समूचे विश्ïव के लिए विकलांगता एक अभिशाप बनी हुई है। दुनिया का हरेक दसवां व्यक्ति परिस्थितिवश इस त्रासदी को झेलने के लिए विवश है। विभिन्न राष्टï्रीय व अंतर्राष्टï्रीय संस्थाएं विकलांगों की संख्या में दिनो-दिन होता इजाफा चिंता का सबब है। आज के युवाओं में एक तबका ऐसा भी है जो संवेदनशील है, वो कैरियर के रूप में ऐसे क्षेत्र को चुनना चाहता है जहां धन, पद, प्रतिष्ठïा के अलावा वो मानव जाति के कल्याण तथा सामाजिक उत्थान के महायज्ञ में अपनी आहुति दे सके। ऐसे युवक-युवतियों के लिए विकलांगता निवारण एक बेहतरीन कैरियर हो सकता है।
समाजसेवा से जुड़े कार्यों को प्रचीन समय से पुण्य के कामों की श्रेणी में रखा जाता है। दो-तीन दशक पूर्व तक तो लोग यह सोचते भी नहीं थे कि इन क्षेत्रों में कार्य करके भावी पीढ़ी अपने लिए बेहतर भविष्य का निर्माण तो करेगी ही, दुखी-पीडि़तों की सेवा करके मानव सभ्यता के कल्याण का मार्ग भी प्रशस्त करेगी। पूरे विश्व में आज लाखों लोग ऐसे संस्थानों या संस्थानों में कार्य कर रहें हैं, जहां विकलांगता उन्मूलन हेतु सार्थक प्रयास किए जा रहे हैं। भारत सरकार के कल्याण मंत्रालय का मानना है कि भारत में 1.9 प्रतिशत आबादी विकलांगता की गिरफ्त में है। भारतीय चिकित अनुसंधान परिषद के एक सर्वेक्षण के अनुसार 6.8 फीसदी लोग बहरेपन का शिकार हैं जबकि जनसंख्या का एक बहुत बड़ा भाग दृष्टिï विकलांगता से पीडि़त हैं। 40 लाख लोग कुष्ठï रोगी हैं। मानसिक विकलांगता तथा सेरिब्रल पाल्सी व शारीरिक अक्षमता से ग्रस्त लेागों का ग्राफ भी करोड़ों की संख्सा को पार कर रहा है।
यदि इसे हम मात्र सामाजिक समस्या मानकर चलें तो यह मानवता के प्रति अन्याय होगा। वास्तविक तथ्य यह है कि विकलांग लोगों में भी उतनी ही कार्यक्षमता तथा समर्थता मौजूद होती है जितनी कि एक स्वस्थ व्यक्ति में। उनकी कार्यक्षमता के प्रति आस्था जाग्रत करके हम असंभव को संभव में तब्दील कर सकते हैं। बहुत से शिक्षित युवक-युवतियों में इस वर्ग के प्रति अपार सहानुभूति तथा गहरी संवेदनाएं होती हैं। वे इस वंचित व पीडि़त तबके के लिए बहुत कुछ करने का जज्बा तो रखते हैं लेकिन समुचित जानकारी व मार्गदर्शन के अभाव में उनकी ये इच्छा पूर्ण नहीं हो पाती। विकलांग पुनर्वास से संबंधित ऐसे अनेक कल्याणकारी पाठ्ïयक्रम हैं जिनमें प्रशिक्षण लेकर युवा अपने लिए रोजगार के बेहतर संसाधन तो जुटा ही सकते हैं, साथ ही साथ समाज कल्याण के कार्यक्रमों में भागीदारी सुनिश्चित करके पुण्य लाभ भी अर्जित कर सकते हैं। वर्तमान समय में भारत में चार प्रमुख राष्टï्रीय संस्थान कार्यरत हैं-शारीरिक रूप से विकलांगों के लिए राष्टï्रीय संस्थान, नई दिल्ली, हड्डिïयों व मानसिक रोगियों का संस्थान, दृष्टिï विकार से ग्रस्त विकलांगों का राष्टï्रीय संस्थान तथा चलने-फिरने में अक्षम व्यक्तियों के लिए पुनर्वास प्रशिक्षण तथा अनुसंधान राष्टï्रीय संस्थान, कटक। इन संस्थनों द्वारा विकलांग शिक्षा से जुड़े कई तरह के पाठ्ïयक्रमों का संचालन किया जाता है।
भारतीय पुनर्वास परिषद-दिल्ली: इस संस्थान के अधीन चल रहे डाकघर बेराई-कटक (उड़ीसा) द्वारा बैचलर इन फिजियोथैरेपी, ऑक्यूपेशनल थैरेपी में स्नातक तथा आर्थोटिक इंजीनियरी में उिप्लोमा पाठ्ïयक्रम चलाया जा रहा है। यह पाठ्ïयक्रम राष्टï्रीय आर्थो-पेडिकली विकलांग संस्थान, बोन (हुगली)कलकत्ता में भी उपलब्ध है। पाठ्ïयक्रमों में प्रवेश के लिए इंटरमीडिएट की परीक्षा विज्ञान से उत्तीर्ण होना आवश्यक है। इसके अतिरिक्त अखिल भारतीय वाक एवं श्रवण संस्थान गंगोत्री (मैसूर) तथा राष्टï्रीय मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका विज्ञान होसूर रोड (बंगलौर) भी विकलांगता निवारण से जुड़े अनेक पाठ्ïयक्रम संचालित करता है। सरकार द्वारा विकलांगों के विद्यालय स्थापित करने के लिए 90 प्रतिशत तक की आर्थिक मदद दी जाती है।
