ऑफिस में कभी काम को कल पर टाल कर, तो कभी काम ज्यादा होने पर छुट्टी ले लेना जैसी आदतें पुरुषों में ही नहीं, बल्कि महिला कर्मचारियों में भी पाई जाती हैं। उन्हें तो शायद यह महसूस भी नहीं होता कि उनकी यह आदत धीरे-धीरे उनकी ही परफार्मैंस पर भारी पड़ते हुए उन्हें बॉस की नजरों में गैर-जिम्मेदार ठहराती जा रही है।

महिलाएं अक्सर दूसरों के सामने यह राग अलापती हैं कि वे तो मजे की नौकरी कर रही हैं। ऐसी बातें जब बॉस के कानों में पहुंचती हैं, तो वह निल-परफार्मैंस के साथ सहज ही आपकी तुलना कर लेता है। यही कारण है कि जब प्रमोशन की बात आती है तो कई बार आपके जूनियर बाजी मार जाते हैं।

ऐसी कई गलतियां हैं, जिनकी आदी हो चुकीं महिला कर्मचारी इन्हें अपनी आदत बना लेती हैं। यदि आप में भी कोई ऐसा अवगुण है तो उसे समय रहते ही सुधार लेना आवश्यक है।

अपनी गलती दूसरों के सिर न मढ़ें
अपनी गलती को छिपाने वाले तथा बॉस की नजरों में अच्छी इमेज साबित करने वाले लोग हर जगह होते हैं। ऐसे लोग अपनी गलती दूसरे के सिर मढ़ कर बच निकलना चाहते हैं, परंतु अपनी इस आदत के कारण दूसरों की परेशानी की वजह बन जाते हैं। यदि आप में भी यह आदत है तो इसे सुधार लेना ही बेहतर है। हो सकता है कि आरंभ में अपनी गलती मानते हुए आपको शर्मिंदगी महसूस हो, लेकिन यकीन मानें कि उसे छिपाने में आपको कहीं ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ती है। अपने किसी कुलीग के सिर गलती मढऩे की कोशिश हर बार कामयाब नहीं हो सकती और गलती साबित हो जाने पर वह स्थिति अधिक कष्टदायक हो सकती है।

रोज की बहानेबाजी तौबा-तौबा
कई बार आप सुबह उठती हैं और काम पर जाने का मन नहीं हो रहा या बच्चों ने घूमने की फरमाइश कर दी तो तुरंत फोन कर बॉस से पेट दर्द, सिरदर्द या किसी और बीमारी का बहाना बना कर आप लीव ले लेती हैं। छुट्टी लेना तो आपका अधिकार है और उस समय आप अभिनय में कलाकारों को भी मात दे देती हैं। कुछ दिन की छुट्टी चाहिए तो मैडीकल सर्टीफिकेट देकर लंबी छुट्टी ले ली परंतु ऐसी बहानेबाजी आपके दूसरे कुलीग्स का वर्क  प्रैशर बढ़ा देती है। कभी यह सोचा है कि आपकी इस आदत के चलते आप अपने सहयोगियों का ही नहीं, बल्कि अपने बॉस का भी विश्वास खोने लगती हैं, क्योंकि वह आपको जिम्मेदारी का काम या ओहदा देने से कतराने लगते हैं।

व्यवहार हो संतुलित

किसी ने आपके काम पर उंगली उठाई या फिर आपको क्रिटीसाइज किया तो आप अपने गुस्से पर काबू नहीं रख पातीं और गुस्से में लाल-पीली होकर सामने वाले पर बरस उठती हैं या फिर आप सामने वाले की कही गलत बातों को भी चुपचाप सुन स्वयं में ही सिमटे हुए वहां से उठ कर चल देती हैं। प्रोफैशनल नजरिए से देखा जाए तो दोनों तरह के व्यवहार सही नहीं हैं, क्योंकि तुरंत रिएक्ट करने से आप सबकी नजरों में एग्रैसिव साबित होते हैं तो चुपचाप हर किसी की नाराजगी झेलने से आप सॉफ्ट टार्गैट बन जाते हैं। इसलिए बेहतर है कि व्यवहार को संतुलित रखें क्योंकि दोनों ही स्थितियों में आप अपना सही पक्ष नहीं रख सकतीं। इसलिए  बेहतर है कि भीतर का आक्रोश थम जाने पर ही सामने वाले से बात करें। इससे आप जहां सही ढंग से अपना पक्ष रख सकेंगी, वहीं आपकी एनर्जी बेकार की बातों में वेस्ट नहीं होगी और काम पर भी उसका नैगेटिव असर नहीं पड़ेगा।

पर्सनल काम करें अवॉयड

ऑफिस के फोन से पर्सनल कॉल करना, ई-मेल पर चैट करना, प्रिंट पर पर्सनल डॉक्यूमैंट्स के प्रिंट लेना या फिर घरेलू कामों को निपटाना जैसे काम एक दिन बॉस के नोटिस में आ ही जाते हैं। ये सब आपकी कार्यक्षमता पर सवालिया निशान भी लगाते हैं। इसलिए बेहतर है कि इस प्रकार के पर्सनल कामों को अवॉयड किया जाए।

शालीन पहनावा
जब बात ऑफिस में प्रोफैशनल बिहेवियर की चल रही हो तो सही ड्रैसिंग भी उसी में आती है। यदि ऑफिस में कोई ड्रैस कोड नहीं है तो आपकी जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है, इसलिए ऑफिस में हमेशा ग्रेसफुल पोशाक ही पहनें, क्योंकि इसी से आपके सहयोगी आपके बारे में अपनी राय कायम करते हैं।