माना
जाता है कि हर व्यक्ति की लिखावट यानी हैंडराइटिंग से उसके व्यक्तित्व के
छुपे पहलुओं के बारे में जाना जा सकता है। दरअसल, व्यक्ति लिखते समय अवचेतन
अवस्था में अक्षरों को जो रूप देता है, उसका उसकी सोच, स्वभाव तथा आदतों
से गहरा ताल्लुक होता है। कोई व्यक्ति अक्षरों को कितना तथा किस तरफ झुका
कर लिखता है, उनमें कितना अंतर रखता है, कितने दबाव से लिखता है या वह हर
बिंदियां किस ढंग से लगाता है, ऐसी कई बातों पर गौर करके उस व्यक्ति के
बारे में अनजानी बातों को भी जाना जा सकता है। आज जिस तेजी से आम लोगों की
जिंदगी में उलझनें और पेचीदगियां बढ़ती जा रही हैं उसी अनुपात में ऐसे
पेशे सामने आ रहे हैं जिनका इस्तेमाल मानव व्यक्तित्व को समझने व गुत्थियों
को सुलझाने में किया जाने लगा है। ग्राफोलॉजी भी ऐसा ही एक पेशा है।
चाहे आप कोई आवेदन पत्र भर रहे हैं, या घर की शॉपिंग की सूची बना रहे हैं या किसी चैक पर हस्ताक्षर कर रहे हैं, जाने-अनजाने में आप अपने व्यक्तित्व की छाप छोड़ रहे हैं जिससे किसी भी ग्राफोलॉजिस्ट के लिए आपके गुण-दोषों की पहचान करनी मुश्किल नहीं होगी। कोई भी व्यक्ति अपने हाव-भाव से भले ही सामने वाले को एक हद तक बहकाने में सफल हो सकता है लेकिन वह चाहकर भी अपनी हैंडराइटिंग बदलने में कामयाब नहीं हो सकता।
क्या है ग्राफोलॉजी?
ग्राफोलॉजिस्ट हैंडराइटिंग के माध्यम से किसी भी व्यक्ति के मूल चरित्र (व्यक्तित्व) को सामने ले आते हैं। इस कला का उपयोग न सिर्फ स्वयं को समझने में बल्कि अन्य लोगों की सोच, व्यवहार एवं व्यक्तित्व की रूपरेखा को संजोने के लिए भी किया जा सकता है।
इस प्रकार की जानकारियों से अपनी कमियों को जानने एवं उनमें सुधार लाने का प्रयास किया जा सकता है। इसके अलावा सामने आने वाले व्यक्ति के स्वभाव को समझ कर उससे बातचीत के आधार पर सकारात्मक नतीजे प्राप्त किए जा सकते हैं।
विधि
ग्राफोलॉजी जानकार हस्तलेखा की विभिन्न कसौटियों के आधार पर जांच करने में पारंगत होते हैं जिनमें अक्षरों का आकार, अक्षरों के बीच की स्पेसिंग, शब्दों का झुकाव, हस्ताक्षर की स्टाइल, उनमें आपसी एकसारता, शुरूआती अक्षर और अंत इत्यादि का इस क्रम में खासतौर से उल्लेख किया जा सकता है।
उपयोग एवं सम्भावनाएं
ऐसे जानकारों की सेवाओं का लाभ बड़ी कंपनियां आवेदन पत्रों की छंटनी करने और प्रत्याशियों के मौलिक व्यक्तित्व के बारे में जानकारियां हासिल करने में करती हैं। काऊंसलर इस विधा के माध्यम से उपयुक्त राय देने और व्यक्ति को उसमें निहित गुण-दोषों से परिचित कराने का प्रयत्न करते हैं। अब तो वैवाहिक मामलों में भी इस प्रकार के जानकारों की सेवाएं ली जाने लगी हैं।
