डेयरी व्यवसाय में प्रगति की असीम संभावनाएं


एक जमाना था जब डेरी से जुड़े व्वसा को दूधिों का काम समझकर कुछ खास महत्व नहीं दिा जाता था। लेकिन आधुनिक टेक्नोलॉजी के प्रवेश से दुग्ध उत्पादन के ग्राफ में बेहद उछाल आा है। डेरी टेक्नोलॉजी के अभूतपूर्व प्रोगों के फलस्वरूप आज भारत दुग्ध उत्पादन के मामले में पहले नम्बर पर है। दुग्ध दोहन से लेकर उसके अवशीतन, पैकिंग, विपणन आदि मामलों में आधुनिक टेक्नोलॉजी का प्रोग किा जा रहा है। तकनीकी पक्ष जुड़ जाने के कारण विभिन्न सरकारी व निजी क्षेत्र के संस्थानों ने इस बाबत बाकादा प्रशिक्षण पाठï्क्रम शुरू कर दिए हैं, जिनमें ुवा वर्ग अपना भविष् खोज रहा है।
आज प्रत्ेक छोटे-बड़े शहरों में पैकेटबंद दूध की खपत भारी मात्रा में है। चा, मिष्ठïान्न की दुकानों से लेकर घरों व विभिन्न मांगलिक आोजनों तक में पैकेटवाले दूध की मांग है। अनेक लोग विभिन्न कारणों व मिलावट आदि के भ से खुला दूध लेने में विश्वास नहीं करते और निमित रूप से पैकेटबंद दूध का सेवन करते हैं। इस पैकेटबंद दूध की आपूर्ति स्थानी ा क्षेत्री स्तर पर स्थापित विभिन्न दुग्ध कारखानों द्वारा की जाती है, जो अपने निश्चित सम तथा माध्मों द्वारा उपभोक्ताओं तक दुग्ध की आपूर्ति सुनिश्चित करते हैं। इन दुग्ध कारखानों में दूध के अतिरिक्त मक्खन, घी, पनीर, दही, छेना, चीज, आइसक्रीम आदि का भी उत्पादन किा जाता है।
डेरी कारखानों में दूध तथा उससे निर्मित होने वाले विभिन्न उत्पादों के निर्माण, प्रसंस्करण आदि अनेक वैज्ञानिक प्रक्रिाओं में डेरी टेक्नोलॉजी की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। ह र्का र्काकुशल तथा प्रशिक्षित व्क्तिों द्वारा सम्पन्न किा जाता है, जिन्हें डेरी टेक्नोलॉजिस्ट कहा जाता है। डेरी कारखानों में सामान्त: उन्हीं ुवाओं को निुक्तिां दी जाती हैं जो इस विधा में बाकादा डिग्री अथवा डिप्लोमाधारक होते हैं। डेरी टेक्नोलॉजी में आज स्नातक तथा पीएच.डी. तक की शिक्षा की व्वस्था होने के कारण इस क्षेत्र में प्रगति व उन्नति की भी अपार संभावनाएं हैं।
जो ुवक-ुवतिां, इण्टरमीडिएट अथवा 10+2 विज्ञान संका से न्ूनतम 50 प्रतिशत अंक सहित उत्तीर्ण हैं, वे 'डेरी टेक्नोलॉजीÓ पाठï्क्रम में प्रवेश की पात्रता रखते हैं। राष्टï्री डेरी अनुसंधान संस्थान, करनाल (हरिाणा) तथा डेरी साइंस इंस्टीटï्ूट, मुंबई द्वारा दो साल की अवधि का डिप्लोमा पाठï्क्रम संचालित किा जाता है।
डेरी टेक्नोलॉजी में डिग्री पाठ्क्रम (बी.एससी. ा बी.टेक.) चार साल की अवधि का है। इस पाठï्क्रम में शैक्षिक अहर्ता सामान्त: डिप्लोमा पाठ्क्रम के समकक्ष होती है। कुछ शैक्षिक संस्थान पाठï्क्रम की अवधि तथा निर्धारित न्ूनतम अंकों का प्रतिशत अलग-अलग भी रखते हैं। मसलन संज गांधी इंस्टीटï्ूट ऑफ डेरी साइंस एण्ड टेक्नोलॉजी, पूसा में डिग्री पाठï्क्रम की अवधि पांच वर्ष की है। इस संस्थान में उन्हीं अभ्र्थिों को प्रवेश दिा जाता है जो 55 फीसदी अंकों के साथ 10+2 अथवा इंटरमीडिएट कर चुके हैं। साथ ही उन्होंने विषों के रूप में भौतिकी, रसान विज्ञान, गणित आद संका में अध्न किा हो।
इसी प्रकार उदपुर (राजस्थान) स्थित कॉलेज ऑफ डेरी साइंस भी पांच वर्षी डिग्री पाठï्क्रम संचालित करता है। इस संस्थान की शैक्षिक अहर्ताएं संज गांधी संस्थान के समान हैं। जबकि सेठ एम.सी. कॉलेज ऑफ डेरी साइंस, आनंद (गुजरात) तथा वैटनरी कॉलेज, हव्वल (कर्नाटक) में साढ़े चार साल की अवधि का डिग्री पाठïï्क्रम चलाा जाता है। ही नहीं कॉलेज ऑफ डेरी टेक्नोलॉजी, रापुर (मध्प्रदेश) एवं फैकल्टी ऑफ वैटनरी साइंस एनीमल हस्बैण्डरी, नादिा (पश्चिम बंगाल) चार वर्षी डिग्री पाठï्क्रम संचालित करता है।
