सफलता
उसी को मिलती है जो दूरदर्शी होते हैं लेकिन आज के कई युवाओं में
दूरदर्शिता का अभाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। दूरदर्शी न होने के
कारण वे सभी दृष्टियों से सक्षम होते हुए भी असफलता का सामना कर रहे हैं और
अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
यदि आप भी सफलता चाहते हैं तो दूर की सोच रखिए। इसके बिना आपके मार्ग में बाधाएं आती रहेंगी और आपको असफलता का सामना करते रहना पड़ेगा। जब भी आप किसी प्रतियोगी परीक्षा के लिए फॉर्म भरते हैं या किसी नौकरी के लिए आवेदन करते हैं तो आप उसी दिन से अपना लक्ष्य पाने के लिए तैयारी शुरू कर दीजिए।
मान लीजिए कि आपने किसी पद के लिए आवेदन पत्र भरा। यदि वह सीधी भर्ती है तो आपको साक्षात्कार में उपस्थित होना पड़ेगा। आप यह निश्चय करके साक्षात्कार की तैयारी शुरू कर दीजिए कि आपको साक्षात्कार में उपस्थित होना ही है। इस बात का इंतजार मत कीजिए कि साक्षात्कार के लिए जब आपको बुलावा पत्र मिल जाएगा, तभी आप तैयारी शुरू करेंगे। यदि आप साक्षात्कार के लिए तैयारी कर लेते हैं और आपको बुलावा पत्र नहीं भी मिलता, तब भी आप घाटे में नहीं रहते। आपकी तैयारी उस नौकरी के लिए काम न आई तो क्या हुआ, आपने सामान्य ज्ञान वगैरह की जो तैयारी की है, वह दूसरी नौकरी के प्रयास में काम आएगी। आपके इस प्रयास में आपका ज्ञानार्जन ही होगा, साक्षात्कार में सफल होने की संभावना बढ़ेगी और आपकी दूरदर्शिता आपकी सफलता का द्वार खोलेगी।
कई ऐसी प्रतियोगी परीक्षाएं हैं, जो प्राय: हर साल आयोजित की जाती हैं। इन प्रतियोगी परीक्षाओं में से किसी एक में आप को बैठना है तो लक्ष्य बनाकर तुरंत उसकी तैयारी शुरू कर दें। ऐसा नहीं कि जब उक्त प्रतियोगी परीक्षा के आयोजन संबंधी विज्ञापन जारी होगा और जब आप परीक्षा में बैठने के लिए फॉर्म भर देंगे, तभी परीक्षा की तैयारी शुरू करेंगे। ऐसा करना अनुचित है। ऐसा करने वाले युवाओं को समयाभाव का सामना करना पड़ता है और उन्हें सफलता नहीं मिलती।
स्कूल या महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं में वे अच्छे अंकों के साथ सफलता अर्जित करते हैं जो शुरू से ही अर्थात शिक्षा सत्र की शुरूआत से ही पढ़ाई में ध्यान देते हैं। उनका लक्ष्य परीक्षा में श्रेष्ठ अंक लाना होता है। वे अपने लक्ष्य को पाने के लिए शिक्षा सत्र की शुरूआत से ही तैयारी में जुट जाते हैं जबकि जो छात्र परीक्षा के नजदीक आने पर तैयारी शुरू करते हैं, वे या तो असफलता का सामना करते हैं या उन्हें वांछित सफलता नहीं मिलती।
जैसे कि पहले तो अनिल ने केवल अपनी स्कूलीय और महाविद्यालयीन पढ़ाई की ओर ध्यान दिया। इस बीच उसने किसी तरह की प्रतियोगी परीक्षा वगैरह के लिए फार्म नहीं भरा। उसका लक्ष्य स्कूल और कालेज की परीक्षाओं में उच्च श्रेणी हासिल करना था। उसने कड़ी मेहनत की और वह अपने उद्देश्य में सफल भी हुआ। उसने मैरिट में स्नातक किया।
स्नातक होने के बाद उसने प्रतियोगी परीक्षाओं के बारे में सोचा। इसके लिए उसने बैंक के क्षेत्र में अपना करियर बनाने का निश्चय किया। फिर उसने बैंक की प्रतियोगी परीक्षा में बैठने के लिए कड़ी मेहनत शुरू कर दी। तैयारी के लिए लिए उसने आवेदन भरने तक भी इंतजार नहीं किया क्योंकि उसे मालूम था कि हर साल बैंकों में विभिन्न पद हेतु प्रतियोगी परीक्षा के लिए विज्ञापन जारी होते हैं।
उसकी मेहनत रंग लाई। वह बैंक अफसर हेतु आयोजित प्रतियोगी परीक्षा में प्रथम प्रयास में ही सफल हो गया। वह इसलिए सफल हुआ क्योंकि वह दूरदर्शी था। यदि वह दूर की सोच नहीं रखता तो उसे इतनी आसानी से सफलता नहीं मिलती। वास्तव में जो दूरदर्शी होते हैं, उन्हें सफलता आसानी से मिल जाती है और उनके होने की संभावना का प्रतिशत भी अपेक्षाकृत अधिक होता है। अत: आप भी दूरदर्शी बनिए और श्रेष्ठ सफलता पाइए।
