अरुण साहनी रैनबैक्सी लैबोरेटरीज के मैनेजिंग डायरैक्टर हैं जिनके पास कैमिकल तथा फार्मास्यूटिकल सैक्टर में तीन दशक से ज्यादा का अंतर्राष्ट्रीय अनुभव है। किसी भी क्षेत्र में सफलता को सुनिश्चित बनाने के लिए सुझाव देते हुए उन्होंने कहा कि एक सफल लीडर में प्रतिभा को पहचानने की पारखी नजर होनी चाहिए। उनके अनुसार लीडरशिप वह पद है जिसमें खूब सारी नैतिक तथा संगठनात्मक प्रतिबद्धताएं होती हैं। एक लीडर वही है जो दुनिया को रास्ता दिखाता है।
वह कहते हैं, ‘‘जहांगीर रतनजी दादाभाई (जे.आर.डी.) टाटा मेरे आदर्श रहे हैं। वह प्रतिभाओं को पहचानने में अत्यधिक पारखी थे। हर टाटा कम्पनी को उनके द्वारा खुद चुने हुए लोगों ने खड़ा किया है। उन्होंने अपनी कम्पनी को मूल्यों तथा सिद्धांतों के आधार पर चलाया तथा कभी नैतिक मूल्यों से समझौता नहीं किया।’’
उनके अनुसार लीडर के सर्वाधिक महत्वपूर्ण गुण हैं कि ‘‘उसे पारदर्शी, निष्पक्ष तथा टीम में काम करने वाला व्यक्ति होना चाहिए। मैं अपने सहकर्मियों तथा कर्मचारियों के करीब रहने की कोशिश करता हूं क्योंकि एक लीडर को न केवल निर्णयों की जवाबदेही स्वीकार करनी चाहिए बल्कि उसे ऐसा संगठन तैयार करना चाहिए जिसमें ज्ञान का प्रसार हो ताकि लोग आपस में मिल कर मूल्यों तथा व्यवसाय का विकास कर सकें।’’
उनके अनुसार किसी संकट या आपदा के दौरान लीडर को संयम से काम लेना चाहिए। उसे बहकावे में नहीं आना चाहिए तथा दिशाहीन नहीं होना चाहिए। उसे अपने लोगों को साथ लेकर चलना चाहिए। संकट का समय किसी तूफान की तरह होता है, ऐसे में लीडर को एक मजबूत वृक्ष की भांति व्यवहार करना चाहिए जो बेशक थोड़ा झुक जाए परंतु खड़ा रहे।
उनका कहना है कि लीडर को आलोचना सुनने तथा स्वीकार करने को तैयार रहना चाहिए। उनके अनुसार, ‘‘लीडर भी एक इंसान होता है। आलोचना व्यक्ति को सुधार के पग पर आगे बढऩे में सहायक होती है। नैतिक मूल्यों तथा प्रतिबद्धताओं का पालन करने वाला व्यक्ति आलोचना से कभी डरता नहीं है। सहकर्मियों के विचार तथा टिप्पणियों को सुनना जरूरी है। इसके बाद व्यक्ति अपने विवेक के आधार पर अपनी प्राथमिकताएं तय कर सकता है।’’
उनका कहना है कि विचारों का आदान-प्रदान टीम वर्क का आधार है। एक लीडर उतना ही अच्छा होता है जितनी अच्छी उसकी टीम होती है। टीम में प्रतिभाओं को शामिल करना तथा सभी को साथ लेकर चलना उसके अपने हित में होता है। लीडर तथा उसकी टीम एक समान मूल्य तथा सिद्धांत प्रदर्शित करते हैं।
वह कहते हैं, ‘‘जहांगीर रतनजी दादाभाई (जे.आर.डी.) टाटा मेरे आदर्श रहे हैं। वह प्रतिभाओं को पहचानने में अत्यधिक पारखी थे। हर टाटा कम्पनी को उनके द्वारा खुद चुने हुए लोगों ने खड़ा किया है। उन्होंने अपनी कम्पनी को मूल्यों तथा सिद्धांतों के आधार पर चलाया तथा कभी नैतिक मूल्यों से समझौता नहीं किया।’’
उनके अनुसार लीडर के सर्वाधिक महत्वपूर्ण गुण हैं कि ‘‘उसे पारदर्शी, निष्पक्ष तथा टीम में काम करने वाला व्यक्ति होना चाहिए। मैं अपने सहकर्मियों तथा कर्मचारियों के करीब रहने की कोशिश करता हूं क्योंकि एक लीडर को न केवल निर्णयों की जवाबदेही स्वीकार करनी चाहिए बल्कि उसे ऐसा संगठन तैयार करना चाहिए जिसमें ज्ञान का प्रसार हो ताकि लोग आपस में मिल कर मूल्यों तथा व्यवसाय का विकास कर सकें।’’
उनके अनुसार किसी संकट या आपदा के दौरान लीडर को संयम से काम लेना चाहिए। उसे बहकावे में नहीं आना चाहिए तथा दिशाहीन नहीं होना चाहिए। उसे अपने लोगों को साथ लेकर चलना चाहिए। संकट का समय किसी तूफान की तरह होता है, ऐसे में लीडर को एक मजबूत वृक्ष की भांति व्यवहार करना चाहिए जो बेशक थोड़ा झुक जाए परंतु खड़ा रहे।
उनका कहना है कि लीडर को आलोचना सुनने तथा स्वीकार करने को तैयार रहना चाहिए। उनके अनुसार, ‘‘लीडर भी एक इंसान होता है। आलोचना व्यक्ति को सुधार के पग पर आगे बढऩे में सहायक होती है। नैतिक मूल्यों तथा प्रतिबद्धताओं का पालन करने वाला व्यक्ति आलोचना से कभी डरता नहीं है। सहकर्मियों के विचार तथा टिप्पणियों को सुनना जरूरी है। इसके बाद व्यक्ति अपने विवेक के आधार पर अपनी प्राथमिकताएं तय कर सकता है।’’
उनका कहना है कि विचारों का आदान-प्रदान टीम वर्क का आधार है। एक लीडर उतना ही अच्छा होता है जितनी अच्छी उसकी टीम होती है। टीम में प्रतिभाओं को शामिल करना तथा सभी को साथ लेकर चलना उसके अपने हित में होता है। लीडर तथा उसकी टीम एक समान मूल्य तथा सिद्धांत प्रदर्शित करते हैं।
