बायोमैडीकल
रिसर्चर्स को बायोमैडीकल इंजीनियर के नाम से भी जाना जाता है। बायोमैडीकल
इंजीनियरिंग के तहत इंजीनियरिंग के सिद्धातों एवं तकनीकों का प्रयोग
चिकित्सा क्षेत्र में किया जाता है। इसके तहत इंजीनियरिंग क्षेत्र की
डिजाइन एवं प्रोब्लम सॉल्विंग स्किल्स को मैडीकल एवं बायोलॉजिकल साइंस के
साथ जोड़ कर स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में सुधार करने की कोशिश की जाती है
ताकि रोगों का शीघ्र पता लगाने, उनके उपचार से लेकर स्वास्थ्य पर नजर
रखने के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाकर मानवता के हित में काम किया जा
सके।
इसके तहत बायोमैडीकल रिसर्च के अनजान क्षेत्रों में कदम रखने का प्रयास किया जाता है ताकि इंसान का जीवन संवारने तथा उसकी रक्षा के लिए नई तकनीकों एवं साधनों आदि का आविष्कार किया जा सके।
इस क्षेत्र में किए जाने वाले खास कार्यों में अत्याधुनिक कृत्रिम अंगों का निर्माण, रोगों का पता लगाने के लिए नई तकनीकों की ईजाद से लेकर चिकित्सा सेवा में काम आने वाले विभिन्न प्रकार के उपकरणों को तैयार करने पर जोर दिया जाता है। माइक्रो इम्प्लांट से लेकर एम.आर.आई., ई.ई.जी. जैसे उपकरण बायोमैडीकल रिसर्च की बदौलत ही आज इंसान को उपलब्ध हो सके हैं।
इतना ही नहीं, कोशिकाओं को नया जीवन देने से लेकर फार्मास्यूटिकल ड्रग्स एवं जैनेटिक्स, जैनोमिक्स, स्टेम सैल्स, कैंसर एवं डिवैल्पमैंट बायोलॉजी के क्षेत्र में शोध कार्य भी बॉयोमैडीकल रिसर्च की बदौलत ही सम्भव हो रहे हैं।
बायोमैडीकल रिसर्च में विभिन्न विषयों का समावेश है जिनमें बायोमैकेनिक्स, बायोइंस्ट्रूमैंटेशन, बायोमैटीरियल्स, बायोमैकाट्रॉनिक्स, बायोनिक्स, सैल्यूलर इंजीनियरिंग, टिश्यू इंजीनियरिंग एवं जैनेटिक इंजीनियरिंग, मैडीकल इमेजिंग, ऑर्थोपैडिक बायोइंजीनियरिंग, रिहैब्लिटेशन इंजीनियरिंग, सिस्टम्स फिजियोलॉजी, बायो नैनो टैक्नोलॉजी, न्यूरल इंजीनियरिंग आदि शामिल हैं।
रोजगार की सम्भावनाएं
इंडियन ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स के अनुसार बायोमैडीकल रिसर्च के क्षेत्र में रोजगार एवं उज्ज्वल भविष्य के अपार अवसर मौजूद हैं। अधिकतर बायोमैडीकल इंजीनियर्स मैडीकल इक्विपमैंट एवं सप्लाइज की मैन्युफैक्चरिंग का काम करते हैं।
बायोमैडीकल इंजीनियर्स को नौकरी देने वाले संस्थानों में मैडीकल रिसर्च इंस्टीच्यूशन्स, अस्पताल, इंडस्ट्रियल फर्म्स एवं शिक्षा संस्थान भी शामिल हैं। वे ऐसी कम्पनियों में सरलता से रोजगार प्राप्त करते हैं जो चिकित्सा सेवा में काम आने वाले उपकरण तथा तकनीकें तैयार करती हैं।
इन दिनों दुनिया भर में बायोमैडीकल इंजीनियर्स की भारी मांग है। वे क्लीनिकल इंजीनियर्स, रिहैब्लिटेशन इंजीनियर्स, ऑर्थोपैडिक इंजीनियर्स के रूप में भी काम कर सकते हैं।
योग्यता
किसी भी क्षेत्र में रिसर्च करने के लिए उससे संबंधित विषयों में कम से कम 55 प्रतिशत अंक सहित पोस्ट ग्रैजुएट डिग्री प्राप्त करनी होगी। इसके बाद ही किसी विश्वविद्यालय में शोध या अनुसंधान के लिए आपका चयन किया जाएगा जिसके तहत आप पीएच.डी. डिग्री प्राप्त कर सकते हैं।
वैसे बायोमैडीकल रिसर्च के क्षेत्र में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले छात्रों को बी.टैक, बी.ई., एम.टैक, एम.ई. डिग्री हासिल करने की सलाह दी जाती है। इच्छुक छात्र विदेशी विश्वविद्यालयों से भी बायोमैडीकल रिसर्च में पोस्ट ग्रैजुएट डिग्री या पीएच.डी. डिग्री का अध्ययन कर सकते हैं।
कौशल