इतना ही नहीं, अपराध विज्ञान तथा पुलिस द्वारा फॉरैंसिक तफ्तीश के मामलों में भी हैंडराइटिंग एक्सपर्ट को बाकायदा जांच दल का हिस्सा माना जाता है। अधिकांश विभागों में ऐसे पदों का भी सृजन किया गया है या केस की जरूरत के मुताबिक बाहरी जानकारों की सेवाएं भी ली जाती हैं।
हस्ताक्षरों की पहचान करने, जालसाजी या संदिग्ध दस्तावेजों की जांच करने इत्यादि में इनकी अहम भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। हैंडराइटिंग किसी भी व्यक्ति को जानने का एक सटीक माध्यम हो सकती है।
हर क्षेत्र में लाभदायक कला
इस ज्ञान का लाभ जीवन के लगभग प्रत्येक क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के लोगों से काम लेने, उन्हें समझने तथा अपने लक्ष्य की प्राप्ति में आसानी हेतु मिल सकता है।
अन्य पेशे के साथ पार्टटाइम आधार पर अपनी सेवाएं फीस की एवज में प्रदान की जा सकती हैं। परामर्शदाताओं, मनोवैज्ञानिकों तथा हस्तविधा के क्षेत्र में पहले से कार्यरत लोगों के लिए भी इसका ज्ञान काफी माकूल और उपयोगी कहा जा सकता है।
प्रशिक्षण
यूं तो इस क्षेत्र में करियर बनाने या इसमें महारत हासिल करने के लिए किसी तरह की विशेष औपचारिक शिक्षा हासिल करने की जरूरत नहीं है। वैसे भी देश में ग्राफोलॉजी में कोई प्रमाणित डिग्री कोर्स उपलब्ध नहीं है। देश में विभिन्न फॉरैंसिक साइंस कोर्सेज में ही ग्राफोलॉजी को एक विषय के रूप में पढ़ाए जाने का प्रावधान है। वहीं कई संस्थान अब ग्राफोलॉजी में डिप्लोमा या सर्टीफिकेट कोर्स जरूर करवाते हैं। पत्राचार माध्यम से करवाए जाने वाले कोर्स भी मौजूद हैं।
वैसे इस क्षेत्र में रुचि रखने वाले युवा स्व-अध्ययन हेतु बाजार में इस विषय पर उपलब्ध विभिन्न पुस्तकों, इंटरनैट पर उपलब्ध संबंधित वैबसाइटों इत्यादि की सहायता से एक्सपर्ट बनने की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं। हालांकि इस क्षेत्र में करियर बनाने वाले युवाओं को सलाह दी जाती है कि वे इसे विधा को मनोविज्ञान के अध्ययन के साथ सीखें। इससे रोजगार तथा तरक्की की सम्भावनाएं कहीं अधिक हो जाती हैं।
प्रमुख संस्थान
इंटरनैशनल ग्राफोलॉजिकल रिसर्च सैंटर (आई.जी. आर.सी.), बेंगलूर, कर्नाटक
हैंडराइटिंग इंस्टीच्यूट इंडिया, बेंगलूर, कर्नाटक
एम.जी. राजोर्स इंस्टीच्यूट ऑफ ग्राफोलॉजी एंड पर्सनल सक्सैस, मुम्बई व पुणे (महाराष्ट्र)
चाहे आप कोई आवेदन पत्र भर रहे हैं, या घर की शॉपिंग की सूची बना रहे हैं या किसी चैक पर हस्ताक्षर कर रहे हैं, जाने-अनजाने में आप अपने व्यक्तित्व की छाप छोड़ रहे हैं जिससे किसी भी ग्राफोलॉजिस्ट के लिए आपके गुण-दोषों की पहचान करनी मुश्किल नहीं होगी। कोई भी व्यक्ति अपने हाव-भाव से भले ही सामने वाले को एक हद तक बहकाने में सफल हो सकता है लेकिन वह चाहकर भी अपनी हैंडराइटिंग बदलने में कामयाब नहीं हो सकता।
क्या है ग्राफोलॉजी?
