सूचना क्रांति के विस्फोटवाले इस युग में जब पूरी दुनिया एक छोटे-से गाँव में तब्दील होकर सीमित हो रही है, तब लाइब्रेरी भी इंटरनेट पर उपलब्ध है। शिक्षा के विस्तार के साथ-साथ पुस्तकालय विज्ञान का भी महत्व बढ़ा है। भारत सरकार ने वर्ष 1959 में पुस्तकालय विज्ञान सलाहाकार समिति का गठन किया, तब से सभी स्तर के पुस्तकालयों में प्रशिक्षित लाइब्रेरियन की नियुक्ति एक अनिवार्य अंग हो गई है। आज लाइब्रेरियन का काम भी कम जिम्मेदारी या कम रुतबेवाला नहीं है। इस क्षेत्र में कैरियर की शानदार संभावनाओं के मद्देनजर देश के लगभग 75 विश्ïवविद्यालयों में पुस्तकालय विज्ञान के विविध स्तरीय पाठ्ïयक्रम चलाए जा रहे हैं।
लाइब्रेरी को दूसरे शब्दों में ज्ञान और मनोरंजन का खजान कहा जा सकता है। इस तरह से लाइब्रेरियन भी मोटेतौर पर इस खजाने का हिसाब-किताब रखनेवाला खजांची ही हुआ। पुस्तकालय एक ऐसा क्षेत्र है जहां एकांतप्रिय और ज्ञान की खोज में जुटे लेागों के लिए अनेक अवसर उपलब्ध हैं। पुस्ताकालयों के कैरियर में कनिष्ठï स्तर से लेकर उच्चतम स्तर तक अर्थात्ï प्रथम श्रेणी के राजपत्रित अध्किारी स्तर तक की अनेक संभावनाएं हैं। लाइब्रेरी की प्रकृति के अनुरूप लाइब्रेरियन का काम भी बदलता रहता है। पब्लिक लाइब्रेरी और बाल पुस्तकालयों संस्थान, निजी क्षेत्र की कंपनिया, समाचार पत्रों के कार्यालयों, म्यूजियम व विशेष उद्देश्यों को लेकर बनाई गई लाइब्रेरी में लाइब्रेरियन की भूमिका अलग तरह की होती है। अनेक संदर्भ (ह्म्द्गद्घद्गह्म्द्गठ्ठष्द्ग) लाइब्रेरियों में पूर्णकालिक लाइब्रेरियन रखे जाने की व्यवस्था है।
एक कुशल लाइब्रेरियन पाठकों की जिज्ञासा के अनुरूप पुस्तकों की उपलब्धता का ख्याल करता है। यही नहीं वह समस्त किताबों का रिकॉर्ड, समय-समय पर चेकिंग, लाइब्रेरी में अनुशासन तथा व्यवस्था बनाए रखने का कार्य भी करता है। पिछले कुछ समय सी वीडिया लाइब्रेरी के चलन में इजाफा हुआ है। ज्यादातर पुस्तकालयों में अलग से 'वीडियो सेक्ïशनÓ बना दिया जाता है, जिसकी देखरेख का जिम्मा भी लाइब्रेरियन के ही सुपुर्द होता है। मौजूदा दौर में जब लाइब्रेरियन को पुस्तकों के अतिरिक्त वीडियो कैसेट, सी.डी., स्लाइड, टी.पी. तथा रिकॉर्ड आदि की भी तार-संभाल करनी पड़ती हो, तब यह पेशा कठोर परिश्रम तथा विशेषज्ञता की अपेक्षा रखने लगा है। यही कारण है कि पश्चिमी देशों में लाइब्रेरियन का पद विशेष महत्व का समझा जाता है। भारत जैसे राष्टï्र में जहां साक्षरता की दर में कमी तथा संसाधनों का अभाव एक भारी समस्या बने रहे हैं। पुस्तकालयों विशेषकर स्तरीय पुस्तकालयों का सर्वथा अभाव बना रहा है। फलस्वरूप यहां लाइब्रेरी तथा सूचना विज्ञान को अपेक्षित प्रतिष्ठïा व सम्मान नहीं मिल पाया।
