दुनिया
में कोई भी चीज दृढ़ता की जगह नहीं ले सकती, प्रतिभा भी नहीं। प्रतिभा
होते हुए भी असफल होना एक आम-सी बात है। दिमाग तेज होने पर भी बेरोजगार
होना एक मुहावरा ही बन चुका है। पढ़े-लिखे निराश व्यक्तियों की दुनिया में
कोई कमी नहीं। केवल दृढ़ता और संकल्प ही सर्वशक्तिमान हैं। ‘लगे रहो’ के
मुहावरे ने मानव सभ्यता की समस्याओं को पहले भी हल किया है और आगे भी करता
रहेगा। दृढ़ता आत्म-अनुशासन का 5वां और आखिरी स्तंभ है।
दृढ़ता क्या है? दृढ़ता काम को करते रहने की क्षमता है, चाहे आपकी मन:स्थिति जैसी भी हो। आप तब भी कोशिश करते रहते हैं जब आपको हार मान लेने की इच्छा होती है। जब आप किसी बड़े लक्ष्य पर काम करते हैं तो आपके उत्साह में ऐसे ही उतार-चढ़ाव होते हैं जैसे कि किनारे से लहरें टकराती हैं।
कई बार आप उत्साहित होते हैं, कई बार नहीं भी होते परन्तु यह आपका उत्साह नहीं जिससे आपको अच्छे नतीजे मिलेंगे बल्कि वह तो आपका काम है। दृढ़ता आपको उत्साह कम होने पर भी काम करते रहने की क्षमता प्रदान करती है इसलिए आपको नतीजे मिलते रहते हैं।
दृढ़ता क्या है? दृढ़ता काम को करते रहने की क्षमता है, चाहे आपकी मन:स्थिति जैसी भी हो। आप तब भी कोशिश करते रहते हैं जब आपको हार मान लेने की इच्छा होती है। जब आप किसी बड़े लक्ष्य पर काम करते हैं तो आपके उत्साह में ऐसे ही उतार-चढ़ाव होते हैं जैसे कि किनारे से लहरें टकराती हैं।
कई बार आप उत्साहित होते हैं, कई बार नहीं भी होते परन्तु यह आपका उत्साह नहीं जिससे आपको अच्छे नतीजे मिलेंगे बल्कि वह तो आपका काम है। दृढ़ता आपको उत्साह कम होने पर भी काम करते रहने की क्षमता प्रदान करती है इसलिए आपको नतीजे मिलते रहते हैं।
