नयनाभिराम रंगों में चमकदार भविष्य-पेंट इंजीनियरिंग


सामान्त: ह बात कोई सोचता भी नहीं कि पेंट जैसे साधारण उत्पाद की भी कोई इंजीनिरिंग अथवा टेक्नोलॉजी हो सकती है। इंजीनिरिंग की शिक्षा को अपने जीवन का संकल्प बनाने वाले ुवक-ुवतिों को जब प्रचलित इंजीनिरिंग कोर्सेज में प्रवेश नहीं मिल पाता तो वे निराश हो जाते हैं। वे े नहीं जानते कि विशिष्टï इंजीनिरिंग अथवा टेक्नोलॉजी के कोर्स भी अपने आप में बहुपोगी तथा अत्ंत महत्व के हैं। पेंट इंजीनिरिंग का क्षेत्र एक अति महत्वपूर्ण क्षेत्र है जहां प्रतिभाशाली ुवा अपने शानदार भविष् का निर्माण कर सकते हैं। आज पेंट इंजीनिरों की कमी के चलते इस कैरिर में भारी स्कोप है। मोटर वाहन उद्योग के अप्रतशित विस्तार तथा उसमें विदेशी कंपनिों की सहभागिता के कारण पेंट इंजीनिरिंग का क्षेत्र बेहद सुरक्षित व गरिमापूर्ण हो गा है।
पेंट समस्त घरों में प्रोग आनेवाला केमिकल है। सामान्त: लोहे, लकड़ी तथा सीमेंट की सतह को सजाने-संवारने अथवा बारिश व मौसम के अन् कुप्रभावों से बचाए रखने की गरज से पेंट का उपोग किा जाता है। पेंट, वार्निश, इनेमल एवं लैकर औद्योगिक नजरिए से अन् र्काों में भी प्रुक्त किए जाते हैं। एक जमाना था जब लोग कच्चे घरों में रहते थे और पीली मिट्टïी अथवा गोबर के घोल से घरों में पुताई की जाती थी। लेकिन सभ्ता के विकास के साथ-साथ लोगों की जीवनशैली तथा रहन-सहन में भी आमूल-चूल परिवर्तन हुए। फलस्वरूप झोंपडि़ों में गुजर-बसर करने वाले लोग महलों, कॉम्पलेक्सों तथा गगनचुम्बी इमारतों के मालिक हो गए।
विभिन्न अवसरों पर की जाने वाली साज-सफाई का पेंट व ननाभिराम रंगों से गहरा नाता है। हम अपनी जरूरत व पसंद के मुताबिक रंगों का डिब्बा बाजार से खरीदकर लाते हैं और वार्निश, थिनर अथवा मिट्टïी के तेल से सम्मिश्रित करके ब्रश अथवा स्प्रे उपकरण की मदद से दीवारों अथवा मनचाहे स्थानों पर लगा देते हैं। इसके रासानिक सूत्र पर धन दें तो हम पाते हैं कि पेंट, जिसे हम साधारण-सा रंग-रोगन भर मान लेते हैं, वास्तव में रेजिन, पॉलीमर, तेल, प्लास्टिसाइजर, ड्रार, एडिटिव, पिगमेंट, साल्वेंट आदि अनेक कच्चे मालों का जटिल मिश्रण है। किसी भी पेंट की उपोगिता तथा गुणवत्ता प्रत्ेक कच्चे माल की शुद्धता तथा उसकी समुचित मात्रा पर निर्भर रहती है।
बीते एक-दो दशकों में पेंट की दुनिा में क्रांतिकारी परिवर्तन आए हैं। मोटर वाहन उद्योग के आश्र्चजनक विस्तार तथा उसमें वाहनों के लिए रंगों की विविधता ने इस क्षेत्र में भारी संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं। कारों के विशेष रंग वाले मॉडलों की कीमत सामान् मॉडल से कही जदा है और लोग बिना इसकी परवाह उन्हें खरीदते भी हैं। ही नहीं मोटर बाइकों के रंग तथा स्कूटरों के मैटेलिक रंगों के आकर्षण ने लोगों को अपने -पुराने व फीके से लगने वाले वाहनों को बेचने के लिए विïवश कर दिा।
बहुराष्टï्री कंपनिों की वाहन उद्योग में बढ़ी-चढ़ी सहभागिता ने भी पेंट की दुनिा में नित नए चमत्कारों को जन्म दिा है। वाहन उद्योग के अलावा प्रा: सभी कारोबार पेंट की जरूरत से रू-ब-रू हैं। आश्र्चजनक तथ् ह है कि भारत में हर साल लगभग दस हजार करोड़ रुपे मूल् की कीमत का लोहा जंग लग जाने के कारण नष्टï हो जाता है। पेंट इंजीनिरिंग के समुचित प्रासों से इस राष्टï्री संपत्ति को बचाए जाने की दिशा में मदद मिल सकती है। विभिन्न प्रासों के बावजूद भारत मात्र 250 ग्राम प्रति व्क्ति पेंट का उत्पादन कर सकने में समर्थ है जबकि अमेरिका, ूरोप तथा जापान जैसे देशों में ही ग्राफ लगभग 25 कि.ग्रा. प्रति व्क्ति है।
