जब किसी आलसी के साथ काम करना पड़े

10 में से कम से कम 9 कर्मचारी अपने किसी ऐसे सहकर्मी का नाम अवश्य ले सकते हैं जो उनकी नजर में बेहद आलसी हो और अपना काम करने से भी बचने की कोशिश करता रहता हो। चार में से एक कर्मचारी यह भी मानता है कि ऐसे आलसी कर्मचारी की वजह से उन पर काम का बोझ बढ़ जाता है और उसकी वजह से वे अक्सर क्रोधित तथा नाराज रहते हैं।

अक्सर यह भी देखने को मिलता है कि दफ्तरों में बेहतर काम करने वालों और मेहनती कर्मचारियों पर ही काम का अधिक बोझ डाला जाता है जबकि आलसी लोगों को ऐसे ही छोड़ दिया जाता है परंतु ऐसे कर्मचारियों के साथ सहजता के साथ कार्य करने के लिए आपको कुछ बातों का ध्यान रखना होगा। पेश हैं इसी संबंध में कुछ टिप्स— 

आरोप-प्रत्यारोप से बचें

- आलसी सहकर्मी से किसी जिज्ञासु मित्र की तरह बातचीत करने की कोशिश करें, न कि क्रोधित सहकर्मी के रूप में। 

- उस सहकर्मी को बताएं कि आप दोनों के लक्ष्य सांझे हैं। उसे समझाएं कि आप उसे लेकर क्यों चिंतित हैं? 

- स्पष्ट बात करें। उससे तथ्यों को सांझा करें। उसे बताएं कि कम्पनी की उससे अपेक्षाएं क्या हैं जबकि वह कैसा प्रदर्शन कर रहा है और उनमें कितना अंतर है। 

- उससे पूछें कि क्या इस स्थिति को वह किसी और ढंग से देखता रहा है। 

- अच्छे कर्मचारी जोकि गुणवत्ता तथा उत्पादकता को लेकर वास्तव में  चिंतित होते हैं, कई बार ऐसे मामलों में हस्तक्षेप करने का फैसला करते हैं लेकिन स्थिति को बद से बदतर बनाने से बचने के लिए इस मामले में कुशलता होना आवश्यक है। असली लक्ष्य दफ्तर में तनाव को कम  करना तथा अपनी टीम के मनोबल को उठाना या कम्पनी को लाभ पहुंचाना होता है। 

- यदि आप अपने किसी सहकर्मचारी के आलसीपन या कामचोरी को देखकर चुप नहीं रह सकते हैं और आपके हस्तक्षेप से भी स्थिति में कोई सुधार नहीं होता है तो आपको फैसला लेना होगा कि आप कर्मचारियों की कार्यक्षमता में असमान्यता के तथ्य को स्वीकार करके काम करते रहें या काम से अपने हाथ पीछे खींच लें।

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