प्रमाणिक जानकारी तथा आवश्यक सूचनाओं का सतत प्रवाह ही लाइब्रेरी का मूलभूत उद्देश्य है। पुस्तकालय के क्षेत्र में कैरियर चुनने के लिए विकल्प हैं। आप अपनी शैक्षिक योग्यताओं, रुचि व क्षमताओं के अनुरूप अपने क्षेत्र का चयन करने को स्वतंत्र हैं। बेहतर प्रशिक्षण के बाद लाइब्रेरी से संबंध पेशों में प्रवेश आसान है। कार्य की तकनीकी बारीकियों को जानने-समझाने तथा उच्च पदों पर प्रमोशन के लिए प्रशिक्षण विशेष अहमियत रखता है। मैटिक के बाद लाइब्रेरी साइंस में डिप्लोमा करके लाइब्रेरी क्लर्क का काम पाया जा सकता है। लाइगेरी साइंस में बैचलर या मास्टर डिग्री अर्जित करके जूनियर सहायक अथवा सहायक बना जा सकता है। यही नहीं आपकी योग्यता व कार्य को गंभीरता से लेने की प्रव़त्ति के चलते एम.लिब. से सीधे सीनियर असिस्टेंट के रूप में चयन हो सकता है। डिप्टी लाइब्रेरियन बनने के लिए लाइब्रेरी साइंस में डॉक्टरेट होना जरूरी है।
इस क्षेत्र में पद और ग्रेड के आधार पर व्यक्ति के काम और जिम्मेदारी का अनुमान लगा पाना बड़ा कठिन है। बड़ी लाइब्रेरी में प्रत्येक विभाग के लिए अलग से पूरा स्टाफ हो सकता है, जबकि छोटे पुस्तकालयों में एक या दो व्यक्तियों से समस्त कार्य लिया जाता है। सामान्यत: काम करनेवाले स्टाफ को लाइब्रेरी अटेंडेंट, लाइब्रेरी असिस्टेंट, जूनियर लाइब्रेरियन, डिप्टी लाइब्रेरियन, लाइब्रेरियन और निदेशक या लाइब्रेरी प्रमुख के रूप में जाना जाता है।
पुस्कालय और सूचना विज्ञान में स्नातक या स्नातकोत्तर डिग्री किसी भी विश्ïवविद्यालय अथवा कॉलेज से ली जा सकती है। यही नहीें अनेक संस्थान पत्राचार द्वारा भी सर्टिफिकेट, डिप्लोमा तथा डिग्री कार्स संचालित कर रहे हैं। प्रवेश के लिए अहर्ताओं का आधार आपके द्वारा चयनित कोर्स और संस्थान पर निर्भर करता है। सामान्य तौर पर सर्टिफिकेट या डिप्लोमा के लिए हायर सेकंडरी अथवा 10+2 और बी.लिब. (बैचलर ऑफ लाइब्रेरी) डिग्री के लिए किसी भी संकाय में स्नातक होना जरूरी होता है। बी. एच. डी. करना आपकी अपनी इच्छा पर निर्भर करता है।
अल्पकालिक सर्टिफिकेट कोर्स की अवधि तीन से नौ माह की होती है। जबकि अन्य कोर्स एक से चार साल की अवधि के हैं। पुस्तकालय विज्ञान में तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद सरकारी पब्लिक लाइब्रेरी, विभागीय पुस्तकालय, शैक्षणिक और सांस्कृतिक पुस्तकालय, सूचना केंद्रों, म्यूजियम या आर्ट गैलरियों, विशेषज्ञता प्राप्त अनुसंधान संस्थानों, औद्योगिक स्थापनाओं के अनुसंधान एवं विकास विभागों, प्रलेखीकरण एवं अर्धसरकारी कार्यालयों आदि में रोजगार के अवसर मिल सकते हैं। सरकारी लाइब्रेरी में वेतन और काम की परिस्थितियां बेहतर मानी जाती हैं। विदेशी सूचना केंद्रों और वाणिज्यिक पुस्तकालयों में पैसा बहुत ज्यादा मिलता है। इस क्षेत्र में प्रशिक्षित युवाओं के लिए स्वरोजगार के अवसरों को भी कमी नहीं है। जिसके तहत विभिन्न ग्रंथ सूचियों का संकलन करना, विभिन्न सेवाओं के सार एवं उनकी सूचियां तैयार करना, निर्देशिकाएं एवं रिपोटï्र्स की सूचियां तैयार करना आदि कार्य शामिल हैं।
