मैनेजमैंट
स्नातकों की बात करें तो हर किसी के लिए बैंक में नौकरी पाना सर्वोपरि
होता है, इसके बाद लोग अन्य क्षेत्र में भाग्य आजमाते हैं। हर गांव को बैंक
से जोडऩे की पहल में बैंकिंग सैक्टर तेजी के साथ कदम बढ़ा रहा है और
इसमें अवसर भी उसी तेजी के साथ पैदा हो रहे हैं इसलिए अब पी.जी. डिप्लोमा
बैंकिंग इन फाइनैंस की मांग बहुत अधिक बढ़ गई है।
इसके तहत दो सैमेस्टर होते हैं। पहले सैमेस्टर में जनरल बैंकिंग ऑप्रेशंस, फाइनैंशियल प्रोडक्ट और सर्विसेस, बैंकिंग मैथेमैटिक्स, बेसिक अकाऊंट्स, इंश्योरैंस मैनेजमैंट, मार्कीटिंग मैनेजमैंट, कम्प्यूटर बेसिक्स, स्पोकन इंग्लिश, प्रोजैक्ट रिसर्च और सबमिशन, प्रैजेंटेशन ग्राफिक्स, मैनेजमैंट प्रिंसीपल्स की पढ़ाई होती है जबकि दूसरे सैमेस्टर में ट्रेड फाइनैंस और सर्विसेस, रिटेल बैंकिंग, रूरल बैंकिंग और माइक्रो फाइनैंस बैंक अकाऊंटिंग , अकाऊंटिंग साफ्टवेयर, मार्कीटिंग ऑफ फाइनैंशियल प्रोडक्ट्स, बिजनैस कम्युनिकेशन, सेलिंग स्किल, बिजनैस एंड कंपनी लॉ, स्टैटिस्टिक्स की पढ़ाई करवाई जाती है। इसके तहत बाजार प्रबंधन में पी.जी. डिप्लोमा, वित्तीय प्रबंधन में पी.जी. डिप्लोमा, वित्त और बैंकिंग में सर्टीफिकेट कोर्स एवं एम.बी.ए. इन बिजनैस मैनेजमैंट आदि किया जा सकता है।
पी.जी. डिप्लोमा इन बिजनैस एडमिनिस्ट्रेशन में इतना कुछ करने के लिए है कि कोई भी छात्र पूरी तरह निखर कर पेशेवर बन जाता है। मूलभूत बैंकिंग नौकरी संबंधी प्रोफाइल जैसे धन जमा करना, डिमांड ड्राफ्ट बनाना और अन्य बैंकिंग कार्यों को संभालना आदि सिखाया जाता है। विभिन्न बैंकों के बीच में बैंकिंग कार्य, आसान खाता बही, कॉर्पोरेट क्रैडिट, परियोजना क्रैडिट, वित्तीय क्रैडिट और उपभोक्ता क्रैडिट आदि कार्यों को भी इसके तहत सिखाया जाता है।
पाठ्यक्रम के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के 30 और निजी क्षेत्र के 50 बैंकों और फाइनैंशियल सैक्टर में काम करने की उम्मीदें बंधती हैं। इन संस्थानों में ट्रेनिंग के बाद कई तरह के पदों वित्तीय प्रबंधक, बैंक टेलर, बिल और लेखा समाहर्ता से लेकर योग्य छात्रों को इन संस्थानों में प्रबंधकीय नौकरी मिलती है।
योग्यता
बैंकिंग और फाइनैंस में पी.जी. डिप्लोमा करने के लिए छात्र को स्नातक में किसी भी विषय के तहत 50 प्रतिशत अंक से उत्तीर्ण होना चाहिए। कई संस्थान एस.सी./एस.टी. और ओ.बी.सी. को 5 फीसदी तक की छूट भी प्रदान करते हैं। भले ही इस मानक को पूरा करने वाला कोई भी छात्र यह पढ़ाई कर सकता है लेकिन संस्थान छात्रों को सलाह देते हैं कि वही इसका रूझान करे जिसकी दिलचस्पी फाइनैंस में हो। आजकल इस विषय में दो साल एम.बी.ए. करने के बजाए लोग पी.जी. डिप्लोमा को तरजीह देते हैं क्योंकि एक साल के कोर्स के बाद ही उन्हें बैंकों में अच्छी नौकरी मिल जाती है।
बैंकिंग दाखिला और वित्तीय क्षेत्र में पी.जी. डिप्लोमा करने के लिए पहले तो एप्टीच्यूड टैस्ट में पास होना जरूरी है और इसमें निजी रूप से साक्षात्कार भी देना होगा। इसमें मूलत: अंग्रेजी, गणितीय योग्यता, लिखित परीक्षा में रीजनिंग आदि की जांच की जाती है। असल में यह जानने की कोशिश की जाती है कि छात्र को मूल ज्ञान है कि नहीं। परीक्षा पूर्ण होने के बाद उन्हें इंटर्नशिप, शिक्षा लोन आदि कोर्स के बारे में बताया जाता है।
नौकरी और तनख्वाह