ग्राफोलॉजिस्ट हैंडराइटिंग के माध्यम से किसी भी व्यक्ति के मूल चरित्र (व्यक्तित्व) को सामने ले आते हैं। इस कला का उपयोग न सिर्फ स्वयं को समझने में बल्कि अन्य लोगों की सोच, व्यवहार एवं व्यक्तित्व की रूपरेखा को संजोने के लिए भी किया जा सकता है।
इस प्रकार की जानकारियों से अपनी कमियों को जानने एवं उनमें सुधार लाने का प्रयास किया जा सकता है। इसके अलावा सामने आने वाले व्यक्ति के स्वभाव को समझ कर उससे बातचीत के आधार पर सकारात्मक नतीजे प्राप्त किए जा सकते हैं।
विधि
ग्राफोलॉजी जानकार हस्तलेखा की विभिन्न कसौटियों के आधार पर जांच करने में पारंगत होते हैं जिनमें अक्षरों का आकार, अक्षरों के बीच की स्पेसिंग, शब्दों का झुकाव, हस्ताक्षर की स्टाइल, उनमें आपसी एकसारता, शुरूआती अक्षर और अंत इत्यादि का इस क्रम में खासतौर से उल्लेख किया जा सकता है।
उपयोग एवं सम्भावनाएं
ऐसे जानकारों की सेवाओं का लाभ बड़ी कंपनियां आवेदन पत्रों की छंटनी करने और प्रत्याशियों के मौलिक व्यक्तित्व के बारे में जानकारियां हासिल करने में करती हैं। काऊंसलर इस विधा के माध्यम से उपयुक्त राय देने और व्यक्ति को उसमें निहित गुण-दोषों से परिचित कराने का प्रयत्न करते हैं। अब तो वैवाहिक मामलों में भी इस प्रकार के जानकारों की सेवाएं ली जाने लगी हैं।
इतना ही नहीं, अपराध विज्ञान तथा पुलिस द्वारा फॉरैंसिक तफ्तीश के मामलों में भी हैंडराइटिंग एक्सपर्ट को बाकायदा जांच दल का हिस्सा माना जाता है। अधिकांश विभागों में ऐसे पदों का भी सृजन किया गया है या केस की जरूरत के मुताबिक बाहरी जानकारों की सेवाएं भी ली जाती हैं।
हस्ताक्षरों की पहचान करने, जालसाजी या संदिग्ध दस्तावेजों की जांच करने इत्यादि में इनकी अहम भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। हैंडराइटिंग किसी भी व्यक्ति को जानने का एक सटीक माध्यम हो सकती है।
हर क्षेत्र में लाभदायक कला
इस ज्ञान का लाभ जीवन के लगभग प्रत्येक क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के लोगों से काम लेने, उन्हें समझने तथा अपने लक्ष्य की प्राप्ति में आसानी हेतु मिल सकता है।
अन्य पेशे के साथ पार्टटाइम आधार पर अपनी सेवाएं फीस की एवज में प्रदान की जा सकती हैं। परामर्शदाताओं, मनोवैज्ञानिकों तथा हस्तविधा के क्षेत्र में पहले से कार्यरत लोगों के लिए भी इसका ज्ञान काफी माकूल और उपयोगी कहा जा सकता है।
प्रशिक्षण
यूं तो इस क्षेत्र में करियर बनाने या इसमें महारत हासिल करने के लिए किसी तरह की विशेष औपचारिक शिक्षा हासिल करने की जरूरत नहीं है। वैसे भी देश में ग्राफोलॉजी में कोई प्रमाणित डिग्री कोर्स उपलब्ध नहीं है। देश में विभिन्न फॉरैंसिक साइंस कोर्सेज में ही ग्राफोलॉजी को एक विषय के रूप में पढ़ाए जाने का प्रावधान है। वहीं कई संस्थान अब ग्राफोलॉजी में डिप्लोमा या सर्टीफिकेट कोर्स जरूर करवाते हैं। पत्राचार माध्यम से करवाए जाने वाले कोर्स भी मौजूद हैं।
वैसे इस क्षेत्र में रुचि रखने वाले युवा स्व-अध्ययन हेतु बाजार में इस विषय पर उपलब्ध विभिन्न पुस्तकों, इंटरनैट पर उपलब्ध संबंधित वैबसाइटों इत्यादि की सहायता से एक्सपर्ट बनने की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं। हालांकि इस क्षेत्र में करियर बनाने वाले युवाओं को सलाह दी जाती है कि वे इसे विधा को मनोविज्ञान के अध्ययन के साथ सीखें। इससे रोजगार तथा तरक्की की सम्भावनाएं कहीं अधिक हो जाती हैं।
प्रमुख संस्थान
इंटरनैशनल ग्राफोलॉजिकल रिसर्च सैंटर (आई.जी. आर.सी.), बेंगलूर, कर्नाटक
हैंडराइटिंग इंस्टीच्यूट इंडिया, बेंगलूर, कर्नाटक
एम.जी. राजोर्स इंस्टीच्यूट ऑफ ग्राफोलॉजी एंड पर्सनल सक्सैस, मुम्बई व पुणे (महाराष्ट्र)