इंजीनियरी एक सेवा व्यवसाय है जिसमें अध्ययन, अनुभव और अभ्यास से प्राप्त गणित व प्राकृतिक विज्ञानों के ज्ञान का उपयोग मानवता की भलाई के लिए प्राकृतिक विज्ञानों के ज्ञान का उपयोग मानवता की भलाई के लिए प्रकृति की शक्तियों और सामग्रियों के समुचित उपयोग के उपयुक्त तौर-तरीके खोजने में किया जाता है। इंजीनियर चाहे जिस क्षेत्र में विशेषज्ञता रखता हो, उसका मूल सरोकार रोजमर्रा की व्यावहारिक समस्याओं को वैज्ञानिक सिद्धांतों के जरिए सुलझाने से होता है। विज्ञान के इस अनुप्रयोग के कई आयाम हैं और मोटे तौर पर उन्हें अनुसंधान व विकास, उत्पादन, प्रशासन, निर्माण और अध्यापन आदि में वर्गीकृत किया जा सकता है। सिविल, इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल और एयरोनॉटिकल आदि इंजीनियरी की विभिन्न शाखाएं हैं।
एयरोनॉटिकल इंजीनियरी यानी वैज्ञानिक अभियंत्रण का संबंध व्यावसायिक और सामरिक विमानों, प्रेक्षापास्त्रों और अंतरिक्ष यानों का डिजाइन तैयार करने और उनके निर्माण, विकास, परीक्षण और उत्पादन से है। वैमानिक इंजीनियर विद्युत तथा इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों, राडार, विमान निर्देशन यंत्रों तथा रेडियो संचार उपकरणों आदि के रख-रखाव में विशेषज्ञता रखते हैं। फ्लाइट इंजीनियर (उड्डïयन अभिंतया) विमान के उड़ान भरने से पहले उसकी जांच करते हैं और इस बात का ध्यान रखते हैं कि उड़ते वक्त विमान की समस्त प्रणालियां सुचारू रूप सेकार्य करती रहें। वे विमान की विभिन्न प्रणालियों की गड़बड़ी का समय रहते पता लगाकर उसकी मरम्मत करे हैं। विमान में ईंधन भरने आदि की जिम्मेदारी भी उन पर होती है।
हवाई अड्डïों में विमान की जांच के दौरान मैकेनिकल (यांत्रिक), इलेक्ट्रोनिक्स और एयरोनॉटिकल इंजीनियरों का दल रोजमर्रा के अनुरक्षण संबंधी कार्य करता है। इसके अलावा ये इंजीनियर हवाई अड्डïों के हैंगर (विमानों को ठहराने के स्थान) और कार्यशालाओं में लाए गए विमानों की भी मरम्मत करते हैं। विमानों के टायरों, ब्रेक और विभिन्न यांत्रिक प्रणालियों की जांच भी उनकी जिम्मेदारियों में शामिल है।
उन्हें अपना काम शीघ्रतस ेकरना होता हैऔर साथमें इस बात का भी ध्यान रखना होता है कि विमान तथा यात्रियों की सुरक्षा की दृष्टिï से इसमें कोई भी चूक न रहने पाए।
विमान कम्पनियां प्रारंभिक स्तर पर स्नातक इंजीयिरों को टे्रनी (प्रशिक्षु) के रूप में भर्ती करती हैं। उनको कार्य-कुशलता, शैक्षिक पृष्ठïभूमि और दक्षता को ध्यानमें रखकर उन्हें विमानों के रख-रखाव, मरम्मत या अन्य अनुभागों में प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण पूरा कर लेने पर उन्हें सहायक विमान अभियंता, सहायक तकनीकी अधिकारी के पद पर नियुक्त किया जाता है। आगे पदोन्नति के लिए उन्हें विभागीय परीक्षाएं पास करनी पड़ती है। वैमानिक अभियंताओं की मदद के लिए विमान मैकेनिकल होते हैं जो विमान के ढांचे से लेकर इंजन, विद्युत प्रणाली और अन्य सहायक यंत्रों व उपकरणों का रख-रखाव का काम देखते हैं।
व्यक्तिगत गुण
एयरोनॉटिकल इंजीनियरों में टीम के रूप में काम करने की भावना, जिम्मेदारी का अहसास, अच्छे स्वास्थ और यांत्रिक दक्षता के साथ-साथ रंगों को पहचानने के लिए सामन्य नजर (दृष्टिï क्षमता) होना जरूरीहै।
प्रशिक्षण
मद्रास इंस्टीट्ïयूट ऑफ टै्रक्नोलॉजी क्रोमपेट, चेन्नई, चेंगई, एमजीआर डिस्ट्रिक्ट-600044 और पंजाब इंजीनियरी कॉलेज, चंडीगढ़ में एयरोनॉटिकल इंजीनियरी में चार साल का डिग्री पाठ्ïयक्रम उपलब्ध है। इनमें प्रवेश के लिएअलग-अलग प्रवेश परीक्षाएं ली जाती है, जिसमें भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और गणित के साथ 10+2 पढ़ाई पूरी कर चुके विद्यार्थी बैठ सकते हैं। इसके अलावा आई.आई.टी. चेन्नई, मुम्बई, कानपुर और खडग़पुर में भी एयरोनॉटिकल, एयरोस्पेस इंजीनियरी में चार साल का बी.टेक पाठ्ïयक्रम उपलब्ध है। इसमें प्रवेश के लिए हर साल दिसम्बर और मई मेंं आईआईटी संयुक्त प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाती। भारतीय विज्ञान संस्थान बंगलौर में एयरोनॉटिकल इंजीनियरी में एमटेक और पीएचडी पाठ्ïयक्रम उपलब्ध है।
