फिटनेस का रखे ख्याल डाइटीशियन

यदि आप अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हैं तो जाहिर-सी बात है कि आप अपने खान-पान के प्रति भी जागरूक होंगे लेकिन यदि आपकी रुचि दूसरों को भी खान-पान के प्रति आगाह करने की है तो फिर डाइटीशियन बन कर बाखूबी यह कार्य कर सकते हैं। तेजी से बदलते परिवेश ने जहां एक ओर हमारी जीवनशैली को प्रभावित किया है, वहीं तनाव व प्रदूषण भरे माहौल में खान-पान से होने वाली बीमारियों में भी खासा इजाफा हुआ है या यूं कहें कि आधी से ज्यादा बीमारियों की जड़ भोजन से ही जुड़ी हुई है इसलिए लोग अब पहले के मुकाबले खान-पान को लेकर ज्यादा सजग हैं। यही वजह है कि डाइट से जुड़े क्षेत्र में लोगों को काम भी ज्यादा मिल रहा है। 

डाइटीशियन का मतलब अब सिर्फ अस्पताल और बीमार लोगों तक ही सीमित नहीं रहा बल्कि फास्ट फूड और जंक फूड के दौर में लोगों को खान-पान से कई तरह की दिक्कतें हो रही हैं। क्या, कब और कितना खाएं, जानना लोगों की जरूरत बन गई है, इसी का समाधान करते हैं डाइटीशियन। आप स्वस्थ हों या बीमार, स्वस्थ हैं तो कैसे रखें स्वास्थ्य को बरकरार ताकि ढलती उम्र में आपको किसी प्रकार की परेशानी न हो। इसके लिए आपके हैल्दी फूड में डाइटीशियन की सलाह बहुत जरूरी है।

डाइट को मुख्यत: 2 भागों में रखा गया है। एक सामान्य न्यूट्रिशन, जो स्वस्थ लोगों में होता है, दूसरा थैरेपी न्यूट्रिशन जो बीमार लोगों का खान-पान तय करता है।

आज प्राय: सभी पेशों से जुड़े जैसे खिलाड़ी, सैनिक, एयर होस्टैस, मॉडल्स, पुलिस, अभिनेता, अभिनेत्री, छात्र सभी को डाइटीशियन के महत्वपूर्ण सुझावों की जरूरत महसूस होती है। वृद्ध व्यक्तियों से लेकर बच्चों, गर्भस्थ शिशुओं व गर्भवती महिलाओं की डाइट का निर्धारण भी डाइटीशियन  ही करते हैं। इसके अलावा अब बहुत से विद्यालयों  में ‘मिड-डे मील’ की भी योजना लागू की गई है। वहां भी डाइटीशियनों की सेवा बाखूबी ली जा रही है।

इस पेशे की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें नौकरी के साथ-साथ स्वतंत्र व्यवसाय का भी अवसर है। घर बैठे आप फोन के जरिए भी ग्राहकों को सेवा दे सकते हैं। इस पाठ्यक्रम को पूरा करने के बाद अस्पताल, नॄसग होम से लेकर स्कूल, छात्रावास, होटल, स्लिमिंग सैंटर्स के अलावा ब्यूटी व फिटनैस केद्रों, समाज कल्याण विभाग, उत्पाद मैन्युफैक्चरिंग कम्पनी, बोतल बंद पानी व कोला, पैप्सी जैसी कम्पनियों में रोजगार के अवसर उपलब्ध हैं। अध्यापन कार्य यानी कालेज में पढ़ा भी सकते हैं।

इस कोर्स को आप चाहें तो घर बैठे कर सकते हैं या फिर रैगुलर पढ़ाई करके भी। इसमें ग्रैजुएशन (बी.एससी.), पोस्ट ग्रैजुएशन (एम.एससी.) डिग्री या फिर डिप्लोमा व सर्टीफिकेट कोर्स भी कर सकते हैं। बी.एससी. में एडमिशन के लिए विज्ञान विषय सहित 12वीं पास होना चाहिए। हालांकि कुछ विश्वविद्यालयों में न्यूनतम 55 प्रतिशत अंक भी निर्धारित किए गए हैं। इसी तरह एम.एससी. तथा डिप्लोमा में नामांकन  के लिए बी.एससी. होना चाहिए।
                                                                              
संस्थान 
- कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, दिल्ली।
- इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, नई दिल्ली।
- गुरु जम्बेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार, हरियाणा।
- मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय, भोपाल, मध्य प्रदेश।

Post a Comment

Previous Post Next Post
संस्कार News
संस्कार News

🎧 LIVE FM RADIO




🔊 Volume