गूगल अपने कर्मचारियों को मुफ्त खाना देता है, पालतु कुत्तों को दफ्तर में लाने की स्वीकृति देता है, आप मानें या न मानें लॉन की घास साफ करने के लिए उन्होंने बकरियां भी रखी हैं। बेशक हर कम्पनी गूगल जैसे सुविधाएं न देना चाहे, सफलता का मंत्र है कि अपने कर्मचारियों को किसी न किसी तरह से प्रोत्साहित तथा खुश रखा जाए ताकि वे दिल लगा कर काम करें।
आज प्रोत्साहन केवल पैसों तक ही सीमित नहीं है, कर्मचारियों के कल्याण के लिए रोज कुछ न कुछ करते रहना जरूरी है। चाहे उनके लिए चाय-पानी का खास इंतजाम किया जाए या इस बात पर ध्यान दिया जाए कि कोई कर्मचारी क्यों ओवरटाइम काम कर रहा है।
ऐसे ही कुछ तरीकों के बारे में जानते हैं जिनसे कर्मचारियों को प्रोत्साहित तथा उत्साहित रखा जा सकता है।
उनकी बात सुनें
कर्मचारियों की भावनाओं को जानने का पहला कदम उनकी बात सुनना है ताकि उपयुक्त सुधार किए जा सकें। केवल वही बातें सुनना काफी नहीं हैं जो कर्मचारी कहें, अपनी आंखें खुली रखना भी जरूरी है क्योंकि कई बार कर्मचारी अपने मुंह से कुछ नहीं कहते हैं परंतु उसका असर उनके कामकाज तथा उनके व्यवहार में स्पष्ट जाहिर होता है। उन समस्याओं को समझना तथा दूर करना जरूरी है जो किसी कर्मचारी को प्रभावित करती हों। अच्छी नीतियां तथा अच्छा शासन इस तथ्य से कायम होता है कि प्रबंधन कर्मचारियों की बात सुनता है।
खाओ, खेलें और काम करो
अच्छी तनख्वाह तथा भत्तों के साथ-साथ तनाव दूर करने वाली गतिविधियां, खेल आदि का इंतजाम भी होना चाहिए। दफ्तर के एक हिस्से में कर्मचारियों के हल्के-फुल्के खेल का इंतजाम हो तो तनाव से मुक्ति पाने के साथ-साथ एक-दूसरे को बेहतर ढंग से जाना जा सकता है।
विश्वास कायम करना
कर्मचारियों को इस बात का विश्वास दिलाना भी जरूरी है कि कम्पनी करियर शुरू करने तथा तरक्की करने के लिए एक उत्तम स्थान है। काम से असंतुष्ट होकर कर्मचारियों के कम्पनी छोडऩे का एक कारण अक्सर उनमें विश्वास की कमी होता है। वहां कर्मचारियों के आपस में तथा वरिष्ठ अधिकारियों के साथ संबंध सही नहीं होते हैं। कई बार तो कर्मचारियों पर बस काम थोप दिया जाता है और उन्हें यह भी पता नहीं होता है कि वे काम क्यों कर रहे हैं। उन्हें कम्पनी के लक्ष्य के साथ जोडऩा अहम है।
भावनाओं पर नियंत्रण
कर्मचारियों को दिए जाने वाले पैसे या भत्तों को अब कई कम्पनियां निवेश के तौर पर देखती हैं। कठिन दौर में सहायता करके कर्मचारियों को कम्पनी के प्रति वफादार बनाया जा सकता है। यही वजह है कि ऐसी इंडस्ट्रीज हैं जिन्होंने मुनाफे में कमी के बावजूद अपने कर्मचारियों के भत्तों में कटौती नहीं की।
आज प्रोत्साहन केवल पैसों तक ही सीमित नहीं है, कर्मचारियों के कल्याण के लिए रोज कुछ न कुछ करते रहना जरूरी है। चाहे उनके लिए चाय-पानी का खास इंतजाम किया जाए या इस बात पर ध्यान दिया जाए कि कोई कर्मचारी क्यों ओवरटाइम काम कर रहा है।
ऐसे ही कुछ तरीकों के बारे में जानते हैं जिनसे कर्मचारियों को प्रोत्साहित तथा उत्साहित रखा जा सकता है।
उनकी बात सुनें
कर्मचारियों की भावनाओं को जानने का पहला कदम उनकी बात सुनना है ताकि उपयुक्त सुधार किए जा सकें। केवल वही बातें सुनना काफी नहीं हैं जो कर्मचारी कहें, अपनी आंखें खुली रखना भी जरूरी है क्योंकि कई बार कर्मचारी अपने मुंह से कुछ नहीं कहते हैं परंतु उसका असर उनके कामकाज तथा उनके व्यवहार में स्पष्ट जाहिर होता है। उन समस्याओं को समझना तथा दूर करना जरूरी है जो किसी कर्मचारी को प्रभावित करती हों। अच्छी नीतियां तथा अच्छा शासन इस तथ्य से कायम होता है कि प्रबंधन कर्मचारियों की बात सुनता है।
खाओ, खेलें और काम करो
अच्छी तनख्वाह तथा भत्तों के साथ-साथ तनाव दूर करने वाली गतिविधियां, खेल आदि का इंतजाम भी होना चाहिए। दफ्तर के एक हिस्से में कर्मचारियों के हल्के-फुल्के खेल का इंतजाम हो तो तनाव से मुक्ति पाने के साथ-साथ एक-दूसरे को बेहतर ढंग से जाना जा सकता है।
विश्वास कायम करना
कर्मचारियों को इस बात का विश्वास दिलाना भी जरूरी है कि कम्पनी करियर शुरू करने तथा तरक्की करने के लिए एक उत्तम स्थान है। काम से असंतुष्ट होकर कर्मचारियों के कम्पनी छोडऩे का एक कारण अक्सर उनमें विश्वास की कमी होता है। वहां कर्मचारियों के आपस में तथा वरिष्ठ अधिकारियों के साथ संबंध सही नहीं होते हैं। कई बार तो कर्मचारियों पर बस काम थोप दिया जाता है और उन्हें यह भी पता नहीं होता है कि वे काम क्यों कर रहे हैं। उन्हें कम्पनी के लक्ष्य के साथ जोडऩा अहम है।
भावनाओं पर नियंत्रण
कर्मचारियों को दिए जाने वाले पैसे या भत्तों को अब कई कम्पनियां निवेश के तौर पर देखती हैं। कठिन दौर में सहायता करके कर्मचारियों को कम्पनी के प्रति वफादार बनाया जा सकता है। यही वजह है कि ऐसी इंडस्ट्रीज हैं जिन्होंने मुनाफे में कमी के बावजूद अपने कर्मचारियों के भत्तों में कटौती नहीं की।