राष्टï्रीय दृष्टिï व्याधितार्थ संस्थान, 116, राजपुर मार्ग-देहरादून (उ.प्र.): दुष्टिï बाधितों के विद्यालयों तथा संस्थानों में शिक्षा देने प अनुपस्थि विज्ञान एवं चक्रिष्णुता अनुदेशकों के प्रशिक्षण हेतु संस्थान द्वारा डिप्लोमा पाठ्ïयक्रम संचालित किया जाता है। इन पाठ्ïयक्रमों में प्रवेश के लिए शैक्षिक योग्यता क्रमश: स्नातक व हाई स्कूल है। यही नहीं दृष्टिï बाधितों के लिए कुर्सियों की बुनाई, लघु अभियांत्रिकी, आशुलिपि, इलेक्ट्रॉनिक, हथकरघा बुनाई आदि के एक वर्षीय व्यावसायिक पाठ्ïयक्रम हैं। इन पाठ्ïयक्रमों में प्रवेश के लिए शैक्षिक योग्यता मैट्रिक व कक्षा 5 उत्तीर्ण है। दृष्टिï बाधितार्थ के लिए दी ब्लाइंड रिलीफ एसोसिएशन, लाल बहादुर शास्त्री मार्ग, नई दिल्ली द्वारा भी डिप्लोमा प्रदान किया जाता है।
विकलांग जन संस्थान 4, विषणु दिंबर मार्ग-नई दिल्ली: यह संस्थान भैतिक चिकित्सा व व्यावसायिक चिकित्सा में साढ़े तीन वर्षीय बी. एस.सी. ऑनर्स (डिग्री) प्रदान करता है। जीव विज्ञान, रसायन, भैतिकी तथा अंग्रेजी विषयों में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंकों के साथ 10+2 कर चुके युवक-युवतियां भाग ले सकते हैं। प्रशिक्षण लोगों काक अस्पताल व अन्य संस्थानों में काम के पर्याप्त अवसर हैं।
राष्टï्रीय मानसिक विकलांग संस्थान मनोविकास नगर-सिकंदराबाद : यह स्ंस्थान मानसिक विकास बाधा में एक वर्षीय विशेष डिप्लोमा प्रदान करता है। यह पाठ्ïयक्रम देशभर में 28 केंद्रों पर संचालित है। एक वर्षीय पाठ्ïयक्रम के बाद मानसिक बाधा स्कूलों, विकलांगों के विद्यालयों में अध्यापक के रूप में या निजी संस्थान खोलकर कैरियर का श्रीगणेश किया जा सकता है।
इस संस्थान द्वारा मानसिक मंदन में त्रिवर्षीय बैचलर डिग्री भी दी जाती है। जिसमें प्रवेश के लिए 50 प्रतिशत के साथ इंटरमीडिएट (विज्ञान), होना जरूरी है।
अली यावर जंग राष्टï्रीय श्रवण विकलांग संस्थान, के.सी. मार्ग बांद्रा रिक्ïलेमेशन, बांद्रा (प.) मुंबई-49 : यह सस्ंथान श्रवण विकलांगता से जुड़े अनेक पाठ्ïयक्रम संचालित करता है। श्रवण-भाषा और वाणी (बी.एस. सी., एच.एल.एम.), श्रवण विज्ञान एवं वाणी पुनस्र्थापन (बी.एस.सी., ए. एल.आर.), के त्रिवर्षीय पाठ्ïयक्रम में प्रवेश हेतु शैक्षिक योग्यता विज्ञान विषयों के साथ 50 अंकों से इंटरमीडिएट उत्तीर्ण होना आवश्यक है। श्रवण-भाषा और वाणी (डी. एच. एल.एस.) व श्रवण विकलांगता के डिप्लोमा पाठ्ïयक्रम में अध्ययन की सुविधा यहां उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त श्रवण विकलांगता में बी.एड., एम.एड. व एम.एससी. भी किया जा सकता है। पाठ्ïयक्रम पूरा करने के बाद दूरर्शन में समाचार प्रस्तोता या या अध्यापक आदि के रूप में कैरियर की शुरुआत की जा सकती है।
केंद्रीय मनश्चिकित्सा संस्थान कांके-रांची, बिहार: यह संस्थान रांची वि.वि. रांची द्वारा विभिन्न पाठ्ïयक्रमों में डिग्री-डिप्लोमा प्रदान करता है। मनश्चिकित्सा उपचर्या में उिप्लोमा की अवधि एक वर्ष है। सामान्य उपचर्या तथा धाती कर्म में डिप्लोमा लेने के उपरांत अस्पतालों व विकलांगों के स्कूलों में रोजगार के अवसर उपलब्ध हैं। यही नहीं मनश्चिकित्सा में डिप्लोमा के लिए एम.बी.बी.एस. डिग्रीधारक प्रवेश के लिए पात्रता रखते हैं। मनोविज्ञान विषय में एम.ए. करने वाले लोगों के लिए इस संस्थान से नैदानिक मनोविज्ञान में पी एच.डी., चिकित्सा सामाजिक मनोविज्ञान, मनश्चिकित्सा, समाज सेवा आदि पाठ्ïयक्रमों में एम.फिल. के लिए अध्ययन की सुविधा उपलब्ध है।