बायोमैडीकल रिसर्च को करियर के रूप में अपनाने के चाहवान छात्रों को यह बात समझनी चाहिए कि उनमें इसके लिए कुछ खास कौशल होने आवश्यक हैं। उन्हें रिसर्च के बारे में मूलभूत जानकारी होनी चाहिए। प्रयास करें कि जिस भी विषय में विशेषज्ञता प्राप्त करना चाहते हैं, उसके बारे में आपको अच्छी समझ तथा ज्ञान हो। रिसर्च के दौरान आंकड़ों, सूचनाओं तथा तथ्यों को जुटाना होता है तथा उनका गहन विश्लेषण करके किसी पुख्ता नतीजे तक पहुंचा जाता है। इसके लिए छात्रों में विश्लेषणात्मक कार्यों में कुशलता तथा पैनी एवं पारखी नजर होना जरूरी है।
इसके तहत बायोमैडीकल रिसर्च के अनजान क्षेत्रों में कदम रखने का प्रयास किया जाता है ताकि इंसान का जीवन संवारने तथा उसकी रक्षा के लिए नई तकनीकों एवं साधनों आदि का आविष्कार किया जा सके।
इस क्षेत्र में किए जाने वाले खास कार्यों में अत्याधुनिक कृत्रिम अंगों का निर्माण, रोगों का पता लगाने के लिए नई तकनीकों की ईजाद से लेकर चिकित्सा सेवा में काम आने वाले विभिन्न प्रकार के उपकरणों को तैयार करने पर जोर दिया जाता है। माइक्रो इम्प्लांट से लेकर एम.आर.आई., ई.ई.जी. जैसे उपकरण बायोमैडीकल रिसर्च की बदौलत ही आज इंसान को उपलब्ध हो सके हैं।
इतना ही नहीं, कोशिकाओं को नया जीवन देने से लेकर फार्मास्यूटिकल ड्रग्स एवं जैनेटिक्स, जैनोमिक्स, स्टेम सैल्स, कैंसर एवं डिवैल्पमैंट बायोलॉजी के क्षेत्र में शोध कार्य भी बॉयोमैडीकल रिसर्च की बदौलत ही सम्भव हो रहे हैं।
बायोमैडीकल रिसर्च में विभिन्न विषयों का समावेश है जिनमें बायोमैकेनिक्स, बायोइंस्ट्रूमैंटेशन, बायोमैटीरियल्स, बायोमैकाट्रॉनिक्स, बायोनिक्स, सैल्यूलर इंजीनियरिंग, टिश्यू इंजीनियरिंग एवं जैनेटिक इंजीनियरिंग, मैडीकल इमेजिंग, ऑर्थोपैडिक बायोइंजीनियरिंग, रिहैब्लिटेशन इंजीनियरिंग, सिस्टम्स फिजियोलॉजी, बायो नैनो टैक्नोलॉजी, न्यूरल इंजीनियरिंग आदि शामिल हैं।
रोजगार की सम्भावनाएं
इंडियन ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स के अनुसार बायोमैडीकल रिसर्च के क्षेत्र में रोजगार एवं उज्ज्वल भविष्य के अपार अवसर मौजूद हैं। अधिकतर बायोमैडीकल इंजीनियर्स मैडीकल इक्विपमैंट एवं सप्लाइज की मैन्युफैक्चरिंग का काम करते हैं।
बायोमैडीकल इंजीनियर्स को नौकरी देने वाले संस्थानों में मैडीकल रिसर्च इंस्टीच्यूशन्स, अस्पताल, इंडस्ट्रियल फर्म्स एवं शिक्षा संस्थान भी शामिल हैं। वे ऐसी कम्पनियों में सरलता से रोजगार प्राप्त करते हैं जो चिकित्सा सेवा में काम आने वाले उपकरण तथा तकनीकें तैयार करती हैं।
इन दिनों दुनिया भर में बायोमैडीकल इंजीनियर्स की भारी मांग है। वे क्लीनिकल इंजीनियर्स, रिहैब्लिटेशन इंजीनियर्स, ऑर्थोपैडिक इंजीनियर्स के रूप में भी काम कर सकते हैं।
योग्यता
किसी भी क्षेत्र में रिसर्च करने के लिए उससे संबंधित विषयों में कम से कम 55 प्रतिशत अंक सहित पोस्ट ग्रैजुएट डिग्री प्राप्त करनी होगी। इसके बाद ही किसी विश्वविद्यालय में शोध या अनुसंधान के लिए आपका चयन किया जाएगा जिसके तहत आप पीएच.डी. डिग्री प्राप्त कर सकते हैं।
वैसे बायोमैडीकल रिसर्च के क्षेत्र में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले छात्रों को बी.टैक, बी.ई., एम.टैक, एम.ई. डिग्री हासिल करने की सलाह दी जाती है। इच्छुक छात्र विदेशी विश्वविद्यालयों से भी बायोमैडीकल रिसर्च में पोस्ट ग्रैजुएट डिग्री या पीएच.डी. डिग्री का अध्ययन कर सकते हैं।
कौशल
बायोमैडीकल रिसर्च को करियर के रूप में अपनाने के चाहवान छात्रों को यह बात समझनी चाहिए कि उनमें इसके लिए कुछ खास कौशल होने आवश्यक हैं। उन्हें रिसर्च के बारे में मूलभूत जानकारी होनी चाहिए। प्रयास करें कि जिस भी विषय में विशेषज्ञता प्राप्त करना चाहते हैं, उसके बारे में आपको अच्छी समझ तथा ज्ञान हो। रिसर्च के दौरान आंकड़ों, सूचनाओं तथा तथ्यों को जुटाना होता है तथा उनका गहन विश्लेषण करके किसी पुख्ता नतीजे तक पहुंचा जाता है। इसके लिए छात्रों में विश्लेषणात्मक कार्यों में कुशलता तथा पैनी एवं पारखी नजर होना जरूरी है।