यदि आप भी सफलता चाहते हैं तो दूर की सोच रखिए। इसके बिना आपके मार्ग में बाधाएं आती रहेंगी और आपको असफलता का सामना करते रहना पड़ेगा। जब भी आप किसी प्रतियोगी परीक्षा के लिए फॉर्म भरते हैं या किसी नौकरी के लिए आवेदन करते हैं तो आप उसी दिन से अपना लक्ष्य पाने के लिए तैयारी शुरू कर दीजिए।
मान लीजिए कि आपने किसी पद के लिए आवेदन पत्र भरा। यदि वह सीधी भर्ती है तो आपको साक्षात्कार में उपस्थित होना पड़ेगा। आप यह निश्चय करके साक्षात्कार की तैयारी शुरू कर दीजिए कि आपको साक्षात्कार में उपस्थित होना ही है। इस बात का इंतजार मत कीजिए कि साक्षात्कार के लिए जब आपको बुलावा पत्र मिल जाएगा, तभी आप तैयारी शुरू करेंगे। यदि आप साक्षात्कार के लिए तैयारी कर लेते हैं और आपको बुलावा पत्र नहीं भी मिलता, तब भी आप घाटे में नहीं रहते। आपकी तैयारी उस नौकरी के लिए काम न आई तो क्या हुआ, आपने सामान्य ज्ञान वगैरह की जो तैयारी की है, वह दूसरी नौकरी के प्रयास में काम आएगी। आपके इस प्रयास में आपका ज्ञानार्जन ही होगा, साक्षात्कार में सफल होने की संभावना बढ़ेगी और आपकी दूरदर्शिता आपकी सफलता का द्वार खोलेगी।
कई ऐसी प्रतियोगी परीक्षाएं हैं, जो प्राय: हर साल आयोजित की जाती हैं। इन प्रतियोगी परीक्षाओं में से किसी एक में आप को बैठना है तो लक्ष्य बनाकर तुरंत उसकी तैयारी शुरू कर दें। ऐसा नहीं कि जब उक्त प्रतियोगी परीक्षा के आयोजन संबंधी विज्ञापन जारी होगा और जब आप परीक्षा में बैठने के लिए फॉर्म भर देंगे, तभी परीक्षा की तैयारी शुरू करेंगे। ऐसा करना अनुचित है। ऐसा करने वाले युवाओं को समयाभाव का सामना करना पड़ता है और उन्हें सफलता नहीं मिलती।
स्कूल या महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं में वे अच्छे अंकों के साथ सफलता अर्जित करते हैं जो शुरू से ही अर्थात शिक्षा सत्र की शुरूआत से ही पढ़ाई में ध्यान देते हैं। उनका लक्ष्य परीक्षा में श्रेष्ठ अंक लाना होता है। वे अपने लक्ष्य को पाने के लिए शिक्षा सत्र की शुरूआत से ही तैयारी में जुट जाते हैं जबकि जो छात्र परीक्षा के नजदीक आने पर तैयारी शुरू करते हैं, वे या तो असफलता का सामना करते हैं या उन्हें वांछित सफलता नहीं मिलती।
जैसे कि पहले तो अनिल ने केवल अपनी स्कूलीय और महाविद्यालयीन पढ़ाई की ओर ध्यान दिया। इस बीच उसने किसी तरह की प्रतियोगी परीक्षा वगैरह के लिए फार्म नहीं भरा। उसका लक्ष्य स्कूल और कालेज की परीक्षाओं में उच्च श्रेणी हासिल करना था। उसने कड़ी मेहनत की और वह अपने उद्देश्य में सफल भी हुआ। उसने मैरिट में स्नातक किया।
स्नातक होने के बाद उसने प्रतियोगी परीक्षाओं के बारे में सोचा। इसके लिए उसने बैंक के क्षेत्र में अपना करियर बनाने का निश्चय किया। फिर उसने बैंक की प्रतियोगी परीक्षा में बैठने के लिए कड़ी मेहनत शुरू कर दी। तैयारी के लिए लिए उसने आवेदन भरने तक भी इंतजार नहीं किया क्योंकि उसे मालूम था कि हर साल बैंकों में विभिन्न पद हेतु प्रतियोगी परीक्षा के लिए विज्ञापन जारी होते हैं।
उसकी मेहनत रंग लाई। वह बैंक अफसर हेतु आयोजित प्रतियोगी परीक्षा में प्रथम प्रयास में ही सफल हो गया। वह इसलिए सफल हुआ क्योंकि वह दूरदर्शी था। यदि वह दूर की सोच नहीं रखता तो उसे इतनी आसानी से सफलता नहीं मिलती। वास्तव में जो दूरदर्शी होते हैं, उन्हें सफलता आसानी से मिल जाती है और उनके होने की संभावना का प्रतिशत भी अपेक्षाकृत अधिक होता है। अत: आप भी दूरदर्शी बनिए और श्रेष्ठ सफलता पाइए।