इन संस्थानों में प्रवेश संबंधी सूचनाएं देश के समस्त अखबारों एवं रोजगार संबंधी बुलेटिनों में प्रतिवर्ष मार्च-अप्रैल में प्रकाशित की जाती हैं। सामान्त: जून-जुलाई में समस्त प्रतिष्ठिïत संस्थान राष्टï्री स्तर पर प्रवेश परीक्षाएं आोजित करते हैं। प्रवेश परीक्षाएं तीन प्रकार के प्रश्न-पत्रों पर आधारित होती हैं। प्रथम प्रश्नपत्र में भौतिक, रसान विज्ञान तथा गणित, द्विती प्रश्नपत्र में अंग्रेजी तथा तृती प्रश्नपत्र में सामान् ज्ञान से जुड़े सवाल पूछे जाते हैं। इन समस्त प्रश्नपत्रों का स्तर इण्टरमीडिएट के समकक्ष होता है।
विज्ञान स्नातकों तथा ववसाकि डिग्रीधारकों के लिए डेरी टेक्नोलॉजी में स्नातकोत्तर पाठï्क्रम (एम.एससी.) की भी व्वस्था है। माइक्रो बाोलॉजी, डेरी कैमिस्ट्री, डेरी टेक्नोलॉजी, एनीमल बाो कैमिस्ट्री, डेरी इकोनॉमिक्स, डेरी इंजीनिरिंग तथा बाो टेक्नोलॉजी में न्ूनतम 55 फीसदी अंकों के साथ उत्तीर्ण छात्र-छात्राएं इस पाठï्क्रम में प्रवेश की पात्रता रखते हैं। कुछ ववसाकि डिग्रिों जैसे कृषि, वैटनरी साइंस, एनीमल हस्बैंडरी, होम साइंस, फूड टेक्नोलॉजी, आदि विषों में स्नातक उत्तीर्ण अभ्र्थी भी एम.एससी. कर सकते हैं।
एम.एससी. पाïठï्क्रम की अवधि डेरी टेक्नोलॉजी स्नातकों एवं विज्ञान स्नातकों के लिए तीन साल तथा ववसाकि डिग्रीधारक स्नातकों हेतु दो वर्ष है। इस विष में पीएच.डी. करने के लिए संबंधित विष में 60 प्रतिशत प्राप्तांक से परास्नातक उत्तीर्ण होना आवश्क है। डेरी टेक्नोलॉजी में पीएच.डी. के लिए कम-से-कम ढाई साल का वक्त लगता है। करनाल स्थित राष्टï्री डेरी अनुसंधान संस्थान डेरी टेक्नोलॉजी में डिप्लोमा, डिग्री (बी.टेक.) स् स्नातकोत्तर (एम.एससी.) तथा पीएच.डी. की डिग्रिां प्रदान करता है।
डेरी टेक्नोलॉजी में प्रशिक्षण पाठï्क्रम में प्रवेश लेने वाले ुवक-ुवतिों को डेरी इंजीनिरिंग, डेरी कैमिस्ट्री, डेरी वैक्टीरिोलॉजी, माइक्रोबॉोलॉजिक लेबोरेटरी टेस्टिंग, स्टेटिस्टकल क्वालिटी कंट्रोल आदि के अन्तर्गत अध्न कराा जाता है। ही नहीं प्रशिक्षुओं को दुग्ध संंत्र स्थापित करने से लेकर संचालन प्रावधान, लेखांकन आदि की विस्तृत जानकारी भी प्रदान की जाती है।
ववहारिक अनुभव के लिए प्रशिक्षुओं को र्काप्रशिक्षण हेतु भी भेजे जाने का प्रावधान है। इस प्रकार की तकनीकी शिक्षा अर्जित कर चुके ुवाओं को बैंक आदि से ऋण सुविधाएं भी मिल रही हैं, जिससे वो अपना खुद का कारोबार स्थापित करने के साथ-साथ अन् बेरोजगार साथिों का भी भला कर सकते हैं।
प्रशिक्षण संस्थान
राष्टï्री डेरी अनुसंधान संस्थान, करनाल, हरिाणा-132001
आंध्र प्रदेश कृषि विश्वविद्याल, राजेंद्रनगर, हैदराबाद (आंध्रप्रदेश)
डेरी साइंस इंस्टीटï्ूट, मिल्क कॉलोनी, मुंबई
वैटनरी कॉलेज, हव्वल (कर्नाटक)
कॉलेज ऑफ डेरी साइंस, उदपुर (राजस्थान)
गुजरात कृषि विश्वविद्याल, कृषि नगर, वनासकांठा, गुजरात- 385006
फैकल्टी ऑफ वैटनरी साइंस एंड एनीमल हस्बैंटरी, कृषि विश्वविद्याल, नादिा (पश्चिम बंगाल)
कॉलेज ऑफ डेरी टेक्नोलॉजी, कृषक नगर, लुंभडी, रामपुर (मध्प्रदेश)

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