दुनिया आज एक वैश्विक गांव बन गई है, देशों की सीमाएं महज भौगोलिक लकीरें मात्र रह गई हैं, राष्टï्रों के बीच वार्तालाप निरन्तर बढ़ता जा रहा है। ऐसे में, भारत भी अपने दरवाजे खोल रहा है और इस वैश्विक आदान-प्रदान में सक्रिय भागीदारी निभा रहा है। एक-दूसरे के विचार जानने के लिए अन्य भाषाएं समझाना आवश्यक है क्योंकि भाषा ही संचार का सबसे कारगर और शक्तिशाली साधन है।
विदेशी भाषाओं में सबसे लोकप्रिय और सर्वाधिक व्यापक भाषा फ्रैं्रच है और दूसरा स्थान र्मन का है। ये भाषाएं वाणिज्य उवं उोग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। जापानी भाषा की भी पर्याप्त मांग है। रूसी भाषा भी विश्व की प्रमुख भाषाओं में से एक है। इनके अलावा रोजगार की दृष्टि से इटेलियन, स्पैनिश, पुर्तगीज, अरबी, चीनी आदि भाषाओं को महत्वपूर्ण विदेशी भाषा समझा जाता है। इनमें से अधिकतम भाषाओं का ेसिविल सेवा परीक्षा में वैकल्पिक विषय के रूपमें भी लिया जा सकता है। आज की परिस्थितियों में बहुभाषी बनना निश्चित रूप से लाभदायक है। अधिकतर नौकरियों के लिए विदेशी भाषा का ज्ञान निश्चित रूप से एक परिसम्पत्ति बन गया है। टे्रवल एजेंसियों, होटल उद्योग, मार्केटिंग आदि व्यवसायों में विदेशी भाषा के ज्ञान को अतिरिक्त योग्यता माना जाता है। किन्तु, कुछ व्यवसाय ऐसे हैं जो भाषा में प्रवीणता के बिना प्राप्त नहीं किए जा सकते, जैसे शिक्षक, दुभाषिया, अनुवादक आदि।
वैयक्तिक विशेषताएं
इस क्षेत्र में रोजगार के लिए व्यक्ति में प्रखर बुद्धि, समसामयिक घटनाओं में रुचि घंटों ध्यान केन्द्रित करने की क्षमता, तनाव के अन्तर्गत काम करने की क्षमता अन्य लोगों के साथ वार्तालाप करते हुए काम करने और भाषाओं को सुनकर तत्काल समझने की क्षमता होनी चाहिए।
भाषा प्रवीणता आधारित व्यवसाय
एक व्याख्याता अथवा दुभाषिया एक भाषा में कही गई बात को अन्य लक्षित भाषा में परिवर्तित करता है। इसमें जरूरी नहीं है कि शब्दश: अनुवाद किया जाये, किन्तु कोशिश यह होनी चाहिए कि जो कहा गया है उसका सार अन्य भाषा में अवश्य व्यक्त हो जाये। अभिव्यक्ति और मुहावरों का अर्थ लक्षित भाषा की प्रकृति के अनुरूप हो और अनुवाद अपने में सजीव और मौलिक दिखाई दे। व्याख्या आवश्यकतानुसार तत्काल या परावर्ती हो सकतीहै। तत्काल व्याख्या करने वाले दुभाषिये को भाषण का अर्थ लगभग उसी क्षण बताना पड़ता है जबकि परवर्ती व्याख्याता वक्तव्यों का अनुवाद उस समय करता है जब वक्ता अपने व्याख्यान के बीच में थोड़ी देर के लिए रुकता है।
अनेक ऐसे व्यापारिकऔर विशेषज्ञ व्याख्याता होते हैं जिनके कौशल का उपयोग व्यापार मेलों में व्यापारिक शिष्टïमंडलों द्वारा अंतरराष्टïीय अनुबंधों के लिए बातचीत के समय किया जाता है। इनमें से कुछ दुभाषियों को इंजीनियरी, अर्थशास्त्र, सूचना प्रौद्योगिकी जैसे किसी विशिष्टï क्षेत्र का ज्ञान भी अपेक्षित है।
दुभाषियों की स्मरण शक्ति अच्छी होनी चाहिए, उनकी आवाज प्रभावशाली हो और वे तत्काल उत्तर देने की क्षमता रखते हों, उन्हें चीजों को सही अर्थ में समझने और अभिव्यक्त करने का कौशल विकसित करना चाहिए। विभिन्न वक्ताओं, विषयों और स्थितियों के प्रति दुभाषिएं का दृष्टिïकोण विश£ेषणातमक और अनुकूलनशील होना चाहिए। उनमें इतनी क्षमता होनी चाहिए कि लम्बे समय तक ध्यान केन्द्रित कर सकें और वे अत्यन्त कुशाग्र बुद्धि भी हों।