इस तरह के प्रोफैशनल्स की जरूरत बहुत सारी एम.एन.सी., निजी बैंकों और वित्तीय संस्थानों में होती है। ये कोर्स के बाद छात्रों को अपने यहां नौकरी का ऑफर देते हैं। शुरूआत में इनकी आेर से न्यूनतम पैकेज 20 से 30 हजार रुपए मासिक दिया जाता है। यह धीरे-धीरे अनुभव के आधार पर बढ़ता जाता है। बहुत सारे छात्रों को कॉलेज कैम्पस में आकर कंपनियां सिलैक्ट कर लेती हैं।
क्या कहते हैं जानकार
यह एक एेसा क्षेत्र है जहां काम समाप्त करने की कोई समय सीमा नहीं है। यहां जरूरत है इस बात की है कि संबंधित व्यक्ति तुरंत चीजों को समझे आौर उसमें इस बात की योग्यता हो कि वह तर्क को समझने की क्षमता रखता हो।
टी.के.डब्ल्यू.एस., इंस्टीच्यूट ऑफ बैंकिंग एंड फाइनैंस के डायरैक्टर अमित गोयल कहते हैं,‘‘मौजूदा समय में भारत का बैंकिंग, फाइनैंशियल और इंश्योरैंस सैक्टर कई ट्रिलियन डॉलर का है और आने वाले दस सालों में यह सैक्टर 20 लाख लोगों को रोजगार देने जा रहा है और एेसा करके भारत का बी.एफ.एस.आई. सैक्टर वॉल्यूम एंड एम्प्लॉयमैंट में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा सैक्टर बन जाएगा इसलिए जो छात्र जो अभी तक अपना करियर तय नहीं कर पाए हैं, उनके लिए यह सैक्टर बेहतरीन मौका लेकर आया है। बैंकिंग क्षेत्र में बहुत योग्य पेशेवर छात्रों की जरूरत होती है। एेसे लोगों की जो व्यावहारिक रूप से परिस्थितियों को संभाल सकें और त्वरित निर्णय लेने वाले हों और उसमें चीजों को बारीकी से समझने की, सोचने की और उस पर सही तर्क रखने की क्षमता हो। इन गुणों के अलावा बैंकिंग क्षेत्र में काम करने के लिए समस्याआें का निपटारा करने की विशेष योग्यता होनी चाहिए।’’
प्रमुख संस्थान
इंस्टीच्यूट ऑफ बैंकिंग एंड फाइनैंस, राजेन्द्र नगर, नई दिल्ली
इंदिरा गांधी मुक्त विश्वविद्यालय, मैदान गढ़ी, दिल्ली
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, अलीगढ़, उत्तर प्रदेश
गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, नई दिल्ली
इसके तहत दो सैमेस्टर होते हैं। पहले सैमेस्टर में जनरल बैंकिंग ऑप्रेशंस, फाइनैंशियल प्रोडक्ट और सर्विसेस, बैंकिंग मैथेमैटिक्स, बेसिक अकाऊंट्स, इंश्योरैंस मैनेजमैंट, मार्कीटिंग मैनेजमैंट, कम्प्यूटर बेसिक्स, स्पोकन इंग्लिश, प्रोजैक्ट रिसर्च और सबमिशन, प्रैजेंटेशन ग्राफिक्स, मैनेजमैंट प्रिंसीपल्स की पढ़ाई होती है जबकि दूसरे सैमेस्टर में ट्रेड फाइनैंस और सर्विसेस, रिटेल बैंकिंग, रूरल बैंकिंग और माइक्रो फाइनैंस बैंक अकाऊंटिंग , अकाऊंटिंग साफ्टवेयर, मार्कीटिंग ऑफ फाइनैंशियल प्रोडक्ट्स, बिजनैस कम्युनिकेशन, सेलिंग स्किल, बिजनैस एंड कंपनी लॉ, स्टैटिस्टिक्स की पढ़ाई करवाई जाती है। इसके तहत बाजार प्रबंधन में पी.जी. डिप्लोमा, वित्तीय प्रबंधन में पी.जी. डिप्लोमा, वित्त और बैंकिंग में सर्टीफिकेट कोर्स एवं एम.बी.ए. इन बिजनैस मैनेजमैंट आदि किया जा सकता है।
पी.जी. डिप्लोमा इन बिजनैस एडमिनिस्ट्रेशन में इतना कुछ करने के लिए है कि कोई भी छात्र पूरी तरह निखर कर पेशेवर बन जाता है। मूलभूत बैंकिंग नौकरी संबंधी प्रोफाइल जैसे धन जमा करना, डिमांड ड्राफ्ट बनाना और अन्य बैंकिंग कार्यों को संभालना आदि सिखाया जाता है। विभिन्न बैंकों के बीच में बैंकिंग कार्य, आसान खाता बही, कॉर्पोरेट क्रैडिट, परियोजना क्रैडिट, वित्तीय क्रैडिट और उपभोक्ता क्रैडिट आदि कार्यों को भी इसके तहत सिखाया जाता है।
