग के लोग अब मानने लगे हैं कि जमाने के मुताबिक फैशन बदलता है और इस बदलाव को अंगीकार करना होगा। उच्चवर्गीय समाज के लिए फैशनपरस्ती अब सम्मान एवं प्रतिष्ठïा का प्रतीक बन गई है। फैशन के नाम पर खर्च किया गया धन अब लोगों को महसूस नहीं होता।
फैशन से जुड़े कारोबार में निरंतर वृद्धि एक शुभ संकेत है। इस क्षेत्र में तकनीकी दक्षता हासिल कर चुके फैशन विशेषज्ञों के लिए फैशन संस्थानों, ब्रांडों तथा फैशन उद्योग से जुड़ी कंपनियों में मुंहमांगी कीमत पर नियुक्ति होती है। फैशन जगत के एक सर्वेक्षण के मुताबिक 21वीं शताब्दी में प्रवेश करते समय लगभग दस लाख फैशन डिजाइनरों व कार्मिकों की आवश्यकता पड़ेगी। बाजार की मांग के विपरीत मौजूदा समय में भी हमारे यहां प्रशिक्षित फैशन डिजाइनरों की संख्या नहीं के बराबर है।
फैशन की दुनिया में युवतियों को करने के लिए बहुत कुछ है। अभिरुचि व स्वभाव के अनुसार वे किसी भी क्षेत्र में प्रशिक्षित होकर अपने कैरियर की शानदार ऊंचाइयों को स्पर्श कर सकती हैं। फैशन डिजाइनिंग के प्रमुख संकाय निम्नवत हैं :
फैशन डिजाइनर
एपेरेल मर्चेंडाइजिंग को-आर्डीनेटर
रीटेलर
सेल प्रमोशन
फैशन फोटोग्राफी
टेक्सटाइल डिजाइनर
ड्रेस डिजाइनर
एसेसरी डिजाइनर
गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजिस्ट
निटवियर डिजाइनर
फैशन पत्रकारिता
एपेरल मार्केटिंग एंड मर्चेनडाइजिंग
परिधान विनिर्माण प्रौद्योगिकी
चमड़ा परिधान डिजाइन व प्रौद्योगिकी
निटवियर डिजाइन व प्रौद्योगिकी
वस्त्र डिजाइन व विकास
उपरोक्त समस्त क्षेत्रों में भविष्य संवारने के लिए विधिवत प्रशिक्षण लेकर संबंधित तकनीकी ज्ञानार्जन अनिवार्य है। फैशन डिजाइनिंग की इंद्रधनुषी दुनिया में पदार्पण के बाद आपको नित नए-नए फैशन प्रकाश में लाने होते हैं। खूबसूरत व मनोहारी डिजाइन, नई-नई तकनीकें तथा विविध प्रकार की पोशाकों का निर्माण करना पड़ता है।
फैशन की दुनिया में अपने नाम का सिक्का चलाने के लिए फैशनपरस्त लोगों की इच्छाओं के मुताबिक उत्पाद पेश करना होता है, तभी बाजार में टिका जा सकता है। फैशन बहुत जल्दी-जल्दी बदलता रहता है, अत: एक योग्य व प्रतिभाशाली डिजाइनर को बेहद चौकस होकर काम करना होता है। उसे अपने आसपास के वातावरण, फिल्मों, रहन-सहन व जीवन स्तर की भी गहरी समझ रखनी पड़ती है। स्पष्टï है आपको इस क्षेत्र में शोध, अध्ययन व अनुसंधान के कार्य में जुटे रहना पड़ेगा।