अनुवादकों को पुस्तकें, आलेख, निबंध आदि का अनुवाद मातृभाषा, लक्षित भाषा में करना पड़ता है। अत: इसके लिए दो भाषाओं की जानकारी मात्र पर्याप्त नहीं है बल्कि सुबोध और सार लेखन की क्षमता भी जरूरी है। अनुवादक को दो तरह के कार्य करने पड़ते हैं। मुख्य रूप से उन्हें वैज्ञानिक, तकनीकी, व्यापारिक और विधि जैसे विषयों का अनुवाद करना पड़ता है, जिसके लिए लक्ष्य भाषा में सही अर्थ प्रकट करने और उपयुक्त परिभाषिक शब्दों तथा मुहावरों का प्रयोग आवश्यक होता है ताकि पाठक् अनुवादको आसानी से समझ सके। दूसरा क्षेत्र साहित्यिक अनुवाद (उपन्यास, नाटक काव्य आदि) का है जिसके लिए भाषा कौशल ही पर्याप्त नहीं है, अनुवादक को संवेदनशील और कल्पनाशील भीहोना चाहिए।
अनुवादक को विवरण के प्रति सजग और सही शब्दों तथा मुहावरों का चयन करने में सक्षम होना चाहिए। भाषा शिक्षण में इस बात पर बल दिया जाता है कि विद्यार्थी सम्बद्ध भाषा के इस्तेमाल में प्रवीण हो जायें। स्कूल में शिक्षण के लिए स्नातकोत्तर उपाधि जरूरीहै जबकि कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर पर पढ़ाने के लिए एमफिल, पीएचडी होना आवश्यक है।
फ्रीलांसिंग ऐसा क्षेत्र है जिसमें रोजगार के प्रचुर अवसर उपलब्ध है। आपकोविभिन्न एजेंसियों के साथ सम्पर्क कायम करनेकी आवश्यकता है जो अनुबंध के आधार पर सेवाएं प्रदान करती है।
द्वितीय कौशल के रूप में भाषा के रूप में भाषा से रोजगार
कुछ ऐसे क्षेत्र भी है जिनमें विदेशी भाषा का ज्ञान एक परिसम्पत्ति सिद्ध हो सकता है, भले ही वह आपके रोजमर्रा के काम-काज का हिस्सा न हो। इन क्षेत्रों में काम के लिए भाषा का कार्य साधक ज्ञान ही पर्याप्त होता है, उसमें प्रवीणता या लेखन कौशल जरूरी नहीं होता। ऐसे क्षेत्र निम्रांकित हो सकते हैं।
उद्योग और वाणिज्य
बहुराष्टï्रीय कम्पनियों, संगठनों की बढ़ती संख्या इस आवश्यकता को उजागर करती है। हालांकि किसी विशेष क्षेत्र में पात्रता की बुनियादी शर्तें व्यावसायिक योग्यताओं से ही पूरी की जाती है, किन्तु अगर उम्मीदवारों के पास भाषा-कौशल भी हो तो, उसे पूरक योग्यता समझा जाता है। वास्तव में अनेक भारतीय कम्पनियां ऐसी हैं। जिन्होंने गैर अंग्रेजी भाषी देशों के साथ संयुक्त उपक्रम लगाए हैं। ये कम्पनियां अपने साझीदार राष्टï्र की भाषा स्टॉफ को सिखाने के लिए शिक्षक की व्यवस्था करती हैं गैर अंग्रेजी भाषा राष्टï्रों के साथ व्यापार करने वाले एक्सपोर्ट हाउस उन विशेषज्ञों की सेवाएं खरीदते हैँ, जिन्हें लक्षित राष्टï्र की भाषा का ज्ञान हो। टे्रवल एजेंसियां ट्रांसपोर्ट और ठहरने की सुविधा प्रदान करके ग्राहकों और एजेंसियों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाती है। विदेशी पर्यटकों से सम्पर्क करने वालों और टूरिस्ट गाइडों के लिए विदेशी भाषा का ज्ञान होना विशिष्टï योग्यता माना जाता है। महानगरों में अधिकतर होटल विदेशी पर्यटकों कोअपने यहां ठहराते हैं और ऐसे होटलों के लिए, एक या अधिक विदेशी भाषाएं जानने वाले व्यक्ति को काम देना, फायदेमंद होता है ताकि पर्यटक अपने को सहज महसूस कर सकें। एयर लाइन कार्यालयों में सेल्स स्टाफ में ऐसे लोगों को प्राथमिकता दी जाती है जो एक या अधिक विदेशी भाषाएं जानते हों। विदेशी भाषा में वार्तालाप करने की क्षमता को ही पर्याप्त समझा जाता है। इससे आपको उस देश में जाने का अवसर भी मिल सकता है, जिसकी भाषा आप जानते हैं। एयर होस्टेस (विमान परिचारिका) विशेषकर अंतर्राष्टï्रीय एयर लाइन में कार्यरत होस्टेस को उस देश की भाषा की अच्छी जानकारी होनी चाहिए जिससे एयरलाइ सम्बद्ध है। व्यापार मेलों से रोजगार के अवसरों में काफी सुधार होता है। ये रोजगार अंतर्राष्ट्रीय मंडपों में उपलब्ध होते हैं। आकाशवाणी में विभिन्न भाषाओं के समाचार वाचक के रूप में भीबेहतर पारिश्रमिक वाले रोजगार के अवसर मिल सकते हैं। इसमें आप स्टॉफ आर्टिस्ट के रूप में लग सकते हैं, जहां आपको आकाशवाणी के विदेशी सेवा सेल में काम करना पड़ता है।