विभिन्न सरकारी व निजी क्षेत्र के संस्थानों में अब पेंट इंजीनिरिंग के संबंध में विधिवत प्रशिक्षण पाठï्क्रम संचालित किए जा रहे हैं। पेंट इंजीनिरिंग टेक्नोलॉजी का पाठï्क्रम चार वर्ष की अवधि का है।
पेंट इंजीनिरिंग पाठï्क्रम में अनेक विषों के अन्तर्गत अध्न कराा जाता है। इस पाठï्क्रम को हम मौटेतौर पर तीन भागों में विभक्त कर सकते हैं। प्रथम भाग में विज्ञान संबंधी मूल विषों जैसे गणित, भौतिक विज्ञान, रसान शास्त्र आदि उच्च स्तरी कोर्स समाहित होते हैं। दूसरे वर्ग में प्रचलित इंजीनिरिंग विषों मसलन मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, कम्प्ूटर, केमिकल इंजीनिरिंग से जुड़े संदर्भों में अध्न करना होता है। तीसरे व सर्वाधिक महत्वपूर्ण वर्ग के तहत पेंट इंजीनिरिंग के विभिन्न पक्षों जैसे कच्चा माल, पेंट, फार्मूलों का सिद्धांत, उत्पादन प्रक्रिाएं एवं मशीनरी, पेंट की गुणवत्ता निंत्रण, पेंट लगाने के विविध साधन, सूखने व ठोस होने के विविध सिद्धांत, पेंट की शुष्क सतहों की विशेषताएं आदि के बारे में बताा जाता है।
ही नहीं अभ्र्थिों को सजावट, उद्योग-धन्धों, जहाजों, जलानों, फैक्टरिों की चिमनिों व अन् माध्मों के लिए उपोग में आने वाले पेंट का भी ज्ञान कराा जाता है। थेरी के अलावा प्रोगशाला तथा र्काशालाओं में भी अभ्र्थिों को ववहारिक अनुभव कराए जाते हैं।
पाठï्क्रमके  अंतिम वर्ष में प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैार की जाती है। ह रिपोर्ट डिजाइनिंग, सेमिनार, कारखानों में प्रत्क्ष अनुभव आदि के आधार पर तैार की जाती है। पेंट इंजीनिरिंग पाठï्क्रम पूर्ण करने वाले ुवाओं के लिए काम की कोई कमी नहीं, उन्हें कई बार तो प्रशिक्षण अवधि में ही कैंपस इंटरव्ू के बाद निुक्ति पत्र दे दिए जाते हैं।
प्रशिक्षण संस्थान
गरवारे इंस्टीटï्ूट ऑफ कैरिर एजुकेशन एण्ड डेवलपमेंट, विद्या नगरी, कालीना, सान्ताक्रूंज (पूर्व) मुंबई-98
हरकोर्ट बटलर टेक्नॉलॉजिकल इंस्टीटï्ूट (एच.बी.टी.आई.) नवाबगंज, कानपुर-208002 (उ.प्र.)
ूनिवर्सिटी डिपार्टमेंट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी, माटुंगा (मुंबई) 400019
ूनिवर्सिटी डिपार्टमेंट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी, नार्थ महाराष्टï्र विश्वविद्याल, जलगांव-425001
लक्ष्मीनाराण इंस्टीटï्ूट ऑफ टेक्नोलॉजी, अमरावती रोड, नागपुर- 440010
ूनिवर्सिटी डिपार्टमेंट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी, अमरावती ूनिवर्सिटी, अमरावती (महाराष्टï्र)
वीरमाता जीजाबाई टेक्नोलॉजिकल इंस्टीटï्ूट (वी.जे.टी.आई.), माटुंगा, मुंबई-400019
वि_ïलभाई पटेल और राजरत्न पी.जी. पटेल साइंस कॉलेज, वल्लभ विद्यानगर, जिला खेड़ा, (गुजरात) 388120
डेक्कन एजुकेशन सोसाईका टेक्निकल इंस्टीटï्ूट सर्वेन्टï्स ऑफ इंडिा, सोसाइटी रोड, डेक्कन जिमखाना, पुणे-411004
इंडस्ट्रिल रिसर्च लेबोरेटरी, कैनाल साउथ रोड, कलकत्ता-700015

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