यही नहीं रैप्रोग्राफिक्स सेवाओं एवं पांडुलिपियों व लेखाचित्रों के इलेक्ट्रॉनिकी प्रतिरूप तैयार करने जैसे क्षेत्रों में भी स्वरोजगार की अच्छी संभावनाएं हैं। वे सलाहकार के रूप में भी खुद को स्थापित करके स्वरोजगार चला सकते हैं। पुस्तकालय कर्मियों के लिए अन्य संबद्ध पेशों में जाने की भी अपार गुंजाइशें होती हैं। वे शैक्षणिक पुस्तकालयों में शोध या अपने ही विषय में अध्यापन कार्य भी कर सकते हैं। इनके अलावा सिस्टम एनालिस्ट, शोध सहायक, कॉरपोरेट कंसलटैंसी, सूचना इकाइयों के प्रबंधन, प्रिंटिंग और पब्लिशिंग तथा संपादकीय कार्यों में भी उनको नाम, दाम व काम मिल सकता है।
अनेक प्रशिक्षित युवा इस पेशे में सफलतापूर्वक काम करने के बाद व्यावसायिक पुस्तकालयों में सूचना अधिकारी से लेकर सूचना प्रबंधक के प्रतिष्ठिïत पदों पर पहुंचे हैं तथा अपनी प्रतिभा व योग्यता का लोहा मनवाया है।
प्रमुख संस्थान
इंदिरा गांधी राष्टï्रीय मुक्त विश्वविद्यालय- नई दिल्ली
बुंदेलखण्ड विश्वविद्यालय-झांसी (म.प्र.)
बरकतुल्ला विश्वविद्यालय-भोपाल (म.प्र.)
कोटा मुक्त विश्वविद्यालय, न्यू कैंपस, रावतभाटा रोड, कोटा (राजस्थान)
डिपार्टमेंट ऑफ कॉरसपोंडेस कोर्सेस, पंजाबी विश्वविद्यालय, पटियाला-147002
आगरा विश्वविद्यालय, आगरा
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, अलीगढ़
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी
राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर (राजस्थान)
सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकंडरी एजुकेशन, नई दिल्ली
निदेशक, दूरवर्ती शिक्षा निदेशालय, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र- 132119
काकतीय विश्वविद्यालय, स्कूल ऑफ डिस्टेंस लर्निंग एंड कन्टीन्युइंग, एजुकेशन वारंगल- 506009
इंस्टीटï्यूट ऑफ कॉरसपोंडेंस एजुकेशन, मद्रास विश्वविद्यालय, चेपक, चेन्नई- 600005
कश्मीर विश्वविद्यालय, डिपार्टमेंट ऑफ डिस्टेंस एजुकेशन, नसीम बाग-श्रीनगर-190005
मदुरई कामराज विश्वविद्यालय, इंस्टीटï्यूट ऑफ कॉरसपोंडेंट कोर्स एंड कन्टीन्युइंग एजुकेशन, यूनिवर्सिटी बिल्डिंग, पास्कालैगनर, मदुरई-625021
श्री वेंकटेश्वर विश्वविद्यालय, इंस्टीïटï्यूट ऑफ कॉरसपोंडेंट कॉर्सेज, तिरुपति-517502एजुकेशन वारंगल- 506009
इंस्टीटï्यूट ऑफ कॉरसपोंडेंस एजुकेशन, मद्रास विश्वविद्यालय, चेपक, चेन्नई- 600005
कश्मीर विश्वविद्यालय, डिपार्टमेंट ऑफ डिस्टेंस एजुकेशन, नसीम बाग-श्रीनगर-190005
मदुरई कामराज विश्वविद्यालय, इंस्टीटï्यूट ऑफ कॉरसपोंडेंट कोर्स एंड कन्टीन्युइंग एजुकेशन, यूनिवर्सिटी बिल्डिंग, पास्कालैगनर, मदुरई-625021
श्री वेंकटेश्वर विश्वविद्यालय, इंस्टीïटï्यूट ऑफ कॉरसपोंडेंट कॉर्सेज, तिरुपति-517502