अभिजात्य एवं उच्च मध्यम वर्ग की पसंद व जरूरतों के अनुसार फैशन को अस्तित्व में लाने के लिए सृजनशील, कल्पनाशील तथा कलात्मक प्रवृत्तियों को जाग्रत रखना होगा। तभी आप इस क्षेत्र में उपलब्धियों की सीढिय़ां तय कर सकते हैं। इस क्षेत्र को अपना कैरियर बनाने वाले युवा यह बात सुनिश्चित कर लें कि वे किसी भी सरकारी अथवा निजी क्षेत्र के स्तरीय संस्थान से प्रशिक्षण लेते हैं तो उन्हें खाली हाथ नहीं बैठना पड़ेगा। सार्वजनिक व निजी क्षेत्र की वस्त्र कंपनियों, फैशन ब्रांडों, टेक्सटाइलों, फैशन संस्थानों में उनके लिए रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। बहुचर्चित तथा अच्छे संस्थानों में तो 'कैम्पस इंटरव्यूÓ का भी प्रचलन है। अर्थातï जब आप अपने प्रशिक्षण के अंतिम दौर में होते हैं तभी अच्छी कंपनियां ऊंचे वेतनमान पर योग्य प्रशिक्षणार्थी की नियुक्ति कर लेती हैं। यदि नौकरी में आपकी दिलचस्पी नहीं है तो कोई बात नहीं, आप अपने खुद के काम से लाखों के वारे-न्यारे कर सकने में सक्षम हैं।
आपको अपने पसंदीदा क्षेत्र की विधिवत जानकारी व उसमें महारत हासिल रहती है। आप अपने रेडीमेड गारमेंट के सैलून या बुटीक आदि खोल सकते हैं। विभिन्न आयु वर्ग के लिए डिजाइनें, पोशाकें आदि बनाने के लिए आधुनिक साजोसामान व उपकरणों की मदद से आप कामयाब हो सकते हैं। अपनी फैशन इकाई या उद्योग स्थापित करने के लिए राष्टï्रीयकृत बैंकों से वित्तीय मदद भी दिए जाने का प्रावधान है।
ऐसे अनेक उदाहरण हैं जब प्रशिक्षण प्राप्त युवक-युवतियों ने अपने खुद के काम शुरू किए और आज वे अपने क्षेत्र में एक कामयाब हस्ताक्षर हैं। अनेक लोगों की समझ व योग्यता के आधार पर फैशन संस्थानों में अध्यापन के प्रस्ताव भी मिलते हैं। पिछले साल से देश में पुरुषों के पहनावे में आए आमूल-चूल परिवर्तन तथा युवकों की सौंदर्य प्रतियोगिताओं के आयोजनों ने फैशन डिजाइनरों के लिए नए-नए विकल्प सुझाए हैं। बहुत-सी कंपनियां वर्तमान में नियमित फैशन शो कराने लगी हैं, जिन्हें योग्य व अनुभवी लोगों की हमेशा जरूरत रहती है। एक अनुबंध के आधार पर अथवा पैनल का निर्माण करके वे फैशन डिजाइनरों को अच्छी-खासी रकम प्रदान करते हैं। फैशन के संसार में अकूत धन व अपार संभावनाओं के चलेत आधुनिक युवक-युवतियां इसे बतौर कैरियर अपनाने को दीवाने हैं।
प्रशिक्षण संस्थान
नेशनल इंस्टीटï्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (हृढ्ढस्नञ्ज) हौजखास, नई दिल्ली-110016 : वर्ष 1990 में राष्टï्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय द्वारा इस इंस्टीटï्यूट की स्थापना की गई थी। यह देश का जाना-माना संस्थान है जहां से अनेक मशहूर ड्रेस डिजाइनर निकले हैं। समूचे एशिया में चर्चित इस संस्थान में प्रशिक्षण की उच्च व्यवस्था है। यहां से आप मुख्य रूप से पांच प्रकार के तकनीकी पाठï्यक्रम कर सकते हैं। फैशन डिजाइनिंग कोर्स में प्रवेश के लिए बारहवीं कक्षा उत्तीर्ण होना वांछनीय है। यह तीन वर्षीय पाठï्यक्रम है। यहीं से 'एपेरेल मर्चेनडाइजिंग एंड मार्केंटिंग कोर्सÓ दो वर्ष में किया जा सकता है। प्रवेश के लिए किसी भी संकाय में स्नातक होना जरूरी है। 'गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी कोर्सÓ भी दो साल में किया जा सकता है। प्रवेश के लिए किसी भी संकाय में स्नातक इंटरमीडिएट के बाद आप 'एसेसरी डिजाइनिंग कोर्सÓ कर सकते हैं। इसी तरह 'टेक्सटाइल डिजाइनिंग कोर्सÓ कर  सकते हैं। इसी तरह 'टेक्सटाइल डिजाइनिंग कोर्सÓ के लिए भी आपका इंटर होना जरूरी है।
