मरीन इंजीनियर का कार्य पोत या जहाज की मुरम्मत करना तथा उसकी देखरेख करना होता है। आजकल के आधुनिक जहाज नवीनतम तकनीक और उपकरणों का प्रयोग करते हैं। समुद्री इंजीनियर को इन नवीनतम उपकरणों को समझना होता है। उसे इन उपकरणों को चलाना और मुरम्मत करना आना चाहिए।
इस कार्य में उच्च कोटि के अनुशासन की आवश्यकता होती है क्योंकि जब तक चीफ इंजीनियर के पास जहाज की जिम्मेदारी होती है तब तक जहाज में लदे लाखों डॉलर के माल की देखरेख का जिम्मा उसी पर होता है। यह काम डैक अधिकारी के काम से बिल्कुल अलग है, जो जहाज के परिवहन, माल की प्राप्ति और निर्वहन तथा प्रशासनिक कार्य संभालता है। समुद्री इंजीनियर को मालवाहक जहाज, कंटेनर जहाज या फिर एक तेल अथवा गैस के टैंकर में नियुक्त किया जा सकता है। गैस ले जाने वाले जहाज में काम करने के लिए समुद्री इंजीनियर के लिए स्वयं को नवीनतम तकनीक से अपडेट रखना आवश्यक है।
कार्यशैली
जूनियर इंजीनियर जहाज पर नजर रखता है जबकि अन्य इंजीनियरों को सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक रिपेयरिंग और रख-रखाव का कार्य करना होता है। यह उनका नियमित काम होता है। हालांकि जब जहाज बंदरगाह पर होता है तो सभी इंजीनियरों और चालक दल के सदस्यों को तट पर और अपनी पसंद के स्थानों पर घूमने की अनुमति होती है।
आय
परिचालन स्तर पर (छह महीने के प्रशिक्षण के पश्चात) समुद्री इंजीनियर का वेतन 1000 डॉलर से 2000 डॉलर प्रतिमाह होता है। (औसत 70,000 रुपए प्रतिमाह एक जूनियर इंजीनियर के लिए) मुख्य इंजीनियर को प्रतिमाह 10,000 डॉलर मिलते हैं। ये आंकड़े जहाज के आकार, उसकी महत्ता तथा उसके कार्य के आधार पर बदल सकते हैं।
लक्षण और योग्यता
- शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत होना चाहिए।
- इस कार्य की प्रगति कड़ी मेहनत और नियमित परीक्षा पर आधारित है, इसलिए दृढ़ निश्चयी और महत्वाकांक्षी बनें।
- सभी प्रकार के लोगों के साथ मेलजोल रखें क्योंकि कार्य के दौरान चालक दल ही आपका परिवार होता है।
पूर्व तैयारी
कक्षा 11 और 12 में विज्ञान का अध्ययन, उसके उपरांत समुद्री इंजीनियरिंग में बी.टैक और एक साल का तात्कालिक कोर्स करें। सामान्यत: प्रवेश का मानदंड भौतिकी, रसायन शास्त्र और गणित से 12 और आई.आई.टी. प्रवेश परीक्षा में अच्छा रैंक है। इसके अतिरिक्त आप कोई अन्य परीक्षा पास कर सकते हैं।
प्रमुख संस्थान
इंडियन मैरीटाइम विश्वविद्यालय चेन्नई
उन्नत समुद्री अध्ययन एवं अनुसंधान, एल.बी.एस. कालेज,
मरीन इंजीनियरिंग और रिसर्च इंस्टीच्यूट
इस कार्य में उच्च कोटि के अनुशासन की आवश्यकता होती है क्योंकि जब तक चीफ इंजीनियर के पास जहाज की जिम्मेदारी होती है तब तक जहाज में लदे लाखों डॉलर के माल की देखरेख का जिम्मा उसी पर होता है। यह काम डैक अधिकारी के काम से बिल्कुल अलग है, जो जहाज के परिवहन, माल की प्राप्ति और निर्वहन तथा प्रशासनिक कार्य संभालता है। समुद्री इंजीनियर को मालवाहक जहाज, कंटेनर जहाज या फिर एक तेल अथवा गैस के टैंकर में नियुक्त किया जा सकता है। गैस ले जाने वाले जहाज में काम करने के लिए समुद्री इंजीनियर के लिए स्वयं को नवीनतम तकनीक से अपडेट रखना आवश्यक है।
कार्यशैली
जूनियर इंजीनियर जहाज पर नजर रखता है जबकि अन्य इंजीनियरों को सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक रिपेयरिंग और रख-रखाव का कार्य करना होता है। यह उनका नियमित काम होता है। हालांकि जब जहाज बंदरगाह पर होता है तो सभी इंजीनियरों और चालक दल के सदस्यों को तट पर और अपनी पसंद के स्थानों पर घूमने की अनुमति होती है।
आय
परिचालन स्तर पर (छह महीने के प्रशिक्षण के पश्चात) समुद्री इंजीनियर का वेतन 1000 डॉलर से 2000 डॉलर प्रतिमाह होता है। (औसत 70,000 रुपए प्रतिमाह एक जूनियर इंजीनियर के लिए) मुख्य इंजीनियर को प्रतिमाह 10,000 डॉलर मिलते हैं। ये आंकड़े जहाज के आकार, उसकी महत्ता तथा उसके कार्य के आधार पर बदल सकते हैं।
लक्षण और योग्यता
- शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत होना चाहिए।
- इस कार्य की प्रगति कड़ी मेहनत और नियमित परीक्षा पर आधारित है, इसलिए दृढ़ निश्चयी और महत्वाकांक्षी बनें।
- सभी प्रकार के लोगों के साथ मेलजोल रखें क्योंकि कार्य के दौरान चालक दल ही आपका परिवार होता है।
पूर्व तैयारी
कक्षा 11 और 12 में विज्ञान का अध्ययन, उसके उपरांत समुद्री इंजीनियरिंग में बी.टैक और एक साल का तात्कालिक कोर्स करें। सामान्यत: प्रवेश का मानदंड भौतिकी, रसायन शास्त्र और गणित से 12 और आई.आई.टी. प्रवेश परीक्षा में अच्छा रैंक है। इसके अतिरिक्त आप कोई अन्य परीक्षा पास कर सकते हैं।
प्रमुख संस्थान
इंडियन मैरीटाइम विश्वविद्यालय चेन्नई
उन्नत समुद्री अध्ययन एवं अनुसंधान, एल.बी.एस. कालेज,
मरीन इंजीनियरिंग और रिसर्च इंस्टीच्यूट