एयरानॉटिल सोसाइटी ऑफ इंडिया, 13-बी, इंद्रप्रस्थ एस्टेट, नई दिल्ली-110002 साल में दो बार एसोशिएट मेंबरशिप परीक्षा (भाग-ए और बी) आयोजित करतीहै। यह परीक्षा भारतीय विश्वविद्यालय में एयरोनॉटिकल इंजीनियरी में स्नातक डिग्री परीक्षा के समकक्ष मानी जाती है। हर साल 40-50 छात्र यह परीक्षा पास करते हैं।
50 प्रतिशत अंकों में भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान औरगणित विषय के साथ 10+2 परीक्षा या द्वितीय श्रेणी में बीएस.सी. (भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और गणित के साथ) या इंजीनियरी में तीन साल का डिप्लोमा (50 प्रतिशत अंक) या एएमई परीक्षा पास कर चुके लोग सेक्शन-ए की परीक्षा में बैठ सकते हैं। भारतीय वायुसेना के कुछ खास ट्रेडस वाले एयरमैन तथा भारती नौ-सेना के विभिन्न श्रेणियों के तकनीकी कर्मी (वैमानिक) सैक्शन-ए की परीक्षा में भाग ले सकते हैं। सेक्शन-ए परीक्षा पास करने के बाद सेक्शन-बी में बैठा जा सकता है। इंजीनियरी में डिग्री वाले उम्मीदवार सीधे सेक्शन-बी एयरोनॉटिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया के स्नातक उच्च अध्ययन के लिए आईटाईटी की ग्रेजुएट एप्टीटयूट टेस्ट फॉर इंजीनियरिंग (गेट) परीक्षा में बैठक सकते हैं।
भौतिक विज्ञान औरगणित विषयों के साथ 10+2 योग्यता वाले उम्म्ीदवार एयरोनॉटिकल इंजीनियरी में 3 साल के पाठ्ïयक्रम के लिए नामांकन करा सकते हैं। यह परीक्षा एयरोनॉटिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया के एसोशिएट मेंबर (एएमएईएसआई) के समकक्ष है। यह पाठ्ïयक्रम और इससेसंबंधित प्रायोगिक प्रशिक्षण का आयोजन करने वलो कुछ संस्थान ये हैं:-
-स्कूल ऑफ एयरोनॉटिकल, पालम, नई दिल्ली-110045
-स्कूल ऑफ एविएशन टैक्रोलॉजी, बहादुरगढ़-124507
-दिल्ली इंस्टीट्ïयूट ऑफ एयरोनॉटिकल स्टडीज, चिराग दिल्ली, नई दिल्ली-110017
-इंडियन इंस्टीट्ïयूट ऑफ एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग, कालिदास रोड, देहरादून-248001
इसके अलावा कई संस्थान विमान अनुरक्षण इंजीनिरी में 3 साल का पाठ्ïयक्रम आयोजित करतेहैं। इसमें भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और गणित के साथ 50 प्रतिशत अंकरें में 10+2 परीक्षा या 50 प्रतिशत अंकों में बीएससी परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके विद्यार्थी दाखिला ले सकते हैं। कुछ संस्थानों की सूची इस प्रकार है-
- फ्लाइटेक एविएशन एकेडमी, सिकंदराबाद-500026
- भारत इंस्टीट्ïयूट ऑफ एयरोनॉटिक्स, पटना, एयरपोर्ट, पटना-800014
- स्कूल ऑफ एविएशन साइंस एंड टेक्रोलॉजी, दिल्ली फ्लाइंग क्लब, सफदरजंग एयरपोर्ट, नई दिल्ली
- इंस्टीट्ïयूट ऑफ एविएशन टैनोलॉजी, बहादुरगढ़-124507
- हिन्दुस्तान इंस्टीट्ïयूट ऑफ एविएशन टैक्रोलॉजी, चेन्नई-600016
- नेहरू कॉलेज ऑफ एयरोनोटिक्स एंड एप्लाइड साइंसेज, कोयंबटूर।
- वी.एस.एम. एयरोस्पेस, बंगलौर-560043
- पंजाब एयरक्राफ्ट मेंटीनेंस इंजीनियरी कॉलेज, सिविल एयरोड्रोम , पटियाला-147001
- हिन्दुस्तान इंस्टीट्ïयूट ऑफ एयरोनॉटिक्स, भोपाल।
रोजगार के अवसर
रोजगार के अवसर एयर इंडिया, इंडियन एयरलाइंस, पवन हंस, और हेलीकॉप्टर कारपोरेशन ऑफ इंडिया के अलावा फ्लाइंग क्लबों, निजी विमान सेवाओं और सरकारी विमान सेवाओं में उपलब्ध है। विमान सेवाओं और सरकारी विमान सेवाओं में उपलब्ध है। विमान कम्पनियों के अतिरिक्त एयरोनॉटिकल लिमिटेड, रक्षा अनुसंधान और विकास प्रयोगशालाओं, राष्टï्रीय वैमानिकी प्रयोगशाला, नागर विमानन विभागों और अन्य स्थानों में रोजगार के अवसर मौजूद है। निजी हवाई टैक्सी सेवाओं में वृद्धि और मुक्त आकाश नीति अपनाने के बाद एयरोनॉटिकल इंजीनियरों के लिए अवसर और बढ़े हैं।