भाषाओं को व्यवसाय का एकमात्र आधार बनाना पर्याप्त नहीं होता। अधिक संख्याओं में ऐ रोजगार उपलब्ध नहीं होते जो भाषा केन्द्रित हों औरफिर जो गिने-चुने पद निकलते हैं। उनके लिए चयन के वास्ते उच्च स्तरीय भाषा-प्रवीणता होनी चाहिए। दूसरी ओर अगर आप भाषा कौशल के साथ-साथ कोई अन्य विशेषता भी हासिल कर लें तो आपको शानदार अवसर मिल सकते हैं। बेहतर यही रहता है कि किसी अन्य प्रकार की विशेज्ञता के साथ आप अपने भाषा कौशल को एक परिसम्पत्ति के रूप में जोड़ लें इससे आप अपनी विश्ेाज्ञता के बल पर राजेगार पाएंगे और भाषा कौशल से आपके लिए नए द्वार खुलेंगे।
अध्ययन कहां करें
भारत में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में द स्कूल ऑफ लैंग्वेजिज विदेशी भाषा शिक्षण का प्रमुख केन्द्र है। यह देश में अपने तरह का एकमात्र संस्थान है, जहां अधिकतम विदेशी भाषाओं के शिक्षण एवं अनुसंधान की सुविधाएं उपलब्ध है। भाषा शिक्षण के लिए श्रव्य दृश्य सामग्री का व्यापक इस्तेमाल किया जाता है। संस्थान में भली-भांति सुसज्जित भाषा प्रयोगशालाएं हैं। योग्य एवं प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए कुछ छात्रवृत्तियां भी उपलब्ध हैं। अन्य प्रमुख संस्थान हैदराबाद का सेन्टल इंस्टिट्ïयूट ऑफ इंग्लिश एंड फारिन लैंगवेज हैं जो विदेशी भाषों में डिप्लोमा से लेकर स्नातक स्तर तक के विभिन्न पाठ्ïयक्रमों का संचालन करता है।
अनेक विश्वविद्यालय में भी फे्रंच, जर्मन, जापानी आदि भाषाओं को स्नातक स्तर पर एक विषय के रूप में पढ़ाया जाता है। कई विश्वविद्यालय स्नातकोत्तर स्तर पर विभिन्न विदेशी भाषाओं में प्रशिक्षण प्रदान करते हैं। आप चाहें तो पत्राचार या अंशकालिक आधार पर भी किसी विदेशी भाषा में पाठ्ïयक्रम कर सकते हैं। विभिनन विदेशी भाषाओं में प्रशिक्षण देने वाले कुछ प्रतिष्ठिïत संगठन इस प्रकार है-
1. अलायंस फ्रॉसें, डी-13 साउथ एक्सटेंशन, पार्ट-1 नई दिल्ली-110049
2. मैक्स मूलर भवन, 2 कस्तूरबा गांधीमार्ग, नई दिल्ली-110001
3. जापान कल्चरल एंड इंफॉरमेशन सेंटर, 32 फिरोजशाह रोड नई दिल्ली-110001 और एसोसिएशन ऑफ ओवरसीज टैक्रिकल स्कॉलरशिप, हौजखास, नई दिल्ली 110016
4. भारतीय विद्या भवन (विभिन्न केन्द्रों के माध्यम से)
5. इंडियन इंस्टिट्ïयूट ऑफ ट्रैवल एंड टूरिज्म मैनेजमेंट, 8 न्याय मार्ग, चाणक्यपुरी, नई दिल्ली-110021
6. भारतीय विदेश व्यापार संस्थान, कुतुब इंस्टिट्ïयूटशनल एयिर, नई दिल्ली 110016
7. इटालियन अम्बैसी कल्चरल सेंटर, 2-गोल्फ लिंक्स, नई दिल्ली-110003
8. इंस्टिट्ïयूटो कैमोस पोर्चुगीज कल्चरल सेंटर, 3-सुन्दर नगर, नई दिल्ली-110003
दूतावास भी अपने सांस्कृतिक केन्द्रों के माध्ये से अपने देश की भाषा में अल्पावधि के पाठ्ïयक्रमों का संचालन करते हैं। विदेशी भाषा में विशेषज्ञता रखने वालों के लिए स्वरोजगार व्यापक अवसर उपलब्ध हैं। ऐसे विशेषज्ञ अनुबंध के आधार पर अनुवाद कार्य प्राप्त करने के लिए विदेशी दूतावातों से सम्पर्क कर सकते हैं।