क्लीनिकल रिसर्च में तेजी से बढ रहे हैं रोजगार के मुकाम

क्लीनिकल रिसर्च में किसी मैडीकल उत्पाद के फायदे, नुक्सान, जोखिम व प्रभावशीलता का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाता है। मोटे तौर पर कहा जाए तो किसी दवाई को बाजार में लांच करने से पहले उसका वैज्ञानिक अध्ययन क्लीनिकल रिसर्च के अंतर्गत ही आता है। क्लीनिकल शोधकर्ताओं द्वारा रोग के कारण और रोग के बढऩे की प्रक्रिया, रोगी का बेहतर इलाज कैसे हो सकता है, इसका आकलन करने के बारे में भी जानकारी दी जाती है। सामान्यत: क्लीनिकल रिसर्च की प्रक्रिया चार चरणों में पूरी होती है।

एक रिपोर्ट के अनुसार इस क्षेत्र में भारत में प्रोफैशनल्स की मांग 10,000 से बढ़कर 50,000 हो जाएगी। इससे बायोसाइंस स्नातकों और लाइफ साइंस स्नातकों के लिए अपार अवसर पैदा होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इंडस्ट्री का टर्नओवर कई बिलियन डॉलर बढ़ जाएगा।

संभावनाएं 
कई फॉर्मा और बायोटैक कम्पनियां रिसर्च और डिवैल्पमैंट के क्षेत्र में तेजी से प्रवेश कर रही हैं। ऐसे में क्लीनिकल रिसर्च में प्रशिक्षत लोगों के लिए संभावनाओं की कमी नहीं है। इंडस्ट्री को क्वालिटी एश्योरैंस, क्वालिटी कंट्रोल, बिजनैस डिवैल्पमैंट, क्लीनिकल आप्रेशन, मैडीकल राइटिंग, बॉयोस्टैस्टिक्स, डाटा मैनेजमैंट और रैगुलेटरी अफेयर्स से जुड़े प्रशिक्षित लोगों की काफी दरकार है। चूंकि फार्मा उद्योग तेजी से बढ़ता हुआ क्षेत्र है इसलिए इसमें प्रशिक्षित मैनेजर स्किल प्रोफैशनल की काफी जरूरत है। एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करने के लिए कम्पनियां वाजिब कीमतों में अपने उत्पाद बाजार में उतार रही हैं। इसके लिए क्लीनिकल रिसर्च, रैगुलेटरी अफेयर्स, बायोमैट्रिक्स, मैडीकल अफेयर्स, क्वालिटी एश्योरैंस और फार्मेकोविजीलैंस में विशेषज्ञता की जरूरत पड़ती है। इस इंडस्ट्री में आपके पास मौकों की कमी नहीं है।

प्रमुख नियोक्ता  
सिपला, रैनबैक्सी, फाइजर, जोनसन एंड जोनसन, असेंचर, एक्सेल लाइफ इंश्योरैंस, पैनेसिया बायोटैक, जुबलिएंट, परसिस्टैंट जैसी बड़ी कम्पनियां इस क्षेत्र में मौजूद हैं। एम.बी.ए. फॉर्मा इस उद्योग के लिए विशेष कोर्स है। इसमें फार्मास्यूटिकल मैनेजमैंट शामिल है।

कोर्स
इस इंडस्ट्री में प्रवेश के लिए आपके पास बी.एससी. डिग्री होनी चाहिए। मुख्यत: कोर्स में दाखिले के लिए स्नातक स्तर पर आपके पास फार्मेसी,मैडीसन, लाइफ साइंस और बायोसाइंस विषय होने चाहिएं। क्लीनिकल रिसर्च से जुड़े कई डिप्लोमा कोर्स विभिन्न संस्थानों द्वारा कराए जाते हैं। इनमें पोस्ट ग्रैजुएट, डिप्लोमा इन क्लीनिकल रिसर्च, पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा इन क्लीनिकल डाटा मैनेजमैंट, पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा इन फॉर्मेकोविजीलैंस कर सकते हैं। सामान्यत: इन कोर्सों की अवधि एक वर्ष की होती है। कोर्स को करने के बाद आपकी क्लीनिकल रिसर्च एसोसिएट, ड्रग डिवैल्पमैंट एसोसिएट, क्वालिटी एश्योरैंस, क्लीनिकल डाटा मैनेजर जैसे पदों पर नियुक्ति होती है।

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