पाठ्यक्रम के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के 30 और निजी क्षेत्र के 50 बैंकों और फाइनैंशियल सैक्टर में काम करने की उम्मीदें बंधती हैं। इन संस्थानों में ट्रेनिंग के बाद कई तरह के पदों वित्तीय प्रबंधक, बैंक टेलर, बिल और लेखा समाहर्ता से लेकर योग्य छात्रों को इन संस्थानों में प्रबंधकीय नौकरी मिलती है।
योग्यता
बैंकिंग और फाइनैंस में पी.जी. डिप्लोमा करने के लिए छात्र को स्नातक में किसी भी विषय के तहत 50 प्रतिशत अंक से उत्तीर्ण होना चाहिए। कई संस्थान एस.सी./एस.टी. और ओ.बी.सी. को 5 फीसदी तक की छूट भी प्रदान करते हैं। भले ही इस मानक को पूरा करने वाला कोई भी छात्र यह पढ़ाई कर सकता है लेकिन संस्थान छात्रों को सलाह देते हैं कि वही इसका रूझान करे जिसकी दिलचस्पी फाइनैंस में हो। आजकल इस विषय में दो साल एम.बी.ए. करने के बजाए लोग पी.जी. डिप्लोमा को तरजीह देते हैं क्योंकि एक साल के कोर्स के बाद ही उन्हें बैंकों में अच्छी नौकरी मिल जाती है।
बैंकिंग दाखिला और वित्तीय क्षेत्र में पी.जी. डिप्लोमा करने के लिए पहले तो एप्टीच्यूड टैस्ट में पास होना जरूरी है और इसमें निजी रूप से साक्षात्कार भी देना होगा। इसमें मूलत: अंग्रेजी, गणितीय योग्यता, लिखित परीक्षा में रीजनिंग आदि की जांच की जाती है। असल में यह जानने की कोशिश की जाती है कि छात्र को मूल ज्ञान है कि नहीं। परीक्षा पूर्ण होने के बाद उन्हें इंटर्नशिप, शिक्षा लोन आदि कोर्स के बारे में बताया जाता है।
नौकरी और तनख्वाह
इस तरह के प्रोफैशनल्स की जरूरत बहुत सारी एम.एन.सी., निजी बैंकों और वित्तीय संस्थानों में होती है। ये कोर्स के बाद छात्रों को अपने यहां नौकरी का ऑफर देते हैं। शुरूआत में इनकी आेर से न्यूनतम पैकेज 20 से 30 हजार रुपए मासिक दिया जाता है। यह धीरे-धीरे अनुभव के आधार पर बढ़ता जाता है। बहुत सारे छात्रों को कॉलेज कैम्पस में आकर कंपनियां सिलैक्ट कर लेती हैं।
क्या कहते हैं जानकार
यह एक एेसा क्षेत्र है जहां काम समाप्त करने की कोई समय सीमा नहीं है। यहां जरूरत है इस बात की है कि संबंधित व्यक्ति तुरंत चीजों को समझे आौर उसमें इस बात की योग्यता हो कि वह तर्क को समझने की क्षमता रखता हो।
टी.के.डब्ल्यू.एस., इंस्टीच्यूट ऑफ बैंकिंग एंड फाइनैंस के डायरैक्टर अमित गोयल कहते हैं,‘‘मौजूदा समय में भारत का बैंकिंग, फाइनैंशियल और इंश्योरैंस सैक्टर कई ट्रिलियन डॉलर का है और आने वाले दस सालों में यह सैक्टर 20 लाख लोगों को रोजगार देने जा रहा है और एेसा करके भारत का बी.एफ.एस.आई. सैक्टर वॉल्यूम एंड एम्प्लॉयमैंट में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा सैक्टर बन जाएगा इसलिए जो छात्र जो अभी तक अपना करियर तय नहीं कर पाए हैं, उनके लिए यह सैक्टर बेहतरीन मौका लेकर आया है। बैंकिंग क्षेत्र में बहुत योग्य पेशेवर छात्रों की जरूरत होती है। एेसे लोगों की जो व्यावहारिक रूप से परिस्थितियों को संभाल सकें और त्वरित निर्णय लेने वाले हों और उसमें चीजों को बारीकी से समझने की, सोचने की और उस पर सही तर्क रखने की क्षमता हो। इन गुणों के अलावा बैंकिंग क्षेत्र में काम करने के लिए समस्याआें का निपटारा करने की विशेष योग्यता होनी चाहिए।’’
प्रमुख संस्थान
इंस्टीच्यूट ऑफ बैंकिंग एंड फाइनैंस, राजेन्द्र नगर, नई दिल्ली
इंदिरा गांधी मुक्त विश्वविद्यालय, मैदान गढ़ी, दिल्ली
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, अलीगढ़, उत्तर प्रदेश
गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, नई दिल्ली