अमूल्य सांस्कृतिक धरोहरों के अलम्बदार बनें-हेरिटेज प्रबंधन


अदï्भुत प्राकृतिक संपदाओं की धरोहर तथा मानवीय प्रयासों के आश्चर्यजनक करिश्मे आज हमारी विरासत के रूप में हमारे समक्ष मौजूद हैं। लेकिन विभिन्न समस्याओं के चलते आज इनकी भारी उपेक्षा की जा रही है, जो सभी के लिए चिंता का सबब है। 'हेरिटेज प्रबंधनÓ ऐसा ही अमूल्य धरोहरों की साज-संभालवाला कैरियर है, जो युवाओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है।
भारतीय संस्कृति यहां की विशिष्टï सभ्यता व गहरे आध्यात्मिक मूल्यों के चलते सदैव विदेशियों हेतु आकर्षण का केंद्र रही है। यहां की आदर्श तथा अनुकूल जलवायु, प्राकृतिक दृश्य, ऐतिहासिक धरोहर तथा मिथकीय किस्से सभी के लिए प्रेरणास्त्रोत रहे हैं। खजुराहो की उत्कृष्टï कलाकृतियां, कोणार्क के सूर्य मंदिर, अंजता-एलोरा के भित्तिचित्र, ताजमहल का शिल्प भारत के दर्शनीय स्थल माने जाते हैं। लेकिन भारी विडम्बना है कि प्राकृतिक आघात, प्रदूषण तथा पर्यटकों के उपेक्षित रवैए के चलते इन अमूल्य धरोहरों की समुचित देखभाल अथवा रख-रखाव नहीं हो पा रहा है।
भारत के दर्शनीय स्थलों से प्रभावित होकर जब कोई सैलानी भारत पहुंचता है तो यहां स्थलों पर बरती जा रही कोताही तथा अव्यवस्थाएं एक ओर जहां उसका मोहबंग करती हैं वहीं दूसरी ओर उसे फिर यहां आने का कोई चार्म भी शेष नहीं रह जाता। इन्हीं तमाम अव्यवस्थाओं को दूर करने के लिए दिल्ली के सांस्कृतिक शोध एवं प्रबंधन संस्थान ने पहली बार  'हेरिटेज प्रबंधनÓ में स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठï्यक्रम प्रारम्भ किया है। संभवत: यह भारत का पहला ऐसा पाठï्यक्रम है, जो इस संकाय में प्रशिक्षण देता है।
एक वर्ष की अवधि वाले पाठï्यक्रम में प्रवेश के लिए उम्मीदवार को इतिहास, पुरातत्व, एनथैरोपॉलाजी, रसायन शास्त्र अथवा कला इतिहास में स्नातकोत्तर होना जरूरी है। इंजीनियरिंग में स्नातक, वास्तुकला अथवा टाउन प्लानिंग की विधिवत शिक्षा ग्रहण कर चुके युवक-युवतियां भी इस कोर्स में प्रवेश की पात्रता रखते हैं। प्रवेश के लिए यह भी अनिवार्य है कि प्रत्याशी ने जो भी परीक्षा उत्तीर्ण की हो उसमें उसकी अंक प्रतिशतता कम-से-कम 35 हो।
जो अभ्यर्थी पूर्व में हेरिटेज प्रबंधन के व्यवसाय से जुड़े हुए हैं अथवा इस क्षेत्र में थोड़ा-बहुत अनुभव, जानकारी रखते हैं उनके लिए संस्थान प्रवेश में रियायत प्रदान करता है। यही नहीं भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विबाग अथवा इनकी राज्य इकाई, इनटेक अथवा आई.टी.आई. में कार्यरत अभ्यर्थियों के लिए इस पाठï्यक्रम में प्रवेश हेतु आधारभूत शिक्षा में कटौती का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त इस कोर्स में पारम्परिक कलाकर्मी जैसे 'सतपथीÓ भी प्रवेश की पात्रता रखते हैं। परन्तु ïउन्हें कम-से-कम पांच साल का कार्यानुभव होना चाहिए।
हेरिटेज प्रबंधन का पाठï्यक्रम मूलत: तीन सत्रों में विभाजित होता है। चार सप्ताह के फाउण्डेशन कोर्स के अन्तर्गत छात्रों को भारतीय इतिहास, संस्कृति, सामाजिक ढांचे की प्रबंधकीय अवधारणा के अनुसार अध्ययन प्रदान किया जाता है। प्रथम व द्वितीय सत्र में विरासत के रख-रखाव और प्रबंधन के बारे में बताया व सिखाया जाता है। तृतीय व अंतिम सत्र में विरासत के क्षेत्र, योजना विस्तार तथा जन जागृति को महत्व दिया जाता है। यही नहीं अध्ययन छात्रों के समूह मौके या स्थलों पर भी भेजे जाते हैं ताकि वो प्रत्यक्षत: वहां की समस्याओं व अन्य मामलों की बारीकियों की ठीक ढंग से छानबीन कर सकें।
प्रशिक्षण संस्थान
हेरिटेज प्रबंधन, सांस्कृतिक शोध एवं प्रबंधन संस्थान, नई दिल्ली प्रशिक्षण।

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