इंजीनियर बनकर अपना व अपने देश का नाम रोशन करने का सपना हर दूसरा शिक्षित युवा संजोता है। इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अध्ययन के इच्छुक अभ्यर्थियों के लिए 'दी इंस्टीट्ïयूशन ऑफ इंजीनियर्स इंडियाÓ संभावनाओं के अनंत द्वार खोलता है। वे युवक जिनका चयन राज्य व राष्टï्रीय स्तर पर संचालित इंजीनियरिंग कॉलेजों में नहीं हो सका है, उनके लिए ीाी अवसर अभी खत्म नहीं हुए। यह संस्थान 1920 से कलकत्ता में स्थापित है। यद्यपि यह संस्थान गैर सरकारी है परंतु इसके डिग्री तथा डिप्लोमा की मान्यता सभी जगह है। इंजीनियर के रूप में आप भी खुली आँखों से देखे गए अपने सपने सच कर सकते हैं।
आज भी छोटे बच्चों के प्रति जब भविष्य में कुछ बनने या करने संबंधी सवाल पूछे जाते हैं तो हर शिक्षित मां-बाप उन्हें डॉक्टर या इंजीनियर बनाने के सपने देखते हैं। इसी उम्मीद के साथ प्रत्येक वर्ष लाखों युवक-युवतियां इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षा में बैठते हैं। इंजीनियरिंग के क्षेत्र में चूंकि आर्थिक समृद्धि के अपार अवसर तथा तकनीकी ज्ञान के अनन्य स्रोत निहित हैं, अत: यह क्षेत्र लंबे अरसे से युवाओं के आकर्षण का केंद्र रहा है। इंजीनियरिंग रूपी मंजिल का रास्ता उतना आसान नहीं है जितना कि अमूनन समझ लिया जाता है। इंजीनियरिंग से संबंधित पाठ्ïयक्रमों में प्रवेश लेना बड़ा मुश्किल भरा है। राष्टï्रीय अथवा राज्यीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षा में उन्हीं युवाओं का चयन होता है, जो बेहतर तैयारी व जी-तोड़ परिश्रम के बाद इस क्षेत्र में भाग्य आजमाते हैं।
दिन-प्रतिदिन बढ़ रही प्रतिस्पर्धा तथा सीटों की सीमित संख्या के चलते मात्र लाख-डेढ़ लाख युवाओं का चयन हो पाता है। इस क्षेत्र की विशेषताओं की भांति ही इस क्षेत्र में अध्ययन के भी कई चरण हैं। औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों द्वारा चलाए जानेवाले विभिन्न तकनीकी पाठ्ïयक्रमों में कक्षा आठ तथा हाईस्कूल पास युवक-युवती प्रवेश ले सकते हैं। कक्षा दस तथा 10+2 करने के बाद पॉलीटेक्ïिनक कर चुके अभ्यर्थी डिप्लोमा होल्डर इंजीनियर बन सकते हैं।
इसके उपरांत उच्च शिक्षा के लिए आई.आई. टी. और इंजीनियरिंग शिक्षण संस्थान तथा विभिन्न विश्वविद्यालय हैं, जहाँ इस क्षेत्र के लिए बी.ई. तथा बी.टेक. की डिग्रियों के जरिए इंजीनियर तैयार किए जाते हैं। परंतु इन तीन चरणों की पढ़ाई के लिए युवाओं को काफी दुश्वारियों से जूझना पड़ता है। आई.आई.टी. से लेकर पॉलिटेक्रिक, राज्य स्तरीय तथा भारतीय इंजीनियरिंग स्तरीय प्रतियोगी परीक्षा के बाद ही प्रमाण-पत्र, डिप्लोमा अथवा इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल हो पाती है। ऐसे में अनेक युवाओं का आत्मविश्ïवास बीच रास्ते में ही डगमगा जाता है और वे मंजिल पर पहुँचने से पहले ही थक-हारकर किसी और मुकाम का सफर शुरू कर देते हैं।
इन परीक्षाओं में किस्मत आजमा चुके युवाओं को हताश और निराश होने की कतई आवश्यकता नहीं है। संभावनाओं के अनेक पनघटों पर उपलब्धियों के कलश उनकी बााट जोह रहे हैं। इंजीनियरिंग की बेहतरीन पढ़ाई करानेवाली एक और प्रतिष्ठिïत संस्था है दी इंस्टीट्ïयूशन ऑफ इंजीनियर्स इंडिया, कलकत्ता। वैसे तो यह संस्थान गैर सरकारी है लेकिन यहां से प्रशिक्षित युवाओं की योग्यता व प्रतिभा पर किसी को शक नहीं होता। इस संस्थान द्वारा प्रदत्त डिग्री, डिप्लोमा की मान्यता सरकारी तथा निजी दोनों ही क्षेत्रों में है। अनेक युवक-युवतियों के लिए ऐसे भी अवसर उपलब्ध हुए हैं कि उन्हें देश की सरहद से दूर विदेश जाना पड़ा। आज वे सभी विदेशों में अपनी व अपने देश की काबलियत का सभी से लोहा मनवा रहे हैं।
