जल्दी में न लें मकान खरीदने का फैसला अभी नहीं बढ़ेंगी कीमतें

जहां चुनावों के बाद देश में स्थिर सरकार बनने से रियल्टी क्षेत्र में तेजी की अपेक्षा से अनेक लोग उत्साहित हैं वहीं कई सारे लोग जो कुछ समय से नया मकान खरीदने की योजना बना रहे थे या इसकी तलाश कर रहे थे, इससे चिंतित भी हैं। दरअसल, ऐसी अटकलें लगती रही हैं कि चुनावों के बाद रियल एस्टेट में तेजी आएगी जिससे मकानों की कीमतों में भी उछाल आएगा यानी उनकी कीमत कुछ ही समय में कई गुणा बढ़ सकती है। ऐसे में वे लोग जल्द से जल्द मकान खरीद लेना चाहते हैं। परंतु जानकारों की राय में सम्पत्ति की कीमतें बढऩे के भय से मकान खरीदने में किसी तरह की जल्दबाजी दिखाने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि कीमतों में बहुत ज्यादा तेजी जल्द आने की कोई सम्भावना नहीं है।

जानकारों की राय में हो सकता है कि लेन-देन में कुछ तेजी आए तथा थोड़ी कीमतें भी बढ़ जाएं परंतु यह क्षणिक होगा। उनके अनुसार कीमतों में प्रभावी वृद्धि होने में एक साल का समय भी लग सकता है- वह भी तब होगा जब नई सरकार सत्ता में 6 महीने सफलतापूर्वक पूरे कर ले तथा उसकी नीतियां अर्थव्यवस्था में सुधार कर सकें।

कीमतों में तुरंत वृद्धि नहीं होने का एक कारण है कि पहले से ही अनेक इलाकों, खासकर महानगरों, में सम्पत्ति की कीमतें काफी ज्यादा हैं। अर्थव्यवस्था में सुस्ती से लोगों के पारिश्रमिक में अधिक इजाफा नहीं हो सका है जिससे उनकी क्रय क्षमता प्रभावित हुई है। आवासीय क्षेत्र में अधिक मांग के लिए पहले अर्थव्यवस्था में सुधार आना चाहिए जिससे लोगों की क्रय क्षमता में इजाफा हो। उच्च ब्याज दरें भी एक रुकावट हैं क्योंकि नई सरकार भी कम समय में ब्याज दरों में कमी नहीं ला सकती है खासकर जब मुद्रास्फीति की दर अधिक चल रही हो।

सुधारों की जरूरत
जहां नई सरकार तुरंत से रियल एस्टेट सैक्टर में तेजी नहीं ला सकती है, वह कम से कम ऐसे कदम उठाने की शुरूआत तो कर ही सकती है जिनका मध्यम से दीर्घ अवधि में इस क्षेत्र पर सकारात्मक असर हो। सबसे पहले तो इसे रियल एस्टेट परियोजनाओं के लिए कम से कम समय में स्वीकृति  प्रदान करने का बंदोबस्त करना चाहिए।

डिवैल्परों की मांग है कि अधिकारियों को भी समय पर स्वीकृतियां न देने का जवाबदेह बनाना चाहिए। यहां भी यह याद रखना होगा कि रियल एस्टेट राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आता है इसलिए केंद्र शीघ्र स्वीकृतियों के लिए अपनी तरफ से केवल आदर्श पेश कर सकता है तथा राज्य सरकार पर उसे अपनाने का जोर डाल सकता है।

नई सरकार को रियल एस्टेट रैगुलेशन एंड डिवैल्पमैंट बिल भी पास करवाना होगा। डिवैल्पर्स को अधिक जबावदेह बना कर सैक्टर में लोगों का विश्वास मजबूत किया जा सकता है। इस वक्त ग्राहकों को दूर रखने की एक वजह यह भी है कि लोगों को आसानी से डिवैल्पर्स पर भरोसा नहीं होता है कि वे उन्हें समय पर तथा बढिय़ा गुणवत्ता वाली सम्पत्ति देंगे। इस वजह से भी कई ग्राहक नई सम्पत्ति खरीदने से कतरा रहे हैं। हालांकि इस कानून में भी कुछ बेहद सख्त प्रावधानों को हटाने की मांग होती रही है जिनमें कुछ सुधार की गुंजाइश जरूर है।

डिवैल्पर्स को सस्ते फंड्स उपलब्ध करवाना भी बेहद जरूरी है। ऐसा तभी होगा जब रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया रियल एस्टेट क्षेत्र को दिए जाने वाले लोन संबंधी नियमों में ढील देगा।  सेबी ने रियल एस्टेट इन्वैस्टमैंट ट्रस्ट्स रैगुलेशन्स (आई.ई.आई.टी.), 2013 कानून का मसौदा तैयार किया था ताकि इस क्षेत्र में अधिक फंड्स आ सकें। नई सरकार को आई.ई.आई.टीज को टैक्स में जरूरी  छूट देनी होगी। नई सरकार यदि पहले से जारी टैक्स छूट की अवधि बढ़ाती है तो उससे भी इस सैक्टर को फायदा होगा।

अंत में : यदि आप भी उन लोगों में से एक हैं जो कुछ समय से अपना मकान लेने की सोच रहे हैं तो अभी इस भय से इसमें जल्दबाजी न करें कि कीमतों में तुरंत बहुत अधिक इजाफा होगा। रियल एस्टेट मार्कीट में कोई भी बदलाव आने में कुछ समय लगता है इसलिए पूरी तसल्ली करने के बाद अपने लिए मकान का चुनाव तथा सौदा करें।

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