इन पाठï्यक्रमों में प्रवेश के लिए प्रतिवर्ष अखिल भारतीय स्तर पर चयन परीक्षा ली जाती है। प्रवेश परीक्षा का माध्यम मात्र अंग्रेजी भाषा है। हृढ्ढस्नञ्ज में नामांकन के लिए फार्म नवंबर में मिलते हैं जबकि प्रवेश परीक्षा जनवरी-फरवरी में होती है। लिखित परीक्षा में स्केचिंग, कल्पनाशीलता, मौलिकता, रंगों के प्रति संवेदनशीलता तथा सामान्य अंग्रेजी और रीजनिंग से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। लिखित परीक्षा की अवधि लगभग तीस मिनट होती है जिसमें चुने हुए नए प्रतियोगी भाग लेते हैं। साक्षात्कार में उनकी रुचि तथा कैरियर के प्रति प्रतिबद्धता के साथ-साथ भावी योजनाओं की भी पड़ताल की जाती है। बाद में 30 छात्र-छात्राएं चुन लिए जाते हैं।
ए.एम.एम. कोर्स में खरीद-बिक्री, फैशन कोआर्डिनेशन, विज्ञापन तथा जनसंपर्क पर जोर दिया जाता है। व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिए शोरूम, एक्सपोर्ट हाउस तथा ट्रेड फेयर आदि में लाया जात है। जी.एम.टी. कोर्स में प्रोडक्शन मैनेजमेंट की ट्रेनिंग दी जाती है। ए.एम.एम. और जी.एम.टी. में लिखित परीक्षा में 'निगेटिव मार्किंगÓ का प्रावधान है। इनमें दसवीं कक्षा स्तर के गणित पर आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं। दोनों कोर्सों के लिए साक्षात्कार में 100-100 प्रतियोगी बुलाए जाते हैं, जिनमें से अंतत: 30-30 चुन लिए जाते हैं। उनकी कैरियर के प्रति कितनी दृढ़ता है, इसकी जांच साक्षात्कार में की जाती है।
इसके अतिरिक्त पर्ल एकेडेमी ऑफ फैशन, सी-56/2 ओखला इंडस्ट्रियल एरिया-फेज ढ्ढढ्ढ, नई दिल्ली-110020 में मुख्यत: सात किस्म के तकनीकी पाठï्यक्रम संचालित होते हैं।
इंटीग्रेटिड फैशन टेक्नोलॉजी : स्नातकोत्तर स्तर के इस डिप्लोमा के लिए स्नातक होना जरूरी है। पाठï्यक्रम की अवधि है- दो वर्ष।
एपेरेल मर्चेनडाइनिंग कोर्स : स्नातक उत्तीर्ण छात्र-छात्राएं इस एक वर्षीय पाठï्यक्रम में भाग ले सकते हैं।
पी.जी. डिप्लोमा इन फैशन डिजाइनिंग: एक वर्षीय, वांछित शैक्षिक अहर्ता स्नातक।
कम्प्यूटराइज्ड फैशन डिजाइनिंग : एक वर्षीय, इंटर।
एपेरेल प्रॉडक्शन टेक्नोलॉजी एंड फैशन डिजाइनिंग : इंटर, एक वर्षीय।
जिन अभ्यर्थियों के अभिभावकों की आमदनी साठ हजार रुपये वार्षिक से कम है उन्हें यह संस्थान शुल्क में रियायत व छूट देता है।