दी इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स इंडिया की स्थापना सन्ï 1920 में कलकत्ता में की गई थी। इस संस्था ने अपने गौरवपूर्ण अतीत के 80 साल जिए हैं तथा देश में योग्य व प्रतिभाशाली इंजीनियरों रूपी अलग पौध पैदा की है। इस संस्थान की स्थापना का उद्देश्य इंजीनियरिंग से जुड़े नौकरी-पेशेवाले ऐसे कर्तचारियों को प्रशिक्षित करना भी है जो बिना किसी औपचारिक प्रशिक्षण (डिग्री-डिप्लोमा) के इस क्षेत्र में कार्यरत हैं। ऐसे लोग इस संस्थान की सेवाएं लेकर एक ओर अपने प्रशिक्षित सहकर्मियों के बराबर वेतन, सुविधाएं और भत्ते अर्जित कर सकते हैं। यही नहीं संस्थान प्रशिक्षुओं को इंजीनियरिंग के तकनीकी ज्ञान कौशल से अद्यतन रू-ब-रू कराता है।
यदि आप किसी भी संस्थान में किसी इंजीनियर के अधीन इंजीनियरिंग से जुड़ी किसी भी शाखा में कार्यरत हैं तो आप संस्थान में प्रवेश के लिए पात्रता रखते हैं। आई.ई.आई. में आयु सीमा भी अभ्यर्थी की राह का रोड़ा नहीं है। आधी आयु पार करने के बाद भी आाप बी.टेक. की डिग्री हासिल कर सकते हैं। हां, लगन और उत्साह इस समस्त जंग के लिए एक सशक्त हथियार से कम नहीं हैं। हर साल जून और दिसंबर माह में आई.ई.आई. विभिन्न पाठ्यक्रमों के लिए अखिल भारतीय स्तर पर परीक्षाएं आयोजित करता है। विज्ञान व गणित संकाय में हाई स्कूल उत्तीर्ण विद्यार्थी जो कहीं भी इंजीनियरिंग विभाग में कार्यरत हों, इस परीक्षा में भाग ले सकते हैं। परीक्षा के पाठ्यक्रम का स्तर इंटरमीडिएट के समकक्ष होता है। जो विद्यार्थी इस परीक्षा में उत्तीर्ण हो जाते हैं, उन्हें बी.टेक. पाठ्यक्रम के लिए संस्था के भारतभर में फैले केंद्रों में जिसमें आप प्रवेश के लिए इच्छुक हों, पंजीकृत कर लिया जाता है। चयनित अभ्यर्थियों को नियमित तरीके से प्रतिदिन लगभग ढ़ाई घंटे की सैद्धांतिक पढ़ाई (ञ्जद्धद्गशह्म्ड्डह्लद्बष्ड्डद्य ह्यह्लह्वस्र4) कराई जाती है। कक्षाओं को अमूनन संध्याकाल में, संचसलित किया जाता है। पंजीकृत छात्रों को निर्धारित समयावधि (अमूमन 4 वर्ष से 12 वर्ष) तक खंड 'अÓ तथा खंड 'बÓ के दस-दस प्रश्ïन-पत्र उत्तीर्ण करने होते हैं। खंड 'अÓ को पास कर चुकने के बाद एक गाइड के अधीन न्यूनतम का प्रशिक्षण प्राप्त करना होता है। जब गाइड अपनी संस्तुति दे देता है कि अमुक अभ्यर्थी ने सम्यक ज्ञान अर्जित कर लिया है तब उसे खंड 'बÓ के लिए पात्रता व प्रवेश प्रदान किया जाता है।
ऐसे विद्यार्थी जिन्होंने 10 + 2 विज्ञान ण्वं गणित संकाय से किया होता है, को बिना इस परीक्षा से गुजरे सीधे पंजीकरण दे दिया जाता है। बशर्तें वे कहीं अभियांत्रिकी विभाग में कार्यरत हों। डिप्लोमाधारी (पॉलिटेक्रिक अथवा किसी अन्य संस्था से प्रशिक्षण प्राप्त) अभ्यर्थिधें को भी इस परीक्षा से छूट मिल जाती है। इन लोगों को 'प्रशिक्षित कैडरÓ दिया जाता है। उधर इन्हें खंड 'अÓ के पांच प्रश्ïनपत्रों में नहीं बैठने की भी सुविधा दी जाती है।
दी इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स इंडिया द्वारा पंद्रह इंजीनियरिंग शाखाओं में बी.टेक. की सुविधा उपलब्ध है। ये क्षेत्र हैं-केमिकल, मैलर्जी एंड मैटीरियल साइंस, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन, आर्किटेक्चर, इलेक्ट्रिकल, सिविल, मैरीन, कम्प्यूटर, एग्रीकल्चर, प्रोडक्ïशन, इनवायरमेंटल, टेक्सटाइल तथा माइनिंग। इस संस्थान की देशभर में लगभग 92 शाखाएं हैं। यही नहीं इस संस्थान का अनेक प्रतिष्ठिïत संस्थाओं से भी संपूर्ण समन्वय है, जिनमें वल्र्ड एनर्जी कांउसिल, इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ ऑटोमेटिक कंट्रोल वल्र्ड माइनिंग कांग्रेस तथा वल्र्ड फेडरेशन ऑफ इंजीनियरिंग आर्गेनाइजेशन प्रमुख हैं।
संपर्क सूत्र
दी इंस्टीयूशन ऑफ इंजीनियर्स इंडिया, बहादुरशाह जफर मार्ग, नई दिल्ली।