1. रिटर्नशिप प्रोग्राम में हिस्सा लें
रिटर्नशिप प्रोग्राम एक इंटर्नशिप प्रोग्राम की तरह ही काम करता है। यह उन लोगों को काम में लौटने में सहायता करता है जिन्होंने नौकरी से ब्रेक लिया हो। इसके तहत कम्पनियां अस्थायी तौर पर काम देती हैं जिस दौरान वे उनकी दक्षता एवं कौशल की जांच करते हैं। अच्छा प्रदर्शन करने वालों को स्थायी नियुक्ति दे दी जाती है। अधिकतर बड़ी कम्पनियों में ऐसे रिटर्नशिप प्रोग्राम केवल महिलाओं के लिए हैं क्योंकि करियर ब्रेक वाले 90 प्रतिशत आवेदन महिलाओं के ही होते हैं।
2. बूट कैम्प
ब्रेक के बाद अच्छी नौकरी तलाश करना कठिन होता है क्योंकि इंडस्ट्री में लोगों से सम्पर्क भी टूट चुका होता है। रिटर्न-टू-वर्क बूट कैम्प इस कमी को दूर करने में काफी सहायक हो सकते हैं। ऐसे कैम्पों में इंडस्ट्री के लोगों से मुलाकात तथा मानव संसाधन प्रमुखों एवं लीडर्स के साथ सम्पर्क साधने में सहायता की जाती है जो सही मार्गदर्शन कर सकते हैं।
3. स्वयंसेवी बनें
आपको शायद महसूस न हो परंतु वालंटियर के तौर पर काम करके भी आपको नौकरी तलाश करने में सहायता मिल सकती है, खासकर जब आप नए कौशल सीखना चाहते हैं या किसी नए फील्ड में काम करना चाहते हों। आप अपने रिज्यूम में नए कौशल की कमी को दूर करने के लिए अपनी सेवाएं फ्री देने की पेशकश कर सकते हैं। चाहें तो विदेश में वालंटियर के तौर पर काम करने के लिए भी आवेदन दे सकते हैं। इनमें से अधिकतर प्रोग्राम्स में स्टीपैंड भी दिया जाता है।
4. पार्ट-टाइम विकल्प
पहले कार्य का अनुभव रखने वाले पेशेवरों के लिए पार्ट-टाइम काम करने के अनेक विकल्प हैं। वे फ्रीलांसर के तौर पर या अपनी पसंद के समय में काम कर सकते हैं।
उनके पास दफ्तर या घर से काम करने के विकल्प भी होते हैं। करीब-करीब हर फील्ड में पार्ट-टाइम काम मिल जाता है। यदि किसी बड़ी कम्पनी को आपके कौशल उपयुक्त नहीं लगते हैं तो किसी नई कम्पनी में कोशिश करें।
5. फ्रैंचाइजी बनें
बिजनैस शुरू करना अच्छा विकल्प है तथा यह काफी संतोषप्रद भी होता है परंतु इसकी अपनी चुनौतियां हैं, खासकर यदि आप एक अंतराल के बाद बाजार में लौट रहे हैं।
ऐसे में किसी कम्पनी का फ्रैंचाइजी बनना कहीं अधिक सुरक्षित विकल्प है जिसमें आप कम्पनी के देश-दुनिया भर में फैले नैटवर्क का हिस्सा बन जाते हैं। आपको बिजनैस चलाने के लिए प्रशिक्षण तथा विस्तृत सहायता भी मिलती है।
रिटर्नशिप प्रोग्राम एक इंटर्नशिप प्रोग्राम की तरह ही काम करता है। यह उन लोगों को काम में लौटने में सहायता करता है जिन्होंने नौकरी से ब्रेक लिया हो। इसके तहत कम्पनियां अस्थायी तौर पर काम देती हैं जिस दौरान वे उनकी दक्षता एवं कौशल की जांच करते हैं। अच्छा प्रदर्शन करने वालों को स्थायी नियुक्ति दे दी जाती है। अधिकतर बड़ी कम्पनियों में ऐसे रिटर्नशिप प्रोग्राम केवल महिलाओं के लिए हैं क्योंकि करियर ब्रेक वाले 90 प्रतिशत आवेदन महिलाओं के ही होते हैं।
2. बूट कैम्प
ब्रेक के बाद अच्छी नौकरी तलाश करना कठिन होता है क्योंकि इंडस्ट्री में लोगों से सम्पर्क भी टूट चुका होता है। रिटर्न-टू-वर्क बूट कैम्प इस कमी को दूर करने में काफी सहायक हो सकते हैं। ऐसे कैम्पों में इंडस्ट्री के लोगों से मुलाकात तथा मानव संसाधन प्रमुखों एवं लीडर्स के साथ सम्पर्क साधने में सहायता की जाती है जो सही मार्गदर्शन कर सकते हैं।
3. स्वयंसेवी बनें
आपको शायद महसूस न हो परंतु वालंटियर के तौर पर काम करके भी आपको नौकरी तलाश करने में सहायता मिल सकती है, खासकर जब आप नए कौशल सीखना चाहते हैं या किसी नए फील्ड में काम करना चाहते हों। आप अपने रिज्यूम में नए कौशल की कमी को दूर करने के लिए अपनी सेवाएं फ्री देने की पेशकश कर सकते हैं। चाहें तो विदेश में वालंटियर के तौर पर काम करने के लिए भी आवेदन दे सकते हैं। इनमें से अधिकतर प्रोग्राम्स में स्टीपैंड भी दिया जाता है।
4. पार्ट-टाइम विकल्प
पहले कार्य का अनुभव रखने वाले पेशेवरों के लिए पार्ट-टाइम काम करने के अनेक विकल्प हैं। वे फ्रीलांसर के तौर पर या अपनी पसंद के समय में काम कर सकते हैं।
उनके पास दफ्तर या घर से काम करने के विकल्प भी होते हैं। करीब-करीब हर फील्ड में पार्ट-टाइम काम मिल जाता है। यदि किसी बड़ी कम्पनी को आपके कौशल उपयुक्त नहीं लगते हैं तो किसी नई कम्पनी में कोशिश करें।
5. फ्रैंचाइजी बनें
बिजनैस शुरू करना अच्छा विकल्प है तथा यह काफी संतोषप्रद भी होता है परंतु इसकी अपनी चुनौतियां हैं, खासकर यदि आप एक अंतराल के बाद बाजार में लौट रहे हैं।
ऐसे में किसी कम्पनी का फ्रैंचाइजी बनना कहीं अधिक सुरक्षित विकल्प है जिसमें आप कम्पनी के देश-दुनिया भर में फैले नैटवर्क का हिस्सा बन जाते हैं। आपको बिजनैस चलाने के लिए प्रशिक्षण तथा विस्तृत सहायता भी मिलती है।