इंटरनेशनल इंस्टीटï्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (ढ्ढढ्ढस्नञ्ज) साउथ एक्सटेंशन, नई दिल्ली- 110049 भी एक चर्चित व ख्यातिप्राप्त संस्थान है। यहां प्रशिक्षण का माध्यम अंग्रेजी भाषा है परंतु हिन्दी माध्यम के छात्र-छात्राओं को भी प्रवेश दिया जाता है। यहां अनुमानत: चार हजार प्रशिक्षणार्थी विभिन्न पाठï्यक्रमों में अध्ययनरत रहते हैं। यह संस्थान पांच प्रकार के फैशन पाठï्यक्रम संचालित करता है।
एडवांस डिप्लोमा इन क्लाथ एंड मैनेजमेंट : त्रिवर्षीय, इंटर अथवा 10+2
एडवांस डिप्लोमा इन एपेरेल मर्चेनडाइजिंग : दो वर्षीय, इंटर।
एडवांस डिप्लोमा इन फैशन डिजाइनिंग : दो वर्षीय, इंटर।
फैशन टेक्सटाइल, एपेरेल तथा मर्चेनडाइजिंग आदि में डिप्लोमा : एक वर्षीय, इंटर।
उपरोक्त पाठï्यक्रमों में सर्टिफिकेट कोर्स भी किया जा सकता है। जिसकी अवधि 6 माह है।
सेनोरिटा कॉलेज ऑफ फैशन डिजाइनिंग एंड मैनेजमेंट, पंजाबी बाग एक्सटेंशन, नई दिल्ली-110063 द्वारा भी फैशन व्यवसाय से संबंधित सात प्रकार के पाठï्यक्रम संचालित हो रहे हैं। समस्त पाठï्यक्रमों के लिए कुल लगभग 500 सीटें हैं। प्रशिक्षण के बाद यहां प्लेसमेंट की सुविधा है।
अन्य प्रशिक्षण संस्थान
एन.आई.एफ.टी., मंजूषा भवन, करौंगन, एल.ए. ब्लॉक, आई.बी. 181-सेक्टर 3, साल्ट लेक सिटी कलकत्ता- 700091
इंटरनेशनल पॉलिटेक्निक फॉर वुमन, साउथ एक्सटेंशन पार्ट ढ्ढ, नई दिल्ली- 110049
साउथ दिल्ली पॉलीटेक्निक फॉर वुमन, लाजपत नगर, नई दिल्ली
आई.आई.सी. स्कूल ऑफ आर्ट एंड फैशन, एम-12 कनॉट प्लेस, नई दिल्ली-110001
एन.आई.एफ.टी., चेनेथा भवन, नामपल्ली, हैदराबाद- 500001
एस.एन.डी.सी. वूमंस यूनिवर्सिटी, नाथीबाई ठाकरसी रोड, चर्च गेट, मुंबई-400001
निर्मला निकेतन, 49, न्यू मैरीन लाइंस, मुंबई-400020
सोनिया कॉलेज, बी.के. सोमानी पॉलीटेक्निक, भूलाभाई देसाई रोड, मुंबई-400026
जे.डी. इंस्टीटï्यूट ऑफ फैशन टेक्नॉलॉजी, हाजी अली, मुंबई-400026
ए.पी.जे. इंस्टीटï्यूट ऑफ डिजाइन, 54 तुगलकाबाद इंस्टीट्यूशनल एरिया, नई दिल्ली- 110062
नेशनल इंस्टीटï्यूट ऑफ डिजाइन, पालडी, अहमदाबाद-7
एन.आई.एफ.टी., टाटा मिल्स प्रशासनिक विंग, परेल, मुंबई-400014
एन.आई.एफ.टी., को. आप्टीटैक्स बिल्डिंग, पैंथिओन रोड, एग्मोर, चेन्नई-600008
एन.आई.एफ.टी., सेक्टर-25, जी.आई.डी.सी. इलेक्ट्रॉनिक स्टेट, गांधीनगर-382010 (गुजरात)
एन.आई.एफ.टी. कर्नाटक स्टेट को-मार्केंटिंग फेडरेशन, बिल्डिंग संख्या 8, कनिंघम रोड, बैंगलोर
क्रिएटिव कम्प्यूटर सेंटर, लेडी इरविन कॉलेज, सिकदंरा रोड, नई दिल्ली- 110001
हेगडे टेलरिंग इंस्टीटï्यूट, पुणे
सर जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट, मुंबई
इंडियन क्राफ्ट टेलरिंग इंस्टीटï्यूट, नागपुर
एयरफोर्स वोकेशनल कॉलेज, रेसकोर्स रोड, नई दिल्ली
हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान, वाराणसी (उ.प्र.) 

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